गुरुवार, 8 जून 2017

पीपीआईयूसीडी लगवाओ, 300 रुपए भी पाओ
परिवार कल्याण का सबसे बेहतर माध्यम साबित, दो साल में जिले की 13 हजार महिलाओं ने ली सेवा 
श्रीगंगानगर। सरकार ने बच्चों में अंतराल के प्रचलित साधन आईयूसीडी (कॉपर टी) के लिए प्रोत्साहन स्वरुप देय राशि का दायरा बढ़ाया है। प्रसव पश्चात 48 घंटे में इंट्रा यूटेराइन कॉण्ट्रासेप्टिव डिवाइस (पीपीआईयूसीडी) लगवाने पर जहां पहले केवल प्रेरित करने वाली आशा व सेवा प्रदाता एएनएम या चिकित्सक को 150-150 रूपए प्रोत्साहन राशि दी जा रही थी, वहीं अब लाभार्थी महिला को भी प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है। यह राशि विभागीय कार्मिकों से दोगुनी यानि 300 रूपए सरकार की ओर से अब लाभार्थी को दिए जाएंगे। इसके साथ ही योजना को और विस्तार देते हुए सरकार ने यही लाभ गर्भसमापन पश्चात् कॉपर टी (पीएआईयूसीडी) लगवाने पर भी लागू कर दिया है। यही वजह है कि हमारे जिले में भी पीपीआईयूसीडी लगवाने वाली महिलाओं का आंकड़ा बढ़ता दिख रहा है।
प्रदेश में एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन के निर्देशन में चल रहे इस कार्यक्रम को लेकर विगत दिनों आई केंद्रीय टीम भी सराहना कर चुकी है। दल ने चिकित्सा केन्द्रों पर परिवार नियोजन साधनों के स्टॉक प्रबंधन व मॉनीटरिंग के ऑनलाइन ई-साधन सिस्टम के नवाचार को भी सराहा। एमडी नवीन जैन ने बताया कि चिकित्सकों द्वारा प्रसुताओं एवं उनके परिजनों को पीपीआईयूसीडी के प्रति परामर्श बढ़ाने से इसके लाभार्थियों की संख्या में निरन्तर वृद्धि हो रही है। गत वर्ष 2016-17 में राज्य में दो लाख दस हजार पीपीआईयूसीडी लगाई गई। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि श्रीगंगानगर जिले में वर्ष 2015-16 में छह हजार 161 और वर्ष 2016-17 आठ हजार छह सौ दो पीपीआईयूसीडी लगाई गई। नए वित्तीय वर्ष के दो माह में ही अब तक एक हजार 22 महिलाओं ने इस सेवा का लाभ लिया। 
क्या है पीपीआईयूसीडी
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि पीपीआईयूसीडी बच्चों में अंतर रखने की एक विधि है जिसमें महिला के प्रसव के तुरंत बाद गर्भाशय में यह डिवाइस लगाई जाती है। बच्चों में तीन या तीन वर्ष से अधिक समय का अंतर रखने के लिए इस विधि का उपयोग किया जाता है। इससे मां और बच्चे दोनों के स्वास्थ्य पर कोई असर नहीं पड़ता। जब दंपत्ति को अगले बच्चे की इच्छा हो, तो वह यह डिवाइस गर्भाशय से निकलवा सकते हैं। पीपीआईयूसीडी समय से पहले गर्भवती होने से बचाती है जिससे शिशु जन्म दर के साथ-साथ मातृ मृत्यु दर में भी कमी आती है। इसके अतिरिक्त जल्दी गर्भवती होने के कारण अन्य परेशानियों से भी मुक्ति पाई जा सकती है। 
प्रोत्साहन से मिलेगा बढ़ावा 
परिवार कल्याण के अस्थाई साधनों में कंडोम, गर्भ निरोधक गोलियां, पीपीआईयूसीडी अन्य शामिल हैं। इसकी शुरुआत जनवरी 2012-13 में हुई। स्वास्थ्य विभाग द्वारा महिलाओं को पीपीआइयूसीडी लगाने वाली आशा वर्कर और स्टाफ नर्स को 150-150 रुपए प्रोत्साहन राशि के तौर पर दिए जाते हैं। प्रोत्साहन राशि मिलने के बाद आशा वर्कर और नर्सों ने उत्साह के साथ काम करना शुरू किया जिससे अच्छे परिणाम सामने आने लगे। यही वजह है कि अब लाभार्थी को भी प्रोत्साहन राशि देने का निर्णय लिया गया है। लाभार्थी को पीपीआईयूसीडी लगवाते ही 150 रुपए का भुगतान किया जाएगा और इसके बाद नियमित दो जांच करवाने के बाद 150 रुपए का भुगतान यानी कुल 300 रुपए का भुगतान किया जाएगा। 

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