बुधवार, 29 अगस्त 2018

अब हर सीएचसी व शहरी पीएचसी पर अंतरा इंजेक्शन
-चिकित्सकों को दिया दो दिवसीय प्रशिक्षण, परिवार कल्याण कार्यक्रम होगा सुदृढ़
श्रीगंगानगर। परिवार कल्याण के नियमित स्थाई व अस्थाई साधनों से बढक़र इन दिनों अंतरा इंजेक्शन की मांग बढऩे लगी है। अब तक केवल जिला अस्पताल अब चूनिंदा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में यह सुविधा दी जा रही थी लेकिन अब सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों और शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अंतरा इंजेक्शन की सुविधा मिलेगी। इसे लेकर चिकित्सकों को जिला मुख्यालय पर दो दिवसीय प्रशिक्षण दिया गया, जो बुधवार को संपन्न हुआ। इससे पूर्व नर्सिंग स्टाफ को भी प्रशिक्षित किया गया है। 
एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता ने बताया कि सितंबर माह से सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों व शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर अंतरा इंजेक्शन चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर नि:शुल्क लगाया जाएगा। परिवार कल्याण के पारंपरिक साधनों मसलन गर्भ निरोधक गोलियों व कॉपर-टी की बजाए अब दंपतियां का इंजेक्शन की ओर रूझान बढा है, क्योंकि इससे पहले जिला अस्पताल व कई चूनिंदा सीएचसी पर इंजेक्शन लगाया जा रहा है। अंतरा इंजेक्शन एक बार लगाने से तीन माह तक गर्भ निरोधक का काम करता है। अंतरा इंजेक्शन से स्वास्थ्य के साथ ही आर्थिक नुकसान से भी बचाता है। उन्होंने बताया कि जनसंख्या नियंत्रण के लिए गर्भ निरोधक गोलियों की बजाए अंतरा इंजेक्शन का उपयोग ज्यादा फायदेमंद है। इसका कोई भी साइड इफेक्ट नहीं है। दो बच्चों के बीच में अंतराल रखने के लिए इस इंजेक्शन का उपयोग सबसे बेहतर है। अंतरा इंजेक्शन के इस्तेमाल से मातृ व शिशु मृत्युदर में कमी आएगी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि वर्तमान में अंतरा इंजेक्शन नवविवाहित दम्पत्तियों द्वारा काफी पसन्द किया जा रहा है। क्योंकि अधिकांशत: आधुनिक नवविवाहित दंपति शादी के शुरुआती सालों में परिवार कल्याण के अस्थाई साधन अपनाते हैं। वहीं अंतरा इंजेक्शन का सर्वाधिक फायदा नसबंदी न करवाने वालों को भी मिलेगा। नसबंदी न कराने वाली महिलाओं को कई बार अनचाहे गर्भ का सामना करना पड़ता है, ऐसे में एक अंतरा इंजेक्शन तीन माह तक गर्भ निरोधक का कार्य करेगा। इससे महिलाओं को कमजोरी का अनुभव भी नहीं होगा। महिलाओं को जब मां बनना हो, तब वे यह इंजेक्शन लगवाना बंद कर सकती हैं। 

