बुधवार, 24 मई 2017

अब घर बैठे लें आयुष चिकित्सकों से सलाह
-स्वास्थ्य विभाग का नवाचार, 104 या 108 करें डायल, नि:शुल्क सेवा एक जून से
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राज्य में आयुष पद्धति को लेकर पहली बार वृहï्द स्तर पर नवाचार करने जा रहा है। इसके तहत अब कोई भी, कहीं से भी एक डायल के जरिए आयुष पद्धति से संबंधित सलाक नि:शुल्क प्राप्त कर सकेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से मिशन निदेशक नवीन जैन के निर्देशन में यह सेवाएं एक जून से प्रारंभ हो रही है। इसके बाद विभाग के टोल फ्री नंबर 104 व 108 पर फोन कर सेवाएं ली जा सकेंगी। विभाग ने इसे लेकर प्रारंभिक तैयारियां पूर्ण कर ली हैं और सेवाएं देने वाले चिकित्सकों व अन्य स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है। 
एमडी नवीन जैन ने बताया कि एक जून से राज्य के वाशिंदे होम्योपैथी, यूनानी व आयुर्वेदिक चिकित्सा सलाह घर बैठे ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि यूनानी चिकित्सका की सलाह सुबह आठ से 11 बजे, होम्योपैथिक की चिकित्सक सलाह सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे और आयुर्वेदिक चिकित्सा सलाह दोपहर दो बजे से सांय छह बजे तक ली जा सकेगी। इस दौरान प्रशिक्षित चिकित्सक आमजन को विभिन्न बीमारियों से संबंंधित चिकित्सक सलाह देंगे। यही नहीं उन्हें जरूरत पडऩे पर नजदीकी चिकित्सालय में जाने के लिए आवश्यकता पर चिकित्सालय के बारे में भी बताएंगे। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि जिले की आदर्श पीएचसी पर भी इन पद्धतियों के तहत आयुष चिकित्सा आमजन के लिए सुलभ करवाई गई है, जहां आमजन बेहतर सेवाएं ले रहे हैं। 
होम्योपैथी - 
होम्योपैथी, एक चिकित्सा पद्धति है। यह चिकित्सा के समरूपता के सिंद्धात पर आधारित है जिसके अनुसार औषधियाँ उन रोगों से मिलते जुलते रोग दूर कर सकती हैं, जिन्हें वे उत्पन्न कर सकती हैं। औषधि की रोगहर शक्ति जिससे उत्पन्न हो सकने वाले लक्षणों पर निर्भर है। जिन्हें रोग के लक्षणों के समान किंतु उनसे प्रबल होना चाहिए। अत: रोग अत्यंत निश्चयपूर्वक, जड़ से, अविलंब और सदा के लिए नष्ट और समाप्त उसी औषधि से हो सकता है जो मानव शरीर में, रोग के लक्षणों से प्रबल और लक्षणों से अत्यंत मिलते जुलते सभी लक्षण उत्पन्न कर सके। 
यूनानी - 
यूनानी चिकित्सा पद्धति को केवल यूनानी या हिकमत के नाम से भी पुकारा जाता है। इसे भारत में वैकल्पिक चिकित्सा माना गया है। कफ़, बलगम, पीला पित्त और काला पित्त प्रधानता के आधार पर रोग के लक्षणों का पता किया जाता है। मानव शरीर में आग, जल, पृथ्वी और वायु प्रधानता का मानव शरीर पर प्रभाव ही मूल रोग लक्षण और निदान देखा गया है। यूनानी चिकित्सा के अनुयायियों के अनुसार इन तत्वों के विभिन्न तरल पदार्थ में और उनके शेष राशि की उपस्थिति से स्वास्थ्य के असंतुलन का सुराग लगता है। इन पदार्थों का प्रत्येक आदमी में अनूठा मिश्रण उसके स्वभाव और रक्त की विशेषता तय करता है। 
आयुर्वेद - 
आयुर्वेदिक एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। यह पद्धति अपने आपको केवल मानवीय शरीर के उपचार तक ही सीमित रखने की बजाय, शरीर मन, आत्मा व मनुष्य के परिवेश पर भी निगाह रखती है।इस पद्धति की एक और उल्लेखनीय विशिष्टिता है कि यह औषधीय गुण रखने वाली वनस्पतियों व जड़ी-बूटियों के जरिए बीमारियों का इलाज करती है। आयुर्वेद में, निदान व उपचार से पहले मनुष्य के व्यक्तित्व की श्रेणी पर ध्यान दिया जाता है। आयुर्वेद पद्धति जिले के आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सहज उपलब्ध है। इसके साथ ही टोल फ्री नंबर के जरिए इन पद्धतियों की सलाह सेवाएं अब एक जून से उपलब्ध होगी। 

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