सोमवार, 28 अगस्त 2017

एक-एक वंचित को चिन्हित कर राजश्री का लाभ दिलवाएं - कलेक्टर
-पीएचसी की बैठकों में शामिल होने के लिए बीडीओ होंगे पाबंद
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी राजश्री योजना को लेकर गंभीरता बरती जाए और जितने भी वंचित हैं उन्हें एक-एक चिन्हित कर लाभ दिलवाया जाए। इसी तरह जो बीडीओ प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की नियमित बैठकों में शामिल नहीं हो रहे या रूचि नहीं दिखा रहे उन्हें भी पाबंद किया जाएगा ताकि आमजन ज्यादा से ज्यादा सरकारी योजनाओं से लाभान्वित हो सकें। ये निर्देश जिला कलेक्टर ज्ञानाराम ने स्वास्थ्य विभाग की जिलास्तरीय बैठक में दिए हैं। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं व योजनाओं के प्रति किसी भी तरह की लापरवाही पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल व पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना सहित अन्य अधिकारी शामिल हुए।
जिला कलेक्टर ने कहा कि संस्थागत प्रसव की नियमित समीक्षा हो ताकि शत-प्रतिशत प्रसव संस्थान में ही हो। उन्होंने कहा कि आगामी दिनों में राज्यस्तरीय टीम संस्थागत प्रसव, मातृ सुरक्षा, एनीमिया व आयरन सुक्रोज आदि को लेकर निरीक्षण करेगी जिस दौरान हर व्यवस्था सुचारू मिलनी चाहिए। आईएमआर व एमएमआर को घटाने को लेकन विभाग के अधिकारियों से लेकर कर्मचारियों तक हर संभव प्रयास करें। उन्होंने स्वास्थ्य केंद्रों पर दवाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने के लिए संंबंधित अधिकारियों को पाबंद किया। मौसमी बीमारियों के संबंध में उन्होंने एंटी लार्वा गतिविधियां करने के आदेश दिए। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने कहा कि मुखबिर योजना को लेकर जिले की टीम बेहतर कार्य कर रही है लेकिन जरूरत है कि निचले स्तर से भी कन्या भू्रण हत्या व भू्रण लिंग जांच करने वाले लोगों की सूचना मिले। उन्होंने यह सूचना सीधे राज्य कंट्रोल रूम या जिला पीसीपीएनडीटी प्रभारी को देने के लिए कहा। जिला आईईसी प्रभारी विनोद बिश्रोई के राज्य में प्रथम रहने पर जिला कलेक्टर ज्ञानाराम, सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल व अन्य अधिकारियों ने पीठ थपथपाते हुए कहा कि अन्य अधिकारियों को भी प्रेरित करते हुए बेहतर कार्य करना चाहिए ताकि जिले का नाम रोशन हो। पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना ने कहा कि आशा व एएनएम सही कार्य नहीं कर रही है और न ही मरीजों का फॉलोअप हो रहा है। इस पर जिला कलेक्टर ने कहा कि किसी स्तर पर लापरवाही हो रही है तो संबंधित के खिलाफ कार्रवाई करें। पीएमओ ने अवगत करवाया कि जिला अस्पताल में 50 फीसदी से अधिक प्रसव दूर के गांवों से आ रहे हैं, जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। क्योंकि यदि उन्हें आस-पास के स्वास्थ्य केंद्रों पर ही बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले तो वे जिला अस्पताल नहंी आएंगी और न ही अस्पताल पर भार बढ़ेगा। इस पर जिला कलेक्टर ने ग्रामीण इलाके में स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने व जिला अस्पताल से बोझ कम करने के लिए सभी स्वास्थ्य अधिकारियों को पाबंद किया। बैठक में आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला, एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता व डिप्टी कंट्रोलर डॉ. प्रेम बजाज भी शामिल हुए। 
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