मंगलवार, 28 अगस्त 2018

‘बेटी पंचायत’ के जरिए अब घर-घर होगी बेटियों की बात
-‘डॉटर्स आर प्रीशियस’ अभियान के तहत सात सितंबर से शुरू होगा कार्यक्रम
श्रीगंगानगर। राज्य में ‘बेटी बचाओ’ के प्रति जन-जागरुकता की एक और अभिनव पहल करते हुए ‘डॉटर्स आर प्रीशियस’ अभियान के तहत प्रदेश की लगभग पांच हजार ग्राम पंचायतों में ‘बेटी पंचायत’ का आयोजन कर आमजन को ‘बेटियां अनमोल है’ का संदेश दिया जाएगा। इस नवाचार को लेकर राज्यस्तर के साथ ही जिले में तैयारियां शुरू कर दी गई हैं और सात सितंबर से ‘बेटी पंचायत’ का आयोजन प्रारंभ होगा। वहीं इसके बाद 14, 25 व 28 सितंबर को ग्राम पंचायत स्तर पर बेटी पंचायत का आयोजन होगा। 
पीसीपीएनडीटी के समुचित प्राधिकारी एवं एमडी एनएचएम नवीन जैन ने बताया कि प्रदेशभर की ग्राम पंचायतों पर डेप-3 आयोजित कर ग्रामवासियों को प्रजेंटेशन, इमोशनल एनिमेशन फिल्म आदि के जरिए एवं बेटियों के अन्य मुद्दों पर चर्चा करते हुए बेटी बचाओ का संदेश दिया जाएगा। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से आयोजित इस अभियान में महिला एवं बाल विकास विभाग, पंचायती राज के साथ शिक्षा विभाग एवं बेटी बचाओ क्षेत्र में सक्रिय स्वयंसेवी संस्थाओं का भी सहयोग लिया जाएगा। उन्होंने राज्य एवं जिला स्तर पर डेप रक्षकों के प्रशिक्षण एवं आवश्यक बैठकें आयोजित कर इसकी तैयारियां समय पर पूर्ण करने के निर्देश संबंधित अधिकारियों को दिए हैं। श्रीगंगानगर जिले में भी 336 ग्राम पंचायतें हैं, जहां विभाग की ओर से डॉटर्स आर प्रीशियस का आयोजन किया जाएगा। इसके लिए एनएचएम टीम ने तैयारियां प्रारंभ कर दी हैं। वहीं पीसीपीएनडीटी समन्वयकों को राज्यस्तर पर प्रशिक्षण दिया गया है। 
आरबीएसके टीमों की आमुखिकरण कार्यशाला 31 को
-दी जाएंगी सभी योजनाओं की जानकारी, शहर से गांव तक होगा प्रचार-प्रसार
श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत ब्लॉकस्तर पर कार्य कर रही टीमों को अब विभागीय योजनाओं की विस्तृत जानकारी दी जाएगी ताकि वे स्टूडेंट्स को योजनाओं की जानकारी दे सकें। इसके लिए 31 अगस्त को जिला स्वास्थ्य भवन में आमुखिकरण कार्यशाला के दौरान टीम में शामिल चिकित्सकों, फार्मासिस्ट व एएनएम को प्रशिक्षित किया जाएगा। प्रशिक्षण एनएचएम टीम में शामिल डीपीएम, डीएएम, डीएनओ, डीएसी, सीओआईईसी व पीसीपीएनडीटी समन्वयक देंगे। 
कार्यक्रम के नोडल प्रभारी व आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि एनएचएम के एमडी नवीन जैन के निर्देशों पर राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम टीमों को कार्यशाला के दौरान विभाग की सभी योजनाओं के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। दरअसल, टीमें नियमित रूप से स्कूलों में जाकर बच्चों की स्वास्थ्य जांच करती है, जिसा उनका स्कूल प्रंबधन के साथ बेहतर तालमेल होता है। यही वजह है कि अब टीम सदस्यों को निर्देशित किया गया है कि वे जब भी स्कूल में नियमित जांच के लिए जाएं, वहां स्टूडेंट्स को स्वास्थ्य सेवाओं व योजनाओं के प्रति अवश्यक प्रशिक्षण दें ताकि वे आमजन को जागरूक कर सकें और स्वयं भी जागरूक रह सकें। यही नहीं, उन्हें स्वयं की स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक किया जाए ताकि वे बीमारियों की चपेट में न आएं। उन्होंने बताया कि टीमों को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, सुरक्षित मातृत्व अभियान, जननी सुरक्षा योजना, टीकाकरण कार्यक्रम, शिशु देखभाल इकाई, परिवार कल्याण, ईसीटीएस, संपर्क पोर्टल, कायाकल्प, एनीमिया, रिचार्ज योजना, डीवार्मिंग कार्यक्रम, ईउपकरण, टेलीमेडिसिन, एम्बुलेंस योजना सहित अन्य राज्य व राष्ट्रीय कार्यक्रमों के बारे में प्रशिक्षित किया जाएगा। 
शुरू हुई आशाओं की स्वास्थ्य जांच
-अगस्त में ही होगी सभी आशा सहयोगिनियों की जांच, मिलेगा उपचार भी
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने आशा सहयोगिनियों की स्वास्थ्य जांच शुरू कर दी और इसी एक सप्ताह के अंतराल में सभी आशाओं की पूर्ण जांच कर दी जाएगी। मंगलवार को पुरानी आबादी शहरी स्वास्थ्य केंद्र में भी शहरी आशाओं की जांच की गई, वहीं सभी ब्लॉकों पर भी जांच प्रारंभ कर दी गई हैं। उल्लेखनीय है कि एनएचएम एमडी नवीन जैन ने सभी आशा सहयोगिनियों की जिलों में स्वास्थ्य जांच करवाने के निर्देश दिए हैं। वहीं यदि आशा सहयोगिनी संबंधित जांचों में बीमार पाई जाती है तो विभाग उनका उपचार भी करवाएगा। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि जिलास्तर से प्लान तैयार कर अगस्त में ही सभी आशाओं की जांच करने के निर्देश बीसीएमओ को दिए गए हैं। इस दौरान आशा सहयोगिनियों की ब्लड शुगर, ब्लड प्रेशर व कॉमन कैंसर की स्क्रीनिंग की जा रही है। अब सभी स्वास्थ्य केंद्रों से निर्धारित प्रारूप में रिपोर्ट तैयार कर जिलास्तर पर एनसीडी अनुभाग में भेजी जाएगी। यहां उन आशाओं को जिलास्तर पर बुलाया जाएगा जो जांच में संभावित पीडि़त मिलेंगी। खासकर, कैंसर संभावित मिलने पर गहनता से जांच करवाई जाएगी। विभाग जिलास्तर पर विस्तृत जांच व रिपोर्ट तैयार करेगा और फिर आवश्यकता होने पर आशा सहयोगिनियों का उपचार करवाया जाएगा। जिले में करीब 1600 आशाएं कार्यरत हैं। विभाग के पास आशाओं का बीमारी संबंधी रिकॉर्ड तैयार होगा ही, वहीं आशाओं का उपचार भी हो पाएगा। एनसीडी अनुभाग के अर्श बराड़ ने बताया कि अब हर साल आशा सहयोगिनियों की जांच होगी एवं उन्हें स्वास्थ्य संबंधी देखभाल के लिए प्रेरित किया जाएगा। 

मंगलवार, 21 अगस्त 2018

स्टूडेंट्स बनेंगे स्वास्थ्य योजनाओं के प्रचार-प्रसार सारथी
-आरबीएसके टीमें करेंगी स्टूडेंट्स को प्रशिक्षित, ताकि वे आमजन को कर सकें जागरूक
श्रीगंगानगर। आगामी दिनों में स्टूडेंट्स आमजन को स्वास्थ्य सेवाओं व योजनाओं के प्रति जागरूक करते नजर आएंगे। इससे पूर्व स्टूडेंट्स को विभाग की आरबीएसके टीमें स्कूलों में जाकर प्रशिक्षित करेंगी ताकि वे बेहतर तरीके से योजनाओं व सेवाओं के बारे में जान सकें और फिर इसकी जानकारी आमजन को दे सकें। निश्चित ही यह नवाचार आमजन के लिए, खासकर ग्रामीणों के लिए मुफीद साबित होगा। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के मुखिया एनएचएम एमडी नवीन जैन ने निर्देश दिए हैं कि अगस्त माह में ही आरबीएसके टीमों को जिलास्तर पर प्रशिक्षण दिया जाए ताकि वे हर योजना व स्वास्थ्य सेवाओं से रूबरू हो सकें। 
एमडी नवीन जैन ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत टीमें निर्धारित प्लान अनुसार स्कूलों व आंगनबाड़ी केंद्रों पर जाकर बेहतरीन कार्य कर रही हैं। चूंकि टीमों का नियमित स्कूलों में जाना होता है जिस कारण उनका स्कूल प्रंबधन के साथ बेहतर तालमेल स्थापित हो जाता है और उन्हें स्टूडेंट्स से मुखातिब होने में कोई परेशानी नहीं होती। यही वजह है कि अब टीम सदस्यों को निर्देशित किया गया है कि वे जब भी स्कूल में नियमित जांच के लिए जाएं, वहां स्टूडेंट्स को स्वास्थ्य सेवाओं व योजनाओं के प्रति अवश्यक प्रशिक्षण दें ताकि वे आमजन को जागरूक कर सकें और स्वयं भी जागरूक रह सकें। यही नहीं, उन्हें स्वयं की स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति भी जागरूक किया जाए ताकि वे बीमारियों की चपेट में न आएं। स्टूडेंट्स को बताया जाएगा कि वे कैसे अपने परिजनों को योजनाओं की जानकारी दें, कैसे उन्हें बताएं कि झाड़-फूंक नहीं बल्कि चिकित्सक से इलाज करवाना जरूरी होता है, कैसे तंबाकू व धूम्रपान स्वास्थ्य के लिए हानिकारक होता है, आदि। इसके साथ ही विभाग के केंद्रीय व राज्य टोल फ्री नंबर सहित जिला मुख्यालय का कंट्रोल रूम नंबर स्कूलों में प्रदर्शित करवाया जाएगा ताकि स्टूडेंट्स आवश्यक होने पर स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ले सकें। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि इसी माह सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल की अध्यक्षता में आरबीएसके टीमों को जिलास्तरीय प्रशिक्षण दिया जाएगा। 

सोमवार, 20 अगस्त 2018

स्वास्थ्य अधिकारियों व कार्मिकों ने ली शपथ
-स्वास्थ्य विभाग ने मनाया सद्भावना दिवस
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को जिला मुख्यालय सहित अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर सद्भावना दिवस मनाया गया। इस दौरान स्वास्थ्य कार्मिकों ने सद्भावना प्रतिज्ञा लेकर पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय राजीव गांधी को याद किया। जिला स्वास्थ्य भवन में सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल व बीसीएमओ डॉ. राजन गोकलानी ने शपथ दिलाई। 
इस मौके पर जाति, सम्प्रदाय, क्षेत्र, धर्म व भाषा के भेदभाव किए बिना सभी भारतवासियों की भावनात्मक एकता और सद्भावना के लिए कार्य करने की शपथ ली। साथ ही हिंसा का सहारा लिए बिना सभी प्रकार के मतभेद बातचीत और संवैधानिक माध्यमों से सुलझाने की शपथ लेकर सद्भावना दिवस मनाया गया। इस मौके पर डीएनओ डॉ. कमल गुप्ता, डॉ. सोनिया चुघ, विपुल गोयल, रायसिंह सहारण, डॉ. सुनील बिश्रोई, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई, जगत छाबड़ा, राजीव शर्मा, राकेश सचदेवा, नवल योगी, अर्श बराड़, सतीश छाबड़ा, सर्दुलसिंह, शेर सिंह, संदीप जाखड़, मनफूल राम आदि मौजूद रहे। 

