शुक्रवार, 22 दिसंबर 2017

भूप कॉलोनी और नगर परिषद में लगा स्वास्थ्य शिविर
-भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना व पीएमएसएमए की दी जानकारी
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से शुक्रवार को नगर परिषद में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। इसी तरह भूप कॉलोनी स्थित वीर सावरकर पार्क में शिविर लगाकर आमजन को लाभान्वित किया गया। शिविरों में एनसीडी व एनयूएचएम की टीम ने अपनी सेवाएं दी। वहीं आमजन की शुगर, उच्च रक्तचाप व ब्लड गु्रप की जांच की गई। इस दौरान विभागीय योजनाओं मसलन भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस, राजश्री योजना आदि के बारे में आमजन को जागरूक किया गया। खासकर, गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं व योजनाओं के बारे में जागरूक किया गया। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि नगर परिषद में तीन दिवसीय शिविर बुधवार से शुरु किया गया, जिसमें अधिकारियों व कर्मचारियों की जांच की गई। नगर परिषद में हुई जांच में 176 में से 36 को उच्च रक्तचाप की शिकायत मिली, जिसे गंभीरता से लेते हुए विभाग ने सभी की काउंसलिंग करते हुए नियमित व्यवहार में बदलाव की सलाह दी। साथ ही कई कार्मिकों को अन्य जांच के लिए जिला अस्पताल में रैफर किया। यहां नवदीप सिंह, संदीप कुमार, जयकिशन व पूजा तंवर ने सेवाएं दी। भूप कॉलोनी में 250 लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दी गई। जिनमें 102 की शुगर व उच्चरक्तचाप की जांच की गई, जिनमें एक को शुगर व आठ को उच्चरक्तचाप की शिकायत मिली। यहां गगनदीप, प्रतिभा, ज्योति, नेहा कुमारी, इंद्रा रानी व मनोज कुमार ने सेवाएं दी। वहीं चिकित्सक राहुल कोशिक व डॉ. श्याम सुंदर ने अपनी सेवाएं दी। शिविरों की मोनिटरिंग अर्श बराड़ व मनोज प्रजापति ने की। 

बुधवार, 20 दिसंबर 2017

नगर परिषद कार्मिकों की हुई स्वास्थ्य जांच
- स्वास्थ्य विभाग ने लगाया शिविर, 98 की जांच, 22 को उच्च रक्तचाप  
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुधवार को नगर परिषद परिसर में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। इस दौरान नगर परिषद के 98 अधिकारियों व कर्मचारियों की जांच की गई। बुधवार को विभागीय कार्मिकों की जांच हुई, जबकि गुरुवार सफाई कार्मिकों की जांच होगी। तीन दिवसीय इस शिविर में नगर परिषद के करीब एक हजार अधिकारियों व कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। विभाग के एनसीडी अनुभाग की ओर से लगाए जाने वाले इस शिविर की मोनिटरिंग अर्ष बराड़ कर रहे हैं। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि शिविर में 98 में से 22 कार्मिकों को संभावित उच्च रक्तचाप (हाईपरटेंशन) की शिकायत मिली, जिनकी विभाग की ओर से काउंसलिंग की गई। वहीं दो कार्मिक शुगर संभावित मिले। सभी कार्मिकों को काउंसलिंग कर उन्हें नियमित दिनचर्या में विशेष एहतियात की सलाह दी गई। व्यायाम के साथ ही बेहतर खान-पान की सलाह देते हुए उन्हें नियमित जांच के लिए भी कहा गया। वहीं सभी कार्मिकों का ब्लड गु्रप जांचा गया। शिविर में अनुभाग के नवदीप सिंह, संदीप कुमार, प्रतिभा, पूजा तंवर, काउंसलर गगनदीप कौर व एलटी जय किशन ने सेवाएं दी। अनुभाग के अर्ष बराड़ एवं नवल योगी ने मोनिटरिंग के साथ ही व्यवस्थाएं संभाली। गुरुवार व शुक्रवार को भी विभाग की ओर से शिविर लगाकर कार्मिकों की जांच की जाएगी।

मंगलवार, 19 दिसंबर 2017

घर गिरवी रखना पड़ता, कर्जा लेना पड़ता ... बचा लिया बीएसबीवाई ने
-भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के जरिए निजी व सरकारी अस्पतालों में लाभान्वित हो रहे मरीज
श्रीगंगानगर। घर के बाहर धूप सेक रहे कालासिंह निश्चिंता की मुस्कान लिए अपने पोते के साथ मस्ती कर रहे हैं। हार्ट की बीमारी की चपेट में आए तीन ई छोटी निवासी कालासिंह कई दिन शहर के प्रतिष्ठित हॉस्पीटल में ऑपरेशन व सफल उपचार करवाने के बाद घर लौटे हैं। बेशक, वे आज बेहद खुश नजर आ रहे हैं, लेकिन विगत दिनों उन पर बीमारी के साथ ही परेशानियों का बोझ आ पड़ा था, क्योंकि इलाज पर करीब डेढ़ लाख रुपए खर्च आने की जानकारी उन्हें डॉक्टर के जरिए मिली। हालांकि ऐन मौके पर उन्हें राज्य सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना ने न केवल जिंदगी लौटाई बल्कि उन्हें कर्ज लेने से भी बचा लिया। योजना के जरिए उनका नि:शुल्क उपचार हुआ और वे आज पूर्णत: स्वस्थ हैं। वे कहते नहीं थकते कि सरकार ने यह योजना शुरु न की होती तो आज कर्ज तले दबे होते या इलाज मयस्सर न हो पाता। ऐसी ही अनेक दास्तां उन परिवारों की हैं, जो भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाभान्वित हो रहे हैं। निश्चित ही भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के जरिए लाभार्थी परिवार नि:शुल्क इलाज भी ले पा रहे हैं, वहीं बीमारी के कारण होने वाला खर्च भी बच रहा है, जिसके चलते उन्हें कर्ज से मुक्ति मिली है। 
   
