स्वास्थ्य केंद्रों पर लग रहे शिविर, उपचारित होंगे मानसिक रोगी
चिकित्सकों को मिला प्रशिक्षण ताकि कर सकें बेहतर इलाज, कार्यकर्ता कर रहे रोगियों को चिन्हित
श्रीगंगानगर। मानसिक विकारों से पीडि़त लोगों और उनके परिजनों के लिए राहत की बात है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गांव-ढाणी व मोहल्लों में जाकर मानसिक रोगियों की न केवल तलाश कर रहा है बल्कि अब इन्हें उपचारित भी कर रहा है। विभाग ने जिले के चिकित्सकों को इसके लिए प्रशिक्षण दिया भी दिया है ताकि मानसिक रोगियों को उपचार मिल सके। वहीं सी
एचसी व पीएचसी पर शिविर भी लगाए जा रहे हैं ताकि महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की ओर से चिन्हित व रैफर किए गए मरीजों को विशेषज्ञों की देखरेख में इलाज हो सके। कार्यक्रम के नोडल प्रभारी डॉ. प्रेम प्रकाश अग्रवाल शिविरों में जा रहे हैं, वहीं राज्य सरकार ने जिला अस्पताल में दो कार्मिकों भी नियुक्त किया है। साथ ही अर्श बराड़ इसकी मोनिटरिंग कर रहे हैं।
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि विभागीय स्वास्थ्य कार्यकर्ता अपने-अपने क्षेत्र में मानसिक रोगियों को चिन्हित कर उनका डाटा तैयार कर रहे हैं और इस आधार पर स्वास्थ्य केंद्रों पर शिविर लगाए जा रहे हैं। जिसमें प्रशिक्षित चिकित्सक व स्टाफ जांच करते हैं। आगामी दिनों में सभी सीएचसी व पीएचसी पर शिविर लगाए जाएंगे। वहीं श्रीगंगानगर जिले के अधिकांश मेडिकल ऑफिसर्स का प्रशिक्षण दिलवाया गया है और आगामी दिनों में शेष एमओ को प्रशिक्षण दिया जाएगा। इसके साथ ही आशा सहयोगिनियों को भी प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे ऐसे मरीजों को पहचान कर चिन्हित कर सकें और उन्हें शिविर में भेज सकें। विभाग नियमित शिविरों में आमजन को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक भी करेगा। नोडल प्रभारी डॉ. प्रेम प्रकाश अग्रवाल बताते हैं कि गंभीर मानसिक विकारों में सिजोफ्रेनिया, हिस्टीरिया, पेनिक डिसऑर्डर, फोबिया, ऑर्गेनिक साइकोसिस, मिर्गी, मेनिया और गहन अवसाद से अनेक लोग पीडि़त हैं। इन पर निरंतर इलाज और नियमित ध्यान देने की आवश्यकता होती है। देश में लगभग एक करोड़ लोग मानसिक रूप से बीमार हैं। इसके लिए इलाज की उपलब्धता और इलाज के फायदे की जानकारी न होना महत्वपूर्ण कारण है। इसी के चलते राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम शुरू किया गया, ताकि निकट भविष्य में न्यूनतम मानसिक स्वास्थ्य देखभाल सभी वर्गों खासकर जनसंख्या के सबसे असुरक्षित वर्गों को उपलब्ध और उस तक पहुंच हो। डॉ. अग्रवाल बताते हैं कि देवी-देवताओं का प्रकोप, भोपों आदि से इलाज, मिर्गी में अनावश्यक क्रियाएं और ओपरी आदि की बातें अक्सर मानसिक रोगी से जोड़ ली जाती हैं, जबकि इन्हें उपचार की जरूरत होती है।

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