रविवार, 19 अगस्त 2018

आजादी पर्व पर मासूम नेहा को मिली बीमारी से आजादी
-आगंनबाड़ी कार्यकर्ता की बदौलत हृद्य रोग पीडि़त को मिला आरबीएसके के तहत उपचार
श्रीगंगानगर। दिल की गंभीर बीमारी से जूझ रही श्रीगंगानगर निवासी दो वर्षीय नन्हीं नेहा के लिए राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम वरदान साबित हुआ और भगवान का दूत बनकर आईं गांव की आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पलविंद्र कौर। खासकर, आरबीएसके ने नेहा को आजादी पर्व पर बीमारी से आजादी दिलवाई, जिसके बाद वह और उसके परिजन बेहद खुश हैं। इस बीमारी के इलाज पर करीब अढ़ाई से तीन लाख रुपए खर्च होते लेकिन आरबीएसके के जरिए पूर्णत: नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार हुआ, वो भी राज्य के राजधानी जयपुर स्थित प्रतिष्ठित एवं उच्च चिकित्सा संस्थान में। फिलहाल, नेहा पूरी तरह से स्वस्थ है और वह अपनी सामान्य जिंदगी जीने लगी है। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि गांव 11वाई निवासी मोनू बेहद निर्धन एवं मजदूरी पेशा है। उनकी लाडली नेहा जन्म से ही बीमार रहने लगी, जिसका वह सामान्य इलाज करवाते रहे लेकिन कोई असर नहीं हुआ। इस बीच श्रीगंगानगर आरबीएसके टीम 11वाई आंगनबाड़ी केंद्र पहुंची तो उन्हें कार्यकर्ता पलविंद्र कौर ने नेहा की जानकारी टीम को दी। टीम में शामिल डॉ. सोनल कथूरिया व फार्मासिस्ट गुंजन शर्मा ने बच्ची की जांच में पाया कि उसे हृद्य संबंधी बीमारी है जिसकी ईको करवाने पर पुष्टि हुई। इसके बाद टीम ने मोनू को बच्ची के ऑपरेशन के लिए जयपुर जाने के लिए कहा लेकिन मोनू को यकीन नहीं हुआ कि ऐसे सरकारी सिस्टम के जरिए नि:शुल्क उपचार भी हो सकता है। बकौल मोनू, ‘‘महज दो साल की बेटी को गंभीर बीमारी सुनकर होश खो बैठा था। न बीमारी का यकीन और न ही यह यकीन कि इस तरह बेटी का नि:शुल्क उपचार हो जाएगा। लेकिन आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने बार-बार संपर्क किया और समझाया कि नेहा का इलाज बेहद जरूरी है। किसी से जानकारी ली तो मालूम हुआ कि इलाज पर करीब तीन लाख रुपए खर्च होंगे, जो मुझ निर्धन के लिए असंभव राशि थी। आखिरकार, मैं नेहा को लेकर जयपुर के नारायणा हॉस्पीटल में गया, जहां पूर्णत: नि:शुल्क इलाज भी हुआ और डॉक्टरों ने बहुत ही अच्छी देखभाल भी की। डॉक्टरों को भगवान क्यों कहते हैं, यह मैं इन डॉक्टरों से मिलकर समझा। उन्होंने हम जैसे गरीबों के साथ अपनों जैसा व्यवहार किया और नेहा को बेटी समझकर उपचार किया। मैं सरकार का सदैव आभारी रहूंगा।’’
आंगनबाड़ी कार्यकर्ता ने निभाया फर्ज 
गांव की नींव कहे जाने वाले आंगनबाड़ी कार्यकर्ता पलविंद्र कौर ने नेहा के लिए जो प्रयास किए वे वाकई काबिलेतारीफ है, क्योंकि इन्हीं कोशिशों के जरिए नेहा को नया जीवन मिला। दरअसल, पलविंद्र कौर ने नेहा के घर कई चक्कर लगाए लेकिन नेहा के परिजन अज्ञात भय के चलते तैयार नहीं हुए। उन्होंने इधर-उधर से जानकारी लेने और स्थानीय चिकित्सकों से ही सामान्य उपचार करवाने में काफी समय जाया किया। आखिरकार, पलविंद्र कौर की मेहनत रंग लाई और नेहा का उपचार हो सका। बकौल पलविंद्र कौर, ‘‘नेहा का मासूम चेहरा बार-बार सामने आता और मैं हर दिन दिल से प्रयास करती कि इस बेटी का उपचार हो जाए। मोनू सहित उसकी दादी एवं माँ को भी बार-बार समझाया कि उपचार बहुत जरूरी है। उन्हें शायद यह लगता कि मैं पैंसों के लिए या किसी अन्य लालच में ऐसा कर रही रहूं, जबकि मुझे केवल नेहा की जिंदगी की फिक्र थी। शुक्र है वे देर ही सही, बात को समझे और नेहा के उपचार के लिए राजी हुए। मैं चाहती हूं कि अन्य परिजन आरबीएसके टीम का सहयोग करें ताकि बच्चों का समय रहते उपचार मिल सके।’’ 

रविवार, 12 अगस्त 2018

घर-घर पहुंचेगी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी
राज्य के नौ लाख परिवारों को मिलेगी, स्वास्थ्य विभाग ने की तैयारियां, आशा बनेंगी सारथी
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की पॉलिसियां अब लाभार्थियों के घर तक पहुंचेगी। इससे लाभार्थियों को न केवल योजना की जानकारी मिलेगी बल्कि वे पॉलिसी पत्र को हॉस्पीटल में भर्ती होने के दौरान दस्तावेज के तौर पर इस्तेमाल भी कर सकेंगे। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग इस माह के आखिर तक मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के हस्ताक्षर युक्त ये पॉलिसियां ढाणी, गांव, कस्बों व शहर में रहने वाले लाभार्थियों तक पहुंचाएगा। इसे लेकर विगत दिनों विभाग के मुखिया एनएचएम एमडी नवीन जैन ने आशा व आईईसी प्रभारियों को प्रशिक्षण देकर पॉलिसी वितरण की कमान सौंपी है, अब पॉलिसी पत्र मिलते ही आशा सहयोगिनियां इसे लेकर घर-घर दस्तक देंगी। 
भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के सीईओ एवं एनएचएम एमडी नवीन जैन ने बताया कि बीएसबीवाई के लक्षित लाभार्थियों को उपलब्ध इनडोर कैशलेस कवरेज के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से पॉलिसी पत्र घर-घर पहुंचाए जाएंगे। जिस पर बीमा कवर रिन्यू जानकारी, भामाशाह में सम्मिलित प्रत्येक सदस्य का नाम, पॉलिसी नंबर के साथ-साथ मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का संदेश भी होगा। ये पॉलिसी पत्र आशा सहयोगिनी के जरिए व्यक्तिगत रूप से लाभार्थी परिवार तक पहुंचाए जाएंगे और बकायदा हर परिवार से पहुंच रसीद भी ली जाएगी ताकि कोई भी परिवार इससे वंचित न रहे। जहां आशा पद रिक्त है वहां संबंधित एएनएम या एलएचवी इन पत्रों का वितरण करेंगी। एमडी श्री जैन ने बताया कि जिलास्तर से लेकर ब्लॉक, सीएचसी, पीएचसी व आशा स्तर का वितरण समय निर्धारित कर सबकी जिम्मेदारी तय की गई है ताकि किसी भी स्तर पर लापरवाही न हो। इस संबंध में जिलास्तर से भी वीडियो कॉन्फे्रंसिंग कर ब्लॉक अधिकारियों, बीपीएम एवं आशा सुपरवाइजरों को निर्देश दिए गए हैं।
इनकी रहेगी जिम्मेदारी
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि जिलास्तर पर डीपीएम, आईईसी व आशा प्रभारी, ब्लॉक पर बीसीएमओ, बीपीएम व आशा फेसिलेटर, सीएचसी/पीएचसी स्तर पर चिकित्सा प्रभारी, एलएचवी व आशा सुपरवाइजर और इसके बाद एलएचवी, आशा सुपरवाइजर व आशा सहयोगिनियों की जिम्मेदारी तय की गई है। इसी तरह शहरी क्षेत्र में एनयूएचएम डीपीएम, शहरी पीएचसी प्रभारी अधिकारी, पब्लिक हेल्थ मैनेजर, एलएचवी व आशा सहयोगिनी की जिम्मेदारी रहेगी। 
जिले के पौने तीन लाख लाभार्थी परिवार होंगे लाभान्वित
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि श्रीगंगानगर में एनएफएसए (राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम) के तहत सम्मिलित दो लाख 85 हजार 72 लाभार्थी परिवार हैं। जिसमें श्रीगंगानगर ग्रामीण के 38002, शहरी क्षेत्र के 30340, अनूपगढ़ के 25604, श्रीकरणपुर के 22401, घड़साना के 29767, पदमपुर के 24072, रायसिंहनगर के 26671, श्रीविजयनगर के 21233, सूरतगढ़़ के 38071, सादुलशहर के 24868, गजसिंहपुर के 1380 और केसरीसिंहपुर के 2663 लाभार्थी परिवार हैं। जबकि जिले में 11 लाख 47 हजार 119 लोग व्यक्तिगत रूप से एनएफएसए लाभार्थी हैं यानि ये लोग भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ ले सकते हैं। 