कालासिंह की तरह चेक केरा निवासी दुलीचंद की दास्तां भी बेहद मार्मिक है। एक दुर्घटना में पैर की चोट के बाद हुए प्लास्टर से उनके पैर में गलन हो गई। पैर पूरी तरह गलने लगा और बेहद खराब स्थिति में आ गया। मिस्त्री का काम करने वाले दुलीचंद के पास इतना पैसा न था कि वे किसी बड़े हॉस्पीटल में इलाज करवा पाते। घर में माता-पिता, पत्नी और दो बच्चों की जिम्मेदारी भी उन पर थी। ऐसे में उन्हें भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना ने राहत दिलाई। उनका न केवल नि:शुल्क ऑपरेशन हुआ बल्कि उनकी बीमारी पर किसी तरह का कोई खर्च नहीं आया। मुस्कुराते हुए वे बताते हैं कि मेरे लिए यह सहायता बहुत बड़ी है, अन्यथा घर चलाने के साथ ही बीमारी के लिए बड़ा कर्जा लेना पड़ता। कमोबेश, ऐसी ही कहानी मणकिसर निवासी बनवारीगर पुत्र भगवानगर की है। 50 वर्षीय बनवारीगर की एक दुर्घटना में पैर की हड्डी टूट गई थी और लंबे समय से सही इलाज नहीं हो पा रहा था। उन्हें किसी ने जानकारी दी कि श्रीगंगानगर के एक प्रतिष्ठित निजी हॉस्पीटल में हड्डी जोड़ का बेहतरीन इलाज होता है। लेकिन ज्यादा खर्च और कर्जे का डर उनके लिए परेशानी लेकर आया। ऐसे में उन्होंने हॉस्पीटल से जानकारी ली तो पता चला कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के जरिए उनका नि:शुल्क उपचार हो सकता है। हॉस्पीटल में भर्ती होने के बाद पूर्णत: नि:शुल्क उपचार के बाद बनवारीगर अब ठीक हैं। उनके पुत्र पंकजगर कहते हैं कि योजना उनके लिए वरदान साबित हुई है अन्यथा उन्हें कर्जा लेना ही पड़ता। उम्रदराज मरीजों के लिए ही नहीं बल्कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना बच्चों के लिए मुफिद साबित हो रही है। इसी हॉस्पीटल में भर्ती नौ वर्षीय जपनीत सिंह के माँ परमजीत कौर बताती हैं कि जपनीत की एक दुर्घटना में पैर की हड्डी टूट गई थी और इलाज महंगा होना तय था। पिता मजदूरी करते हैं, ऐसे में निजी हॉस्पीटल का सोचते ही डर लगा लेकिन जब उन्हें पता चला कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत उनका नि:शुल्क इलाज हो जाएगा तो उन्हें बेहद राहत महसूस की। हॉस्पीटल में डरते-डरते भर्ती करवाया, लेकिन अब पता चला कि वाकई यहां किसी तरह का कोई खर्च नहीं है और ऑपरेशन, जांच व दवाएं सब कुछ योजना के तहत नि:शुल्क है। हम सरकार का दिल से धन्यवाद देते हैं कि उन्होंने ऐसी महत्वाकांक्षी योजना जरूरतमंद लोगों के लिए शुरू की है। जिससे न केवल उनका उपचार हो रहा है बल्कि उनकी आर्थिक स्थिति भी सुदृढ़ हुई है, क्योंकि बीमारियों पर लगने वाला खर्च काफी ज्यादा होता है। हार्ट स्पेशलिस्ट हॉस्पीटल में उपचार ले रहे ज्ञानीराम ड्राइवर हैं, जिनकी विगत दिनों अचानक तबीयत बिगड़ी तो पता चला कि उन्हें दिल की बीमारी है। एक निजी हॉस्पीटल में जांच करवाते वक्त पता चला कि इलाज पर करीब एक लाख रुपए तक का खर्च आएगा और उसके साथ ही परिवारजनों के होश उड़ गए। बकौल ज्ञानीराम, इस बीमारी से पहले भी एक भाई की मौत हो चुकी, क्योंकि इलाज के लिए पैसा नहीं था। लेकिन किसी ने जानकारी दी कि अब डरने की जरूरत नहीं है, सरकार ने ऐसी योजना शुरु की है जिससे पूर्णत: नि:शुल्क इलाज होता है वो भी निजी हॉस्पीटल में। एकबारगी तो यकीन नहीं हुआ लेकिन जब हॉस्पीटल में भर्ती तो सच पता चला कि वाकई सब नि:शुल्क है। ऑपरेशन के बाद अब ज्ञानीराम स्वस्थ हैं और खुश भी। क्योंकि न केवल उनका इलाज हुआ बल्कि वे कर्ज लेने से भी बच गए। 
स्वास्थ्य विभाग जांचेगा नगर परिषद कार्मिकों का स्वास्थ्य
- नगर परिषद में तीन दिवसीय शिविर आज से, करीब एक हजार कार्मिकों की होगी जांच
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से बुधवार को नगर परिषद परिसर में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया जाएगा। तीन दिवसीय इस शिविर में नगर परिषद के करीब एक हजार अधिकारियों व कर्मचारियों के स्वास्थ्य की जांच की जाएगी। विभाग के एनसीडी अनुभाग की ओर से लगाए जाने वाले इस शिविर में वरिष्ठ अधिकारियों सहित सफाई कार्मिकों तक की स्वास्थ्य जांच हागी। शिविर की मोनिटरिंग अनुभाग के अर्ष बराड़ करेंगे। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि नगर परिषद में लगने वाले शिविर में शुगर, उच्चरक्त चाप और ब्लड गु्रप की जांच की जाएगी। इस दौरान नए मरीजों की विभाग की ओर से काउंसलिंग भी होगी। बुधवार से शुक्रवार तक लगने वाले इस शिविर में अनुभाग के नवदीप सिंह, संदीप कुमार, प्रतिभा,  पूजा तंवर, काउंसलर गगनदीप कौर व एलटी जय किशन सेवाएं देंगे। वहीं अर्श बराड़ मोनिटरिंग कर नगर परिषद व विभाग के बीच समन्वय बनाएंगे। 

