गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

जीवन के साथ ही नासाज ‘दिल’ लेकर पैदा हो रहे मासूम
आरबीएसके टीम निभा रही दिल का रिश्ता, दूरवर्ती क्षेत्र में दिल की बीमारी से जूझ रहे थे मासूम, आरबीएसके ने लौटाई जिंदगी
-स्वास्थ्य विभाग ने 10 बच्चों का करवाया सफल नि:शुल्क ऑपरेशन, सात का जल्द होगा ऑपरेशन

श्रीगंगानगर। जिले के आखिरी क्षोर पर बसे घड़साना खण्ड के अनेक मासूम जन्मजात हृद्य रोग से जूझ रहे हैं, यानि वे जीवन के साथ ही दिल की बीमारी लेकर पैदा हुए। हालांकि अब राहत की बात ये है कि इनके के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम वरदान साबित हुआ है। आरबीएसके टीम यहां हर दिन गांव-गांव जाकर आंनगबाड़ी व स्कूलों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है। टीम ने न केवल ऐसे बच्चों को तलाश किया बल्कि उनका उच्च चिकित्सा संस्थानों में पूर्णत: नि:शुल्क उपचार भी करवाया। बहरहाल, यहां चिन्हित 46 बच्चों में से 10 बच्चों का सफल ऑपरेशन करवाया गया है और चार को दवाओं के जरिए राहत दिलाई गई है। जल्द ही सात बच्चों का जयपुर में ऑपरेशन करवाया जाएगा, वहीं गुरुवार को रोजड़ी निवासी 14 वर्षीय मनफूल पुत्र लालूराम की फाइल तैयार कर जयपुर भेजी गई है, जिसका शुक्र-शनिवार को ऑपरेशन करवाया जाएगा। 
सभी बच्चों की दास्तां भी बेहद गंभीर है। नन्हीं नेहा के पिता मुकेश ने कभी सोचा भी न था कि इतनी छोटी सी बच्ची को भी दिल की गंभीर बीमारी हो सकती है। एक एनएसएम आंगनबाड़ी केंद्र पर चिन्हित हुई नेहा के दिल में छेद था। सांस लेने से शुरु हुई दिक्कत दिल की गंभीर बीमारी तक पहुंची तो उपचार मुश्किल लग रहा था,  क्योंकि इस पर करीब चार लाख रुपए तक का खर्च आता, जो इस परिवार के लिए संभव न था। इस बीच आरबीएसके टीम के डॉ. कमल व डॉ. ममता ने बच्ची को चिन्हित किया और उसका जयपुर के प्रतिष्ठित हॉस्पीटल में नि:शुल्क उपचार करवाया। इसी तरह नाहरांवाली के राजकीय विद्यालय में पढऩे वाले पंकज पुत्र श्रवण कुमार को दिल की बीमारी थी, जिस पर लाखों का खर्च आना तय था। लेकिन आरबीएसके पंकज व उसके परिजनों के लिए वरदान साबित हुई और जयपुर के नारायणा जैसे उच्च संस्थान में नि:शुल्क व सफल ऑपरेशन हुआ। पतरोड़ा निवासी कमलादेवी व उसके पति रामस्वरूप ने कभी सोचा भी न था कि उनका 13 वर्षीय बेटा केवल कुमार दिल की बीमारी से पीडि़त हो सकता है। लेकिन जब उन्हें मालूम हुआ कि केवल के दिल में छेद है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मजदूरी करने वाला यह परिवार कहां से लाखों रुपए लाता। केवल का जयपुर के ही नारायणा हॉस्पीटल में नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार करवाया गया। गांव चार पीएसडी के आशिक अली की बेटी रंजना व उसके परिजनों को भी तब झटका लगा जब उन्हें मालूम हुआ कि उसे दिल की बीमारी है और लाखों रुपए खर्च होंगे। पहले से ही अभावों में जी रहे इस परिवार के लिए यह किसी आपदा से कम न था लेकिन आरबीएसके के जरिए न केवल नि:शुल्क व सफल ऑपरेशन हुआ बल्कि टीम ने नियमित फॉलोअप कर रंजना व उसके परिजनों का हौसला भी बढ़ाया। कमोबेश ऐसे ही हालात 13 वर्षीय ज्ञानचंद के थे। गांव छह जेडडब्ल्यूएम निवासी करणपाल का बेटा ज्ञानचंद राजकीय स्कूल में पढ़ता है और पिता मजदूरी करते हैं। ऐसे में दिल की बीमारी और उसका इलाज करवाना इस परिवार के लिए बड़ी मुसीबत थी। यहां भी आरबीएसके ने मासूम को राहत दिलाई। तीन एमएलडी के राजकीय स्कूल में पढऩे वाले विशाल पुत्र सुभाष को भी टीम ने चिन्हित किया। जांच में पता चला कि विशाल के दिल में छेद है, ऐसे में जयपुर के नारायाणा हॉस्पीटल में भेज नि:शुल्क व सफल ऑपरेशन करवाया गया। गांव दो एमएलडी निवासी सुखराम की 15 वर्षीय बेटी माया गांव के ही राजकीय बालिका विद्यालय में पढ़ती है।