शनिवार, 11 अगस्त 2018

पीएमएसएमए पर लाभान्वित हुईं गर्भवती महिलाएं
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत 1783 को मिली स्वास्थ्य सेवा
श्रीगंगानगर। जिले में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत हर माह की नौ तारीख को बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं लाभान्वित हो रही हैं, हालांकि जिस नौ तारीख को राजकीय अवकाश होता है उसके आगामी दिन यह अभियान मनाया जाता है। इसी कड़ी में शुक्रवार को जिले की 1783 गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य विभाग की ओर से विभिन्न स्वास्थ्य सेवाएं व सुविधाएं दी गईं। इस मौके पर 16 निजी चिकित्सों सहित सरकारी चिकित्सकों ने उत्कृष्ट सेवाएं दी। वहीं जिलास्तरीय अधिकारियों ने निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया और कार्मिकों व चिकित्सकों को बेहतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि हर माह की नौ तारीख को जहां निजी चिकित्सक पूर्णत: नि:शुल्क सेवाएं दे रहे हैं, वहीं राजकीय चिकित्सक भी अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के जरिए गर्भवती महिलाओं को लाभान्वित कर रहे हैं। इस दिवस पर गर्भवती महिलाओं को विभाग की ओर से हर संभव स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाती हैं। गर्भवती महिलाओं को बेहतर व सहज स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए जिला चिकित्सालय सहित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह नौ बजे से तीन बजे तक पीएमएसएमए का आयोजन किया जाता है। शुक्रवार को जिला मुख्यालय पर स्थिति केंद्रों पर बड़ी संख्या में गर्भवती महिलाएं पहुंची। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में भी महिलाओं को उत्साह देखने लायक था। अभियान को सफल व उत्कृष्ट बनाने के लिए एनएचएम टीम में शामिल डीपीएम विपुल गोयल, डीएनओ कमल गुप्ता, डीएसी रायसिंह सहारण एवं सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखीं। इसी तरह अन्य ब्लॉक व जिलाधिकारियों ने अभियान के तहत आयोजित पीएमएसएमए का निरीक्षण किया।