शुक्रवार, 15 दिसंबर 2017

छाई रही स्वास्थ्य विभाग की प्रदर्शनी
-लगाया एनसीडी शिविर, बेटी बचाओ पर प्रश्रोत्तरी प्रतियोगिता, बच्चे पुरस्कृत
श्रीगंगानगर। रामलीला ग्राउंड में राज्य सरकार के चार वर्ष पूर्ण करने के उपलक्ष में आयोजित समारोह में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की प्रदर्शनी छाई रही। इस दौरान विभाग ने एनसीडी शिविर लगाकर लोगों का स्वास्थ्य भी जांचा। वहीं बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत महिला एवं बाल विकास विभाग के संयुक्त तत्वावधान में प्रश्रोत्तरी प्रतियोगिता का आयोजन कर बच्चों को मौके पर ही पुरस्कृत किया। विभाग की ओर से बेटी बचाओ अभियान में योगदान व जागरूकता के लिए आमजन से हस्ताक्षर भी करवाए गए। जहां कार्यक्रम में पहुंचे सभी अतिथियों ने भी हस्ताक्षर कर अपना योगदान दिया। 

प्रदर्शनी के दौरान विजेता रहे स्टूडेंट्स को सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, आईसीडीएस अधिकारी विजय कुमार, पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीप सिंह, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई, आशा प्रभारी रायसिंह सहारण, डॉ. पवन शर्मा, राकेश सचदेवा व डीपीएम विपुल गोयल ने पुरस्कृत किया। शिविर में आमजन की शुगर व बीपी चेक किया गया, जहां 207 लोगों ने लाभ लिया एवं कैंसर संबंधी जांच कर जरूरतनुसार संभावित मरीज को उच्च संस्थान के लिए रैफर किया गया। प्रदर्शनी में राजश्री योजना, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, मुखबिर योजना, राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम, टीबी, एड्स, एनसीडी, स्तन कैंसर, बालिका संबंल योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस, डॉटर्स आर प्रीसियस, शुगर, डेंगू, मलेरिया आदि के बारे में जागरूक किया गया। प्रदर्शनी का अवलोकन कर मंत्री सुरेंद्रपाल सिंह टीटी, सांसद निहालचंद मेघवाल, जिला कलेक्टर ज्ञानाराम सहित अन्य अतिथियों ने विभाग की ओर से किए गए डिकॉय ऑपरेशनों की सराहना करते हुए बेटी बचाओ अभियान में इसे उल्लेखनीय उपलब्धि बताया। इस दौरान डॉ. सोनिया चुघ, डॉ. प्रमोद चौधरी, शोभा ओस्तवाल, अर्ष बराड़, नवल योगी, सुरेश भादू, संदीप कौर, रणजीत, रमन गुंबर, संतोख सिंह आदि ने अपनी सेवाएं दी। 

