शुरु हुआ टीबी तलाश अभियान
-घर-घर जाकर तलाश रहे टीबी मरीज, तत्काल उपचार भी मिलेगा
श्रीगंगानगर। टीबी रोग से देश को 2025 तक मुक्त करने का लक्ष्य भेदने की शुरुआत कर दी गई है। इस कड़ी मेें स्वास्थ्य विभाग ने जिले में ‘एक्टिव केस फाइंडिंग’ अभियान चलाया है, जिसके तहत 18 दिसंबर तक घर-घर जाकर टीबी रोगियों की तलाश की जाएगी और उनका तत्काल उपचार प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए बकायदा सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल जिलास्तर से मोनिटरिंग कर रहे हैं, जबकि जिला टीबी अधिकारी डॉ. गुंजन खुंगर फील्ड में जाकर निरीक्षण कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के श्रीगंगानगर जिले सहित बांसवाड़ा, कोटा, जयपुर शहर, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर व झुंझुनूं जिले को इस अभियान के तहत चिन्हित किया गया है। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि अभियान की मोनिटरिंग करने के लिए शुक्रवार को जयपुर निदेशालय व अजमेर से भी टीम आएंगी। वहीं जिले के विभिन्न खण्डों में डीपीएस सुरेंद्र बुडाणिया, एसटीएस सुरेंद्र, राहुल व महेंद्र सहारण ने सर्वे की मोनिटरिंग कर रहे हैं, जबकि जगदीश इंदलिया व नरेश भदोरिया जिलास्तर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। एएनएम व आशाएं इस अभियान में जुटी हुई हैं, वहीं विभाग की ओर से रोगी खोजने वाली टीम को प्रोत्साहन राशि के रूप में 500 रुपए प्रति केस देने का प्रावधान रखा है। इसका मुख्य फायदा सब सेंटर स्तर पर गठित टीम सदस्य एएनएम, आशा, वॉलंटियर, एनजीओ, निजी चिकित्सक को मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उदï्देश्य ऐसे संभावित टीबी रोगियों को उपचार के दायरे में लाना है, जिन्हें खुद को टीबी से ग्रसित होने की जानकारी नहीं है। सेंट्रल टीबी डिवीजन ने इन जिलों में विशेष गाइड लाइन तैयार की है। इसी के मुताबिक जिले में चार से 18 दिसंबर तक अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले की कुल आबादी के 11 प्रतिशत लोगों की स्क्रीनिंग कर जांच की जाएगी। टीबी के लक्षण वाले व्यक्तियों के घर से बलगम के सैंपल लेकर टीम उसी दिन नजदीकी माइक्रोस्कोपी सेंटर पर जांच करवा रही है। जांच में टीबी पाए जाने की स्थिति में मरीज का दो दिन के भीतर इलाज प्रारंभ किया जा रहा है। विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे राष्ट्रीय अभियान में सहयोग देते हुए कार्मिकों से समन्वय बनाएं।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें