यहां कन्या जन्म पर बजती है थाली, बंटती है मिठाइयाँ
-पीएचसी 17 जेड में चिकित्सक की पहल पर बेटियों का बढ़ रहा मान

श्रीगंगानगर। जिला मुख्यालय से कुछेक दूरी पर स्थित एक गाँव के वाशिंदे इन दिनों बेटियों का मान बढ़ाते हुए ‘बेटी बचाओ अभियान’ में अपना अहम योगदान दे रहे हैं। भले ही श्रीगंगानगर जिला कन्या भू्रण हत्या के लिए कुख्यात रहा हो लेकिन अब इस बदलती सोच और बेटियों के प्रति स्नेह के साथ जिला नई इबारत लिखने को तैयार है। निश्चित ही जागरूकता के मामले में ऐसे छोटे-छोटे प्रयास ही हमें उस सामूहिक लक्ष्य तक पहुंचाएंगे, जहां सब चाहते हैं कि लिंगानुपात समान हो। यानी बेटे-बेटी का भेदभाव समाप्त होते हुए कन्या भू्रण हत्या जैसे जघन्य अपराध पर रोक लगे।
कहने को छोटा सा, लेकिन बेटियों को समाज में बराबरी का हक दिलाने में बेहद खास योगदान दे रहे हैं ग्राम पंचायत 18 जेड के निवासी। इस ग्राम पंचायत के गांव 17 जेड में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. धीरज मंगल ने सकारात्मक पहल करते हुए बेटी के जन्म पर थाली बजाने का निर्णय लिया। यही नहीं पीएचसी पर जन्म लेने वाली बेटी की खुशी में चिकित्सक व अन्य स्टाफ अपने खर्च पर मिठाई भी बांटते हैं। बकौल डॉ. धीरज, ‘‘हमारे समाज में बेटे-बेटी का भेद उसके जन्म से शुरू हो जाता है। बेटा जन्मे तो थाली भी बजे और मिठाइयां भी बंटे। वहीं यदि बेटी ने जन्म लिया तो घर में माहौल कुछ अलग ही बन जाता है। इसी सोच, इसी प्रथा पर प्रहार करने के लिए हमने निर्णय लिया है कि पीएचसी पर जन्म लेने वाली हर बेटी की खुशी में थाली भी बजेगी और मिठाइयां भी बंटेगी। हम प्रयास करेंगे कि यह मुहिम ग्राम पंचायत के हर घर-घर में पहुंचे ताकि बेटे-बेटी का भेद समाप्त हो। क्योंकि यदि शुरूआत से ही भेद समाप्त होने लगा तो भविष्य में बेटियों को भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ेगा।’’ डॉ. धीरज बताते हैं कि उन्हें इस मुहिम के लिए जिला आईईसी समन्वयक विनोद बिश्रोई ने प्रेरित किया, जिसके बाद उन्होंने अपने स्टाफ व गांव के मौजिज लोगों से चर्चा कर थाली बजाने और मिठाई बांटने का निर्णय लिया। बेशक, यह शुरूआत है लेकिन हम निरंतर इस मुहिम को लेकर अलख जगाएंगे और बेटे-बेटी का भेदभाव समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे।
जन्मी लाडो, परिजनों ने भी मनाई खुशी
पीएचसी 17 जेड में गुरूवार को भी एक लाडली ने जन्म लिया। गांव 15 जेड के बिलाल खां की पत्नी शानी बेगम ने गुरूवार सुबह सवा आठ बजे चांद सी बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म के साथ ही पीएचसी स्टाफ ने थाली बजाकर और मिठाई बांटकर खुशी मनाई। वहीं परिजनों ने भी इस मुहिम को सकारात्मक रूप में लेते हुए बेटी के जन्म पर खुशी मनाते हुए कहा कि वे अपने परिजनों को प्रेरित करेंगे कि अपने परिवार या रिश्तेदार में अब कहीं भी बेटी होगी तो थाली बजाकर बेटी का स्वागत करेंगे। इस मौके पर चिकित्सा प्रभारी डॉ. धीरज मंगल, डॉ. प्रेम कुमार सहित नर्सिंग स्टाफ राजकुमार, उदयसिंह, वल्सला वीआर और बलजीत कौर आदि मौजूद रहे।
ताकि समान हो लिंगानुपात
पीएचसी 17 जेड में ग्राम पंचायत 18 जेड के पांच गांव शामिल है। डॉ. धीरज मंगल के मुताबिक गांव 17 जेड में 358 बालक व 316 बालिकाएं, गांव 19 जेड में 353 बालक व 310 बालिकाएं, गांव 16 जेड में 245 बालक व 193 बालिकाएं, गांव 13 जेड में 383 बालक व 287 बालिकाएं और गांव 18 जेड में 258 बालक एवं 237 बालिकाएं हैं। हालांकि लिंगानुपात तकरीबन समान है, लेकिन फिर भी एक दूरी है, जिसे पाटने के लिए ही ये जागरूकता मुहिम शुरू की गई है। ताकि आने वाले समय में बेटा-बेटी की संख्या समान है और समाज से भेदभाव भी समाप्त हो।
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