अब हर सीएचसी व शहरी पीएचसी पर अंतरा इंजेक्शन
-चिकित्सकों को दिया दो दिवसीय प्रशिक्षण, परिवार कल्याण कार्यक्रम होगा सुदृढ़
श्रीगंगानगर। परिवार कल्याण के नियमित स्थाई व अस्थाई साधनों से बढक़र इन दिनों अंतरा इंजेक्शन की मांग बढऩे लगी है। अब तक केवल जिला अस्पताल अब चूनिंदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में यह सुविधा दी जा रही थी लेकिन अब सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अंतरा इंजेक्शन की सुविधा मिलेगी। इसे लेकर चिकित्सकों को जिला मुख्यालय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जो बुधवार को संपन्न हुआ। इससे पूर्व नर्सिंग स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया गया है।
एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता ने बताया कि सितंबर माह से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अंतरा इंजेक्शन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर नि:शुल्क लगाया जाएगा। परिवार कल्याण के पारंपरिक साधनों मसलन गर्भ निरोधक गोलियों व कॉपर-टी की बजाए अब दंपतियां का इंजेक्शन की ओर रूझान बढा है, क्योंकि इससे पहले जिला अस्पताल व कई चूनिंदा सीएचसी पर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। अंतरा इंजेक्शन एक बार लगाने से तीन माह तक गर्भ निरोधक का काम करता है। अंतरा इंजेक्शन से स्वास्थ्य के साथ ही आर्थिक नुकसान से भी बचाता है। उन्होंने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए गर्भ निरोधक गोलियों की बजाए अंतरा इंजेक्शन का उपयोग ज्यादा फायदेमंद है। इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है। दो बच्चों के बीच में अंतराल रखने के लिए इस इंजेक्शन का उपयोग सबसे बेहतर है। अंतरा इंजेक्शन के इस्तेमाल से मातृ व शिशु मृत्युदर में कमी आएगी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि वर्तमान में अंतरा इंजेक्शन नवविवाहित दम्पत्तियों द्वारा काफी पसन्द किया जा रहा है। क्योंकि अधिकांशत: आधुनिक नवविवाहित दंपति शादी के शुरुआती सालों में परिवार कल्याण के अस्थाई साधन अपनाते हैं। वहीं अंतरा इंजेक्शन का सर्वाधिक फायदा नसबंदी न करवाने वालों को भी मिलेगा। नसबंदी न कराने वाली महिलाओं को कई बार अनचाहे गर्भ का सामना करना पड़ता है, ऐसे में एक अंतरा इंजेक्शन तीन माह तक गर्भ निरोधक का कार्य करेगा। इससे महिलाओं को कमजोरी का अनुभव भी नहीं होगा। महिलाओं को जब मां बनना हो, तब वे यह इंजेक्शन लगवाना बंद कर सकती हैं।