सोमवार, 11 दिसंबर 2017

जनवरी के बाद नहीं मिलेगी शुभलक्ष्मी योजना की बकाया राशि
-बेटी जन्म को प्रोत्साहन के लिए राज्य सरकार अब राजश्री योजना के जरिए दे रही 50 हजार रुपए 
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार द्वारा चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के माध्यम से चलाई जा रही मुख्यमंत्री शुभलक्ष्मी योजना को 30 मई 2016 से बंद कर दी गई है, जबकि अब योजना में परिवर्तन कर राजश्री योजना के जरिए बालिकाओं का लाभ दिया जा रहा है। हालांकि जिन बालिकाओं ने शुभलक्ष्मी योजना के तहत प्रथम किश्त ली थी उन्हें दूसरा व तीसरा लाभ बालिका के एक वर्ष पर पूर्ण टीकाकरण एवं जीवित होने के प्रमाण पत्र प्रस्तुत करने पर बालिका के निवास स्थान के स्थानीय राजकीय स्वास्थ्य केंद्र से दिया जा रहा है। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि शुभ लक्ष्मी योजना के तहत प्रथम किश्त के लाभार्थियों को राज्य सरकार की ओर से 31 जनवरी 2018 तक का अंतिम अवसर दिया जा रहा है। इस दौरान नियमानुसार आवेदन निवास स्थान के नजदीकी राजकीय चिकित्सा केंद्र पर किया जा रहा है। इसके बाद भी यदि कोई आवेदन नहीं आता है तो सरकार की ओर से भुगतान नहीं किया जाएगा। उन्होंने बताया कि आमजन से अपील के साथ ही विभागीय स्तर पर प्रयास किए जा रहे हैं ताकि वंचित को लाभ मिले। वहीं आशाओं व एएनएम को निर्देशित किया गया है कि ऐसे वंचित लाभार्थियों को सूचित कर उन्हें किश्त लेने के लिए प्रेरित करें। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि वर्तमान में राज्य सरकार की ओर से बेटी जन्म को प्रोत्साहन देने के लिए राजश्री योजना संचालित की जा रही है। जिसके तहत राजकीय अथवा अधिस्वीकृत चिकित्सा संस्थान में जन्म लेने वाली बालिकाओं को जन्म पर 2500 रुपए और उसकी प्रथम वर्षगांठ पर पूर्ण टीकाकरण होने के बाद 2500 रुपए दिए जाते हैं। इसके बाद राजकीय विद्यालय में प्रथम कक्षा में प्रवेश लेने पर चार हजार रुपए, राजकीय विद्यालय में कक्षा छह में प्रवेश लेने पर पांच हजार रुपए और 10 में प्रवेश लेने पर 11 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। इसके बाद 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को 25 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। इस तरह कुल पचास हजार रुपए दिए जा रहे हैं। योजना का लाभ लेने के लिए हितग्राही का भामाशाह कार्ड होना अनिवार्य है।

शनिवार, 9 दिसंबर 2017

जिला मुख्यालय  से दूरवर्ती क्षेत्र तक सुरक्षित हुआ मातृत्व
हर माह की नौ तारीख को मनाया जा रहा सुरक्षित मातृत्व दिवस, निजी चिकित्सक भी दे रहे सेवाएं
श्रीगंगानगर। शनिवार का दिन गर्भवती महिलाओं के नाम रहा। स्वास्थ्य विभाग ने गर्भवती महिलाओं को जहां नि:शुल्क स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया करवाई, वहीं उन्हें जागरूक भी किया। विभाग हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत यह खास दिवस मना रहा है। जिसमें सरकारी चिकित्सकों के साथ ही निजी चिकित्सक भी अपनी नि:शुल्क सेवाएं दे रहे हैं। शनिवार को आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, डीपीएम विपुल गोयल सहित अन्य अधिकारियों ने निरीक्षण कर अभियान के तहत दी जा रही सुविधाओं का जायजा लिया।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि शनिवार को जिला अस्तपाल, शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित सभी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर पीएमएसएमए मनाया गया। इस दौरान गर्भवती महिलाओं की नि:शुक जांच व उपचार किया गया। उन्हें गर्भकाल के दौरान रखी जाने वाली सावधानियों आदि के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए जागरूक भी किया गया। उन्होंने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस हर माह की नौ तारीख को मनाया जा रहा है। इस दौरान स्वास्थ्य केंद्रों पर सुबह नौ बजे से तीन बजे तक महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। यहां निजी एवं राजकीय चिकित्सक नि:शुल्क सेवाएं देते हैं। अभियान के तहत शनिवार को घड़साना से लेकर जिला मुख्यालय पर तक विभागीय अधिकारियों व कर्मचारियों ने सतर्कता बरतते हुए बखूबी सराहनीय सेवाएं दी। निजी चिकित्सक भी सुबह नौ बजे से तीन बजे तक सेवाएं देने पहुंचे। डॉ. बंसल ने जिले के अन्य चिकित्सकों से भी अपील की है कि वे भी इस पावन कार्य में अपनी भागीदारी निभाएं ताकि देश का भविष्य सुरक्षित हो सके। क्योंकि गर्भवती महिलाओं को यदि बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं व देखभाल मिलेंगी तो बच्चे स्वस्थ पैदा होंगे और देश के निर्माण में अहम भूमिका अदा कर सकेंगे। 

