शुक्रवार, 21 अप्रैल 2017

स्वास्थ्य क्षेत्र में आशा सुपरवाइजरों की अहम भूमिका
-सभी सुपरवाइजरों को किया प्रशिक्षित, ताकि स्वास्थ्य सेवाएं हो सके सुदृढ़
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में निचले स्तर की अहम कड़ी आशा सुपरवाइजरों को जिला स्वास्थ्य भवन में प्रशिक्षण के साथ ही उन्हें नए दिशा-नि
र्देशों से अवगत करवाया गया। शुक्रवार को आयोजित इस प्रशिक्षण कार्यक्रम में जिले के सभी ब्लॉक एवं पीएचसी आशा सुपरवाइजर सम्मिलित हुए। जिन्हें सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, डीपीएम विपुल गोयल, डीएनओ डॉ. कमल गुप्ता व डीएसी रायसिंह सहारण ने प्रशिक्षण दिया। इस मौके पर सुपरवाइजरों की विभिन्न शंकाओं का मौके पर ही समाधान किया गया। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि स्वास्थ्य सेवाओं को और अधिक सुदृढ़ करने के लिए यह कदम उठाया गया, क्योंकि सुपरवाइजर फील्ड में अहम भूमिका निभाते हैं और वे उच्चाधिकारियों, आशाओं व आमजन के बीच तालमेल बिठाने में पूरा योगदान दे रहे हैं। प्रशिक्षण कार्यक्रम में पीसीटीएस पर विस्तार से चर्चा की गई और उन्हें बताया कि तथ्यों व आंकड़ों का सही इंद्राज होना आवश्यक है तभी आगामी योजनाओं को अमलीजामा पहनाया जा सकता है। आशा सॉफ्ट व ऑजस में हुए नए बदलाव और डेटा फिडिंग के दौरान रखे जाने वाली सावधानी व समस्याओं को लेकर डॉ. कमल गुप्ता ने उन्हें जानकारी दी। एचबीएनसी का सेक्टरवार रिव्यू किया गया। ग्रामीण क्षेत्र में सर्वाधिक उपयोग की जा रही 104 एम्बुलेंस सेवा को लेकर भी चर्चा की गई और उन्हें बताया गया कि संबंधित क्षेत्र में आशाओं के जरिए आमजन तक जानकारी पहुंचाएं कि गर्भवती महिला व नवजात शिशु के लिए 104 एम्बुलेंस का उपयोग किया जाए। आशा डायरी की चर्चा करते हुए डीएसी रायसिंह सहारण ने बताया कि सुपरवाइजर नियमित निरीक्षण के दौरान आशाओं की डायरी चेक करें और यदि आशाओं को कोई समस्या आ रही है तो उनका समाधान करवाएं। कुपोषित बच्चों को चिन्हित करने और उन्हें एमटीसी तक पहुंचाने संबंधी आ रही समस्या को लेकर डीपीएम विपुल गोयल ने शंकाओं का समाधान किया। इस दौरान मिसिंग डिलीवरी पर विस्तार से चर्चा की गई। इसके अलावा उन्हें बेहतर प्रचार-प्रसार में योगदान के लिए प्रेरित किया गया ताकि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, राजश्री योजना, मुखबिर योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, बालिका संबल योजना आदि का आमजन बेहतर लाभ उठा सकें। 

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