‘‘दस्त से होने वाली मासूमों की मौत को रोका जा सकता है’’
-जिला प्रमुख प्रियंका श्योराण ने की ‘गहन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा’ की शुरुआत , नौ जून तक चलेगा
श्रीगंगानगर। ‘‘पांच वर्ष तक की आयु में बच्चों की होने वाली असमय मौत के पीछे एक बड़ा कारण दस्त व निर्जलीकरण भी है और यदि परिजन, समाज व हम सामूहिक रूप से प्रयास करें तो मासूमों की इन मौतों को रोका जा सकता है। बस जरूरत है हमें जागरूक होने की एवं अपने आस-पास के लोगों को जागरूक करने की, तभी ये प्रयास सार्थक होंगे।’’ ये विचार सोमवार को जिला प्रमुख प्रियंका श्योराण ने रखे, जो ‘गहन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा’ की विधिवत शुभांरभ अवसर पर संबोधित कर रही थीं। इसके साथ ही नौ जून तक चलने वाले इस पखवाड़े की शुरुआत पूरे जिले में एक साथ हुई।
जिला प्रमुख प्रियंका श्योराण ने कहा कि गर्मी के मौसम में बच्चों को बीमारियों से बचाने के लिए स्वास्थ्य विभाग ने गहन दस्त नियंत्रण पखवाड़ा शुरू किया है। इस दौरान पांच वर्ष तक के बच्चों वाले घरों में आशा सहयोगिनियों के जरिए ओआरएस पैकेट पहुंचाए जाएंगे। वहीं जरूरत होने पर जिंक गोलियां भी दी जाएंगी। सभी चिकित्सा संस्थानों व आंगनबाड़ी केंद्रों पर ओरआएस व जिंक कॉर्नर स्थापित कर घोल तैयार करने व उपचोग करने की विधि परिजनों को बताई जाएगी। उन्होंने कहा कि अभियान सामूहिक जिम्मेदारी है जिसमें हर किसी का सहयोग अपेक्षित है। उन्होंने बताया कि पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों में दस्त तथा कुपोषण के कारण होने वाली मृत्यु दर में कमी लाने व आमजन को जागरूक के उद्देश्य से गहन दस्त नियंत्रण अभियान शुरु किया गया। आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि इस दौरान जनसमुदाय को स्वच्छता, पौष्टिक आहार, हाथ धोने के सही तरीके बताने के साथ ही चिकित्सा संस्थानों की ओपीडी/आईपीडी व आंगनबाडी केंद्रों पर ओआरएस व जिंक कॉर्नर की स्थापित किए गए हैं। दस्त एवं कुपोषण से होने वाली बीमारियों के प्रति आमजन में जनजागृति लाने के लिए जनप्रतिनिधियों, आशा, एएनएम, व आंगनबाडी कार्यकर्ताओं के सहयोग से अपने-अपने क्षेत्र में व्यापक प्रचार प्रसार करवाया जाएगा। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि दस्त व निर्जलीकरण से होने वाली मृत्यु को ओआरएस व जिंक की गोली के साथ ही पर्याप्त पोषण देकर रोका जा सकता है। साथ ही दस्त की रोकथाम के लिए साफ पानी पीना, समय-समय पर हाथों को साफ पानी व साबुन से धोना, स्वच्छता, टीकाकरण, स्तनपान व पोषण का अहम योगदान होता है।