शुक्रवार, 8 दिसंबर 2017

मिट रहा मर्ज बिना किसी कर्ज, अब दो वर्ष नहीं होगा कोई खर्च
-भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का एश्योरेंस कंपनी से हुआ एमओयू, 311 नए पैकेज शामिल
श्रीगंगानगर। जनहितेषी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में शामिल लाभार्थियों के लिए अच्छी खबर है। सरकार व एश्योरेंस कंपनी के बीच इस बार दो वर्ष का एमओयू हुआ है यानि अब दो वर्षों तक इलाज का कोई फिक्र नहीं। वहीं नए एमओयू में कुछ ऐसी बीमारियों को भी शामिल किया है जो अब तक इस योजना में शामिल नहीं थी। इस संबंध में जयपुर के स्वास्थ्य भवन में प्रमुख शासन सचिव वीनू गुप्ता की उपस्थिति में स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेंसी के मुख्य कार्यकारी अधिकारी नवीन जैन एवं न्यू इण्डिया एश्योरेंस कम्पनी के क्षेत्रीय प्रबंधक संजय उप्पल ने आगामी दो वर्षों के लिए अनुबंध पर हस्ताक्षर किए हैं।
योजना के सीईओ नवीन जैन ने बताया कि इस एमओयू के तहत प्रति परिवार प्रतिवर्ष 1263 रुपए की राशि के प्रीमियम का भुगतान किया जाएगा। प्रदेश में इस समय लगभग एक करोड़ परिवार बीएसबीवाई से लाभान्वित हो रहे हैं, इस लिहाज से प्रतिवर्ष राज्य सरकार प्रीमियम के रूप में 1263 करोड़ रुपए का भुगतान किया जाएगा। करारोपण सहित यह राशि लगभग 1500 करोड़ रुपए होगी। उन्होंने बताया कि 13 दिसम्बर, 2015 से संचालित योजना अपने दो वर्ष पूर्ण करने वाली है। योजना के माध्यम से लगभग 974 करोड़ से अधिक रुपए की राशि के 17 लाख 73 हजार क्लेम एनलिस्ट कर 16 लाख मरीजों को लाभान्वित किया जा चुका है। प्रदेश के लगभग एक करोड़ परिवारों को इण्डोर उपचार के दौरान 30 हजार से 3 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर प्रदान कर कैशलेस उपचार की सुविधा उपलब्ध 501 राजकीय चिकित्सा संस्थानों एवं सूचीबद्ध 778 निजी चिकित्सालयों के माध्यम से प्रदान की जा रही है। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि हमारे जिले के श्री बाला जी हॉस्पीटल, तपोवन संस्थान, श्री ओम सांई मल्टी स्पलेशलिस्ट हॉस्पीटल, लालगढिय़ा हॉस्पीटल, आंचल हॉस्पीटल, मेक्स केयर हॉस्पीटल, श्री जगदंबा आई हॉस्पीटल, पेड़ीवाल नर्सिंग होम, जुबिन हॉस्पीटल, सिहाग हॉस्पीटल, नागपाल हॉस्पीटल, बालाजी हॉस्पीटल एण्ड डेंटल केयर, रणवा हॉस्पीटल, थरेजा हॉस्पीटल, राजोतिया हॉस्पीटल, अर्पण हॉस्पीटल, बंसल सुपरस्पेशलिस्ट हॉस्पीटल, बहल हॉस्पीटल, दीवोज हॉस्पीटल, आस्था किडनी केयर, सुरेंद्रा जनरल हॉस्पीटल, आदित्य नर्सिंग होम, एंजल हॉस्पीटल, जयपुर मदर एण्ड चाइल्ड हॉस्पीटल, आदर्श नर्सिंग होम, टांटिया जनरल हॉस्पीटल, गौड़ हॉस्पीटल, नयन मंदिर आई हॉस्पीटल, सत्यम हॉस्पीटल, शाह सतनाम जी जनरल हॉस्पीटल सहित रायसिंहनगर का अग्रवाल नर्सिंग होम, श्रीकरणपुर का बेनीवाल हॉस्पीटल, घड़साना का शांति नर्सिंग होम एवं बुडï्ढ़ा जोहड़ स्थित शहीद बाई सुखा सिंह मेहताब सिंह हॉस्पीटल योजना के तहत शामिल हैं। इसी तरह जिला अस्पताल सहित जिले के 12 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भी योजना में शामिल हैं।
कल गर्भवती महिलाओं को मिलेगी स्वास्थ्य सुरक्षा
-प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाएगा नौ दिसंबर को
श्रीगंगानगर। केंद्र स्तर पर चलाए जा रहे प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत जिले में शनिवार को गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाई जाएंगी। इस दौरान गर्भवती महिलाओं की न केवल जांच व उपचार होगा बल्कि उन्हें गर्भकाल के दौरान रखी जाने वाली सावधानियों आदि के बारे में विस्तार से जानकारी देते हुए उन्हें जागरूक भी किया जाएगा। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस हर माह की नौ तारीख को मनाया जा रहा है। इस दौरान जिला चिकित्सालय सहित शहरी व ग्रामीण प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह नौ बजे से तीन बजे तक महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। यहां निजी एवं राजकीय चिकित्सक नि:शुल्क सेवाएं देते हैं। श्रीगंगानगर जिला इस कार्यक्रम में उत्कृष्ट सेवाएं देकर राज्य में अव्वल रहा है और आगामी दिनों में भी बेहतर सेवाएं जारी रहेंगी। 

गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

जीवन के साथ ही नासाज ‘दिल’ लेकर पैदा हो रहे मासूम
आरबीएसके टीम निभा रही दिल का रिश्ता, दूरवर्ती क्षेत्र में दिल की बीमारी से जूझ रहे थे मासूम, आरबीएसके ने लौटाई जिंदगी
-स्वास्थ्य विभाग ने 10 बच्चों का करवाया सफल नि:शुल्क ऑपरेशन, सात का जल्द होगा ऑपरेशन

श्रीगंगानगर। जिले के आखिरी क्षोर पर बसे घड़साना खण्ड के अनेक मासूम जन्मजात हृद्य रोग से जूझ रहे हैं, यानि वे जीवन के साथ ही दिल की बीमारी लेकर पैदा हुए। हालांकि अब राहत की बात ये है कि इनके के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम वरदान साबित हुआ है। आरबीएसके टीम यहां हर दिन गांव-गांव जाकर आंनगबाड़ी व स्कूलों में बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर रही है। टीम ने न केवल ऐसे बच्चों को तलाश किया बल्कि उनका उच्च चिकित्सा संस्थानों में पूर्णत: नि:शुल्क उपचार भी करवाया। बहरहाल, यहां चिन्हित 46 बच्चों में से 10 बच्चों का सफल ऑपरेशन करवाया गया है और चार को दवाओं के जरिए राहत दिलाई गई है। जल्द ही सात बच्चों का जयपुर में ऑपरेशन करवाया जाएगा, वहीं गुरुवार को रोजड़ी निवासी 14 वर्षीय मनफूल पुत्र लालूराम की फाइल तैयार कर जयपुर भेजी गई है, जिसका शुक्र-शनिवार को ऑपरेशन करवाया जाएगा। 
सभी बच्चों की दास्तां भी बेहद गंभीर है। नन्हीं नेहा के पिता मुकेश ने कभी सोचा भी न था कि इतनी छोटी सी बच्ची को भी दिल की गंभीर बीमारी हो सकती है। एक एनएसएम आंगनबाड़ी केंद्र पर चिन्हित हुई नेहा के दिल में छेद था। सांस लेने से शुरु हुई दिक्कत दिल की गंभीर बीमारी तक पहुंची तो उपचार मुश्किल लग रहा था,  क्योंकि इस पर करीब चार लाख रुपए तक का खर्च आता, जो इस परिवार के लिए संभव न था। इस बीच आरबीएसके टीम के डॉ. कमल व डॉ. ममता ने बच्ची को चिन्हित किया और उसका जयपुर के प्रतिष्ठित हॉस्पीटल में नि:शुल्क उपचार करवाया। इसी तरह नाहरांवाली के राजकीय विद्यालय में पढऩे वाले पंकज पुत्र श्रवण कुमार को दिल की बीमारी थी, जिस पर लाखों का खर्च आना तय था। लेकिन आरबीएसके पंकज व उसके परिजनों के लिए वरदान साबित हुई और जयपुर के नारायणा जैसे उच्च संस्थान में नि:शुल्क व सफल ऑपरेशन हुआ। पतरोड़ा निवासी कमलादेवी व उसके पति रामस्वरूप ने कभी सोचा भी न था कि उनका 13 वर्षीय बेटा केवल कुमार दिल की बीमारी से पीडि़त हो सकता है। लेकिन जब उन्हें मालूम हुआ कि केवल के दिल में छेद है तो उनके पैरों तले जमीन खिसक गई। मजदूरी करने वाला यह परिवार कहां से लाखों रुपए लाता। केवल का जयपुर के ही नारायणा हॉस्पीटल में नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार करवाया गया। गांव चार पीएसडी के आशिक अली की बेटी रंजना व उसके परिजनों को भी तब झटका लगा जब उन्हें मालूम हुआ कि उसे दिल की बीमारी है और लाखों रुपए खर्च होंगे। पहले से ही अभावों में जी रहे इस परिवार के लिए यह किसी आपदा से कम न था लेकिन आरबीएसके के जरिए न केवल नि:शुल्क व सफल ऑपरेशन हुआ बल्कि टीम ने नियमित फॉलोअप कर रंजना व उसके परिजनों का हौसला भी बढ़ाया। कमोबेश ऐसे ही हालात 13 वर्षीय ज्ञानचंद के थे। गांव छह जेडडब्ल्यूएम निवासी करणपाल का बेटा ज्ञानचंद राजकीय स्कूल में पढ़ता है और पिता मजदूरी करते हैं। ऐसे में दिल की बीमारी और उसका इलाज करवाना इस परिवार के लिए बड़ी मुसीबत थी। यहां भी आरबीएसके ने मासूम को राहत दिलाई। तीन एमएलडी के राजकीय स्कूल में पढऩे वाले विशाल पुत्र सुभाष को भी टीम ने चिन्हित किया। जांच में पता चला कि विशाल के दिल में छेद है, ऐसे में जयपुर के नारायाणा हॉस्पीटल में भेज नि:शुल्क व सफल ऑपरेशन करवाया गया। गांव दो एमएलडी निवासी सुखराम की 15 वर्षीय बेटी माया गांव के ही राजकीय बालिका विद्यालय में पढ़ती है।
