बुधवार, 4 जनवरी 2017

नियमित टीकाकरण में शामिल होगा रोटा वायरस वैक्सीन
-राज्यस्तरीय टीम ने स्वास्थ्य अधिकारियों को दिया प्रशिक्षण
श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय टीकाकरण सारणी में आमूलचूल परिवर्तन करते हुए जल्द ही स्वास्थ्य विभाग एक और वैक्सीन को नियमित टीकाकरण में शामिल करेगा। बच्चों को दी जाने वाली इस वैक्सीन की बूंदे गुलाबी रंग की होगी, जो छह, 10 व 14 सप्ताह की आयु में पांच-पांच बूंद के रूप में दिया जाएगा। इस संबंध में आज जिला मुख्यालय पर सभी बीसीएमओ व सीएचसी प्रभारियों को प्रशिक्षण दिया गया। जिसमें आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, प्रोजेक्ट ऑफिसर अश्विनी नागर, बीकानेर से ललित रंगा, एसएमओ डॉ. मंजूलता शर्मा, डॉ. दीपिका मोंगा, डॉ. राजेश अरोड़ा, डीएएम सतीश गुप्ता, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहे। प्रशिक्षक जॉन स्नो इण्डिया के स्टेट टैक्नीकल ऑफिसर लोकेश शर्मा ने रोटा वायरस वैक्सीन के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि आगामी मार्च माह से दस्त रोग प्रतिरक्षक रोटा वायरस टीका शामिल कर बच्चों को यह वैक्सीन लगाना प्रारम्भ किया जाएगा। रोटा वायरस वैक्सीन की 5 गुलाबी रंग की बूंदें 6, 10 और 14 सप्ताह की उम्र में नियमित टीकाकरण के साथ पिलाई जाएगी। उन्होंने बताया कि रोटा वायरस एक अत्यधिक संक्रामक वायरस है। यह बच्चों में दस्त उत्पन्न करने का सबसे बड़ा कारक है। इसके कारण बच्चे को अस्पताल में भर्ती करवाना पड़ सकता है एवं इलाज के अभाव में उसकी मृत्यु भी हो सकती है। इसकी शुरुआत हल्के दस्त से हो सकती है तथा यह गम्भीर रूप भी ले सकता है। पर्याप्त इलाज ना मिलने के कारण बच्चे के शरीर में पानी और नमक की कमी हो जाती है। आरसीएचओ डॉ. असीजा के अनुसार मातृ मृत्युदर एवं शिशु मृत्युदर के नियंत्रण के लिए किए जा रहे प्रयासों से इनमें कमी दर्ज की जा रही है। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष तक की उम्र के बच्चों की अकाल मृत्यु में दस्त भी मुख्य कारण है, जिसको मद्देनजर रखते हुए भारत सरकार ने रोटा वायरस वैक्सीन को टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल करने का निर्णय लिया है। वर्तमान में हिमाचल प्रदेश, उड़ीसा, हरियाणा एवं आंध्रप्रदेश में यह वैक्सीन नियमित टीकाकरण में शामिल है। 
मीठा होगा स्वाद, कम होगी शिशु मृत्यु दर
देश में पांच वर्ष तक के बच्चों की मृत्यु दर में से 13 प्रतिशत बच्चों की डायरिया से मौत होती है एवं 40 प्रतिशत बच्चों को दस्त होने के कारण चिकित्सालय में भर्ती कर उपचार की आवश्यकता होती है। डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि विश्वभर में 81 देशों में पहले से पूर्ण सुरक्षित एवं मीठे स्वाद वाला यह रोटा वायरस वैक्सीन बच्चों को लगाया जाता है। आगामी मार्च माह से प्रदेश में भी समस्त बच्चों को निर्धारित प्रावधानों के अनुसार लगाने प्रारम्भ हो जाएंगे। उन्होंने बताया कि एक वैक्सीन वायल में 10 खुराकें होंगी एवं इनका वायल खोलने के बाद अधिकतम चार घण्टे तक ही उपयोग किया जा सकेगा। इन्हें 2 डिग्री से 8 डिग्री सेंटीग्रेड तापमान पर सतर्कतापूर्वक रखना चाहिए। 

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