गुरुवार, 21 अगस्त 2025

स्वास्थ्य विभाग श्रीगंगानगर का आईईसी अनुभाग कर रहा आमजन को जागरूक

- राज्य में सबसे ज्यादा फॉलोअर्स, कोविड में निभाई अहम भूमिका 

श्रीगंगानगर। जिले में आमजन को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करने और स्वास्थ्य सेवाओं एवं योजनाओं को लेकर नियमित रूप से अपडेट करने में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग का आईईसी श्रीगंगानगर अनुभाग अहम भूमिका निभा रहा है। उल्लेखनीय है कि आईईसी श्रीगंगानगर ने कोविड काल में शानदार कार्य करते हुए आमजन को न केवल पल-पल की अपडेट दी बल्कि उन्हें जागरूक भी किया।


आईईसी श्रीगंगानगर के प्रभारी विनोद बिश्नोई बताते हैं कि आईईसी (सूचना, शिक्षा और संचार) अनुभाग चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अहम कड़ी है, जो उच्चाधिकारियों के निर्देशन में आमजन को जागरूक करने में अपना योगदान दे रहा है। यही वजह है कि आईईसी श्रीगंगानगर के फेसबुक पेज पर करीब 85000 फॉलोअर्स हैं। इसी तरह अन्य सोशल मीडिया प्लेटफार्म जैसे कि इंस्टाग्राम, ट्विटर (एक्स), यूट्यूब एवं व्हाट्स एप आदि के जरिए भी आमजन को जागरूक किया जा रहा है। निश्चित ही आईईसी अनुभाग ने स्वास्थ्य सेवाओं, योजनाओं और कार्यक्रमों के लिए एक विश्वसनीय मंच के रूप में अपनी जगह बनाई है। यह विभाग लोगों तक सही और महत्वपूर्ण स्वास्थ्य जानकारी पहुँचाने का काम करता है, ताकि वे अपने और अपने परिवार के स्वास्थ्य की बेहतर देखभाल कर सकें। आईईसी अनुभाग का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि श्रीगंगानगर जिले के हर नागरिक तक स्वास्थ्य से जुड़ी सही जानकारी पहुंचे। इसके साथ ही विभाग विभिन्न माध्यमों का उपयोग करता है, जैसे कि नुक्कड़ नाटक, जागरूकता अभियान, सोशल मीडिया और स्थानीय समाचार पत्रों एवं न्यूज वेबसाइट के जरिए स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी हर वर्ग के लोगों तक पहुँच सके।

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प्रमुख कार्य एवं सेवाएं

यह अनुभाग केंद्र और राज्य सरकार की विभिन्न स्वास्थ्य योजनाओं, जैसे आयुष्मान भारत, चिरंजीवी योजना और जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के बारे में लोगों को जानकारी देता है। वहीं मलेरिया, डेंगू, टीबी और अन्य संक्रामक बीमारियों की रोकथाम के लिए जागरूकता अभियान चलाता है। ये अभियान लोगों को इन बीमारियों के लक्षणों, बचाव के तरीकों और इलाज के लिए सरकारी अस्पतालों की जानकारी देते हैं। साथ ही सही पोषण और स्वच्छता के महत्व पर भी जोर देता है। इसके माध्यम से लोगों को स्वस्थ जीवनशैली अपनाने और अपने आसपास सफाई रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है।