यहां टीम पहुंची तो माया चिन्हित हुई और पता चला कि माया को दिल की गंभीर बीमारी है। टीम ने जिला मुख्यालय पर भेज जांच करवाई तो बीमारी की पुष्टि हुई। इसके बाद जयपुर में नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार करवाया, जिसके बाद माया को नई जिंदगी मिली। चार बेटियां होने के बावजूद सुखराम ने अपनी बेटी माया के लिए हर संभव प्रयास किया, जो काबिलेतारीफ है। माया की बीमारी भी बेहद घातक थी, जिस पर करीब पांच लाख रुपए तक खर्च आना संभावित था। गांव तीन केडी निवासी 13 वर्षीय चंद्रकांता पुत्री बीरबल राम नायक यहां के राजकीय स्कूूल में पढ़ती है। बीरबल राम ने बहुत नाजों से चंद्रकांता को पाला लेकिन जब उन्हें पता चला कि चंद्र के दिल में छेद है तो परिवार सदमें में आ गया। गांव पांच एलएम निवासी अजय पुत्र दलीप की बीमारी भी बेहद गंभीर थी और अभावों के चलते इलाज मुश्किल लग रहा था। सरकारी स्कूल में चिन्हिकरण के दौरान आरबीएसके टीम ने दलीप की बीमारी का पता लगाया और उसका जयपुर के प्रतिष्ठित संस्थान में ऑपरेशन व उपचार करवा राहत दिलाई। इसी तरह रावला निवासी 15 वर्षीय भगवती पुत्री रामप्रताप के दिल में छेद था। रामप्रताप मजदूरी करते हैं, ऐसे में वे इस बीमारी का इलाज करवाने में अक्षम थे। कमोबेश ऐसी ही बीमारी गांव छह डब्ल्यूएसएम निवासी 11 वर्षीय ज्ञानचंद पुत्र कर्मपाल के थी, जो नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार के बाद अब ठीक है। इस टीम में डॉ. कमल किशोर, डॉ. ममता पारीक, डॉ. रामस्वरूप चौहान व डॉ. नम्रता सिंह सहित फार्मासिस्ट विनोद खोड़, पिंकी शर्मा, एएनएम बसकरणी व शर्मिला शामिल हैं। 
पता ही नहीं था इतनी गंभीर बीमारी पल रही है
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि आरबीएसके टीम द्वारा चिन्हित किए गए अधिकांश बच्चों में एक सामान्य स्थिति यह सामने आई कि ज्यादातर परिजनों को मालूम ही नहीं था कि उनका बच्चा बीमार है, जबकि बच्चा जन्म के साथ ही दिल की बीमारी लेकर पैदा हुआ। सामान्यत: नमूनिया, सांस फूलने, सांस लेने या कमजोरी आदि की समस्या महसूस करते। लेकिन आरबीएसके टीम ने इन्हें गंभीरता से जांचते हुए जिला मुख्यालय से नि:शुल्क इको करवाई तो मालूम हुआ कि बच्चा दिल की बीमारी से पीडि़त है। विभाग की ओर से ऐसे बच्चों की हर माह 28 तारीख को जांच करवाई जाती है। घड़साना टीम की ओर से अब तक 46 बच्चों की इकोकार्डियो करवाई गई, जिससे पुष्टि हुई कि इन्हें दिल की बीमारी है। 
53 संभावित, 46 में दिल की बीमारी की पुष्टि
आरबीएसके टीम के डॉॅ. कमल ने बताया कि दोनों टीमों ने 54 बच्चे चिन्हित किए हैं, जिन्हें दिल की बीमारी की संभावना है। हालांकि इनमें से 46 की इको के जरिए पुष्टि हो चुकी है। इनमें से 10 का ऑपरेशन हो चुका है और चार का उपचार। वहीं अब गांव 12 एनडी निवासी साढ़े तीन वर्षीय प्रियांशु पुत्र विनोद, चार केपीडी निवासी चार वर्षीय जिया पुत्री राकेश बिश्रोई, 12 एनडी बी निवासी 11 वर्षीय लोकेश पुत्र राजेंद्र, गांव 13 केडी निवासी 12 वर्षीय ज्योति पुत्री पृथ्वीराज, चार केएलएम निवासी डेढ वर्षीय गुरविंद्र पुत्री संदीप, सात केएनडी निवासी डेढ़ वर्षीय खुशबू पुत्री सतपाल का जल्द ही ऑपरेशन करवाया जाएगा।

