मंगलवार, 31 जनवरी 2017

जागरुकता की अलख या डिकॉय का असर, बढऩे लगी बेटियां
-जिले में नवजात लिंगानुपात 968, अनेक गांव ऐसे जहां बेटों से ज्यादा बेटियां
श्रीगंगानगर। बेटा-बेटी एक समान का नारा जिले में अब फलीभूत होता नजर आ रहा है। सुखद समाचार है कि जिले में लिंगानुपात बढ़त की ओर है। भले ही पीसीटीएस के आंकड़े हो या एनएफएचएस के तथ्य, सभी में बेटियों की संख्या बढ़ती दिख रही है। वहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले की ग्राम पंचायत स्तर पर किए गए तथ्यात्मक सर्वे में भी आंकड़े बेहद सकारात्मक आए हैं। जहां वर्ष 2011 में बाल लिंगानुपात महज 854 था, वहीं हाल ही के सर्वे में नवजात लिंगानुपात 968 आया है। निश्चित ही यह स्वास्थ्य विभाग एवं निजी संगठनों व संस्थाओं की ओर से किए जा रहे सामूहिक जागरुकता प्रयासों का परिणाम है। वहीं विभाग की ओर से लगातार किए जा रहे डिकॉय ऑपरेशनों का भी असर है कि जिले सहित आस-पास के जिलों व राज्यों में कन्या भू्रण हत्या जैसा जघन्य अपराध कम होता दिख रहा है। 
दरअसल, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से ग्राम पंचायत वार लिंगानुपात सर्वे किया गया, जिसमें यह तथ्य सामने आया कि बेटियों की संख्या बढ़ोतरी की ओर है। विभाग ने इस सर्वे में एक वर्ष तक के नवजात शिशुओं को शामिल और केवल राजकीय चिकित्सा संस्थानों में होने वाले प्रसवों को ही सर्वे में जोड़ा, क्योंकि ग्राम पंचायत स्तर पर अधिकांश प्रसव राजकीय संस्थानों में ही होते हैं। सर्वे में अपे्रेल से लेकर दिसंबर 2016 के अंतराल में पैदा हुए बच्चों को शामिल किया गया है। उक्त सर्वे के अनुसार, जिले की 334 ग्राम पंचायतों में 8851 बेटे एवं 8571 बेटियां हैं, यानी एक हजार बालकों की संख्या पर 968 बालिकाएं हैं। सर्वे में राहत की बात ये भी है कि करीब 157 ग्राम पंचायतों में लिंगानुपात एक हजार से ऊपर है। जिले में छह ग्राम पंचायतें ऐसी भी हैं जहां दो हजार से ऊपर लिंगानुपात है। डीएनओ कमल गुप्ता के मुताबिक 146 ग्राम पंचायतों का लिंगानुपात एक हजार से ऊपर है। जबकि 11 ग्राम पंचायतों में समान लिंगानुपात है। इसी तरह 59 ग्राम पंचायतें ऐसी हैं, जहां संसेक्स 2011 के मुकाबले लिंगानुपात बढ़ा हुआ है, यानी यहां 854 से ऊपर 973 के आंकड़े हैं। निश्चित ही यह सुखद समाचार है कि जिले में बेटियों की संख्या में इजाफा हो रहा है और संभवत: आगामी जनगणना में जिला लिंगानुपात के मामले में सबसे आगे हो। 
टॉप टेन ग्राम पंचायतें
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि सर्वाधिक लिंगानुपात वाली ग्राम पंचायतों में रायसिंहनगर की 71 आरबी (2222), पदमपुर की पांच केके (2200), गंंगानगर की चार जेड (2059), सादुलशहर की बहरामपुरा (2050), पदमपुर की 69 एलएनपी (2000), रायसिंहनगर की दस टीके (2000), गंगानगर की संगतपुरा (1889), रायसिंहनगर की 6/8 एलपीएम (1813), घड़साना की पांच पीएसडी (1800) व रायसिंहनगर की लखाहाकम (1789)शामिल है। वहीं श्रीकरणपुर की मोरा, घड़साना की दो केएम व सात एमएलडी, सादुलशहर की डंूगरसिंहपुरा व रोटांवाली, सूरतगढ़ की जानकीदासवाला, पदमपुर की एक पीएस, नरसिंहपुरा व रिड़मलसर, रायसिंहनगर की सावंतसर, अनूपगढ़ की सात एपीडी में लिंगानुपात बराबर है। 
वर्जन - 
‘‘वाकई में यह सुखद समाचार है कि हमारे जिले में बेटा-बेटी का भेद मिटता दिख रहा है और लिंगानुपात के विभिन्न सर्वे में आंकड़े सकारात्मक आ रहे हैं। निश्चित ही यह जागरुकता, विभाग द्वारा किए जा रहे डिकॉय ऑपरेशनों और सोनोग्राफी सेंटरों के मामले में राज्य सरकार की सख्ती के परिणाम हैं। भविष्य में भी यह परिणाम सकारात्मक रहे और लिंगानुपात समान हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जाएंगे।’’
ज्ञानाराम, जिला कलेक्टर, श्रीगंगानगर
‘‘स्वास्थ्य विभाग लिंगानुपात को समान करने के लिए लगातार प्रयास कर रहा है। जागरुकता कार्यक्रमों के साथ ही डिकॉय ऑपरेशन एवं सख्ती ने खासा असर दिखाया है और अब हर सर्वे में लिंगानुपात बढ़त की ओर है। जल्द ही बेटी बचाओ अभियान को लेकर और अधिक जागरुकता कार्यक्रम चलाए जाएंगे। स्थानीय संगठनों व संस्थाओं से भी आहï्वान करेंगे कि इस अभियान में अपना योगदान दें।’’
डॉ. नरेश बंसल, सीएमएचओ, श्रीगंगानगर

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