सोमवार, 28 नवंबर 2016

जहां हर माह होती है ‘दिल की बात’
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में मनाया जाता है हर माह ह्रदय दिवस

श्रीगंगानगर। भले ही विश्व में 29 सितंबर को ह्रदय  दिवस मनाया जाता हो, लेकिन संभवत: पूरे विश्व में श्रीगंगानगर एक मात्र ऐसा जिला है जहां हर माह ह्रदय  दिवस मनाया जाता है। वो भी उन मासूम बच्चों के लिए जिनके परिजन इतने अस्मृद्ध हैं कि वे उनका इलाज नहीं करवा सकें। यही नहीं, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मनाए जाने वाले इस दिवस से पूर्व ह्रदय रोग से पीडि़त बच्चों को बकायदा विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर चिन्हित करती हैं। दरअसल, यह संभव हो पाया है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते, जो जिले में बदस्तूर जारी है। इसी कार्यक्रम के तहत ही हर माह की 28 तारीख ह्रदय 

दिवस मनाया जाता है। कार्मिकों की कर्तव्यनिष्ठता व संवेदनशीलता का ही नतीजा है कि अब तक जिले में 60 ऐसे बच्चों को चिन्हित किया जा चुका है जो ह्रदय  रोग से पीडि़त हैं। अच्छी बात ये है कि अब
तक 13 बच्चों को सफल व नि:शुल्क ऑपरेशन करवाया जा चुका है और शेष का होना बाकी है।
जिला आईईसी समन्व्यक विनोद बिश्रोई ने बताया कि हर माह की 28 तारीख को मनाए जाने वाले ह्रदय  दिवस के चलते जिला अस्पताल के कमरा नंबर 15 में चिन्हित बच्चों को बुलाया जाता है। जहां वे अपने परिजनों के साथ आते हैं। ये वही बच्चे होते हैं जिन्हें आरबीएसके टीमें आंगनबाड़ी केंद्रों व राजकीय स्कूलों से संभावित ह्रदय  रोगी मानकर चिन्हित करती हैं। इन बच्चों के संबंध में टीम में शामिल चिकित्सक व जिला समन्वयक वाट्सएप व टेलीफोनिक वार्ता कर दिवस से एक सप्ताह पूर्व जानकारी जुटाते हैं और परिजनों को इस संबंध में जानकारी देते हैं। इसके बाद परिजन इन बच्चो को जिला अस्पताल में लगे आरबीएसके समनव्यक किशोर गौड़ व पलविंद्र कौर से मिलते हैं। वे बच्चों की एंट्री कर शिशु रोग विशेषज्ञों से जांच करवाते हैं। जरूरत होने पर इन बच्चों को आस्था हॉस्पीटल भेजा जाता है, जहां डॉक्टर प्रेम मित्तल इनकी नि:शुल्क इकोकार्डियोग्राफी करते हैं। रिपोर्ट के बाद सामान्य व पीडि़त बच्चों की सूची तैयार की जाती है और पीडि़त बच्चों के परिजनों की बकायदा बैठक कर उन्हें ऑपरेशन करवाने के लिए प्रेरित किया जाता है तथा सरकार की ओर से नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार की जानकारी दी जाती है। इसके बाद गंभीर बच्चों को प्राथमिकता से जयपुर स्थित उच्च चिकित्सा संस्थानों में नि:शुल्क ऑपरेशन के लिए भेजा जाता है। वहां ऑपरेशन होने और वापसी तक संबंधित टीमें परिजनों के संपर्क में रहती है और निरंतर फॉलोअप करती है। जुलाई से प्रारंभ किया गया ह्रदय दिवस 28 की बजाए 29 तारीख को तभी होता है जब 28 को राजकीय अवकाश होता है।
इनका दिल था नासाज, अब जगी जीने की आस
आरबीएसके सह प्रभारी डॉ. भारत भूषण ने बताय कि आरबीएसके टीमों ने ह्रदय  रोग से पीडि़त अब तक 60 बच्चों की सूची तैयार की है, जिनमें से 13 बच्चों को सफल ऑपरेशन करवाया जा चुका है। आरबीएसके के डॉ. सुनील बिश्रोई के मुताबिक सूतरगढ़ निवासी आरजू पुत्री भजनलाल, दस ए छोटी निवासी गजेंद्र पुत्र रामस्वरूप, सागरवाला निवासी नेहा, चूनावढ़ निवासी पुत्र राजेंद्र सुथार, घड़साना निवासी चंद्रकांता, पीपरेन, सूरतगढ़ निवासी द्रोपती पुत्री दीनदयाल, सूरतगढ़ निवासी भैरों, अनूपगढ़ निवासी अजय, श्रीकरणपुर निवासी सिमरन पुत्री सुरेंद्र सिंह, ओडक़ी निवासी कपिल, पदमपुर निवासी नीतू पुत्री बीरबल, श्रीकरणपुर निवासी माया पुत्री प्रेमसिंह और रामसिंहपुर निवासी लक्की पुत्री सुभाष का सफल ऑपरेशन करवाया जा चुका है। शेष बच्चों की सूची जयपुर भिजवाई गई है, जिनका हॉस्पीटल में नंबर आते ही ऑपरेशन करवाया जाएगा। 
विश्व ह्रदय दिवस
हर वर्ष 29 सितंबर को विश्व ह्रदय  दिवस मनाया जाता है, जिसकी शुरूआत वर्ष 2000 से हुई। दिवस मनाने का मुख्य उदï्देश्य आमजन में जागरूकता पैदा करना है। क्योंकि वर्तमान में निष्क्रिय जीवन शैली, अत्यधिक तनाव, हाइपरटेंशन, मधुमेह, अधिक धूम्रपान, मोटापा व वसायुक्त भोजन के कारण ह्रदय रोग बढ़ता जा रहा है। वहीं जिनका कोलेस्ट्रोल ज्यादा होता है उनमें ह्रदय  रोग का अधिक खतरा होता है। एक अनुमान के अनुसार, भारत में 10.2 करोड़ लोग इस बीमारी की चपेट में है। जानकारी के मुताबिक हर साल होने वाले 29 फीसदी मौतों की एक प्रमुख वजह ह्रदय  संबंधी बीमारियां या ह्रदयघात होता है। 

‘‘मिशन निदेशक नवीन जैन के निर्देशानुसार जिले में 11 जुलाई से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके तहत विभाग की 16 टीमें आंगनबाड़ी केंद्रों व राजकीय स्कूलों में जाकर 19 वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करती है। जो बच्चे विभिन्न बीमारियों से पीडि़त होते हैं उनका सरकार नि:शुल्क इलाज करवा रही है। वहीं जिलास्तर पर नवाचार करते हुए हर माह की 28 तारीख को ह्रदय  दिवस मनाया जा रहा है और इसी का परिणाम है कि अब तक 60 बच्चों को चिन्हित कर 13 का नि:शुल्क ऑपरेशन करवा जा चुका है। हमारे जिले की आरबीएसके टीमें पूरे राज्य में सबसे बेहतर कार्य कर रही हैं’’
डॉ. नरेश बंसल, सीएमएचओ, श्रीगंगानगर

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