रविवार, 2 दिसंबर 2018

इस माह लगेंग 59 स्वास्थ्य केंद्रों पर परिवार कल्याण शिविर
- पुरुष नसबंदी पर रहेगा विशेष जोर, जिला अस्पताल में चार, 10, 18 व 26 दिसंबर को शिविर 
श्रीगंगानगर। चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से दिसंबर माह में 59 परिवार कल्याण शिविर लगाए जाएंगे। इस दौरान महिला एवं पुरुषों की नसबंदी की जाएगी। शिविरों के सफल व गुणवत्तापूर्ण आयोजन के लिए विभाग ने अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है एवं पाबंद किया है कि किसी भी तरह की लापरवाही पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। पुरुष नसबंदी पखवाड़े के चलते इस बार पुरुष नसबंदी अधिक करवाने का भी विभाग ने लक्ष्य रखा है। 
एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहता ने बताया कि दो दिसंबर को पीएचसी घमूड़वाली व शिवपुर, चार सितंबर को जिला अस्पताल में, पांच को सीएचसी श्रीविजयनगर व पीएचसी फकीरवाली में, आठ को हिंदुमलकोट, पतरोड़ा व रायसिंहनगर, नौ को सीएचसी अनूपगढ, दस को जिला अस्पताल, पीएचसी सरदारगढ़ व मोरजण्डा, 11 सितंबर को केसरीसिंहपुर, पीएचसी सोमासर व महियांवाली, 12 को सीएचसी सादुलशहर, पीएचसी ख्यालीवाला व रोजड़ी, 13 को सीएचसी घड़साना व पीएचसी मांझुवास, 14 को पीएचसी मिर्जेवाला व जैतसर, 15 को सीएचसी सूरतगढ़, रायसिंहनगर व पीएचसी रतेवाला, 16 को पीएचसी लालगढ़ बीरमाना, 17 को सीएचसी राजियासर, डाबला व पीएचसी 17 जेड, 18 को जिला अस्पताल व सीएचसी श्रीकरणपुर, 19 को पीएचसी कमरानिया, 20 को पीएचसी सुखचैनपुरा व ढाबां, 21 को श्रीविजयनगर, चूनावढ़ व हाकमाबाद, 22 को सीएचसी सादुलशहर, 23 को अनूपगढ़, रायसिंहनगर, पीएचसी नाहरांवाली व चकमहाराजका, 24 को रामसिंहपुर व समेजा कोठी, 25 को सीएचसी पदमपुर, पीएचसी ठुकराना व जोगीवाला, 26 को जिला अस्पताल व पीएचसी डूंगरसिंहपुरा, 27 को गजसिंहपुर, सूरतगढ़ व कोनी, 28 को घड़साना व मम्मड़, 29 सीएचसी रावला, 30 दिसंबर को पीएचसी 365 आरडी व सीएचसी रायसिंहनगर में परिवार कल्याण शिविर लगाए जाएंगे।

शनिवार, 1 दिसंबर 2018

आरबीएसके शिविरों में लाभान्वित हो रहे स्टूडेंट्स
-कार्मिकों की कर्मठता के चलते नौनिहालों को बचाया जा रहा है बीमारियों से 
श्रीगंगानगर। स्वास्थ्य विभाग के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जरिए इन दिनों स्टूडेंट्स को लाभान्वित किया जा रहा है। पहली बार ऐसा हुआ है कि इन शिविरों में पांच सौ से अधिक बच्चे इलाज करवाने पहुंच रहे हैं। शिविरों को लेकर आरबीएसके टीमें जी-जान से जुटी हैं और निश्चित ही इन कार्मिकों की बदौलत बच्चों को विभिन्न बीमारियां से बचाया जा रहा है। शनिवार को पदमपुर में लगे शिविर में 688 बच्चे इलाज के लिए पहुंचे, जिन्हें चिकित्सकों ने जांच कर उपचारित किया। टीम में शामिल डॉक्टरों, फार्मासिस्ट, एएनएम, विशेषज्ञ चिकित्सकों सहित बीसीएमओ व बीपीएम अहम योगदान दे रहे हैं।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि आरबीएसके शिविर 14 नवंबर से प्रारंभ हुए हैं, जो दस दिसंबर तक चलेंगे। पहला शिविर लालगढ़ में लगा जहां 254 बच्चों का उपचार किया गया, इसी तरह रावला में 300, शिवपुर में 386, रिड़मलसर में 225, सूरतगढ़ में 300, रायसिंहनगर में 354, अनूपगढ़ में 265,  घड़साना में 341, सादुलशहर में 661, समेजा कोठी में 338, श्रीकरणपुर में 409 और पदमपुर में 688 बच्चों की जांच एवं उपचार हुआ। उन्होंने बताया कि इन शिविरों में बच्चों की सेहत जांच के साथ ही उन्हें अपनी बेहतर सेहत के लिए जागरूक किया जाता है। यहां बेहतर उपकरणों के जरिए न केवल उनकी जांच की जाती है बल्कि मौके पर ही विशेषज्ञ चिकित्सक उनका उपचार करते हैं। डॉ. बंसल ने बताया कि तीन दिसंबर को चूनावढ़, चार को श्रीविजयनगर, पांच को केसरीसिंहपुर, आठ को गजसिंहपुर एवं दस दिसंबर को राजियासर में आरबीएसके शिविर लगाया जाएगा।  

