शनिवार, 31 दिसंबर 2016

नई सुबह, नई भोर . . . नई उम्मीद की ‘अनुरीत कौर’
-आरबीएसके ने लौटाई अनुरीत की धडक़नें, राज्य का सबसे महंगा ऑपरेशन हमारी लाडली का
श्रीगंगानगर। नई भोर, नई सुबह के साथ आज से हम सभी नव वर्ष की शुरुआत कर रहे हैं, वहीं हमारे जिले की एक बेटी ऐसी भी है जो आज से नई जिंदगी की शुरुआत करने जा रही है। उम्मीद और विश्वास की नई किरण दिखाने वाली श्रीकरणपुर के कुरेशिया निवासी ये अनुरीत कौर हैं, जिसका सहारा बना राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे इस कार्यक्रम के तहत न केवल अनुरीत को आज से नई जिंदगी मिली है बल्कि जयपुर के उच्च चिकित्सा संस्थान में हुए उपचार में विभाग का यह अब तक सर्वाधिक महंगा ऑपरेशन हुआ है, जिसका भुगतान पूर्णत: स्वास्थ्य विभाग करेगा। चौदह वर्षीय मासूम कौर को नई जिंदगी दिलाने में खेवनहार बने एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन, जिन्होंने यह पैकेज स्वीकृत किया और आरबीएसके टीम के वे चिकित्सक जिन्होंने इस लाडली की बीमारी को पहचाना एवं लगातार फॉलोअप कर उपचार करवाने में परिजनों को आवश्यक सहयोग व संबल दिया।
असल में यह कहानी है राजपाल कौर की, जो अनुरीत की मां है। वे अपने आस-पास के घरों व खेतों में काम कर अपना व पूरे परिवार का जीवन बसर कर रही हैं। राजपाल के पति यानी अनु के पिता वकीलसिंह खुद बीमार हैं, लिहाजा वे काम करने में अक्षम हैं। फिर भी राजपाल ने अनु को स्कूल में दाखिला दिलाया और वो भी लगन के साथ आठवीं कक्षा में अध्यनरत हैं। संभवत: स्कूल में पढऩा ही अनु के लिए मुफीद साबित हुआ, क्योंकि स्कूल में पहुंची आरबीएसके टीम के चिकित्सक डॉ. एकता शर्मा व डॉ. अभिषेक ने अनु की बीमारी को पहचाना। उन्हें बताया गया कि अनु अक्सर थक जाती हैं, उसका सांस फूल जाता है और बार-बार सर्दी-जुकाम होता है। चिकित्सकों ने बिना देर किए अनु को संभावित हृदï्य रोगी मानते हुए जिला अस्पताल में रैफर किया, जहां सहप्रभारी डॉ. भारत भूषण ने बच्ची की सुध लेते हुए उसकी आस्था हॉस्पीटल में नि:शुल्क इकोकार्डियोग्राफी करवाई। पुष्टि होने पर उसे जयपुर के नारायणा हॉस्पीटल में ऑपरेशन के लिए भेजा गया। जहां जांच में सामने आया कि अनु को एक नहीं बल्कि हृदï्य संबंधी दो-दो बीमारी (फेलोट्स टेट्रोलॉजिी सिंड्रोम एवं मिट्रल वॉल्व खराबी)है। हालंाकि विभाग द्वारा हॉस्पीटल को एक पैकेज के तहत ही इलाज अधिकृत है, लिहाजा स्वीकृति के लिए मिशन निदेशक नवीन जैन से वार्ता की गई, जिन्होंने तुरंत प्रभाव से इसे स्वीकृत कर बेहतर उपचार करने के निर्देश दिए। आखिरकार, हमारी लाडली का न केवल सफल ऑपरेशन हुआ बल्कि उपचार, नई सुबह, नई मुस्कान के साथ अनु को साल के पहले दिन रविवार को अस्पताल से छुट्टी दे दी जाएगी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई के मुताबिक जिले में अब तक 110 बच्चों में हृदï्य रोग की पुष्टि हो चुकी है और विभाग ने अनुरीत सहित 18 बच्चों का नि:शुल्क ऑपरेशन करवा सफल उपचार करवाया है। 
वर्जन - 
‘‘मिशन निदेशक नवीन जैन, आरबीएसके टीम व चिकित्सकों की बदौलत अनु का नई जिंदगी मिली है। पूरी टीम बधाई की पात्र हैं। हमारा प्रयास रहेगा कि भविष्य में ऐसे जरूरतमंद बच्चों को नि:शुल्क उपचार मुहैया करवाया जाए। भगवान अनु को लंबी आयु दे।’’
डॉ. नरेश बंसल, सीएमएचओ 
‘‘आरबीएसके टीम के बेहतर व संवदेनशील कार्यशैली की बदौलत आज किसी बेटी के चेहरे पर मुस्कान लौटाकर बहुत खुशी महसूस हो रही है, क्योंकि अनुरीत कौर का परिवार बेहद निर्धन है जो संभवत: इस बीमारी का इतने बड़े हॉस्पीटल में कभी इलाज नहीं करवा पाता।’’
डॉ. वीपी असीजा, आरबीएसके प्रभारी

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