जीवन बचाने लगी ‘जीवन वाहिनी’
-एकीकृत हुई आपातकालीन सेवाओं के आने लगे सकारात्मक परिणाम, एमडी खुद कर रहे हैं मोनिटरिंग
श्रीगंगानगर। आमजन को आपातकाल में बेहतर एम्बुलेंस सेवाएं देने के लिहाज से शुरू की गई जीवनवाहिनी एम्बुलेंस सेवा के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे है। इसी 15 अगस्त से आमजन के लिए शुरू की गई एकीकृत एम्बुलेंस सेवा ‘जीवनवाहिनी’ जीवन का सहारा बन रही है। मरीजों की लाइफ-लाइन बनी इस सेवा ने प्रदेश में शुरूआत के डेढ़ माह में ही अपनी अलग पहचान बना ली है। दूर-दराज की गांव-ढाणियों में बैठा व्यक्ति भी एक कॉल कर बीमार और घायल का उपचार करवाने में सक्षम हुआ है। अब मरीज समय पर चिकित्सा संस्थान पहुंच रहे हैं जिससे उनका समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य में प्रतिवर्ष होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण चिकित्सा संस्थान पर पहुंचने में देरी होना रहा है। जीवन वाहिनी की राज्यस्तरीय मोनिटरिंग कर रहे एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन बताते हैं कि सडक़ दुर्घटनाओं में पीडि़त व्यक्ति को यदि शुरूआती घंटे यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो जाती है तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि जीवनवाहिनी एकीकृत एंबुलेंस सेवा के राजस्थान में शुरू होने के बाद घायल और अति गंभीर व्यक्ति को अब समय पर एंबुलेंस सेवा मिल रही है, क्योंकि इससे पहले 10४ जननी एक्सप्रेस, बेस एंबुलेंस और 108 एंबुलेंस के सेवा प्रदाता अलग अलग होने से तीनों सेवाओं का आपस में तारतम्य नहीं होता था। इस बार किसी भी आपातकालीन स्थिति में तीनों प्रकार की एंम्बुलेंस घटनास्थल पर पहुंच कर घायलों को शीघ्र ही अस्पताल पहुंचाना सुनिश्चित कर पा रही हैं। राजस्थान सरकार ने इन सभी सेवाओं को एक ही सेवाप्रदाता कंपनी से करार कर जीवनवाहिनी एकीकृत एम्बुलेंस सेवा की शुरूआत की है जिससे इसका संचालन बेहतर हो रहा है और प्रत्येक कॉल पर तुरन्त एम्बुलेंस पहुंचकर घायल और प्रसूताओं को अस्पताल तक पहुंचा रही हैं। अब प्रसूता को अस्पताल तक लेकर जाने के लिए और आपातकालीन सेवाओं के लिये अलग-अलग नंबर पर फोन करके एम्बुलेंस बुलवाने की जरूरत नहीं है। राजस्थान का कोई भी निवासी 108 या 104 नम्बर पर फोन करके एम्बुलेंस सुविधा प्राप्त कर सकता है।
समय पर नहीं पहुंचने का अब नहीें कर सकेंगे बहाना
सीओआर्ईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि आपातकाल में मरीज को एम्बुलेंस सेवा समय पर उपलब्ध करवाने में अब कोई बहाना नहीं चलेगा। चिकित्सा विभाग द्वारा इस बार इसकी मॉनिटरिंग के लिये सॉफ्टवेयर, जीपीएस सिस्टम और एप जैसी टैक्नोलॉजी का सहारा लेकर सेवाओं का आमजन तक तय समय और तय प्रोटोकॉल पहुंचना सुनिश्चित कर दिया है। इस बार विभाग द्वारा प्रत्येक कॉल की रिकार्डिंग को सुनने और उसकी मॉनिटरिंग कर पेनेल्टी लगाने का प्रावधान किया गया है। जिससे आम आदमी को प्रत्येक कॉल पर सेवाएं मिलना तय हुआ है। विभाग की ओर से इन जीवनवाहिनी एम्बुलेंस सेवाओं की मॉनिटरिंग के लिये एक मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है। एम्बुलेंस चालक के घटनास्थल के लिए निकलने, वहां पहुंचने तथा चिकित्सा संस्थान तक पहुंचने व मरीज को भर्ती करवाने की सूचना मोबाइल ऐप से सॉफ्टवेयर में दर्ज होगी। सेवाप्रदाता एजेंसी को आपातकाल के कॉल की सेवा समय पर उपलब्ध नहीं करवाने पर उसके भुगतान में कटौती की जाएगी। यही नहीं 108 व 104 नम्बर पर कॉल करने पर महज चंद मिनटों में ही मरीज के पास एम्बुलेंस पहुंच जाएगी। सॉफ्टवेयर के आधार पर मरीज के आपातकालीन कॉल को जीपीएस सिस्टम के माध्यम से निकटवर्ती एम्बुलेंस चालक को सूचना भेजी जाएगी। जिससे वह जल्द से जल्द मौके पर पहुंच सके। जीवनवाहिनी एम्बुलेंस सेवा मरीज के जीवन को ही सुरक्षित रखने के साथ आम आदमी को पुलिस व अग्निशमन जैसी आपातकालीन सेवाओं से भी जोड़ रही है। पुलिस व अग्निशमन से जुुड़े मामलों के बारे में निकटवर्ती पुलिस स्टेशन व अग्निशमन केन्द्र को सूचना दी जाती है जिससे आमजन को तुरंत राहत मिल सकें।
