शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2016

‘‘जागरूक हो जाएं, आयोडीन युक्त आहार खाएं’’
-विश्व आयोडीन सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों पर एक सप्ताह के दौरान विभाग के जागरूक
श्रीगंगानगर। लोग अक्सर आयोडीन युक्त आहार अपने खाने में शामिल नहीं करते हैं। यही कारण है कि सरकार ने आयोडीन युक्त आहार को लेकर आमजन को जागरूक करने का निर्णय लिया, जो लगातार चल रहा है। आयोडीन थायरॉयड ग्रंथि को अच्छे से काम करने में मदद करता है, जिससे इसमें हार्मोन ठीक से बनने लगते हैं। यह हार्मोन दिमाग को अच्छे से काम करने, वजन नियंत्रण करने में और चयापचय को मजबूत करने में मदद करता है। अगर आयरन सही मात्रा में ना खाया जाए तो कुछ लोगों को थायराइड हार्मोन (हाइपोथायरायडिज्म) की कमी का सामना करना पड़ सकता है। दिमागी विकास के लिए आयोडीन बहुत जरुरी है। जो लोग आयोडीन नहीं खाते हैं उनके सोचने समझने की छमता में कमी और मानसिक एकाग्रता की कमी आ जाती है। यह बात विश्व आयोडीन दिवस के मौके पर सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने कही। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के दौरान जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों यथा सीएचसी व पीएचसी स्तर पर आमजन को आयोडीन नमक के प्रति जागरूक किया जाए। 
उन्होंने कहा कि आयोडीन प्रजनन के लिए और स्तनपान के दौरान भी महत्वपूर्ण है। इसीलिए आज हम आपको कुछ आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना बेहद जरुरी है। खासकर आयोडीन शिशु के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि आयोडीन बढ़ते शिशु के दिमाग के विकास और थायराइड प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है। यह एक माइक्रोपोशक तत्व है जिसकी हमारे शरीर को विकास एवं जीने के लिए बहुत थोड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। थायराइड ग्रंथि गर्दन के सामने है और यह उन हार्मोन का उत्पादन करता है जो शरीर की चयापचय का नियंत्रण करते हैं। आयोडीन हमारे शरीर के तापमान को भी विनियमित करता है, विकास में सहायक है और भ्रूण के पोशक तत्वों का एक अनिवार्य घटक है। दरअसल, एक व्यक्ति को जीवनभर में एक छोटे चम्मच से भी कम आयोडीन की आवश्यकता पड़ती है। चूंकि आयोडीन शरीर में जमा नहीं रह सकता इसे दैनिक आधार पर लेना पड़ता है। रिसर्च से पता चला है कि महिलाओं को गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान अपने आहार में पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलता। 
आयोडीन की कमी से हो सकते हैं कई कुप्रभाव
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई बताते हैं कि आयोडीन की कमी से आप मानसिक तथा शारीरिक तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। इसके आम लक्षण हैं त्वचा का सूखापन, नाखूनों और बालों का टूटना, कब्ज़ और भारी और कर्कश आवाज। इनमें से कुछ लक्षण गर्भावस्था में आम पाए जाते हैं इसलिए इस बारे में चिकित्सीय सलाह लेना सुरक्षित है। आयोडीन की कमी से वजऩ बढऩा, रक्त में कोलेस्ट्रोल का स्तर बढऩा और ठंड बर्दाश्त न होना आदि लक्षण होते हैं। वस्तुत: आयोडीन की कमी से मस्तिष्क का धीमा होना और दिमाग को क्षति आदि हो सकते हैं जिन्हें समय से रोका जा सकता है। आयोडीन की लगातार कमी से चेहरा फूला हुआ, गले में सूजन (गले के अगले हिस्से में थाइराइड ग्रंथि में सूजन) थाइराइड की कमी (जब थाइराइड हार्मोन का बनना सामान्य से कम हो जाए) और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में बाधा आती है। गर्भवती महिलाओं में आयोडीन की कमी से गर्भपात, नवज़ात शिशुओं का वजऩ कम होना,शिशु का मृत पैदा होना और जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु होना आदि लक्षण होते हैं। एक शिशु में आयोडीन की कमी से उसमें बौद्धिक और विकास संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। आयोडीन के सर्वोत्तम प्राकृतिक स्रोत हैं अनाज, दालें एवं ताजे खाद्य पदार्थ। दूध आदि मेंं भी कुछ मात्रा में आयोडीन होता है। 
सर्वाेत्तम उपाय है आयोडीन युक्त नमक 
आयोडीन युक्त नमक अपने आहार में आयोडीन शामिल करने का सबसे बेहतर तरीका है। एक औसत भारतीय प्रतिदिन लगभग 10-15 ग्राम नमक का सेवन करता है। अपने दैनिक भोजन में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करने से आपकी आयोडीन की दैनिक मात्रा पूरी हो जाती है। नमक में आयोडीन नष्ट नहीं होता यदि इसे उचित ढंग से रखा जाए। बहरहाल, लम्बे समय तक सूर्य की रोशनी तथा नमी पडऩे से नमक में मौजूद आयोडीन नष्ट हो सकता है। आपको आयोडीन युक्त नमक शीशे या प्लास्टिक के बंद कंटेनर में रखना चाहिए और उस पर लिखी निर्माण की तारीख हमेशा देखें। आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल पैकिंग की तारीख से 12 महीने के अंदर कर लेना चाहिए। बहरहाल, यदि आपको उच्च रक्तचाप तथा कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है जिसके कारण आप अपने आहार में नमक का इस्तेमाल कर पाने में असमर्थ हैं तो इसके विकल्प के लिए अपनी डाक्टर से सलाह करें।


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