राखी के रक्षकों ने बढ़ाई ‘बहनों’ की संख्या
-बढ़ते अनुपात से बहनों की संख्या 951, डिकॉय का डंका तो कुछ जागरूकता का असर भी
श्रीगंगानगर। भाईयों के लिए खुशखबरी है कि उनकी कलाईयां अब सूनी नहीं रहेंगी। क्योंकि जिले में बहनों की संख्या भाईयों के बराबर आने की कगार पर है, जबकि जनगणना 2011 में बहनों की संख्या काफी कम थी। महज 854, यानी प्रति हजार पर 146 भाईयों की कलाई सुनी। लेकिन अब जिले पर से कन्या भू्रण हत्या का धुलता कलंक बहनों की संख्या में इजाफा कर रहा है। आज भाई-बहनों के इस राखी पर्व पर आपको जानकार खुशी होगी कि बहनों की संख्या में साल-दर-साल बढ़ती जा रही है और वर्ष 2017 में लिंगानुपात 951 पहुंच गया है। निश्चित ही यह सकारात्मक बदलाव चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से किए जा रहे जागरूकता प्रयासों, आमजन की सामूहिक भागीदारी, निजी संस्थाओं के प्रयास, मीडिया का सकारात्मक रूख और डिकॉय ऑपरेशनों की बदौलत आ रहा है जो लगातार जारी रहेगा। हालांकि शुक्रवार को हुए डिकॉय ऑपरेशन ने एक सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आखिर बेटा-बेटी का ऐसा भेद क्यों, कि लोग अब भी दूर-दराज इलाकों में जाकर अपनी नन्हीं जान, ‘किसी की बहन’ का कोख में कत्ल करवा रहे हैं।
पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीपसिंह बताते हैं कि हम हर संभव प्रयास कर ऐसे कुकर्मियों को पकड़ रहे हैं जो अभी भी भ्रूण लिंग जांच कर कन्या भ्रूण हत्या को बढ़ावा दे रहे हैं। लेकिन समाज के हर तबके को जागरूकता बढ़ाने में भागीदारी निभानी होगी, तभी बेटा-बेटी का भेद मिटेगा और कन्या भू्रण हत्या का कलंक पूर्णत: मिटेगा। उन्होंने बताया कि राज्य में अब तक 81 और जिले में सात डिकॉय हो चुके हैं, जबकि हमारी टीम पंजाब व हनुमानगढ़ में भी डिकॉय कर चुकी है और बेटियां बचाने के लिए यह अभियान जारी रहेगा। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि वर्ष 2014 में वरिष्ठ आईएएस नवीन जैन ने स्वास्थ्य विभाग की कमान संभाली और उन्होंने पीसीपीएनडीटी सैल को सशक्त करने के साथ ही मुखबिर को दी जाने वाली राशि में भी इजाफा करवाया। इसके बाद शुरु हुई डिकॉय ऑपरेशन की फेहरिस्त जो लगातार जारी है और निश्चित ही बहनों की संख्या बढ़ाने में इस कार्रवाई का अहम योगदान रहा है और कुकर्मी दलालों व चिकित्सकों में खौफ पैदा हुआ है। बिश्रोई ने बताया कि वर्ष 2011 जनगणना में बाल लिंगानुपात 854 था। पीसीटीएस आंकड़ों के अनुसार वर्ष 2012-13 में बेटियों की संख्या 888, वर्ष 2013-14 में 916, वर्ष 2014-15 में 917 और वर्ष 2015-16 में 933 रही। खुशी की बात है कि वर्ष 2016-17 में यह आंकड़ा 951 तक पहुंच गया।
कन्या भ्रूण हत्यारों पर बढ़ते प्रहार की फेहरिस्त
सीएमएचओ डॉ. नेरश बंसल ने बताया कि टीम ने पहली कार्रवाई कथित चिकित्सक सुखाडिय़ानगर निवासी कंवलजीत बराड़ पर की, जिसे अपंजीकृत मशीन के साथ पकड़ा। इसमें पंजाब की दलाल जनकरानी भी गिरफ्त में आई। दूसरी कार्रवाई दिसंबर 2016 लालगढिय़ा हॉस्पीटल में की, जहां से हॉस्पीटल के स्टाफ अमर मेघवाल को गिरफ्तार किया। तीसरी कार्रवाई 23 फरवरी 2017 को जिला मुख्यालय पर करते हुए पंजाब निवासी दलाल हरजिंद्र सिंह, धमेंद्र सिंह और टिब्बी निवासी पवन कुमार जाट को पकड़ा। बाद में तलाश कर मुख्य आरोपी रमन बतरा को पकडक़र जेल भेजा। चौथी कार्रवाई रायसिंहनगर में 17 मार्च 2017 को हुई, जिसके तार पंजाब तक पहुंचे। टीम ने रायसिंहनगर से पीछा करते हुए फिरोजपुर जिला मुख्यालय से पंजीकृत मशीन के साथ दलाल अमनदीप सिंह, संदीप कौर व चिकित्सक संदीप सिंह को गिरफ्तार किया। इस मामले में रायसिंहनगर के न्यू महावीर नर्सिंग होम के चिकित्सक अशोक गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया। पांचवी कार्रवाई छह अपे्रल 2017 को जिला मुख्यालय के अशोक नगर में हुई, जहां नर्स व कथित चिकित्सक रेखा, नेतेवाला निवासी दाई बिमलादेवी, दलाल राकेश मेघवाल व जयलाल मेघवाल और सहयोगी ममता उर्फ शांति सिंधी को गिरफ्तार कर जेल पहुंचाया। छठी कार्रवाई पड़ोसी राज्य पंजाब के मुक्तसर में की। जहां एमडी डॉक्टर श्याम सुंदर गोयल, दलाल सुखदेव सिंह, बलविंद्र सिंह व महिला दलाल रीटा को गिरफ्तार किया है। वहीं मुक्तसर स्थित बोम्बे सोनोग्राफी सेंटर से मशीन भी जब्त की। सातवीं कार्रवाई 17 जून को हनुमानगढ़ में करते हुए दलाल सुरजीत पुत्र रेशम सिंह निवासी अमरपुरा थेड़ी और लैब से दूसरे दलाल सतनात सिंह पुत्र गुरदीप सिंह रायसिख निवासी सुरेशिया को गिरफ्तार किया। तीसरा दलाल अमृतपाल इस मामले में वांछित है।
वर्जन -
‘कोख में कत्ल के धंधे को समूल नष्ट करने के लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है। डिकॉय कार्रवाइयों में टीम की हौसला अफजाई करते हुए ऐसे चिकित्सकों व दलालों का बहिष्कार करना चाहिए। आमजन को भी चाहिए कि वे मुखबिर बन ऐसे लोगों का बेनकाब करें। सरकार मुखबिर योजना के तहत गर्भवती, मुखबिर व सहयोगी को अढ़ाई लाख रुपए प्रोत्साहन राशि दे रही है।’
नवीन जैन, मिशन निदेशक, एनएचएम
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‘बहनों को बचाने में मीडिया, समाज, पुलिस व प्रशासन सबका साथ जरूरी है ताकि इस गौरखधंधे को पूर्णत: बंद करवाया जा सके। हमारी टीम लगातार ऐसे लोगों को पकडऩे में जुटी है। बस, इंतजार उस दिन का है, जब आमजन गंभीर होते हुए हुए ऐसे लोगों को पकड़वाने में हमारा साथ देने लग जाएंगे। निश्चित ही तब किसी भाई की कलाई सुनी नही रहेगी।’
रघुवीरसिंह, राज्य प्रभारी, पीसीपीएनडीटी सैल
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