शनिवार, 21 जनवरी 2017

आरबीएसके से ‘नजर आई साफ तस्वीर’
चिन्हित बच्चों को पदमपुर बीसीएमओ ने दिए चश्मे
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से मासूमों के लिए चलाए जा रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) के तहत नित नए आयाम स्थापित हो रहे हैं। कभी दिल की धडक़नें लौट रही हैं, कभी मुस्कान तो कभी जिंदगी की खूबसूरती। इस फेहरिस्त में अब नजरें भी जुड़ हैं। जी हां, अब उन मासूम बच्चों को चश्मे भी मिल रहे हैं, जिन्हें या तो आंखों के धुंधलेपन की जानकारी नहीं थी या आंखें धीरे-धीरे धुंधलाती जा रही थी लेकिन वे जांच नहीं करवा पा रहे थे। ऐसे भी बच्चे सामने आए जिन्होंनेे निर्धनता के चलते आंखों की जांच नहीं करवाई, तो कई चश्मे नहीं ले पाए। ऐसे में आरबीएसके इनके लिए वरदान साबित हुआ। 
बीसीएमओ डॉ. मुकेश मित्तल और आरबीएसके टीम बच्चे व परिजनों के साथ
दरअसल, विभाग की ओर से चलाए जा रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत पदमपुर खण्ड में अनेक ऐसे बच्चे चिन्हित हुए जिन्हें आंखों से संबंधित बीमारी थी। इसके बाद खण्ड मुख्यालय पर लगाए शिविर में ऐसे 51 बच्चों को सूचीबद्ध किया गया, जिन्हें चश्मे की सख्त जरुरत थी। क्योंकि उनकी आंखें दिनों दिन धुंधलाती जा रही थी। इनमें से ज्यादातार बच्चे निर्धनता के चलते चश्मे नहीं खरीद पाए, लिहाजा बीसीएमओ डॉ. मुकेश मित्तल ने अपने स्तर पर संवेदनशीलता दिखाते हुए चश्मे वितरण करने का निर्णय लिया। उन्होंने आरबीएसके प्रभारी डॉ. भारत भूषण से संपर्क कर बच्चों को खण्ड पर पुन: बुलाया। जहां नेत्र विशेषज्ञ डॉ. दिनेश भारद्वाज ने आंखों की नि:शुल्क जांच की और पहले दिन 26 बच्चों को नि:शुल्क चश्मे डॉ. मित्तल की ओर से दिए गए। शेष बच्चों की आंखें जांच व अन्य औपचारिकताएं पूर्ण कर आज व कल चश्मे दिए जाएंगे। सीआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि सभी बच्चों को आंगनबाड़ी व स्कूलों में आरबीएसके टीम में शामिल डॉ. जितेंद्र धायल, डॉ. अमनप्रीत कौर व डॉ. संदीप टाक ने चिन्हित किया। इसी तरह सूरतगढ़ बीसीएमओ डॉ. मनोज अग्रवाल ने एक निजी संस्था के जरिए और श्रीगंगानगर ब्लॉक में एक निजी हॉस्पीटल के सहयोग से चश्मे उपलब्ध करवाए गए। वहीं अन्य ब्लॉकों में भी जल्द ही आरबीएसके के तहत चिन्हित बच्चों को चश्मे उपलब्ध करवाए जाएंगे। 
वर्जन 
‘मेरी माँ अक्सर मुझे सदï्कर्म करने व जरुरतमंद की सहयोग करने के लिए प्रेरित करती हैं और संभवत: उन्हीं की प्रेरणा का नतीजा है कि मैं इस छोटे से कार्य में निमित मात्र बन पाया हूँ। वाकई में कई बच्चे ऐसे होते हैं, जिन्हें किताबों, चश्मों व अन्य वस्तुओं की जरुरत होती है जो हममें से कोई भी उपलब्ध करवा सकता है। बस, इरादे नेक होने चाहिए।’
डॉ. मुकेश मित्तल, बीसीएमओ, पदमपुर

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