यहां टीम पहुंची तो माया चिन्हित हुई और पता चला कि माया को दिल की गंभीर बीमारी है। टीम ने जिला मुख्यालय पर भेज जांच करवाई तो बीमारी की पुष्टि हुई। इसके बाद जयपुर में नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार करवाया, जिसके बाद माया को नई जिंदगी मिली। चार बेटियां होने के बावजूद सुखराम ने अपनी बेटी माया के लिए हर संभव प्रयास किया, जो काबिलेतारीफ है। माया की बीमारी भी बेहद घातक थी, जिस पर करीब पांच लाख रुपए तक खर्च आना संभावित था। गांव तीन केडी निवासी 13 वर्षीय चंद्रकांता पुत्री बीरबल राम नायक यहां के राजकीय स्कूूल में पढ़ती है। बीरबल राम ने बहुत नाजों से चंद्रकांता को पाला लेकिन जब उन्हें पता चला कि चंद्र के दिल में छेद है तो परिवार सदमें में आ गया। गांव पांच एलएम निवासी अजय पुत्र दलीप की बीमारी भी बेहद गंभीर थी और अभावों के चलते इलाज मुश्किल लग रहा था। सरकारी स्कूल में चिन्हिकरण के दौरान आरबीएसके टीम ने दलीप की बीमारी का पता लगाया और उसका जयपुर के प्रतिष्ठित संस्थान में ऑपरेशन व उपचार करवा राहत दिलाई। इसी तरह रावला निवासी 15 वर्षीय भगवती पुत्री रामप्रताप के दिल में छेद था। रामप्रताप मजदूरी करते हैं, ऐसे में वे इस बीमारी का इलाज करवाने में अक्षम थे। कमोबेश ऐसी ही बीमारी गांव छह डब्ल्यूएसएम निवासी 11 वर्षीय ज्ञानचंद पुत्र कर्मपाल के थी, जो नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार के बाद अब ठीक है। इस टीम में डॉ. कमल किशोर, डॉ. ममता पारीक, डॉ. रामस्वरूप चौहान व डॉ. नम्रता सिंह सहित फार्मासिस्ट विनोद खोड़, पिंकी शर्मा, एएनएम बसकरणी व शर्मिला शामिल हैं। 
पता ही नहीं था इतनी गंभीर बीमारी पल रही है
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि आरबीएसके टीम द्वारा चिन्हित किए गए अधिकांश बच्चों में एक सामान्य स्थिति यह सामने आई कि ज्यादातर परिजनों को मालूम ही नहीं था कि उनका बच्चा बीमार है, जबकि बच्चा जन्म के साथ ही दिल की बीमारी लेकर पैदा हुआ। सामान्यत: नमूनिया, सांस फूलने, सांस लेने या कमजोरी आदि की समस्या महसूस करते। लेकिन आरबीएसके टीम ने इन्हें गंभीरता से जांचते हुए जिला मुख्यालय से नि:शुल्क इको करवाई तो मालूम हुआ कि बच्चा दिल की बीमारी से पीडि़त है। विभाग की ओर से ऐसे बच्चों की हर माह 28 तारीख को जांच करवाई जाती है। घड़साना टीम की ओर से अब तक 46 बच्चों की इकोकार्डियो करवाई गई, जिससे पुष्टि हुई कि इन्हें दिल की बीमारी है। 
53 संभावित, 46 में दिल की बीमारी की पुष्टि
आरबीएसके टीम के डॉॅ. कमल ने बताया कि दोनों टीमों ने 54 बच्चे चिन्हित किए हैं, जिन्हें दिल की बीमारी की संभावना है। हालांकि इनमें से 46 की इको के जरिए पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 10 का ऑपरेशन हो चुका है और चार का उपचार। वहीं अब गांव 12 एनडी निवासी साढ़े तीन वर्षीय प्रियांशु पुत्र विनोद, चार केपीडी निवासी चार वर्षीय जिया पुत्री राकेश बिश्रोई, 12 एनडी बी निवासी 11 वर्षीय लोकेश पुत्र राजेंद्र, गांव 13 केडी निवासी 12 वर्षीय ज्योति पुत्री पृथ्वीराज, चार केएलएम निवासी डेढ वर्षीय गुरविंद्र पुत्री संदीप, सात केएनडी निवासी डेढ़ वर्षीय खुशबू पुत्री सतपाल का जल्द ही ऑपरेशन करवाया जाएगा।

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