मासूमों की धुंधली होती ‘नजर’ की सरकार ने ली सुध
-आरबीएसके के तहत चलाया मिशन आंखें, 101 बच्चों की हुई जांच, 37 की आंखें कमजोर
श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जिले के बच्चों के लिए नजीर बनता दिख रहा है। यहां नित नए नवाचार कर बच्चों को हर संभव राहत दी जा रही है। यही वजह है कि एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन भी जिले की टीम की सराहना कर चुुके हैं। नवाचारों व संवेदनशीलता की इस कड़ी में मिशन आंखें चलाकार बुधवार को एक सौ एक बच्चों की नि:शुल्क जांच की गई। जिनमें से 37 बच्चों की आंखें कमजोर मिलीं, जिन्हें 16 मई को सीएचसी पर चश्में दिए जाएंगे। आंखों की हालत ज्यादा नाजुक पाए जाने पर चार बच्चों को उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रैफर किया गया है, जहां उनका नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार किया जाएगा। वहीं दो बच्चों का भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अधिकृत हॉस्पीटल में ऑपरेशन करवा राहत दिलवाई जाएगी। बुधवार को जिला मुख्यालय पर लगाए गए शिविर में सादुलशहर खण्ड के बच्चे सम्मिलित हुए।
जिला मुख्यालय पर बुधवार को लगे इस विशेष शिविर में आरबीएसके टीम के साथ ही बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सभी बच्चों को एक साथ यहां टीम अपने खर्चे पर लेकर आई और सबकी नि:शुल्क जांच करवाई। इन बच्चों को विभागीय टीम ने भीषण गर्मी की परवाह न करते हुए विगत कई दिनों के अंतराल में स्कूलों में जाकर चिन्हित किया। आज जांच के दौरान सामने आया कि कुछ बच्चों को आंखों की सामान्य समस्याएं थीं, लिहाजा उन्हें नि:शुल्क दवा दी गई ताकि वे ठीक हो सकें। कुछ बच्चों को माइग्रेन, आंखों में इन्फेक्शन आदि की समस्या भी मिली है। इसी तरह 37 बच्चों की आंखें कमजोर मिलीं, जिन्हें पढऩे-लिखने और सामान्य कार्य में दिक्कत हो रही थी। सभी को सीएचसी सादुलशहर में एक साथ चश्में दिए जाएंगे। चार बच्चों को जयपुर और दो को गंगानगर में नि:शुल्क ऑपरेशन किया जाएगा। सभी बच्चों की जांच बहल हॉस्पीटल में डॉक्टर पल्लवी सहारण ने की।
मासूमों को राहत दिलाने में टीम लीडर डॉ. मोनिका भूटिया, डॉ. योगेश कालड़ा सहित फार्मासिस्ट ममता व आयुष कपांउडर अनिल शर्मा की बेहद सकारात्मक भूमिका रही। इन्होंने न केवल इन बच्चों को चिन्हित किया बल्कि विगत दस दिनों से इन्होंने व्यक्तिगत रूप से सभी बच्चों के परिजनों व स्कूल संचालकों से संपर्क साधा ताकि वे इन्हें उपचार के लिए भेज सकें। कुछेक परिजन ऐसे भी थे जिन्होंने बच्चों को भेजने के लिए तो हामी भर दी लेकिन लेकर आने में असमर्थता जता दी। आखिरकार डॉक्टर मोनिका ने अपने साथियों से मिलकर निजी वाहन के जरिए सभी बच्चों को गंगानगर लाने का निर्णय लिया और वे आज इन्हें लेकर भी आईं। यहां भी टीम ने बच्चों के रजिस्ट्रेशन से लेकर उनकी जांच आदि करवाने में अहम भूमिका अदा की। वहीं शिविर में नोडल प्रभारी डॉक्टर भारत भूषण सहित डॉ. सोनल कथूरिया, डॉ. शैलेंद्र नेहरा व डॉ. एकता शर्मा का सराहनीय योगदान रहा। आरसीएचओ डॉक्टर वीपी असीजा व सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने यहां पहुंचकर व्यवस्थाएं देखीं। वहीं कार्यालय के हेमंत कुमार, पंकज वर्मा व राकेश सचेदवा का भी खास सहयोग रहा।



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