रविवार, 29 अक्टूबर 2017

‘सफाई’ करने वालों की करेंगे ‘सफाई’ - नवीन जैन
-कोख में बेटियों की हत्या रूकेगी, बेशक आमजन निभाए अपनी जिम्मेदारी
-एमडी नवीन जैन ने ‘अनमोल हैं बेटियां’ कार्यक्रम के तहत श्रीगंगानगरवासियों से किया सीधा संवाद 
श्रीगंगानगर। बेटों की चाहत में कुछ लोग कोख में बेटियों की हत्या करवाने को बड़ी ही बेशर्मी से ‘सफाई’ नाम देते हैं और कुछ चिकित्सकीय पेशे से जुड़े लोग इस ‘सफाई’ को अंजाम दे रहे हैं लेकिन हमने भी प्रण लिया है कि इन ‘सफाई’ करने वालों की ‘सफाई’ करके ही दम लेंगे। लेकिन इसमें आमजन की भागीदारी व जिम्मेदारी भी बेहद जरूरी है, क्योंकि आमजन जागरूक होगा तभी बेटियां बचेंगी और ऐसे घिनौने लोग सलाखों के पीछे होंगे। यही नहीं हमें सोच बदलते हुए न केवल बेटा-बेटी का भेद मिटाना होगा, बल्कि जन्म के बाद किया जाने वाला भेद ही खत्म करना होगा। ये विचार रविवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एमडी नवीन जैन ने शहरवासियों से सीधा संवाद करते हुए व्यक्त किए। वे यहां आईईसी व पीसीपीएनडीटी अनुभाग की ओर से नोजगे स्कूल के ऑडिटोरियम में आयोजित कार्यक्रम ‘बेटियां अनमोल हैं’ में बोल रहे थे। इस मौके पर नोजगे स्कूल के चैयरमेन डॉ. पीएस सूदन, सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई, पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीप सिंह, डीएएम सतीश गुप्ता, डायरेक्टर रचना भटनागर व जीएम कमल सूदन आदि मौजूद थे।  
श्री जैन ने कहा कि यह गलत धारणा है कि गर्भ में बेटियों का कत्ल करने वाले गरीब या अनपढ़ लोग होते हैं लेकिन असल में हम जैसे पढ़े-लिखे और ऊंची सोसायटी के लोग भी बदस्तूर बेटियों का कत्ल करवा रहे हैं। उन्होंने कहा कि हम भले ही शिक्षित व ऊंची सोसायटी में खुद का रसूख बरकरार रखने के लिए झूठ बोलते हैं कि हम बेटा-बेटी में फर्क नहीं करते, लेकिन सच्चाई यह है कि हम आज भी बेटा और बेटी में फर्क समझते हैं। कई उदाहरण के साथ उन्होंने शिक्षित समाज में बेटा-बेटी में किए जा रहे फर्क की सोच को उजागर किया। उन्होंने कहा कि इसी सोच के कारण लिंगानुपात में गिरावट आई। बेटियों की सुरक्षा को लेकर अगर हम चिन्तित हैं, तो इस बीमारी की जड़ समाज के हमीं लोग हैं। पहले गर्भ में लिंग जांच और फिर कोख में बेटी का कत्ल करने की परम्परा महानगरों व शिक्षित लोगों से शुरू हुई, जो अब छोटे कस्बों और गांव तक पहुंच चुकी है। गर्भ में भ्रूण की जांच और गर्भपात का सिलसिला नहीं रोका गया, तो आंकड़े और भी चौंकान्ने व परेशान करने वाले होंगे। उन्होंने कहा कि हर परिवार दुर्गाष्टमी पर भले ही कंजक पूजन करते हों, लेकिन गर्भवती महिलाओं व उनके परिजनों को संतान के रूप में बेटा ही चाहिए, यही सोच घातक है। ऑडिटोरियम में स्कूली छात्राओं, नर्सिंग छात्राओं व शहर के नागरिकों को सम्बोधित करते है हुए श्री जैन ने कहा कि बेटों की चाहत में हम बेटियों का कोख में कत्ल करवा रहे हैं, जबकि बहुत से परिवार ऐसे हैं जिनके बेटों से उनकी कई महीनों तक बात तक नहीं होती। ऐसे भी बेटे हैं, जिन्होंने मां-बाप को बेघर कर दिया। वंशवाद के नाम पर बेटों की चाहत रखते हैं, जबकि दो से तीसरी पीढ़ी की वंशावली हमें नहीं मालूम। