स्टूडेंट्स के लिए सौगात बना आरबीएसके
-राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का एक वर्ष, पौने दो लाख से अधिक की जांच
श्रीगंगानगर। स्टूडेंट्स के बेहतर सेहत के लिए शुरू किया गया राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) उनके लिए सौगात साबित हुआ है। बीते एक वर्ष में आरबीएसके के तहत एक लाख 81 हजार तीन सौ 92 बच्चों का स्वास्थ्य जांचा गया, जिनमें करीब पौने नौ फीसदी बच्चों में विभिन्न सामान्य व गंभीर बीमारियां पाई गईं। विभाग ने इन्हें न केवल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्रों पर रैफर कर इलाज करवाया बल्कि राज्यस्तरीय उच्च चिकित्सा संस्थानों में बीमार बच्चों को बेहतर उपचार करवाया। यही नहीं आरबीएसके टीमें लगातार फॉलोअप कर स्टूडेंटï्स की सेहत की खैर-खबर ले रही हैं और उन्हें बेहतर स्वास्थ्य के लिए जागरूक भी कर रही हैं।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जिले में जुलाई 2016 से प्रारंभ हुआ और इस माह एक वर्ष पूरा हुआ है। जिले के आठ ब्लॉकों में 16 टीमें कार्य कर रही हैं, जिनमें चिकित्सक, फार्मासिस्ट व अन्य स्टाफ शामिल हैं। टीमें आंनगबाड़ी केंद्रों व स्कूलों में जाकर 18 वर्ष आयु तक के बच्चों की सेहत जांच रही है, किसी तरह की बीमारी मिलने पर बच्चों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, जिला अस्पताल, बीकानेर पीबीएम या जयपुर के नारायणा हृदï्यालय व फोर्टिस जैसे उच्च चिकित्सा संस्थानों में रैफर किया जाता है ताकि उनका नि:शुल्क उपचार हो सके। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि टीमों ने 2905 आंनगबाड़ी केंद्रों पर 44 हजार 318 बच्चों को जांच 2796 बच्चों को उपचार के लिए रैफर किया। इसी तरह 1835 स्कूलों में एक लाख 37 हजार 30 बच्चों को जांच 13 हजार 123 बच्चों को रैफर किया गया, जबकि दो मदरसों के 44 बच्चों को जांच एक बच्चे को रैफर किया गया। यानी कुल चार हजार सात सौ 42 संस्थानों में टीमें पहुंची, जहां एक लाख 81 हजार 392 बच्चों की सेहत देख उनमें से विभिन्न खामियां-बीमारियों से पीडि़त 15920 बच्चों को उपचार के लिए रैफर किया।
ये बीमारियां शामिल हैं आरबीएसके में
आरबीएसके के जिला नोडल अधिकारी डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि जन्मजात कटे होंठ व तालू, जन्मजात मुड़े हुए पैर, हडिï्डयों की विकृति, मोतियाबिंद, बहरापन, हृदï्य रोग, आंखों संबंधी बीमारियां, एनीमिया, विटामिन ए व डी संबंधी बीमारी, कुपोषण, गले में होने वाली गांठ, चमड़ी के विभिन्न रोग, कान बहना, फेफड़ों संबंधी बीमारी, दांतों में होने वाले रोग, दौरे आना, सुनने में आ रही बाधा संबंधी रोग, तंत्रिकातंत्र संबंधी बीमारी, बच्चों का विकास अवरोध, देर से बोलना, तुतलाना, देर से समझने की समस्या, व्यवहार संबंधी रोग, देर से सीखना व मानसिक रोग आदि बीमारियों का आरबीएसके के तहत उपचार किया जा रहा है।
इन संस्थाओं का भी रहा सहयोग
आरबीएसके के सह जिला नोडल अधिकारी डॉ. पवन शर्मा के मुताबिक कटे-होंठ व तालू वाले बच्चों के उपचार में स्माइल ट्रेन संस्था व बहल हॉस्पीटल, सेरेबल पाल्सी (अल्प मानसिक विकास) में जुबिन नर्सिंग होम, हृदï्य रोग में आस्था हॉस्पीटल, ईएनटी जांच व उपचार में अर्पण हॉस्पीटल, आंखों के शिविरों में बहल हॉस्पीटल व लक्ष्मीनारायण चेरीटेबल हॉस्पीटल श्रीकरणपुर और दांतों से संबंधित जांच व उपचार में सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज का सहयोग रहा।

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