सोमवार, 13 नवंबर 2017

विटामिन-ए का 34वां चरण 15 नवम्बर से
-बच्चों को रतौंधी व अन्य रोगों से बचाने के लिए विटामिन-ए की खुराक अवश्य पिलाएं
श्रीगंगानगर। आंखों की बीमारियों मसलन रतौंधी व अंधता से बचाव के साथ ही बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि के लिए विटामिन-ए का 34वां चरण 15 नवम्बर से शुरु  किया जाएगा, जो 15 दिसम्बर 2017 तक चलेगा। कार्यक्रम के तहत नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को आंगनबाडी केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र, पीएचसी व सीएचसी सहित जिला अस्पताल पर विटामिन ए की खुराक पिलाई जाएगी। यह खुराक छह माह के अंतराल से पिलाई जाती है।
आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि विटामिन-ए आंखों की बीमारियों जैसे रतौंधी अंधता से बचाव के साथ-साथ बच्चों में शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि के लिए भी आवश्यक है। विटामिन-ए की खुराक देने से बच्चों में दस्त एवं निमोनिया आदि बीमारियों के घातक प्रभाव में कमी लाई जा सकती है। विटामिन-ए पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में कमी लाता है। कार्यक्रम के दौरान एक से पांच साल तक के बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों को विटामिन-ए की दो एमएल खुराक पिलाई जाती हैै एवं नौ माह के बच्चों को जिन्हें मिजल्स के साथ विटामिन-ए नहीं दी जाती है, उन्हें विटामिन ए की एक एमएल खुराक पिलाई जाती है। जिन स्थानों पर आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं है, वहां एएनएम के द्वारा यह खुराक दी जाती है।
विटामिन-ए के फायदे- 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि विटामिन-ए की खुराक नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को छह माह के अन्तराल पर वर्ष में दो बार  जरूर पिलाएं। इससे बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता में वृद्वि होती है। खसरा व डायरिया से होने वाली मृत्यु में कमी आती है। बच्चों की हड्डियों को मजबूती मिलती है। श्वसन संबंधी संक्रमण से बचाव होता है। आंख संबंधित रोग (रतौंधी) से बचाव होता है तथा 5 वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्यु दर में कमी होती है। इसलिए बच्चे के नौ माह पूरे होते ही उसे अपने नजदीकी आंगनबाडी केन्द्र या स्वास्थ्य केन्द्र पर ले जाकर विटामिन-ए की खुराक पिलाना न भूलें। 

कोई टिप्पणी नहीं:

एक टिप्पणी भेजें