नि:शुल्क परामर्श, सुझाव, शिकायत व स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी
जीवनवाहिनी एकीकृत एम्बुलेंस सेवा में 108 व 104 नम्बर पर किसी भी बीमारी के बारे में चिकित्सकों से नि:शुल्क परामर्श व काउंसलिग भी दी जा रही है। साथ ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से चल रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी 108 व 104 नम्बर डायल कर प्राप्त की जा सकती है। इससे आमजन को घर बैठे ही नि:शुल्क मेडीकल सलाह मिल जाएगी। यही नहीं विभाग से जुड़ी भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायत भी १०४ पर दर्ज करवाई जा सकती है। वहीं बेटी बचाओ अभियान में भी १०४ सुविधा कारगर साबित हो रही है, क्योंकि अब कोई भी कन्या भू्रण हत्या या लिंग जांच संबंधी शिकायत १०४ पर दर्ज करवा सकता है। जीवनवाहिनी एम्बुलेंस सेवा से आमजन को कोई परेशानी हो तो उनकी सहायता के लिये राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। विभाग की ओर से दो हैल्पलाइन नम्बर भी जारी किए गए हैं। विभाग के 8764835254 और 8764835255 नम्बर पर आम आदमी एम्बुलेंस सेवा से संबंधित अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं और सहायत प्राप्त कर सकते हैं।
डायल एन एम्बूलेन्स सेवा
अब तक बेस एम्बूलेन्स वाहन राजकीय चिकित्सा संस्थानों पर स्थापित किए गए थे, परंतु यहां पर इनका उपयोग काफी कम रहा। जीवनवाहिनी एकीकृत एंबुलेंस सेवा के माध्यम से इस बेस एम्बुलेंस का उपयोग डायल एन एम्बुलेंस सेवा के रूप में किया जा रहा है। बेस एम्बूलेन्स की सेवाएं उन वृद्ध या बीमार लोगों के लिए हैं, जो आपातकालीन स्थिति में नहीं है परंतु साधारण वाहन से सफर करने में सक्षम नहीं है। इससे पहले निजी एंबुलेंस द्वारा अपनी मनमर्जी से पैसे वसूले जा रहे थे वहीं विभाग की डायल एन एंबुलेंस सेवा के द्वारा न्यूनतम किराए में ये सेवाएं आमजन को उपलब्ध करवाई जा रही है। बेस एम्बुलेंस की सेवाऐं लाभार्थी के लिए नि:शुल्क नहीं है जबकि अन्य तीन सेवाएं पूर्णतया नि:शुल्क उपलब्ध है।
ये खासियत हैं जीवन वाहिनी की
सभी वाहनों पर बेहतर मॉनिटरिंग हेतु जीपीएस प्रणाली।
योजना के सफल संचालन हेतु वेब आधारित सॉफ्टवेयर। यह सॉफ्टवेयर जीपीएस सिस्टम से इंटीग्रेट होगा व घटनास्थल से निकटतम एम्बुलैंस की स्थिति बताने में सक्षम होगा। इसके माध्यम से दुर्घटना होने की स्थिति में सबसे निकटवर्ती उपलब्ध एम्बुलैंस का चयन कर घटनास्थल पर भिजवाया जाना सुनिश्चित किया जाएगा।
इस सॉफ्टवेयर में चिकित्सा सुविधा के आधार पर चिकित्सा संस्थानों, फायर स्टेशनों तथा पुलिस स्टेशनों को भी जी.आई.एस. मैपिंग के माध्यम से इन्टिग्रेट किया जायेगा, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में आवश्यकता अनुसार निकटतम संस्थान को सूचित किया जा सके।
सेवाप्रदाता को प्रत्येक वैध कॉल पर सेवायें प्रदान करना आवष्यक होगा एवं ऐसा नहीं करने पर उसके भुगतान में से कटौती की जायेगी।
इंटीग्रेटेड एम्बुलैंस के बेड़े में इस बार 588 जननी एक्सप्रेस वाहन, 200 बेस एम्बुलेंस और 630 एम्बुलेंस (108) सम्मिलित होंगी।
मोबाइल ऐप से होगी पारदर्शी और सुव्यवस्थित प्रक्रिया
वाहनो में कार्यरत ड्राइवर की मोबाइल ऐप के माध्यम से वाहन पर घटनास्थल के लिये निकलने, वहां पहुचने, घटना स्थल से चिकित्सा संस्थान हेतु निकलने तथा चिकित्सा संस्थान पर मरीज को सुरक्षित सौपने तथा वापिस अपने स्थान पर पहुचने की सूचना स्वत: सॉफ्टवेयर में दर्ज होगी।
वाहनो में उपकरणाो तथा वाहन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु इंस्पेक्शन मोबाइल ऐप बनाई गई है। इस मोबाइल ऐप से निरीक्षण होते ही वाहन में पाई गई कमिया सीधे सॉफ्टवेयर में अंकित होने के साथ साथ सेवाप्रदाता को भी सुधार करने हेतु प्रेषित हो जायेगी।
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