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के मुखिया नवीन जैन ने जागरूकता कार्यक्रम के दौरान अपने बेटियों को कोख में मारने वाले नर्सिंग पेशे व चिकित्सकीय पेश से जुड़े लोगों को आड़े हाथों लिया। उन्होंने कहा कि गर्भ में भू्रण की जांच करवाने वाले गिरोह में सबसे ज्यादा ऐसी ही महिलाएं शामिल हैं, जो चिकित्सीय पेश से जुड़ी हैं। पीसीपीएनडीटी टीम ने डिकॉय की अनेक कार्रवाई मेंं डॉक्टरों सहित नर्सिंग स्टाफ व आशाओं तक को पकड़ा है। उन्होंने श्रीगंगानगर पीसीपीएनडीटी टीम के रणदीप सिंह व सीओआईईसी विनोद विश्रोई प्रशंसा करते हुए कहा कि इसी टीम ने जिले के अलावा दूसरे राज्यों में जाकर दस डिकॉय किए। टीम के कार्य से दूसरे जिलों की टीम भी प्रेरणा ले रही है। उन्होंने कहा कि राजस्थान में प्रत्येक वर्ष 17 लाख बच्चे पैदा होते हैं। इसमें छह लाख महिलाएं पहली बार मां बनती हैं। दूसरी बार मां बनने पर महज एक लाख 65 हजार महिलाएं रिस्क पर रहती हैं। इनमें भी हम एक लाख 32 हजार गर्भवती महिलाओं को जागरूक करके कोख में बेटी का कत्ल होने से बचा सकते हैं। कार्यक्रम के दौरान एमडी जैन ने लाइव प्रश्रोत्तरी प्रतियोगिता की। उन्होंने सवाल कर विजेताओं को मौके पर ही पुरस्कृत किया। इस दौरान स्टूडेंट्स का उत्साह देखते ही बन रहा था। कार्यक्रम में नोजगे स्कूल के सीनियर स्टूडेंट्स, उनके परिजन, स्टाफ, जुबिन नर्सिंग कॉलेज, एसएन नर्सिंग कॉलेज, सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज व राजकीय नर्सिंग कॉलेज के छात्र-छात्राएं शामिल हुए। 
अब आ रहा सुधार, बदलेगी तस्वीर
पीसीपीएनडीटी एक्ट को प्रभावी से लागू करने पर अब गर्भ में भू्रण की जांच कुछ कम हुई है और लिंगानुपात में सुधार हुआ है। एक हजार लडक़ों पर प्रदेश में वर्ष 2014 में एक 971, वर्ष 2015 में 930, वर्ष 2016 में 939 और इस वर्ष में अक्टूबर तक लड़कियों की संख्या 942 है। हमारे लिए यह खुशी की बात है कि पिछले चार वर्षो से लगातार लडक़ों के मुकाबले लड़कियों की संख्या बढ़ रही है। प्रदेश की टीम अब तक 93 डिकॉय कार्रवाई कर भू्रण लिंग जांच करने वाले 223 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है, जिसमें 150 लोग राजस्थान के हैं, जबकि 73 लोग दूसरे राज्यों से हैं। इनमें 57 डॉक्टर शामिल हैं। 
आप भी बने भागीदार, निभाएं जिम्मेदारी
आमजन की भागीदारी के लिए जल्द ही राज्यस्तर पर बड़ा कार्यक्रम एमडी नवीन जैन के नेतृत्व में होने जा रहा है। जिसके तहत एक निर्धारित दिवस पर पूरे राज्य में एक साथ, एक समय पर बेटियां अनमोल है कार्यक्रम आयोजित होगा। कॉलेज स्तर पर होने वाले इस कार्यक्रम में जुडऩे के लिए विभाग के स्थानीय आईईसी या पीसीपीएनडीटी प्रभारी को अपने नाम दर्ज करवाए जा सकते हैं। इसके बाद सभी को जयपुर में प्रशिक्षित किया जाएगा। 

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