हृदय हुआ कमजोर, हर माह मिल रहे 20 पीडि़त मासूम
-स्वास्थ्य विभाग कर रहा है चिन्हित, आरबीएसके में हो रहा नि:शुल्क उपचार

श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से आंगनबाड़ी केंद्रों व राजकीय स्कूलों में किए जा रहे स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। परीक्षण में 19 वर्ष आयु तक के बच्चों का स्वास्थ्य जांच कर विभिन्न बीमारियों का राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत नि:शुल्क उपचार करवाया जा रहा है। गंभीर तथ्य ये है कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से 11 जुलाई 2016 से प्रारंभ किए स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान अब तक 110 बच्चे हृदय रोग से पीडि़त मिले हैं, जो जन्म से 19 वर्ष आयु तक के हैं। बहरहाल, विभाग पूरी शिदï्दत के साथ न केवल इनका चिन्हिकरण कर रहा है, बल्कि नि:शुल्क जांच के साथ ही नि:शुल्क उपचार भी करवा रहा है। अब तक बड़े ऑपरेशनों सहित 20 बच्चों का नि:शुल्क इलाज करवाया जा चुका है और शेष बच्चे विभागीय फेहरिस्त में शामिल हैं।
आरबीएसके प्रभारी डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गुरुवार को भी जिला चिकित्सालय में हृदय दिवस मनाया गया, जो हर माह की 29 तारीख में मनाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि गुरुवार को जिला अस्पताल में आरबीएसके टीमों ने संभावित हृदय रोग के 41 बच्चों को जांचा। आरबीएसके सहप्रभारी डॉ. भारत भूषण के नेतृत्व में डॉ. एकता शर्मा, डॉ. अमित, पलविंद्र कौर व जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय राठी ने यहां अपनी सेवाएं दी। इसके बाद चिन्हित बच्चों की स्थानीय आस्था हॉस्पीटल में डॉ. प्रेम मित्तल ने नि:शुल्क इको कार्डियोग्राफी की, जिनमें से 27 बच्चों में हृदय रोग की पुष्टि हुई। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई के मुताबिक विभाग अब प्राथमिकता के आधार पर इन बच्चों का जयपुर स्थित उच्च चिकित्सा संस्थानों में ऑपरेशन करवा उपचार करवाएगा। विभाग ने अब तक 17 बच्चों का ऑपरेशन और तीन बच्चों को दवाओं व अन्य ट्रीटमेंट के जरिए राहत दी है। यही नहीं विभाग बच्चों के ऑपरेशन व उपचार के बाद भी लगातार फॉलोअप कर रहा है ताकि मासूम सामान्य जीवन यापन कर सके।
कई हैं कारण, खुद के हाथ है निवारण
डॉ. भारत भूषण बताते हैं कि बच्चों में हृदय संबंधी बीमारियां अक्सर परिजनों की सामान्य अनदेखी व लापरवाही से होती हैं। गर्भावस्था के दौरान डॉक्टर की सलाह के बिना या नीम-हकीम व झोलाझापों से दवा लेेना काफी गंभीर हो सकता है, इसलिए इस मामले में पूरी गंभीरता बरती जानी चाहिए। प्राय: देखने में आता है कि एक या दो बच्चे के बाद गर्भवती महिला के पोषण का ख्याल नहीं रखा, कुछेक मामलों में तो पहले बच्चे पर भी नहीं। जो कहीं न कहीं गर्भ में पल रहे बच्चे के शारीरिक विकास पर प्रतिकूल असर डालता है, इसलिए खान-पान व बेहतर पोषण पर ध्यान देना चाहिए। पर्यावरण संबंधी कारण भी हो सकते हैं, लिहाजा गर्भवती को साफ सुधरी व खुली हवा और अच्छे पर्यावरण में रखा जाना चाहिए। धूम्रपान बच्चे के हृदï्य रोग का सबसे बड़ा कारण है। यदि गर्भवती स्वयं या उसके आस-पास कोई भी धूम्रपान करता है तो उसके धूएं से गर्भ में पल रहे बच्चे पर खासा विपरीत असर पड़ता है। वहीं टीकाकरण भी एक प्रमुख कारण है। दरसअल, महिलाओं को संपूर्ण टीकाकरण करवाना चाहिए ताकि वे स्वस्थ शिशु को जन्म दे सके। परिजनों को चाहिए कि गर्भावस्था के दौरान गर्भवती की संपूर्ण जांचे करवाएं। हालांकि कुछेक मामलों में आणुवांशिक कारण भी हो सकते हैं, लेकिन इनकी संख्या काफी कम होती है।
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