विश्व एड्स दिवस पर हुए जागरूकता कार्यक्रम
-युवाओं में जरूरी है जागरूकता, भ्रांतियों से न हो भ्रमित
श्रीगंगानगर। विश्व एड्स दिवस पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले में विभिन्न जागरूकता किए गए। मुख्य आयोजन स्थानीय अंबेडकर कॉलेज, डीएवी कॉलेज व गुुरुनानक गल्र्स कॉलेज में आयोजित किया गया, जहां विभागीय अधिकारियों ने युवाओं को जागरूक किया एवं आह्वान किया कि वे एड्स के प्रति फैली भ्रांतियों से भ्रमित न हों और अन्य जन को भी जागरूक करें। वहीं विश्व एड्स दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को भी जिला स्वास्थ्य भवन में दीप प्रज्जवलित कर एड्स के प्रति आमजन को जागरूक करने की शपथ दिलाई गई।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि एचआईवी-एड्स के प्रति आमजन को जागरूक करने के उद्देश्य से विश्व एड्स दिवस पर विभिन्न जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। जिला मुख्यालय सहित सभी खण्ड मुख्यालयों पर कार्यक्रम आयोजित हुए। शनिवार को अंबेडकर कॉलेज, डीएवी कॉलेज एवं श्रीगुरुनानक गल्र्स पीजी कॉलेज में आयोजित कार्यक्रमों में डॉक्टर पुष्पेंद्र कुमार व सुपरवाइजर नवल किशोर ने युवाओं को एचआईवी संबंधी जानकारी देते हुए भ्रांतियों के संबंध में जागरूक किया। उन्होंने आह्वान किया कि युवा इस बीमारी से न केवल खुद बचें बल्कि अन्य जन को भी जागरूक करें। इस दौरान छात्र-छात्राओं को शपथ भी दिलाई गई। वहीं शनिवार को जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए गए। 

सोमवार, 17 सितंबर 2018

सीएचसी व यूपीएचसी पर लग रहे अंतरा इंजेक्शन, नवदंपति में बढ़ा रूझान
-चिकित्सकों के बाद अब स्वास्थ्य कार्मिकों को दिया प्रशिक्षण
श्रीगंगानगर। परिवार कल्याण के नियमित स्थाई व अस्थाई साधनों से बढक़र इन दिनों अंतरा इंजेक्शन की मांग बढऩे लगी है, खासकर नवदंपति यानि युवा इसे खासा पसंद कर रहे हैं। अब तक केवल जिला अस्पताल अब चूनिंदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में यह सुविधा दी जा रही थी लेकिन अब सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अंतरा इंजेक्शन की सुविधा मिलने लगी है। इसे लेकर सोमवार को दो दिवसीय प्रशिक्षण जिला स्वास्थ्य भवन में प्रारंभ हुआ, जहां नर्सिंग स्टाफ को प्रशिक्षण दिया जा रहा है। सोमवार को डॉ. हिमानी कोशिक व डॉ. संजोली सोनी ने प्रशिक्षण दिया। वहीं परिवार कल्याण अनुभाग की प्रीति अरोड़ा व प्रशांत आदि मौजूद रहे। इससे पहले चिकित्सकों को भी प्रशिक्षित किया जा चुका है। 

एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता ने बताया कि सितंबर माह से सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अंतरा इंजेक्शन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर नि:शुल्क लगाया जाना प्रारंभ किया है। परिवार कल्याण के पारंपरिक साधनों मसलन गर्भ निरोधक गोलियों व कॉपर-टी की बजाए अब दंपतियां का इंजेक्शन की ओर रूझान बढा है, क्योंकि इससे पहले जिला अस्पताल व कई चूनिंदा सीएचसी पर ही इंजेक्शन लगाया जा रहा था। अंतरा इंजेक्शन एक बार लगाने से तीन माह तक गर्भ निरोधक का काम करता है। अंतरा इंजेक्शन से स्वास्थ्य के साथ ही आर्थिक नुकसान से भी बचाता है। उन्होंने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए गर्भ निरोधक गोलियों की बजाए अंतरा इंजेक्शन का उपयोग ज्यादा फायदेमंद है। इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है। दो बच्चों के बीच में अंतराल रखने के लिए इस इंजेक्शन का उपयोग सबसे बेहतर है। अंतरा इंजेक्शन के इस्तेमाल से मातृ व शिशु मृत्युदर में कमी आएगी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि वर्तमान में अंतरा इंजेक्शन नवविवाहित दम्पत्तियों द्वारा काफी पसन्द किया जा रहा है। क्योंकि अधिकांशत: आधुनिक नवविवाहित दंपति शादी के शुरुआती सालों में परिवार कल्याण के अस्थाई साधन अपनाते हैं। वहीं अंतरा इंजेक्शन का सर्वाधिक फायदा नसबंदी न करवाने वालों को भी मिलेगा। नसबंदी न कराने वाली महिलाओं को कई बार अनचाहे गर्भ का सामना करना पड़ता है, ऐसे में एक अंतरा इंजेक्शन तीन माह तक गर्भ निरोधक का कार्य करेगा। इससे महिलाओं को कमजोरी का अनुभव भी नहीं होगा। महिलाओं को जब मां बनना हो, तब वे यह इंजेक्शन लगवाना बंद कर सकती हैं। 

