छूट न जाए कोई बच्चा, जरूर पिलाएं पोलियो दवा - जिला कलेक्टर
श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय पोलियो अभियान का आज आखिरी दिन है और स्वास्थ्य विभाग की टीमें वंचित घरों में जाकर पोलियो रोधी दवा पिलाएगी। फिर भी यदि किसी का बच्चा पोलियो बूंद से वंचित रह गया है तो वह स्वास्थ्य विभाग को फोन कर सूचित कर सकता है। चंूंकि हमारा भारत पोलियो मुक्त हो चुका है, इसलिए हर बच्चे को पोलियो बूंद जरूर पिलाई जाएं। ये आहï्वान जिला कलेक्टर ज्ञानाराम ने करते हुए आमजन को इस राष्ट्रीय अभियान को गंभीरता से लेने के लिए प्रेरित किया है। उन्होंने कहा कि पोलियो फिर से देश में पैर न पसारे इसके लिए हमें अभियान में व्यक्तिगत सहयोग देना चाहिए। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने सोमवार को घर-घर जाकर पोलियो दवा पिलाई। इसके साथ ही विभागीय अधिकारियों व सुपरवाइजरों ने किए गए कार्यों का सर्वे कर अभियान की समीक्षा की।
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि इस बार जिले में पांच वर्ष तक के बच्चों की संख्या दो लाख 89 हजार आठ सौ 23 को दवा पिलाने का लक्ष्य रखा गया था, जिनमें पहले दिन रविवार को ही 72.02 फीसदी बच्चों को पोलियो दवा पिला दी गई। जबकि सोमवार को घर-घर जाकर दवा पिलाई गई और इसी तरह मंगलवार को भी विभागीय टीमें घरों में जाकर वंचित बच्चों को पोलियो दवा पिलाएंगी। सोमवार को शहरी क्षेत्र में प्रभारी डॉ. संजय राठी, सोहनलाल, राकेश कुमार, रविंद्र शर्मा, घनश्याम गिल्होत्रा, रमेश थन्नई, राजेंद्र अरोड़ा, राहुल मोयल, सुरेंद्र गोदारा व सुरेश भादू आदि ने सुपरविजन कर व्यवस्थाएं देखीं। इसी तरह ग्रामीण क्षेत्र में सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, डीपीएम विपुल गोयल सहित सभी बीसीएमओ व बीपीएम आदि ने व्यवस्थाओं का जायजा लिया। विभागीय टीमें बस स्टेंड, रेलवे स्टेशन आदि मुख्य स्थलों पर भी तैनात रहीं। वहीं झुग्गी झोंपडिय़ों व ईंट भटï्टा आदि पिछड़े क्षेत्रों में भी टीमों ने पोलियो दवा बच्चों को पिलाई। विभाग की ओर से 2838 गांव व ढाणियों सहित 10 शहरी क्षेत्रों को माइक्रोप्लान में शामिल किया गया है, जबकि 412 ईंट भटï्टे और अन्य 476 हाई रिस्क क्षेत्र भी चिन्हित किए गए हैं। पोलियो रोधी दवा से वंचित रहने पर आमजन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के कंट्रोल रूम नंबर 2445071 पर एवं शहरी क्षेत्र के लिए मोबाइल नंबर 9460485072 पर सूचना दी जा सकती है।
अब पोलियो के लिए बाइवेलेंट वैक्सिन
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इस बार ट्राइवेलेंट ओरल पोलियो वैक्सिन (टीओपीवी) की जगह पहली बार बाइवेलेंट ओरल पोलियो वैक्सिन (बीओपीवी) बच्चों को पिला रहा है। राष्ट्रीय स्तर पर किए गए इस फेरबदल के बाद सभी सरकारी प्रतिरक्षण कार्यक्रम, निजी स्वास्थ्य केंद्रों और नर्सिंग होम्स के लिए अनिवार्य होगा कि वह केवल बीओपीवी का ही उपयोग करें। शहरी क्षेत्र के प्रभारी डॉ. संजय राठी ने बताया कि भारत ने पोलियो का उन्मूलन कर एक एतिहासिक उपलब्धि हासिल की है। देश में पोलियो का अंतिम केस 13 जनवरी 2011 को पाया गया था, जिसके बाद 27 मार्च 2014 को भारत को पोलियो से मुक्त देश घोषित किया गया। हालांकि पोलियो का भारत से उन्मूलन हो चुका है, लेकिन पाकिस्तान और अफगानिस्तान में पोलियो वायरस अब भी सक्रिय है, जिससे भारत में इसके दोबारा प्रवेश करने का खतरा रहता है। पोलियो के संभावित खतरे से निजात पाने के लिए यह आवश्यक है कि पोलियो दवा की मदद से रोग प्रतिरोधक क्षमता को मजबूत बनाया जाए। भारत में पहले पोलियो उन्मूलन अभियान के अंतर्गत टीओपीवी का प्रयोग नियमित टीकाकरण में हो रहा था। यह तीन प्रकार के पोलियो वाइरस (टाइप 1, 2 व 3) के उन्मूलन के लिए है, अब जबकि सबसे खतरनाक पोलियो वायरस (टाइप-2) का दुनिया से उन्मूलन हो चुका है, इसलिए टीओपीवी की जरूरत नहीं रह गयी है।

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