-गांव-गांव, ढाणी-ढाणी हो रही है एंटीलार्वा गतिविधियां, आमजन भी बरते सावधानी
श्रीगंगानगर। मौसमी बीमारियों की रोकथाम को लेकर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने पूरी तैयारियां कर ली हैं। विभाग की ओर से प्राथमिक कदम उठाते हुए गांव-गांव, कस्बे-कस्बे व शहरी गली-मोहल्लों में नियमित एंटीलार्वा गतिविधियां की जा रही है। जहां भी मलेरिया या संभावित डेंगू आदि के मरीज सामने आ रहे हैं, वहां आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। विभागीय अधिकारी भी मौके पर पहुंच रहे हैं। इसके साथ ही जिले के सभी आठों बीसीएमओ को फिल्ड में रहकर नियमित मोनिटरिंग करने के लिए निर्देेशित किया गया है। महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ता, एमपीडब्ल्यू व अन्य स्टाफ गांवों-कस्बों में जाकर खड़े पानी में एमएलओ व गम्बूशिया मच्छलियां आदि डाल रहे हैं। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल के मुताबिक गांव छह एलएनपी, नेहरा नगर और वार्ड नंबर 13 में सर्वे कार्य पूरा हो चुका है।
डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला ने बताया कि शहरी क्षेत्र के सभी वार्डों में एंटीलार्वा गतिविधियां की जाएंगी और इस बार पार्षदों का भी सहयोग लिया जाएगा। बकायदा उन्हें बताकर और राय करके उनके क्षेत्र में टीमें जाएंगी। तीन सदस्यीय इस तरह की पांच टीमें शहर में कार्य कर रही हैं। जो ठहरे हुए पानी में एमएलओ और पीने के पानी भण्डारण में टेमीफोस डाले रहे हैं। डॉ. सिंगला ने बताया कि जिन क्षेत्रों में डेंगू मरीज मिलेंगे, वहां पायराथ्रम का छिडक़ाव तत्काल प्रभाव से करवाया जाएगा। वहीं जिला कलेक्टर पीसी किशन द्वारा शिक्षा विभाग के दोनों जिलास्तरीय अधिकारियों को पाबंद किया गया है कि वे स्कूलों में प्रार्थना सभाओं में डेंगू, मलेरिया आदि मौसमी बीमारियों के बारे में जानकारी दें। इसके साथ ही नगर परिषद को जिला प्रशासन की ओर से निर्देशित किया गया है कि जल्द ही शहरी क्षेत्र में फोगिंग करवाई जाए।
दो मरीज, दोनों नेगेटिव
मौसमी बीमारियों के साथ ही डेंगू लक्षण दिखने वाले मरीज भी सामने आए हैं। विभाग को अभी तक दो मरीजों की सूचना मिली, जिनकी तुरंत प्रभाव से जांच करवाई गई। दोनों ही मरीजों का एनएस वन और एलाइजा नेगेटिव आया है। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई के अनुसार हनुमानगढ़ जिले के गांव थालडक़ा निवासी कंवरलाल और पंजाब के अबोहर निवासी कृष्णादेवी को स्थानीय निजी चिकित्सालय में भर्ती करवाया गया था। जिनकी सूचना मिलने पर डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला स्वयं मौके पर जाकर मरीजों की स्थिति देखी और दोनों जांचे करवाई जो नेगेटिव पाई गईं। दोनों मरीजों के पलेटï्लेïट्स में गिरावट आई थी और डेंगू लक्षण लगने पर जांच करवाई गई लेकिन दोनों ही मरीज डेंगू नेगेटिव पाए गए। डॉ. सिंगला ने बताया कि इनके अलावा अभी कोई मरीज नहीं मिला है, लेकिन सामान्य बुखार आदि के मरीज सामने आ रहे हैं इसलिए सावधानी बरतने की आवश्यकता है।
आप भी रहें सतर्क, बरतें सावधानी
डॉ. सिंगला ने बताया कि मौसमी बीमारियों के इस दौर में खासकर मच्छरों से बचना बेहद जरूरी है, जो अपने स्तर पर की गई सावधानियों के जरिए बचा जा सकता है। जरूरी है कि इन दिनों पूरी बाजू के कपड़े पहने जाएं और साप्ताहिक रूप से गमलों से, गमलों की ट्रे और फ्रिज की ट्रे का पानी साफ किया जाए। जो पौधे पानी में लगते हैंं उनका पानी भी हर दूसरे दिन बदला जाए। बुखार होने पर के
वल पेरासिटामोल लें और तुरंत चिकित्सक को दिखाएं। झोलाछाप लोगों के पास न जाएं। नीम की पत्तियों का धुंंआ घर में फैलाएं, पानी के बर्तन को खुला न रखें, किचन एवं बाथरूम को सूखा रखें, कूलर का पानी सुबह-शाम बदलें। शरीर पर मच्छर को दूर रखने वाली क्रीम लगाएं। सोते समय मच्छरदानी का प्रयोग करें। घर के आस-पास मच्छर मारने वाली दवा का छिडक़ाव करवाएं। डेंगू के शुरुआती लक्षणों में रोगी को तेज ठंड लगती है, भूख कम लगती है, सिरदर्द, कमरदर्द, चमड़ी के नीचे लाल धब्बे होना और आंखों में तेज दर्द हो सकता है। इसके साथ ही उसे लगातार तेज बुखार रहता है। इसके अलावा, जोड़ों में दर्द, बेचैनी, उल्टियां, लो ब्लड प्रेशर जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं। चूंकि डेंगू वायरस के कारण होता है इसलिए इसका उपचार किसी एक तरह से संभव नहीं है। ऐसे में जरूरी है कि इन लक्षणों को पहचानकर व्यक्ति बिना देरी के चिकित्सक से मिले और इसका उपचार करवाए। इस दौरान अधिक से अधिक पानी व पेय पदार्थ लेना चाहिए और आराम करना जरूरी है।








