अब बेटियां खेलेंगी क्रिकेट
-बेटी बचाओ अभियान के तहत बनेगी कन्या क्रिकेट एकेडमी, जिला क्रिकेट संघ ने की घोषणा
-बेटी के जन्म पर युवा क्रिकेटरों ने मनाई खुशी, बांटी मिठाई, बजाया ढोल
श्रीगंगानगर। बेटियों को हर क्षेत्र में बराबरी का हक दिलाने में जुटे श्रीगंगानगर में एक और नया आयाम स्थापित होने जा रहा है। यहां की बेटियां अब किके्रट खेल सकेंगी और उनके लिए बकायदा कन्या क्रिकेट एकेडमी खोली जाएगी। यह निर्णय शुक्रवार को एसके बिहाणी क्रिकेट एकेमडी में आयोजित एक सादा समारोह में लेते हुए जिला सचिव विनोद सहारण ने इसकी घोषणा की। दरअसल, यहां राजस्थान खिलाड़ी भैराराम की भतीजी के जन्म की खुशी में कार्यक्रम रखा गया और सभी क्रिकेटरों को बेटी बचाओ अभियान के तहत स्वास्थ्य विभाग के आईईसी अनुभाग की ओर से कन्या भू्रण रोकने व बेटा-बेटी समानता की शपथ दिलाई गई। इस मौके पर संघ सचिव विनोद सहारण, कोच धीरज शर्मा, रणजी खिलाड़ी अजय कुकणा, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई, कर्मचारी नेता अनिल सहारण, नर्सिंग यूनियन के जिलाध्यक्ष रविंद्र शर्मा, प्रवीण गौड़, भूप कुकणा व ईश्वरराम गेदर आदि मौजूद रहे।
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सचिव विनोद सहारण ने कहा कि स्वास्थ्य विभाग के बेटी बचाओ अभियान से प्रेरित होकर गांव पांच ई नाइयांवाली निवासी श्रवण कुमार ने अपनी बेटी के जन्म पर न केवल मिठाई बांटकर खुशी मनाई, बल्कि जन्म पर थाली बजाकर रूढ़ीवादी परंपरा को तोडऩे का सार्थक प्रयास किया। परिजनों ने बकायदा खुशी मनाते पटाखे बजाए व आतिशबाजी भी की। नन्हीं बेटी को ढोल व थाली बजाते हुए हॉस्पीटल से घर लेकर आए। उन्होंने बेटी का नाम दिव्यांशी रखा है। संघ ने इसी मौके पर निर्णय लिया कि बेटी बचाओ अभियान में योगदान देते हुए जिला मुख्यालय पर दिव्यांशी क्रिकेट एकेडमी खोली जाएगी ताकि बेटियां भी बेटों के बराबर क्रिकेट खेल सके और वे भी समाज में खुद को स्थापित कर सके। क्योंकि आज बेटियां किसी से कम नहीं है और वे भी समाज में बराबरी की हकदार हैं। एकेडमी के कोच धर्मवीर देहडान होंगे और यहां बेटियों को उच्चस्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। कार्यक्रम में विभाग की ओर से विनोद बिश्रोई व रवींद्र शर्मा ने सभी युवा क्रिकेटरों को बेटी बचाओ अभियान के तहत शपथ दिलाई। संघ सचिव विनोद सहारण ने आमजन से अपील की कि वे भी विभाग का साथ देते हुए इस तरह के आयोजन निरंतर करवाएं ताकि बेटी बचाओ अभियान पूर्णत: सफल हो सके व बेटियों का बचाया व पढ़ाया जा सके।
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