‘‘लाभार्थियों का भुगतान तुरंत हो, लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी’’
-ओजस को लेकर हुई वीसी में मिशन निदेशक नवीन जैन ने दिए सख्त निर्देश,

श्रींगगानगर। ‘‘महिला और बालिकाओं का अधिकार है कि उन्हें सरकार की ओर से दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि तुरंत प्रभाव से मिले। यदि इसमें किसी भी तरह की लापरवाही, किसी भी स्तर पर होती है तो संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यही नहीं ब्लॉक व जिलास्तरीय अधिकारी भी यह सुनिश्चित करें कि लाभार्थियों के भुगतान में विलंब न हो। ये निर्देश शुक्रवार को एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन ने वीडियो कॉन्फे्रंसिंग के दौरान दिए। एक दिसंबर से पीएचसी स्तर पर शुरू हो रहे ओजस सॉफ्टवेयर के संबंध में आयोजित इस वीसी में जिलास्तर से सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, डीएएम सतीश गुप्ता, डीएनओ कमल गुप्ता, डीपीएम विपुल गोयल, डीएसी रायसिंह सहारण और सीओआईईसी विनोद बिश्रोई सहित अन्य अधिकारी व कार्मिक शामिल हुए। वहीं ब्लॉकस्तर से सभी बीसीएमओ, बीपीएम एवं अन्य कार्मिक शामिल हुए।
वीसी में मिशन निदेशक नवीन जैन ने निर्देशित किया कि कुछेक जगहों पर चिकित्सा अधिकारियों की लापरवाही के चलते लाभार्थियों को विलंब से भुगतान किया जा रहा है, जो बर्दाश्त के लायक नहीं है। सभी संस्थान प्रभारी सुनिश्चित कर लें कि वे जेएसवाई, शुभलक्ष्मी योजना व राजश्री योजना का भुगतान तुरंत प्रभाव से करें। क्योंकि यह लाभार्थी का अधिकार है और इसमें किसी अधिकारी या कर्मचारी की इच्छा या लापरवाही नहीं चलेगी। श्री जैन ने अब तक बकाया भुगतान की समीक्षा करते हुए सभी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को आगामी 25 नंवबर तक का समय देते हुए कहा कि वे तुरंत प्रभाव से शत-प्रतिशत लाभार्थियों का भुगतान करवाने का प्रयास करें। श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ ब्लॉक में बकाया भुगतान को लेकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए बीसीएमओ को एक दिसंबर तक का समय देते हुए निर्देशित किया कि वे स्वयं अपनी टीम के साथ फील्ड में उतरे और लाभार्थियों का अकाउंट नंबर हासिल कर उनका भुगतान करवाएं। वहीं अन्य संबंधित कार्मिकों का एक माह का समय देते हुए कहा कि यदि लक्ष्य हासिल करने में असमर्थ रहते हैं तो इन्हें तुरंत एपीओ कर जयपुर भेजें। इसी तरह उन्होंने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया कि वे बच्चे का पूर्ण टीकाकरण कर पीसीटीएस में एंट्री करवाएं और प्रमाणित करें ताकि शुभलक्ष्मी योजना की दूसरी किश्त मिल सके। इसके साथ ही महिलाओं व उनके परिजनों को प्रेरित करें कि वे शुभलक्ष्मी योजना की हर किश्त लें। उन्होंने जिलाधिकारियों से कहा कि वे भी नियमित मोनिटरिंग करें और हर कार्य की समीक्षा करें। साथ ही पीएचसी पर शुरू हो रहे ओजस सॉफ्टवेयर को लेकर उन्होंने कहा कि पीएचसी पर प्रसूता को 48 घण्टे के बाद ही डिस्चार्ज किया जाए और इसी दौरान बैंक खाता सहित अन्य वांछित दस्तावेज हासिल किए जाएं ताकि प्रसूता को भुगतान के लिए चक्कर न निकालने पड़े। बीसीएमओ एवं बीपीएम को हर माह सेक्टर मिटिंग लेने एवं मोनिटरिंग करने के निर्देश दिए।
तो आशाओं को नहीं मिलेगा भुगतान
वीसी के दौरान एमडी नवीन जैन ने कहा कि आशाओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे गर्भवती महिला के पंजीकरण के दौरान ही उसका बैंक अकाउंट नंबर लें अन्यथा आगामी एएनसी के दौरान उससे अकाउंट नंबर हासिल करे। यदि प्रसव के दौरान तक महिला का बैंक अकाउंट नंबर लापरवाही के कारण नहीं लिया जाता है तो दो-तीन मामलों के बाद आशाओं का एएनसी संबंधी भुगतान नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने हिदायत दी कि आशाएं घर-घर जाने के दौरान महिलाओं को बैंक खाता खुलवाने के लिए प्रेरित करें। श्री जैन ने इस कार्य के लिए ब्लॉक हेल्थ सुपरवाइजर और पीएचसी हेल्थ सुपरवाइजर सहित चिकित्सा प्रभारी की जिम्मेदारी तय करते हुए कहा कि वे भी बैंक अकाउंट के संबंध में मोनिटरिंग करें अन्यथा उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। वीसी के दौरान ही कुछेक कार्मिकों की लापरवाही पर उन्हें तत्काल एपीओ करने के निर्देश दिए गए।
एक दिसंबर से ओजस पीएचसी पर शुरू
अब एक दिसंबर 2016 से प्रसव पर महिलाओं व बालिकाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान नगद या चेक के माध्यम से नहीं किया जाएगा, बल्कि ओजन सॉफ्टवेयर के जरिए ऑनलाइन भुगतान होगा। एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन ने आहï्वान किया है कि राज्य की हर महिला का बैंक खाता खुलवाया जाए ताकि कोई भी इस राजकीय राशि से वंचित न रहे। उल्लेखनीय है कि प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के तहत शहरी क्षेत्रों में 1000 व ग्रामीण क्षेत्रों में 1400 रुपए सहायता राशि दी जा रही है, जो एक दिसंबर से ऑनलाइन मिलेगी। वहीं मुख्यमंत्री राजश्री योजना के तहत बेटी पैदा होने पर छह किस्तों में 50 हजार रुपए की राशि भी ऑनलाइन दी जाएगी। शुभलक्ष्मी योजना के संबंध में निर्देशित करते हुए मिशन निदेशक ने कहा कि योजना की दूसरी किश्त राज्य के किसी भी स्वास्थ्य केंद्र से ली जा सकती है, भले ही प्रसव राज्य के किसी भी स्वास्थ्य केंद्र मेंं हुआ हो।
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