‘‘बेटे की चाह में मरवा रहे बेटे’’
-पीसीपीएनडीटी की बैठक में डिकॉय को लेकर चर्चा, मुखबिर योजना का होगा व्यापक प्रचार-प्रसार
श्रीगंगानगर। ‘अब तक हो रही डिकॉय कार्रवाई मे मुख्यत: सामने आया है कि अधिकांश लोग फर्जीवाड़ा कर गर्भपात करवा रहे हैं। ऐसे में लोग बेटे की चाह में बेटा ही मरवा रहे हैं। क्योंकि कथित रूप से लिंग जांच करने वाले हर मामले में बेटी ही बताते हैं ताकि उन्हें गर्भपात के भी पैसे मिल जाएं। आमजन को चाहिए कि वे इस मामले में संवेदना दिखाते हुए बेटे-बेटी का भेद खत्म करें और दोनों को ही इस दुनिया में आने का मौका दे।’ ये चर्चा मंगलवार को जिला स्वास्थ्य भवन में आयोजित हुई पीसीपीएनडीटी की बैठक में हुई। जिसमें सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉॅ. राजेश अरोड़ा, स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अनामिका गुप्ता, समाजसेविका मंजू गर्ग, विधि विशेषज्ञ सोफिया सिंह, पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीप सिंह एवं सीओआईईसी विनोद बिश्रोई मौजूद रहे।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने कहा कि ऐसे घिनौने कार्य के प्रति समाजसेवियों, विभिन्न संस्थाओं व संगठनों को चाहिए कि वे आमजन को इसके प्रति जागरूक करें। क्योंकि ऐसे कार्य के प्रति सामूहिक रूप से ही जागरूकता पैदा की जा सकती है। इस मौके पर मुखबिर योजना के तहत अढ़ाई लाख रूपए की जानकारी देते हुए बताया कि अब मुखबिर योजना के तहत अढ़ाई लाख रूपए की प्रोत्साहन राशि मिल रही है और इसकी जानकारी के लिए अब हर अटल सेवा केंद्र पर भी पोस्टर लगाए जाएंगे। बैठक में जिले में हुई पांचों डिकॉय कार्रवाई को लेकर विस्तार से चर्चा हुई। पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीप सिंह ने बताया कि दलाल अब लोगों को बेवकूफ बनाकर पैसे एंठने का कार्य कर रहे हैं। उन्हें गर्भ में पल रहे बच्चे से कोई वास्ता नहीं, बल्कि उन्हें केवल लिंग जांच के बदले और गर्भपात के लिए मिलने वाले पैसे से मतलब होता है। ऐसे में आमजन को चाहिए कि वे बेटा-बेटी का भेदभाव न करते हुए बच्चे को जन्म दें।
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