मिशन निदेशक की प्रेरणा से चलाया मिशन, एक माह में हुआ ७३ फीसदी भुगतान
-बेटियों को शुभलक्ष्मी योजना का लाभ देने के लिए घर-घर पहुंचे अधिकारी-कर्मचारी, एनएचएम कार्मिक बने टीम लीडर
श्रीगंगानगर। यदि इंसान ठान ले तो कुछ भी असंभव नहीं है, फिर भले ही वह सरकारी काम ही क्यों न हो। हम बात कर रहे हैं स्वास्थ्य महकमे की जिसके अधिकारियों व कर्मचारियों ने बेटियों को दिए जाने एक भुगतान पर सकारात्मक रूख अपनाते हुए ऐसा कीर्तिमान कर दिखाया जो असंभव सा लगता है। दरअसल, विभाग की ओर से बालिका जन्म पर मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना के तहत दी जाने वाली द्वितीय किश्त को लेकर खासी दिक्कत आ रही थी और जिले में अक्टूबर 2016 तक भुगतान न के बराबर था। इसी के मदï्देनजर एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन ने विभागीय अधिकारियों व कार्मिकों को वीसी कर बालिकाओं को उनका हक दिलाने के लिए प्रेरित किया और आज नतीजा ये कि केवल एक माह के भीतर ७३ फीसदी से अधिक का भुगतान करवा दिया गया। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल का कहना है कि आगामी दस दिन में शेष का भुगतान करवा दिया जाएगा।
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से अप्रेल २०१३ में मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना शुरू की गई, जिसके तहत बालिका जन्म के बाद तीन किश्तों में 7300 रूपए दिए जा रहे हैं। हालांकि पूर्व में चैक के माध्यम से भुगतान किया जाता था लेकिन सिस्टम में सुधार करते हुए महिलाओं की सहूलियत के लिए अगस्त 2015 से ओजस सॉफ्टेवयर शुरू कर ऑनलाइन भुगतान किया जाने लगा। इसके बाद तत्काल भुगतान होने लगा और सिस्टम में सुगमता व पारदर्शिता भी आई। चूंकि ओजस के तहत दूसरी किश्त ऑनलाइन दी जानी थी तो समस्या आने लगी। जिले में 27 अक्टूबर 2016 तक केवल 151 महिलाओं को ही ऑनलाइन भुगतान हुआ, जबकि शेष यानी करीब 90 फीसदी महिलाओं का भुगतान बकाया था। ऐसे में मिशन निदेशक नवीन जैन ने मामले की गंभीरता देखते हुए 27 अक्टूबर को वीसी के जरिए अधिकारियों व कार्मिकों को बालिकाओं का हक दिलाने के लिए प्रेरित किया। निश्चित ही उस संवेदनशील हूक का नतीजा हुआ कि अधिकारियों व कार्मिकों ने इस कार्य को मिशन के रूप में लिया। सबसे पहले जिला मुख्यालय पर सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने एनएचएम के कार्मिकों डीपीएम विपुल गोयल, डीएनओ कमल गुप्ता, डीएसी रायसिंह सहारण, डीएएम सतीश गुप्ता व सीओआईईसी विनोद बिश्रोई के साथ बैठकर रणनीति तैयार की। कार्मिक मैदान में उतरे और ब्लॉक दर ब्लॉक पहुंचे। बैठेंक हुईं, चर्चा की और हर संभव प्रयास किया। विभाग के सभी बीसीएमओ, बीपीएम, बीएचएस के साथ मिलकर इस कार्य को एक माह के भीतर 50-55 फीसदी हासिल करने की ठानी। जबकि विभाग की महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं व आशाओं ने ऐसा सहयोग किया कि यह आंकड़ा ७३ फीसदी पार कर गया। इस दौरान करीब एक माह के भीतर ही विभाग ने १३४० खातों में 2८ लाख २8 हजार ७00रूपए जमा करवा दिए। यह भुगतान अगस्त 2015 से नवंबर 2015 के बीच जन्मी बालिकाओं का है। हालांकि अब भी कुछेक महिलाओं का भुगतान बाकी है लेकिन विभागीय कार्मिकों ने ठाना है तो निश्चित ही मंजिल भी मिलेगी और बालिकाओं का उनका हक भी। सीएमएचओ डॉ. बंसल के अनुसार फील्डस्तर पर किए गए सर्वे में सामने आया है कि इन दिनों ज्यादातर परिवार खेती में व्यस्त हैं इस कारण वे द्वितीय किश्त लेने नहीं आ रहे। वहीं अनेक ऐसे भी हैं, जो द्वितीय किश्त लेना भूल गए हालंाकि अब विभागीय आशाएं व एएनएम उन्हें घर-घर जाकर याद दिला रही हैं। अनेक परिवार ऐसे भी हैं जो मजदूरी करते हैं और वे या तो जिले से बाहर चले जाते हैं या जो बाहर से आते हैं वे वापिस अपने क्षेत्र में चले जाते हैं। फिलहाल विभाग ऐसे परिवारों को फोन कर प्रेरित कर रहा है कि वे जहां भी हैं नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर जाकर भुगतान लें अन्यथा उन्हें तीसरी किश्त का लाभ नहीं मिलेगा।
क्या है शुभलक्ष्मी योजना
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि प्रदेश में बालिका जन्म को प्रोत्साहित करने एवं मातृ मृत्यु दर कम करने के उद्घेश्य से राज्य सरकार ने मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना प्रारंभ की। जिसके तहत एक अप्रेल 2013 या इसके बाद राजकीय एवं अधिस्वीकृत चिकित्सा संस्थानों में संस्थागत प्रसव में बालिका के जन्म होने पर प्रसूता को 2100 रुपए की राशि का चैक दिया जाता है। यह राशि जननी सुरक्षा योजना के अन्तर्गत देय राशि के अतिरिक्त है। इसके बाद बालिका की उम्र एक वर्ष पूर्ण होने और सभी आवश्यक टीके लगवाने पर 2100 रुपए की अतिरिक्त राशि का चैक दिया जाने का प्रावधान है। वहीं बालिका की आयु पांच वर्ष पूर्ण होने और स्कूल में प्रवेश होने की स्थिति में बालिका को 3100 रुपए की राशि देने का प्रावधान था। यानी कुल सात हजार 300 रुपए की राशि देय थी। हालांकि वर्तमान राज्य सरकार ने इस योजना का नाम राजश्री योजना कर दिया है और एक जून 2016 से जन्मी बालिकाओं को राजश्री का लाभ मिल रहा है। जबकि इससे पूर्व जन्मी बालिकाओं को शुभलक्ष्मी योजना का ही लाभ दिया जा रहा है, यानी उन्हें 7300 रूपए ही मिलेंगे।
वर्जन -
मिशन निदेशक नवीन जैन की प्रेरणा का ही परिणाम है कि विभागीय टीम ने घर-घर जाकर शुभलक्ष्मी योजना की द्वितीय किश्त लाभार्थियों को दिलवाई। जिले के हर ब्लॉक में बेहतर कार्य हुआ और हर कार्मिक ने अपनी भूमिका बखूबी अदा की। जल्द से जल्द प्रयास कर वंचित लाभार्थियों को भुगतान दिलाया जाएगा। हालांकि परिजनों को खुद द्वितीय किश्त व आगामी किश्त की तारीख याद रखनी चाहिए ताकि समय पर भुगतान हो सके।
विनोद बिश्रोई, सीओआईईसी
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