सोमवार, 28 नवंबर 2016

फ्लोराइड युक्त पानी भी दे सकता है फ्लोरोसिस
-आधा पीपीएम से ज्यादा पेयजल पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फें्रस में विशेषज्ञों ने जताई चिंता
श्रीगंगानगर। यदि आप अधिक फ्लोराइड वाला पानी पी रहे हैं तो यह आपके लिए घातक साबित हो सकता है। क्योंकि अधिक फ्लोराइड वाले पेयजल से फ्लोरासिस की बीमारी निश्चित है। सामान्य तौर पर इस बीमारी से हडिï्डयों में दर्द व जकडऩ और दांतों में सडऩ व पीलापन हो सकता है। इसके अलावा शारीरिक क्षमता भी कमजोर हो सकती है। इस गंभीर समस्या को लेकर हाल ही हैदराबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फें्रस में चर्चा की गई। जिसमें श्रीगंगानगर से स्वास्थ्य विभाग के फ्लोरोसिस प्रभारी डॉ. सुनील बिश्रोई सम्मिलित हुए। उन्होंने बताया कि पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा 0.5 पीपीएम से ज्यादा हो तो ये आपकी हड्डियों व दांतों के लिए घातक है। लगातार ऐसे पानी का सेवन करने से फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। 
उन्होंने बताया कि हाल ही में फ्लोराइड अनुसंधान पर अंतरराष्ट्रीय सोसाइटी के हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पोषण संस्थान में आयोजित 33 वीं कॉन्फें्रस में विशेषज्ञों ने इस बात का पुर जोर समर्थन किया कि फ्लोरोसिस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए भारत में पानी में फ्लोराइड के वर्तमान स्वीकृत मानक स्तर एक पीपीएम को घटा कर 0.5 पीपीएम कर देना चाहिए क्योंकि गरीब व दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे भारतीयों के भोजन में कैल्सियम, विटामिन व आयरन के अभाव के चलते एक पीपीएम से अधिक मात्रा वाले पानी का लगातार सेवन भी फ्लोरोसिस दे सकता है। कॉन्फें्रस में यह तथ्य भी उभरकर आया कि मात्र स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के बजाय जलदाय विभाग, नगर व ग्रामीण निकाय, केमिस्ट व डेंटिस्ट का भी समन्वय आवश्यक है। तीन दिवसीय कांफ्रेंस में सोसाइटी के अध्यक्ष अरुण एल खंडारे द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लोराइड टेस्टिंग लैब की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया। डॉ. बिश्रोई ने बताया कि लगातार अधिक फ्लोराइड युक्त पानी, तम्बाकू, सुपारी, काली चाय, काला नमक इत्यादि का सेवन व फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का उपयोग करने से होने वाले हड्डियों में टेढ़ापन, कुबड़ापन व दांतों में पीलापन को फ्लोरोसिस कहते है। फ्लोरोसिस से बचने के लिए वर्षा जल एकत्र कर पीएं, इमली, आंवला, नीम्बू, हरी सब्जियां, दूध-दही, विटामिन सी, डी, कैल्सियम व आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें। 

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