बुधवार, 29 अगस्त 2018

अब हर सीएचसी व शहरी पीएचसी पर अंतरा इंजेक्शन
-चिकित्सकों को दिया दो दिवसीय प्रशिक्षण, परिवार कल्याण कार्यक्रम होगा सुदृढ़
श्रीगंगानगर। परिवार कल्याण के नियमित स्थाई व अस्थाई साधनों से बढक़र इन दिनों अंतरा इंजेक्शन की मांग बढऩे लगी है। अब तक केवल जिला अस्पताल अब चूनिंदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में यह सुविधा दी जा रही थी लेकिन अब सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अंतरा इंजेक्शन की सुविधा मिलेगी। इसे लेकर चिकित्सकों को जिला मुख्यालय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जो बुधवार को संपन्न हुआ। इससे पूर्व नर्सिंग स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया गया है। 
एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता ने बताया कि सितंबर माह से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अंतरा इंजेक्शन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर नि:शुल्क लगाया जाएगा। परिवार कल्याण के पारंपरिक साधनों मसलन गर्भ निरोधक गोलियों व कॉपर-टी की बजाए अब दंपतियां का इंजेक्शन की ओर रूझान बढा है, क्योंकि इससे पहले जिला अस्पताल व कई चूनिंदा सीएचसी पर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। अंतरा इंजेक्शन एक बार लगाने से तीन माह तक गर्भ निरोधक का काम करता है। अंतरा इंजेक्शन से स्वास्थ्य के साथ ही आर्थिक नुकसान से भी बचाता है। उन्होंने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए गर्भ निरोधक गोलियों की बजाए अंतरा इंजेक्शन का उपयोग ज्यादा फायदेमंद है। इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है। दो बच्चों के बीच में अंतराल रखने के लिए इस इंजेक्शन का उपयोग सबसे बेहतर है। अंतरा इंजेक्शन के इस्तेमाल से मातृ व शिशु मृत्युदर में कमी आएगी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि वर्तमान में अंतरा इंजेक्शन नवविवाहित दम्पत्तियों द्वारा काफी पसन्द किया जा रहा है। क्योंकि अधिकांशत: आधुनिक नवविवाहित दंपति शादी के शुरुआती सालों में परिवार कल्याण के अस्थाई साधन अपनाते हैं। वहीं अंतरा इंजेक्शन का सर्वाधिक फायदा नसबंदी न करवाने वालों को भी मिलेगा। नसबंदी न कराने वाली महिलाओं को कई बार अनचाहे गर्भ का सामना करना पड़ता है, ऐसे में एक अंतरा इंजेक्शन तीन माह तक गर्भ निरोधक का कार्य करेगा। इससे महिलाओं को कमजोरी का अनुभव भी नहीं होगा। महिलाओं को जब मां बनना हो, तब वे यह इंजेक्शन लगवाना बंद कर सकती हैं। 

मंगलवार, 28 अगस्त 2018

‘बेटी पंचायत’ के जरिए अब घर-घर होगी बेटियों की बात
-‘डॉटर्स आर प्रीशियस’ अभियान के तहत सात सितंबर से शुरू होगा कार्यक्रम
श्रीगंगानगर। राज्य में ‘बेटी बचाओ’ के प्रति जन-जागरुकता की एक और अभिनव पहल करते हुए ‘डॉटर्स आर प्रीशियस’ अभियान के तहत प्रदेश की लगभग पांच हजार ग्राम पंचायतों में ‘बेटी पंचायत’ का आयोजन कर आमजन को ‘बेटियां अनमोल है’ का संदेश दिया जाएगा। इस नवाचार को लेकर राज्यस्तर के साथ ही जिले में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और सात सितंबर से ‘बेटी पंचायत’ का आयोजन प्रारंभ होगा। वहीं इसके बाद 14, 25 व 28 सितंबर को ग्राम पंचायत स्तर पर बेटी पंचायत का आयोजन होगा। 
पीसीपीएनडीटी के समुचित प्राधिकारी एवं एमडी एनएचएम नवीन जैन ने बताया कि प्रदेशभर की ग्राम पंचायतों पर डेप-3 आयोजित कर ग्रामवासियों को प्रजेंटेशन, इमोशनल एनिमेशन फिल्म आदि के जरिए एवं बेटियों के अन्य मुद्दों पर चर्चा करते हुए बेटी बचाओ का संदेश दिया जाएगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित इस अभियान में महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायती राज के साथ शिक्षा विभाग एवं बेटी बचाओ क्षेत्र में सक्रिय स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने राज्य एवं जिला स्तर पर डेप रक्षकों के प्रशिक्षण एवं आवश्यक बैठकें आयोजित कर इसकी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। श्रीगंगानगर जिले में भी 336 ग्राम पंचायतें हैं, जहां विभाग की ओर से डॉटर्स आर प्रीशियस का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए एनएचएम टीम ने तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। वहीं पीसीपीएनडीटी समन्वयकों को राज्यस्तर पर प्रशिक्षण दिया गया है।