बुधवार, 8 अगस्त 2018

लापरवाह कार्मिकों पर होगी कार्रवाई, ब्लॉक वाइज होंगे चिन्हित
-जिले से ब्लॉकस्तरीय वीसी में दिए सख्त निर्देश, हर माह होगी समीक्षा
श्रीगंगानगर। स्वास्थ्य सेवाओं की ऑनलाइन रिपोर्टिंग और राज्यस्तर पर हो रही साप्ताहिक व मासिक समीक्षा का असर आगामी दिनों में जिले की स्वास्थ्य सेवाओं में देखने को मिलेगा। स्वास्थ्य योजनाओं व सेवाओं की रिपोर्टिंग और मोनिटरिंग को सुदृढ़ करने को लेकर बुधवार को सीएमएचओ सहित एनएचएम टीम ने जिले से ब्लॉकस्तर पर वीडियो कॉन्फे्रंसिंग की। इस दौरान टीबी ऑफिसर डॉ. गुंजन खुंगर, डीपीएम विपुल गोयल, डीएनओ कमल गुप्ता, आशा प्रभारी रायसिंह सहारण, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई, प्रवीण अवस्थी व जगदीश इंदलिया जिलास्तर से शामिल हुए जबकि ब्लॉक से संबंधित बीसीएमओ, बीपीएम, बीएचएस, पीएचएस व एलएचवी शामिल हुईं। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने वीसी के जरिए कहा कि निक्षय पोषण योजना के लाभार्थियों को शत-प्रतिशत भुगतान होना चाहिए इसके लिए जरूरी है कि आप सभी टीबी रोगियों के खाता संख्या व अन्य वांछित डिटेल अपडेट करें। उन्होंने कहा कि केंद्र की मंशा वर्ष 2025 तक देश का टीबी मुक्त करना है और यह तभी संभव होगा जब हर टीबी मरीज का रिकॉर्ड विभाग के पास होगा और उसका बेहतर उपचार होगा। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर घर-घर पहुंचाए जाने वाले सीएम संदेश पत्र के संबंध में उन्होंने कहा कि निर्धारित अवधि में कार्य पूर्ण होना चाहिए और हर लाभार्थी तक संदेश पत्र पहुंचना चाहिए अन्यथा इस मामले में सख्त कार्रवाई होगी। किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही पर संबंधित को तुरंत जयपुर एपीओ किया जाएगा। आशाओं व लाभार्थियों का मास्टर डाटा अपडेट करने व सत्यापन को लेकर निर्देश देते हुए उन्होंने कहा कि कुछ आंकड़े गलत एंट्री किए गए हैं जिन्हें आगामी एक सप्ताह के अंदर सुधारें अन्यथा गलत होने पर जिसने भी सत्यापन किया है उसके खिलाफ कार्रवाई होगी और यदि किसी की गलत एंट्री की वजह से कोई भुगतान होता है तो उसके वेतन से रिकवरी की जाएगी। उन्होंने कहा कि आशा सहयोगिनियों को समय पर भुगतान मिले, यह सभी केंद्र सुनिश्चित करें। गृह आधारित शिशु देखभाल को लेकर उन्होंने स्वास्थ्य अधिकारियों व कार्मिकों को फटकार लगाते हुए कहा कि जब एएनसी रिपोर्ट हो रही है तो एफबीएनसी रिपोर्ट क्यों नहीं हो रही है। यदि एफबीएनसी नहीं की जा रही है तो भी गंभीर लापरवाही है, अत: आगामी दिनों में इस संबंध में व्यापक समीक्षा की जाए। उन्होंने बीसीएमओ व बीपीएम को निर्देशित करते हुए कहा कि वे टूर प्लान के दौरान दस्तावेज जांचे और स्वास्थ्य केंद्रों के स्टोर भी देखें कहीं आईईसी का दुरुपयोग तो नहीं हो रहा। उन्होंने कहा कि सभी केंद्रों पर व्यापक आईईसी होनी चाहिए और नियमित अपडेट भी हो। जिला रैंकिंग सुधारने को लेकर डॉ. बंसल ने कहा कि अब ब्लॉक या सीएचसी व पीएचसी ही नहीं उप स्वास्थ्य केंद्र की रिपोर्ट ऑनलाइन मिल रही है, इसलिए अभी से सुधर जाएं अन्यथा लापरवाही मिलते ही संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 

मंगलवार, 7 अगस्त 2018

राज्य स्तनपान नीति लागू, चिकित्सा मंत्री ने किया शुभारंभ
-स्तनपान के प्रति बढ़ेगा रूझान, जिले में सप्ताहभर चला जागरूकता अभियान
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ ने प्रदेश में पोषण अभियान-2022 के तहत राज्य स्तनपान नीति का जयपुर में शुभारंभ किया। छह माह तक के बच्चों को केवल स्तनपान के लिए निर्धारित स्वास्थ्य लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए यह नीति लागू की गई है। निश्चित ही यह नीति शिशु के जन्म के एक घंटे में स्तनपान व छह माह तक केवल स्तनपान करवाने के लिए परिवार, समुदाय एवं स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़ेे समस्त कार्यकर्ताओं के लिए मार्ग-दर्शक सिद्ध होगी। इधर, श्रीगंगानगर जिले में भी एक से सात अगस्त तक विश्व स्तनपान सप्ताह तक जागरूकता अभियान चलाकर गर्भवती महिलाओं व उनके परिजनों को शिशु स्तनपान के प्रति जागरूक किया।
चिकित्सा मंत्री श्री सराफ ने स्तनपान करवाने वाली सभी माताओं, परिवारजनों एवं स्वास्थ्यकार्मिकों से लागू राज्य स्तनपान नीति में बताए गए तरीकों के अनुसार आचरण कर बच्चों को स्तनपान करवाने में अपना योगदान करने का आह्वान किया है। उन्होंने बताया कि नेशनल फेमिली हैल्थ सर्वे-4 के अनुसार राजस्थान प्रदेश में जन्म के एक घंटे के भीतर मां के स्तनपान करवाने का प्रतिशत मात्र 28.4 प्रतिशत है वहीं जन्म के पहले छह माह तक केवल मात्र स्तनपान का प्रतिशत मात्र 58.2 है। इसलिए राज्य स्तनपान नीति लागू करना शिशु स्वास्थ्य के प्रति अनुकूल सिद्ध होगा। उन्होंने प्रत्येक बच्चे को जन्म के एक घंटे के भीतर माँ का दूध एवं छह माह तक केवल स्तनपान के संकल्प को आगे बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया। एसीएस वीनू गुप्ता ने बताया कि विभाग द्वारा समुदाय, स्वास्थ्य केन्द्रों पर गर्भवती महिलाओं व धात्री माताओं को परामर्श के साथ-साथ स्तनपान में सहयोग प्रदान करने के उद्देश्य से माँ कार्यक्रम संचालित किया जा रहा है। साथ ही अधिक प्रसव वाले चिकित्सा संस्थानों में अमृत कक्ष की भी स्थापना की गई है, जहां शिशु को स्तनपान करवाया जाता है। एनएचएम एमडी नवीन जैन ने बताया कि माँ का दूध बच्चों में गंभीर बीमारियां जैसे दस्त और निमोनिया से सुरक्षा प्रदान करने के साथ ही शिशु के सम्पूर्ण विकास में महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। उन्होंने बताया कि यह शिशुओं के साथ स्तनपान कराने वाली माताओं के स्वास्थ्य के लिए भी लाभदायी रहता है। उन्होंने बताया कि माँ के दूध से वंचित नवजात शिशु को माँ का दूध उपलब्ध करवाने के उद्देश्य से प्रदेश के 18 जिलों में मदर मिल्क बैंक की स्थापना की गई है। इस नीति के तहत इनका भी और उपयोग बढेगा। उन्होंने बताया कि अधिक प्रसव वाले चिकित्सा संस्थानों में स्तनपान में सहयोग हेतु महिला कार्यकर्ता यशोदा कार्यरत हैं। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि राजस्थान स्तनपान नीति के प्रभावी क्रियान्वयन एवं पालन से समुदाय एवं पोषण के निर्धारित लक्ष्यों को प्राप्त कर सकेंगे। 

