राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस दस को
-जिले के साढ़े छह लाख बच्चों को पिलाई जाएगी कृमि नियंत्रण की दवा

श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से इसी दस फरवरी को राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवस मनाया जाएगा। जिसमें एक से 19 आयु वर्ष के जिले के करीब साढ़े छह लाख बच्चों को कृमि नियंत्रण की दवा पिलाई जाएगी। अभियान में मुख्यत: स्वास्थ्य विभाग, शिक्षा विभाग और आईसीडीएस का योगदान रहेगा। अभियान को लेकर प्रारंभिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं एवं सोमवार को उच्चाधिकारियों ने राज्यस्तर से वीडियो कॉन्फें्रसिंग के जरिए भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। जो बच्चे राष्ट्रीय कृमि मुक्ति दिवसपर दवा नहीं खा पाएंगे, उन्हें मॉपअॅप दिवस पर 15 फरवरी को दवा दी जाएगी।
आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि फरवरी 2016 में राज्य के 1.75 करोड़ बच्चों को कृमि मुक्त किया गया था। जबकि फरवरी 2017 में राज्य के 2.17 करोड़ बच्चों को कृमि मुक्त करने का लक्ष्य रखा गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमान के अनुसार भारत में एक से 14 वर्ष की आयु के 22 करोड़ बच्चे आँतों के कृमियों के संक्रमण के जोखिम में हैं। जो पोषक तत्व बच्चों के शरीर के लिए ज़रूरी होते हैं उन्हें कृमि खा जाते हैं। जिससे बच्चों में रक्त की हानि, कुपोषण और शरीर की बढ़त रुक जाने जैसी समस्याएं जन्म लेती हैं। कृमियों के अत्यधिक संक्रमण के कारण बच्चे इतने बीमार या थके हुए रहने लगते हैं और वे स्कूल में पढ़ाई पर ध्यान देने या स्कूल जाने में असमर्थ हो जाते हैं। आंगनवाड़ी और स्कूल अधारित कृमि मुक्ति एक सुरक्षित, सरल कम लागत वाला कार्यक्रम है जिससे असानी से करोड़ों बच्चों को कृमि मुक्त किया जा रहा है। अभियान में बच्चों को एल्बेंडाजोल गोली खाकर कृमि मुक्त किया जाता है। इस दवाई से उबकाई आना, उल्टी, पेट में हल्का दर्द, दस्त और थकावट जैसी सामान्य समस्याएं कुछेक बच्चों में देखने को मिल सकती हैं, खासकर ऐसे बच्चों में जिनमें कृमि संक्रमण काफी अधिक है। इसलिए बच्चों, परिजनों व अध्यापकों को घबराना नहीं चाहिए बल्कि बच्चों को इसकी पहले जानकारी देते हुए उन्हें दवा खाने के लिए प्रेरित करना चाहिए।
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें