लू-तापघात को लेकर स्वास्थ्य विभाग ने किया अलर्ट
रहें सचेत, खुद के साथ ही दूसरों का रखें ख्याल, विभाग ने अलग से वार्ड स्थापित किए
श्रीगंगानगर। अत्यधिक गर्मी के चलते लू-तापघात की बढ़ती आशंका को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने चिकित्सा अधिकारियों, कर्मचारियों व आमजन को विशेष एहतियात बरतने के निर्देश दिए हैं। अलर्ट जारी करते हुए सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने समस्त स्वास्थ्यकर्मियों को निर्देश दिए हैं कि वे स्वास्थ्य केन्द्रों पर उपस्थिति के साथ-साथ फील्ड में भी पर्याप्त नजर रखें। सभी संस्थान आवश्यक दवाओं का वांछित स्टॉक रखें एवं प्रचार-प्रसार के माध्यम से लोगों को लू-तापघात से बचाव एवं उपचार की जानकारी दें। वहीं जिला अस्पताल में अलग से वार्ड आरक्षित किया गया है, जबकि अन्य संस्थाओं पर अतिरिक्त आरक्षित बैड लगाए गए हैं। इस संबंध में गुरूवार को स्वास्थ्य विभाग ने पत्रकार वार्ता कर विस्तार से जानकारी दी। इस मौके पर सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला व सीओआईईसी विनोद बिश्रोई मौजूद रहे।
सीएमएचओ डॉ. बसंल ने बताया कि समस्त बीसीएमओ को गर्मी के मौसम को देखते हुए सभी आवश्यक व्यवस्थाएं चाक-चौबंद करने व चिकित्सकों-मैदानी कार्यकर्ताओं को अलर्ट करनेे के सख्त निर्देश दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि भीषण गर्मी व सूखे मौसम में विभाग को इससे प्रभावितों को तुरंत राहत देने के लिए पूर्व तैयारियां रखने के लिए भी पाबंद किया है। लू-तापघात के रोगियों के लिए आरक्षित बैड के साथ ही कूलर व शुद्ध पेयजल की व्यवस्था, संस्थान में रोगी के उपचार के लिए आपातकालीन किट में ओआरएस, रिगरलेकट्रेट (आरएल) फ्लूड एवं आवश्यक दवाइयां रखने के निर्देश दिए हैं। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला ने आमजन से अपील की है कि जहां तक संभव हो धूप में न निकलें। अगर धूप में जाना पड़े, तो शरीर पूर्ण तरह से ढक़ा हो। धूप में बाहर जाते समय हमेशा सफेद या हल्के रंग के ढीले व सूती वस्त्र पहनें। बहुत अधिक भीड़, गर्म व घुटन भरे कमरों में बैठने से बचें, रेल या बस आदि की यात्रा अत्यावश्यक होने पर ही करें। खाली पेट घर से बाहर न निकलें। भोजन करके एवं पानी पीने के बाद ही घर से बाहर निकलें। ऐसे मौसम में सड़े-गले फल व बासी सब्जियों का उपयोग ना करें। गर्मी मे हमेशा पानी अधिक मात्रा मे पिएं एवं नींबू पानी, नारियल पानी, ज्यूस आदि का प्रयोग करें।
लू-तापघात के लक्षण
सिर का भारीपन व सिरदर्द हो, अधिक प्यास लगना व शरीर में भारीपन के साथ थकावट लगे तो लू-तापघात हो सकता है। इसके अलावा जी मचलाना, सिर चकराना व शरीर का तापमान बढऩा, पसीना आना बंद होना, मुंह का लाल हो जाना व त्वचा का सूखा होना, अत्यधिक प्यास का लगना, बेहोश होना या बेहोशी लगना जैसी स्थिति होने पर लू-तापघात का प्रभाव हो सकता है। लू-तापघात से प्रभावित रोगी को तुरंत छायादार जगह पर कपड़े ढ़ीले कर लेटा दिया जाए एवं हवा का इन्तजाम करें। रोगी को होश मे आने पर उसे ठण्डे पेय पदार्थ व जीवन रक्षक घोल दें। रोगी के शरीर का ताप कम करने के लिए यदि सम्भव हो, तो उसे ठण्डे पानी से नहलाएं या उसके शरीर पर ठण्डे पानी की पट्टियां रखकर पूरे शरीर को ढंक दें। इस प्राथमिक उपचार के साथ-साथ प्रभावित मरीज को निकट स्वास्थ्य केन्द्र ले जाकर जांच करवाएं।

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