गुरुवार, 11 जनवरी 2018

30 साल के बाद 20 फीसदी शुगर व हाइपरटेंशन की चपेट में 
-महिला व पुरुष बराबर संख्या में, स्वास्थ्य विभाग कर रहा है 30 साल से ऊपर वालों की नि:शुल्क जांच
श्रीगंगानगर। इसे बिगड़ी दिनचर्या, बढ़ते तनाव या खानपान के प्रति लापरवाही का नतीजा कहें या कुछ और कि जिले के 20 फीसदी लोग शुगर व हाइपरटेंशन की चपेट में है। इस फेहरिस्त में 30 साल से ऊपर के महिला व पुरुष बराबर शामिल है। चिकित्सकों का मानना है कि शुगर व हाइपरटेंशन ही अन्य गंभीर बीमारियों की जनक है, लिहाजा समय रहते इनके प्रति सचेत होना बेहद जरूरी है। राहत की बात ये है कि स्वास्थ्य विभाग इन दिनों 30 साल से ऊपर के सभी लोगों की शुगर व हाइपरटेंशन की नि:शुल्क जांच करने में जुटा है। अभी तक चुनिंदा स्थलों पर शिविर लगाकर ये जांच की जा रही थी, लेकिन अब जिले के सभी लोगों की जांच की जाएगी। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि विभाग के एनसीडी अनुभाग की ओर से एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम के तहत आयोजित शिविरों में ये जांचे नि:शुल्क की जा रही हैं। अप्रेल से दिसंबर तक विभाग ने दो लाख 62 हजार तीन लोगों की जांच की, जिसमें 12 हजार 311 नए लोग संभावित शुगर पीडि़त मिले। इसमें शामिल 41 हजार 445 लोगों में पहले से ही शुगर की शिकायत थी, जिनकी फॉलोअप जांच की गई। इन्हीं दो लाख 62003 लोगों में से 12 हजार 635 लोग संभावित हाइपरटेंशन से पीडि़त मिले, जबकि 34698 लोग पहले से ही हाइपरटेंशन की चपेट में थे। यही वजह है कि विभाग लगातार हर संभव प्रयास कर नए लोगों को चिन्हित करने में जुटा है। विभाग ने जहां अपे्रल 2017 में शुरुआत केवल छह शिविरों से की, वहीं जुलाई-अगस्त तक प्रति माह करीब 60 शिविर आयोजित किए गए। इसके बाद सितंबर से दिसंबर 2017 के अंतराल में प्रतिमाह करीब 175 शिविर आयोजित किए गए। विभाग ने अपे्रल 2017 से दिसंबर 2017 तक 855 शिविर आयोजित किए। नए साल में नए मरीजों की तलाश में नए सिरे से प्रयास करते हुए विभाग लगातार शिविर आयोजित करेगा। अब 30 साल से ऊपर हर महिला व पुरुष की जांच करने का लक्ष्य रखा गया है। 
अब डोर-टू-डोर जांच शुरु
विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र में घर-घर जांच शुरु कर दी है। शुरुआत 17 जैड पीएचसी के अधीन आने वाले गांवों से की, जहां तकरीबन 60 फीसदी लोगों की जांच की जा चुकी है। वहीं डाबला, ऊड़सर, रिड़मलसर व ढाबां में डोर-टू-डोर जांच जारी है। मोनिटरिंग के लिए जीएनएम नवदीप सिंह एवं संदीप कुमार को लगाया गया है। वहीं जिलास्तर से डीपीओ डॉ. सोनिया चुघ व डीपीसी अर्श बराड़ निरीक्षण व समीक्षा कर रहे हैं। जल्द ही सभी सीएचसी व पीएचसी के अधीन आने वाले समस्त गांवों में जांच की जाएगी। साथ ही शहरी क्षेत्र का भी प्लान तैयार कर शुगर व हाइपरटेंशन की जांच की जाएगी। 
बीमारियों ही मुख्य वजह यही, हर दिन ‘कमाएं’ आधा घण्टा
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. जयंत नाथ बताते हैं कि बढ़ता तनाव शुगर व हाइपरटेंशन की मुख्य वजह है। जिसमें घरेलू, सामाजिक व कार्यस्थल का तनावपूर्ण माहौल शामिल हैं। वहीं अपराधिक तत्वों की गतिविधियों, घपले-घोटाले, देश की अस्थिर राजनीतिक व आर्थिक स्थिति, असुरक्षा का भाव आदि से भी गहरा तनाव पैदा होता है। इसके अलावा बिगड़ी दिनचर्या व खानपान के प्रति लापरवाही से भी शुगर व हाइपरटेंशन होता है। वे बताते हैं कि किडनी फेल होने, हार्ट अटैक, शारीरिक कमजोरी आदि बीमारियों के पीछे मुख्य कारण शुगर व हाइपरटेंशन ही है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते सचेत हो जाएं। भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हर संभव प्रयास कर आधा या एक घण्टे का समय अपने लिए अवश्य निकालें, जिसमें ध्यान, योग, पूजा आदि शामिल करते हुए शारीरिक व्यायाम भी करें। शांतिपूर्ण माहौल बनाएं। पैसे की बजाए, यही आधा या एक घण्टा आपकी असल कमाई होगी। डॉ. जयंतनाथ बताते हैं कि किसी भी कार्य को आफत की बजाए साधारण रूप से लें। अनावश्यक रूप से देश-दुनिया, धर्म-जाति या समाज की टेंशन न लें। बच्चों व परिवार के साथ खुशनुमा माहौल में समय बिताएं। कार्यस्थल पर भी खुशनुमा व मित्रवत व्यवहार पैदा करें ताकि इन बीमारियों की चपेट में आने से बच सकें।

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