इस माह 10 को मनाया जाएगा पीएमएसएमए 
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में निजी सहित सरकारी चिकित्सक देंगे नि:शुल्क सेवाएं
श्रीगंगानगर। गर्भवती महिलाओं के लिए मुफीद साबित हुआ प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान इस माह दस अगस्त को जिलेभर के स्वास्थ्य केंद्रों पर मनाया जाएगा। उल्लेखनीय है कि हर माह की नौ तारीख को पीएमएसएमए मनाया जाता है लेकिन इस माह नौ तारीख को जिले में राजकीय अवकाश होने के चलते आगामी दिन यानी दस अगस्त को पीएमएसएमए मनाया जाएगा।
आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि शुक्रवार को मनाए जाने वाले इस दिवस पर जहां निजी चिकित्सक पूर्णत: नि:शुल्क सेवाएं देंगे, वहीं राजकीय चिकित्सक भी अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के जरिए गर्भवती महिलाओं को लाभान्वित करेंगे। इस दिवस पर गर्भवती महिलाओं को विभाग की ओर से हर संभव स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। गर्भवती महिलाओं को बेहतर व सहज स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए जिले में हर माह की नौ तारीख को सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान मनाया जा रहा है, जबकि राजकीय अवकाश होने पर आगामी दिन यह दिवस मनाया जाता है। इस दौरान जिला चिकित्सालय सहित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह नौ बजे से तीन बजे तक महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएगी। जिला मुख्यालय पर पुरानी आबादी, पुराना हॉस्पीटल, गुरुनानक बस्ती आदि शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों सहित जिला अस्पताल में भी पीएमएसएमए मनाया जाएगा। जिसकी मोनिटरिंग सीएमएचओ, आरसीएचओ, डीपीएम, बीसीएमओ सहित अन्य अधिकारीगण करेंगे। 


सोमवार, 6 अगस्त 2018

टीबी मरीजों के घर-घर पहुंचेगी आशा सहयोगिनी
-वर्ष 2025 तक टीबी मुक्त देश बनाने की कवायद, हर मरीज को मिल रहे प्रति माह 500 रुपए
श्रीगंगानगर। देश को वर्ष 2025 तक पूर्णत: टीबी मुक्त करने के लक्ष्य को हासिल करने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग जी-जान से जुटा है। विभाग हर दिन नए जोश व जुनून के साथ इस मुहिम को आगे बढ़ा रहा है। इसी कड़ी में एनएचएम एमडी नवीन जैन ने निर्देशित किया है कि सभी टीबी मरीजों के बैंक खाता नंबर व अन्य डिटेल लेते हुए उन्हें निक्षय पोषण योजना के तहत जोड़ा जाए ताकि मरीजों को प्रतिमाह 500 रुपए मिल सकें। जिले में इसे लेकर मंगलवार से टीम फील्ड में जाएगी और जल्द ही जिलास्तरीय वीडियो कॉन्फे्रंसिंग करवा आशा सहयोगिनियों को घर-घर जाकर टीबी मरीजों से बैंक डिटेल लेने के लिए प्रेरित करेंगे। जिले में करीब 1900 टीबी मरीज चिन्हित हैं, जिनमें 60 फीसदी की डिटेल अपडेट की जा चुकी है। 
जिला टीबी अधिकारी डॉ. गुंजन खुंगर ने बताया कि निक्षय पोषण योजना के तहत जिले में तीन लाख 44 हजार रुपए का भुगतान किया गया है। वंचित मरीजों की जैसे-जैसे बैंक डिटेल मिल रही है, उन्हें अपडेट करते हुए भुगतान प्रक्रिया शुरू की जा रही है। विभाग ने बकायदा इसके लिए निजी चिकित्सालयों, लैब संचालकों व चिकित्सा प्रभारियों को निर्देशित किया है ताकि सभी मरीजों को योजना का लाभ मिल सके और वे जल्द दुरुस्त हो सकें। विभाग का लक्ष्य है कि देश के साथ ही हमारा जिला भी वर्ष 2025 तक पूर्णत: टीबी मुक्त हो जाए। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि टीबी मरीज से बैंक खाता नंबर, ब्रांच नाम व आईएफएससी आदि की डिटेल ली जा रही है, जिसके अपडेट होने के बाद योजना का लाभ मिलना प्रारंभ हो जाता है। हाल ही में विभाग ने 344 मरीजों को भुगतान किया है, इन्हें दो माह के 1000-1000 रुपए मिले हैं। वहीं 700 अन्य मरीजों की डिटेल अपडेट हो गई है यानि जिले में करीब 60 फीसदी मरीजों की डिटेल अपडेट हो चुकी है। हालांकि जो मरीज निजी चिकित्सालयों, जिलों या राज्यों में उपचार करवा रहे हैं उनसे घर-घर जाकर जानकारी ली जा रही है। इस कार्य के लिए अब आशा सहयोगिनियों को निर्देशित किया गया है। मंगलवार को सूरतगढ़ खण्ड में डीपीएम विपुल गोयल, आशा प्रभारी रायसिंह सहारण व सीओआईईसी विनोद बिश्रोई आशा सहयोगिनियों की बैठक लेंगे। इसके साथ ही टीबी अनुभाग के कार्मिकों व आशा सुपरवाइजर्स को भी इस कार्य के लिए पाबंद किया गया है। उल्लेखनीय है कि जिलास्तर पर सीबीनोट मशीन भी संचालित है जिसके जरिए टीबी जांच जल्द हो रही है। 

