सोमवार, 7 नवंबर 2016

‘बेटा है या बेटी, जांच करवाना पड़ सकता हैै भारी’
-अब बेटियां करेंगी समाज को जागरूक, छात्राओं को दी पीसीपीएनडीटी की जानकारी
श्रीगंगानगर। भू्रण लिंग जांच करना ही केवल अपराध नहीं है, बल्कि भू्रण लिंग जांच करवाने वाला भी दोषी होता है और उसे कानूननï् सजा भी मिलती है। यदि कोई डॉक्टर जागरूक और ईमानदार हो तो वह ऐसे लोगों की शिकायत कर सकता है जो गर्भ में पल रहे भू्रण की लिंग जांच करवाने आते हैं। ऐसे में न्यायालय अपराधी को तीन वर्ष की कैद और दस हजार रूपए जुर्माना दोनों की सजा सुना सकता है। इसलिए भू्रण लिंग जांच के बारे में कतई नहीं सोचें और बेटा-बेटी का एकसमान समझते हुए उनसे जीने का अधिकार नहीं छीनें। वैसे भी यदि कोई प्रकृति से छेड़छाड़ करते हुए भगवान के नियमों से खिलवाड़ करता है तो उसकी आध्यात्मिक सजा भी तय है। ये विचार सोमवार को गोदारा गल्र्स कॉलेज में आयोजित बेटी बचाओ जागरूकता अभियान के तहत वक्ताओं ने कही। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बतौर अतिथि एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता, वरिष्ठ व्याख्याता मेघराज ओझा, डीपी सिंह, पवन कुमार, छात्रासंघ अध्यक्ष कुमारी मंजू, अभियान प्रभारी रणदीपसिंह एवं विनोद बिश्रोई शामिल रहे।
छात्राओं को संबोधित करते हुए एसीएमएचओ डॉ. मेहत्ता ने कहा कि बेटी बचाओ अभियान का मूल उदï्देश्य यही है कि बेटे-बेटी का भेद समाप्त हो और जिस दिन यह समस्या समाप्त हो गई उसके बाद भू्रण हत्या नहीं होगी। क्योंकि इसी भेद के इर्द-गिर्द कई प्रथाओं, धारणाओं व ओच्छी सामाजिक सोच जैसी अनेक उलझनें है जो इस भेद के समापन से ही नष्ट हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस भेद को मिटाने में युवाओं की अहम भूमिका साबित हो सकती है और खासकर बालिकाएं दो-दो परिवारों के साथ पूरे समाज को जागरूक कर सकती हैं। पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीपसिंह ने कानूनी पहलूओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई भी पंजीकरण के बिना सोनोग्राफी मशीन नहीं रख सकता है और यदि ऐसा कोई करता है एवं किसी को जानकारी है तो उसकी शिकायत करनी चाहिए। शिकायत टोल फ्री नंबर 104 और हमारी बेटी वेबसाइट पर दर्ज करवाई जा सकती है। यदि शिकायतकर्ता चाहे तो उसका नाम गुप्त रखा जाता है। इसी तरह भू्रण लिंग जांच संबंधित शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। भू्रण लिंग की जांच करवाना, करना और इसमें सहयोग करना तीनों ही अपराध है। ऐसा करने वालों को तीन साल की सजा व दस हजार रूपए जुर्माना लगाया जा सकता है। फिर से यही जुर्म दोहराने पर पांच साल की सजा और पचास हजार रूपए तक जुर्माना हो सकता है। इस मौके पर कॉलेज व्याख्याता एवं छात्राओं ने संकल्प करते हुए कहा कि वे इस सामाजिक बुराई को जड़ से उखाड़ फैंकने में अपना पूरा योगदान देंगे।

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