स्वास्थ्य विभाग ने ‘दिल’ के नाम किया वैलेंटाइन डे
वैलेंटाइन सप्ताह में करवाए ‘दिल’ के सात ऑपरेशन,
अब तक 27 का ऑपरेशन, 47 को राहत
श्रीगंगानगर। फरवरी माह में जब पूरा विश्व वैलेंटाइन सप्ताह मना रहा था तो उसी अंतराल में स्वास्थ्य विभाग के कुछ युवा भी ‘दिल’ की बात कर रहे थे। विभिन्न कारणों से नासाज हुए मासूमों के ‘दिल’ की बात। दरअसल, जिले में चल रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिन्हित किए जा रहे है बच्चों में अनेक ऐसे भी मिले जिन्हें हृदï्य संबंधी बीमारी है। इन्हीं को राहत दिलाने के लिए आरबीएसके टीम ने वैलेंटाइन सप्ताह के दौरान सात बच्चों को चिन्हित कर न केवल जयपुर के प्रतिष्ठित हॉस्पीटलों में भर्ती करवाया, बल्कि उनका सफल उपचार भी करवाया। आज सातों बच्चे पूरी तरह स्वस्थ हैं और वे सामान्य जिंदगी जी रहे हैं।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल के मुताबिक, विभाग अब तक हृद्य रोग से संबंधित 120 बच्चे चिन्हित कर चुका है। जिनमें 27 बच्चों का ऑपरेशन और 20 बच्चों का दवाओं के जरिए उपचार किया जा चुका है। सभी बच्चों का विभाग नियमित फॉलोअप भी कर रहा है और अन्य बच्चों को चिन्हित करने का कार्य जारी है। फरवरी मध्य में जिन सात बच्चों का ऑपरेशन विभाग ने करवाया, उनकी दास्तां कमोबेश मिलती जुलती हैं।ज्यादातर के पिता मजदूरी करते हैं और वे बेहद निर्धन परिवार से हैं। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि तीन बीएमएम, सूरतगढ़ निवासी मजदूरी करने वाले जयपाल के 15 वर्षीय पुत्र श्रीराम पिछले लंबे अर्से से हृदï्य रोग से पीडि़त था, लेकिन महंगे इलाज के चलते उपचार नहीं करवाया गया। इसी तरह श्रीकरणपुर क्षेत्र के गांव 27 आरबी निवासी जगीरसिंह के दस वर्षीय पुत्र राकेश के भी यही हालात थे। कपड़े की दुकान पर नौकरी करने वाले तीन एमएलडी, घड़साना निवासी सुभाष के सात वर्षीय पुत्र विशाल भी दिल की बीमारी से जूझ रहा था, लेकिन इन बच्चों को विभागीय टीम ने चिन्हित कर सफल ऑपरेशन करवा राहत दिलाई। इसी तरह करणीसर, सूरतगढ़ निवासी 11 वर्षीय साहिल पुत्र कालूराम, छह जेडडब्ल्यूएम, घड़साना निवासी 14 वर्षीय ज्ञानचंद पुत्र करमपाल और चार आरबी, पदमपुर निवासी चार वर्षीय दिनेश पुत्र नरेंद्र कुमार को भी टीम ने दिल का ऑपरेशन करवा राहत दिलवाई। सूरतगढ़ के वार्ड नंबर 28 निवासी उमेश कुमार की पुत्री नन्ही मासूम रीना भी हृद्य रोग से पीडि़त थीं, लेकिन टीम ने रीना को प्राथमिक उपचार कर इको कॉर्डियोग्राफी करवाई और जयपुर के प्रतिष्ठित हॉस्पीटल में ऑपरेशन करवाया। आज दूसरे बच्चों के साथ ही रीना खुश हैं, उसके चेहरे पर मुस्कान है। राहत की मुस्कान, दिल दुरुस्त होनी की खुशी।
इन चिकित्सकों की रही भूमिका
सभी बच्चों को राहत दिलाने में युवा टीम यानी आरबीएसके के अतिरिक्त प्रभारी डॉ. भारत भूषण व सहप्रभारी डॉ. सुनील बिश्रोई के नेतृ़त्व में डॉ. सुमन, डॉ. रोहिताश, डॉ. पूनम, डॉ. प्रदीप, डॉ. पवन, डॉ. वाटिका, डॉ. रामस्वरूप, डॉ. जितेंद्र, डॉ. सुनैना, डॉ. कमल किशोर, डॉ. ममता पारीक व डॉ. नमृता का अहम योगदान रहा। इन्हीं की बदौलत ये मासूम चिन्हित हो पाए और उन्हें बेहतर उपचार मिल सका। इस उल्लेखनीय कार्य में डॉक्टर प्रेम मित्तल का भी सहयोग रहा है, जिन्होंने आरबीएसके के तहत अब तक 150 से अधिक बच्चों की नि:शुल्क इको कॉर्डियोग्राफी की है।