बुधवार, 6 दिसंबर 2017

शुरु हुआ टीबी तलाश अभियान
-घर-घर जाकर तलाश रहे टीबी मरीज, तत्काल उपचार भी मिलेगा
श्रीगंगानगर। टीबी रोग से देश को 2025 तक मुक्त करने का लक्ष्य भेदने की शुरुआत कर दी गई है। इस कड़ी मेें स्वास्थ्य विभाग ने जिले में ‘एक्टिव केस फाइंडिंग’ अभियान चलाया है, जिसके तहत 18 दिसंबर तक घर-घर जाकर टीबी रोगियों की तलाश की जाएगी और उनका तत्काल उपचार प्रारंभ किया जाएगा। इसके लिए बकायदा सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल जिलास्तर से मोनिटरिंग कर रहे हैं, जबकि जिला टीबी अधिकारी डॉ. गुंजन खुंगर फील्ड में जाकर निरीक्षण कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि प्रदेश के श्रीगंगानगर जिले सहित बांसवाड़ा, कोटा, जयपुर शहर, जयपुर ग्रामीण, जोधपुर व झुंझुनूं जिले को इस अभियान के तहत चिन्हित किया गया है। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि अभियान की मोनिटरिंग करने के लिए शुक्रवार को जयपुर निदेशालय व अजमेर से भी टीम आएंगी। वहीं जिले के विभिन्न खण्डों में डीपीएस सुरेंद्र बुडाणिया, एसटीएस सुरेंद्र, राहुल व महेंद्र सहारण ने सर्वे की मोनिटरिंग कर रहे हैं, जबकि जगदीश इंदलिया व नरेश भदोरिया जिलास्तर से रिपोर्टिंग कर रहे हैं। एएनएम व आशाएं इस अभियान में जुटी हुई हैं, वहीं विभाग की ओर से रोगी खोजने वाली टीम को प्रोत्साहन राशि के रूप में 500 रुपए प्रति केस देने का प्रावधान रखा है। इसका मुख्य फायदा सब सेंटर स्तर पर गठित टीम सदस्य एएनएम, आशा, वॉलंटियर, एनजीओ, निजी चिकित्सक को मिलेगा। स्वास्थ्य विभाग का मुख्य उदï्देश्य ऐसे संभावित टीबी रोगियों को उपचार के दायरे में लाना है, जिन्हें खुद को टीबी से ग्रसित होने की जानकारी नहीं है। सेंट्रल टीबी डिवीजन ने इन जिलों में विशेष गाइड लाइन तैयार की है। इसी के मुताबिक जिले में चार से 18 दिसंबर तक अभियान चलाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि जिले की कुल आबादी के 11 प्रतिशत लोगों की स्क्रीनिंग कर जांच की जाएगी। टीबी के लक्षण वाले व्यक्तियों के घर से बलगम के सैंपल लेकर टीम उसी दिन नजदीकी माइक्रोस्कोपी सेंटर पर जांच करवा रही है। जांच में टीबी पाए जाने की स्थिति में मरीज का दो दिन के भीतर इलाज प्रारंभ किया जा रहा है। विभाग ने आमजन से अपील की है कि वे राष्ट्रीय अभियान में सहयोग देते हुए कार्मिकों से समन्वय बनाएं। 

सोमवार, 4 दिसंबर 2017

दिसंबर में लगेंगे 49 परिवार कल्याण शिविर 
-सीएचसी व पीएचसी पर लगेंगे नसबंदी शिविर, पुरुष नसबंदी के लिए करेंगे प्रेरित
श्रीगंगानगर। चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से दिसंबर माह में 49 नसबंदी शिविर लगाए जाएंगे। प्राथमिक एवं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर लगेने वाले इन शिविरों से इस बार पुरुष नसबंदी के लिए आमजन को जागरूक किया जाएगा। वहीं सामान्य शिविरों की तरह नियमित नसबंदी केस होंगे। इस संबंध में चिकित्सकों, नर्सिंग स्टाफ एवं अन्य कार्मिकों की ड्यूटी लगा कर मासिक प्लान तैयार किया गया है। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि मंगलवार को श्रीविजयनगर में शिविर लगाया गया। अब आठ दिसंबर को पीएचसी हिंदुमलकोट व सीएचसी रायसिंहनगर में शिविर लगेगा। इसी तरह नौ को सीएचसी अनूपगढ़ व पीएचसी सरदारगढ़, 10 को जिला अस्पताल में, 11 को सीएचसी केसरीसिंहपुर व पीएचसी सोमासर, 12 को सीएचसी सादुलशहर व पीएचसी ख्यालीवाला, 13 को सीएचसी घड़साना व पीएचसी मांझूवास, 14 को पीएचसी जैतसर, रामसिंहपुर व मिर्जेवाला, 15 को सीएचसी सूरतगढ़ व रायसिंहनगर, 16 को पीएचसी बीरमाना व लालगढ़, 17 को सीएचसी राजियासर व पीएचसी 17 जेड, 18 को जिला अस्पताल व सीएचसी श्रीकरणपुर, 19 को पीएचसी सुखचैनपुरा व गुलाबेवाला, 20 को सीएचसी श्रीविजयनगर व पीएचसी ढाबां, 21 को सीएचसी चूनावढ़, 22 को सीएचसी सादुलशहर, 23 को सीएचसी अनूपगढ़, रायसिंहनगर व पीएचसी चकमहाराजका, 24 को सीएचसी समेजा कोठी, 25 को सीएचसी पदमपुर व ठुकराना, 26 को जिला अस्पताल व पीएचसी डूंगरसिंहपुरा, 27 को पीएचसी कोनी, सीएचसी गजसिंहपुर व सूरतगढ़, 28 को सीएचसी घड़साना व श्रीकरणपुर, 29 को सीएचसी रावला व पीएचसी 365 हेड और 30 दिसंबर को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र रायसिंहनगर में परिवार कल्याण शिविर लगाया जाएगा।