रविवार, 2 जुलाई 2017

कभी लगते थे दो माह, अब आधे घण्टे में आ रही टीबी रिपोर्ट
-सीबी नॉट मशीन से 500 मरीजों की हुई जांच, दवा कितनी असरकारक इसकी भी रिपोर्ट मिल रही
श्रीगंगानगर। टीबी मरीजों के लिए सीबी नॉट मशीन मुफीद साबित हो रही है। खासकर, जिन्हें टीबी रोग की आशंका होती है उनके लिए यह मशीन फायदेमंद रही है, क्योंकि अब उन्हें दो माह तक जांच रिपोर्ट का इंतजार नहीं करना पड़ता बल्कि आधे घण्टे में ही रिपोर्ट मिल जाती है। वहीं मरीज के दो से अढ़ाई हजार रुपए भी बच रहे हैं, क्योंकि स्वास्थ्य विभाग नि:शुल्क जांच कर रहा है। विभाग को सैंपल पहले जोधपुर भेजने पड़ते थे, लेकिन अब जिला मुख्यालय पर ही जांच हो रही है।  
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि सीबी नॉट मशीन स्वास्थ्य क्षेत्र में वरदान साबित हुई है। मशीन के जरिए टीबी है या नहीं इसका तो पता चलता ही है साथ ही यह भी पता लगाया जा सकता है कि मरीज को दी जाने वाली दवा कितनी असर कर रही है। पहले सैंपल जोधपुर लैब में भेजा जाता था जिसकी रिपोर्ट आने में ही दो से तीन माह लग जाते लेकिन अब इस मशीन से आधे घण्टे में रिपोर्ट दी जा रही है। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. गुंजन खुंगर के मुताबिक मशीन से एक साथ चार मरीजों के सैंपल जांच कर सकत हैं और एक दिन में 15 सैंपल जांचे जा सकते हैं। निजी लैब में यह जांच करवाने पर मरीज को दो से अढ़ाई रुपए खर्च करने पड़ते हैं, जबकि स्वास्थ्य विभाग की ओर से टीबी क्लीनिक में जांच नि:शुल्क की जा रही है। इस मशीन से गंभीर प्रकार की टीबी, एमडीआर, संभावित क्षय रोगियों की जांच की जा रही है, जिसमें स्पुटम नेगेटिव, एचआईवी के मरीज व चाइल्ड केस आदि सभी तरह के संभावित टीबी मरीजों की जांच शामिल है। पीपीएम समन्वयक गरिमा परिहार के अनुसार सभी बीसीएमओ को पाबंद किया गया है कि वे संभावित टीबी मरीज की जांच जिला टीबी क्लीनिक से करवाएं ताकि सही व समय पर जांच रिपोर्ट दी जा सके। वहीं निजी चिकित्सालयों व लैब संचालकों से अपील की गई है कि वे संभावित टीबी मरीजों की जांच टीबी क्लीनिक से करवाएं। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि मशीन वर्ष 2016 में स्थापित की गई और इसके बाद से यह लाभ आमजन को मिलने लगा। अब तक सीबीनॉट के जरिए 485 लोगों की जांच की जा चुकी है, जिनमें 96 टीबी मरीज मिले। 

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