मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

घर गिरवी रखना पड़ता, कर्जा लेना पड़ता ... बचा लिया बीएसबीवाई ने
-भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के जरिए निजी व सरकारी अस्पतालों में लाभान्वित हो रहे मरीज
श्रीगंगानगर। घर के बाहर धूप सेक रहे कालासिंह निश्चिंता की मुस्कान लिए अपने पोते के साथ मस्ती कर रहे हैं। हार्ट की बीमारी की चपेट में आए तीन ई छोटी निवासी कालासिंह कई दिन शहर के प्रतिष्ठित हॉस्पीटल में ऑपरेशन व सफल उपचार करवाने के बाद घर लौटे हैं। बेशक, वे आज बेहद खुश नजर आ रहे हैं, लेकिन विगत दिनों उन पर बीमारी के साथ ही परेशानियों का बोझ आ पड़ा था, क्योंकि इलाज पर करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च आने की जानकारी उन्हें डॉक्टर के जरिए मिली। हालांकि ऐन मौके पर उन्हें राज्य सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना ने न केवल जिंदगी लौटाई बल्कि उन्हें कर्ज लेने से भी बचा लिया। योजना के जरिए उनका नि:शुल्क उपचार हुआ और वे आज पूर्णत: स्वस्थ हैं। वे कहते नहीं थकते कि सरकार ने यह योजना शुरु न की होती तो आज कर्ज तले दबे होते या इलाज मयस्सर न हो पाता। ऐसी ही अनेक दास्तां उन परिवारों की हैं, जो भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाभान्वित हो रहे हैं। निश्चित ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के जरिए लाभार्थी परिवार नि:शुल्क इलाज भी ले पा रहे हैं, वहीं बीमारी के कारण होने वाला खर्च भी बच रहा है, जिसके चलते उन्हें कर्ज से मुक्ति मिली है। 
   
कालासिंह की तरह चेक केरा निवासी दुलीचंद की दास्तां भी बेहद मार्मिक है। एक दुर्घटना में पैर की चोट के बाद हुए प्लास्टर से उनके पैर में गलन हो गई। पैर पूरी तरह गलने लगा और बेहद खराब स्थिति में आ गया। मिस्त्री का काम करने वाले दुलीचंद के पास इतना पैसा न था कि वे किसी बड़े हॉस्पीटल में इलाज करवा पाते। घर में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों की जिम्मेदारी भी उन पर थी। ऐसे में उन्हें भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना ने राहत दिलाई। उनका न केवल नि:शुल्क ऑपरेशन हुआ बल्कि उनकी बीमारी पर किसी तरह का कोई खर्च नहीं आया। मुस्कुराते हुए वे बताते हैं कि मेरे लिए यह सहायता बहुत बड़ी है, अन्यथा घर चलाने के साथ ही बीमारी के लिए बड़ा कर्जा लेना पड़ता। कमोबेश, ऐसी ही कहानी मणकिसर निवासी बनवारीगर पुत्र भगवानगर की है। 50 वर्षीय बनवारीगर की एक दुर्घटना में पैर की हड्डी टूट गई थी और लंबे समय से सही इलाज नहीं हो पा रहा था। उन्हें किसी ने जानकारी दी कि श्रीगंगानगर के एक प्रतिष्ठित निजी हॉस्पीटल में हड्डी जोड़ का बेहतरीन इलाज होता है। लेकिन ज्यादा खर्च और कर्जे का डर उनके लिए परेशानी लेकर आया। ऐसे में उन्होंने हॉस्पीटल से जानकारी ली तो पता चला कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के जरिए उनका नि:शुल्क उपचार हो सकता है। हॉस्पीटल में भर्ती होने के बाद पूर्णत: नि:शुल्क उपचार के बाद बनवारीगर अब ठीक हैं। उनके पुत्र पंकजगर कहते हैं कि योजना उनके लिए वरदान साबित हुई है अन्यथा उन्हें कर्जा लेना ही पड़ता। उम्रदराज मरीजों के लिए ही नहीं बल्कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना बच्चों के लिए मुफिद साबित हो रही है। इसी हॉस्पीटल में भर्ती नौ वर्षीय जपनीत सिंह के माँ परमजीत कौर बताती हैं कि जपनीत की एक दुर्घटना में पैर की हड्डी टूट गई थी और इलाज महंगा होना तय था। पिता मजदूरी करते हैं, ऐसे में निजी हॉस्पीटल का सोचते ही डर लगा लेकिन जब उन्हें पता चला कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत उनका नि:शुल्क इलाज हो जाएगा तो उन्हें बेहद राहत महसूस की। हॉस्पीटल में डरते-डरते भर्ती करवाया, लेकिन अब पता चला कि वाकई यहां किसी तरह का कोई खर्च नहीं है और ऑपरेशन, जांच व दवाएं सब कुछ योजना के तहत नि:शुल्क है। हम सरकार का दिल से धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने ऐसी महत्वाकांक्षी योजना जरूरतमंद लोगों के लिए शुरू की है। जिससे न केवल उनका उपचार हो रहा है बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हुई है, क्योंकि बीमारियों पर लगने वाला खर्च काफी ज्यादा होता है। हार्ट स्पेशलिस्ट हॉस्पीटल में उपचार ले रहे ज्ञानीराम ड्राइवर हैं, जिनकी विगत दिनों अचानक तबीयत बिगड़ी तो पता चला कि उन्हें दिल की बीमारी है। एक निजी हॉस्पीटल में जांच करवाते वक्त पता चला कि इलाज पर करीब एक लाख रुपए तक का खर्च आएगा और उसके साथ ही परिवारजनों के होश उड़ गए। बकौल ज्ञानीराम, इस बीमारी से पहले भी एक भाई की मौत हो चुकी, क्योंकि इलाज के लिए पैसा नहीं था। लेकिन किसी ने जानकारी दी कि अब डरने की जरूरत नहीं है, सरकार ने ऐसी योजना शुरु की है जिससे पूर्णत: नि:शुल्क इलाज होता है वो भी निजी हॉस्पीटल में। एकबारगी तो यकीन नहीं हुआ लेकिन जब हॉस्पीटल में भर्ती तो सच पता चला कि वाकई सब नि:शुल्क है। ऑपरेशन के बाद अब ज्ञानीराम स्वस्थ हैं और खुश भी। क्योंकि न केवल उनका इलाज हुआ बल्कि वे कर्ज लेने से भी बच गए। 

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