बारिश के मौसम में सचेत रहें मलेरिया से
-मामूली बुखार को न लें हल्के में, तुरंत नजदीकी चिकित्सक से करें संपर्क
श्रीगंगानगर। मौसम में अचानक आए बदलाव के कारण कई तरह की बीमारियां पैदा होने का खतरा रहता है, जिनमें मलेरिया, डेंगू, टाइफाइड, बुखार आदि शामिल है। लेकिन सामान्यत: इस मौसम में मलेरिया फैलने की आशंका ज्यादा रहती है। मलेरिया एक विशेष तरह के मच्छर से काटने से होता है, जो बारिश के दिनों में उत्पन्न होते हैं। बारिश के बाद अब मलेरिया रोग के प्रति आमजन को सतर्क रहने की आवश्यकता है। क्योंकि इस दौरान हल्का बुखार भी मलेरिया हो सकता है, इसलिए तुरंत जांच व उपचार की जरूरत होती है। आमजन को चाहिए किसी भी तरह के बुखार के प्रति लापरवाही न बरतें और तुरंत जांच करवाएं। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सभी बीसीएमओ एवं अन्य प्रभारी अधिकारियों को पाबंद करते हुए संभावित मलेरिया रोगी की जांच करने और उसकी नियमित रिपोर्टिंग करने के लिए पाबंद किया है। वहीं आवश्यक दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि मलेरिया एक ऐसी बीमारी है, जो परजीवी रोगाणु की वजह से होती है। मलेरिया के लक्षण में बुखार, कंपकंपी, पसीना आना, सिरदर्द, शरीर में दर्द, जी मचलना और उल्टी होना शामिल है। मलेरिया एक परजीवी रोगाणु से होता है, जिसे प्लास्मोडियम कहते हैं। ये रोगाणु एनोफेलीज जाति के मादा मच्छर में होते हैं। इसलिए इन दिनों हर संभव प्रयास कर मच्छरदानी में सोएं, घर में मच्छररोधी दवा का नियमित छिडक़ाव करें, घर के दरवाजों और खिड़कियां पर जाली लगाएं और कम से कम खुला रखें, पंखे का इस्तेमाल करें ताकि मच्छर एक जगह न बैठ पाएं, हल्के रंग के कपड़े पहनें, पूरा शरीर ढके ऐसे कपड़े पहनें। मलेरिया से न केवल आप बचें बल्कि अपने आस-पास के लोगों को भी बचाएं, जिसके लिए जरूरी है सतर्कता व सावधानी। घरो में व आसपास गड्ढ़ों, नालियों, बेकार पड़े खाली डिब्बों, पानी की टंकियों, गमलों, टायर-टï्यूब मे पानी एकत्रित न होने दें। आमतौर पर यह मच्छर साफ पानी में जल्दी पनपता है, इसलिए सप्ताह मे एक बार पानी से भरी टंकियों, मटके, कूलर आदि खाली करके सुखा दें। डिग्गी आदि पेयजल स्त्रोतों मे स्वास्थ्य कार्यकर्ता से टेमीफॅास नामक दवाई समय-समय पर डलवाते रहें। पानी के स्थाई स्त्रोतों में मछलियां छुड़वाने के लिए नजदीकी स्वास्थ्य कार्यकर्ता से सम्पर्क करें। जहां पानी एकत्रित होने से रोका नहीं जा सके वहां पानी पर मिट्टी का तेल या जला हुआ तेल (मॉबिल ऑयल ) छिडकें।

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