शनिवार, 4 अगस्त 2018

भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर हुआ व्यापक सुधार
-सम्बद्ध अस्पतालों की समस्याओं का होगा त्वरित समाधान, योजना को लेकर गंभीर राज्य सरकार
श्रीगंगानगर। राज्य की अतिमहत्वाकांक्षी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना से जुड़े हॉस्पीटलों के क्लेम निरस्तीकरण, कारण बताओं नोटिस एवं भुगतान में देरी आदि समस्याओं को गंभीरता से लेते हुए इनके समाधान के लिए सरकार ने विशेष कदम उठाए हैं। मुख्य सचिव डीबी गुप्ता की अध्यक्षता में एसीएस वीनू गुप्ता और न्यू इंडिया एश्योरेंस कम्पनी के उच्च अधिकारियों के साथ हुई बैठक में कई मुद्दों पर सहमति के बाद इन समस्याओं के समाधान का मार्ग प्रशस्त हुआ है। राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेन्सी के सीईओ नवीन जैन ने बताया की सम्बद्ध अस्पतालों की समस्याओं का बारीकी से परीक्षण करवाया गया एवं समस्याओं के निस्तारण की कार्ययोजना बनाकर आवश्यक कार्यवाही की गई।
उन्होंने बताया कि बीमा कम्पनी द्वारा क्लेम निरस्त किए जाने पर अस्पताल द्वारा सीधे संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी, राजस्थान स्टेट हैल्थ एश्योरेंस एजेन्सी के स्तर पर अपील दायर की जा सकती है। योजना के प्रथम चरण में अस्पताल जिला स्तरीय समिति में अपील करने का प्रावधान था। द्वितीय चरण में सीधे ही संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी के स्तर पर अपील करने का प्रावधान किया गया है। उन्होने बताया है कि संयुक्त मुख्य कार्यकारी अधिकारी द्वारा अब तक लगभग 15 हजार क्लेम्स की सुनवाई कर निर्णय दिया जा चुका है। श्री जैन ने बताया कि निर्धारित प्रावधानों के अनुसार बीमा कम्पनी एवं अस्पतालों के मध्य विवाद उत्पन्न होने या बीमा कम्पनी द्वारा अस्पतालों को कारण बताओं नोटिस जारी करने अथवा योजना से असम्बद्ध करने के नोटिस की स्थिति में अस्पताल मुख्य कार्यकारी अधिकारी राजस्थान हैल्थ एश्योरेंस एजेन्सी की अध्यक्षता में गठित राज्य स्तरीय परिवेदना निस्तारण कमेटी में अपील दायर कर सकते है। उन्होने बताया कि अस्पतालों को बीमा कम्पनी द्वारा अकारण बिना किसी साक्ष्य के नोटिस दिये जाने की स्थिति में कमेटी में सम्बद्ध अस्पतालों के हितों का पूर्ण ध्यान रखा जाता है। एसजीआरसी द्वारा अब तक 48 परिवेदनाओं का निस्तारण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि योजना से सम्बद्ध सभी अस्पतालों से इस महत्वाकांक्षी योजना का ईमानदारी से संचालन करने तथा पात्र मरीजों का नि:शुल्क इलाज करने की अपेक्षा की जाती है। अस्पतालों से यह भी अपेक्षा की जाती है कि वे मरीजों का कैशलेस उपचार करें एवं इलाज की आवश्यकता के अनुसार ही पैकेज बुक करें। अस्पतालों को मरीज के भर्ती एवं डिस्चार्ज के समय की फोटो भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के सॉफ्टवेयर में ही कैप्चर्ड करने के निर्देश है। उन्हे यह स्पष्ट कर दिया गया है कि मोबाईल अथवा कैमरे से ली हुई फोटो मान्य नहीं है। मुख्य कार्यकारी अधिकारी ने बताया कि भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के सॉफ्टवेयर में आधार कार्ड लिंक होने पर मरीजों का भौतिक सत्यापन बायोमेट्रिक्स मशीन द्वारा ही किया जाना आवश्यक है। आधार कार्ड नहीं बने होने अथवा तीन बार प्रयास किए जाने के बावजूद उंगलियों के निशान प्रमाणित नहीं होने पर ही मरीज की पहचान वैकल्पिक विधि से की जा सकती है। इस विधि में मरीज का एक फोटो पहचान पत्र तथा कारण लिखते हुए क्लेम प्रेषित करना है। 

शुक्रवार, 3 अगस्त 2018

नाम से ही नहीं, सेवाओं से भी ‘आदर्श’ है हिंदुमलकोट पीएचसी
-भारत-पाक बॉर्डर पर बसी एकमात्र आदर्श पीएचसी पर पंजाब से भी आते हैं मरीज
श्रीगंगानगर। अंतर्राष्ट्रीय सीमा पर स्थित आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र हिंदुमलकोट नाम से ही आदर्श नहीं है बल्कि यहां आमजन को भी आदर्श स्वास्थ्य सेवाएं भी मुहैया करवाई जा रही है। यहां स्टाफ की कर्तव्यनिष्ठता के साथ ही संसाधनों का भी पूर्णत: सदुपयोग किया जा रहा है। यही वजह है कि यहां राज्य के बाहर से, यानि पंजाब से भी मरीज आते हैं। खासकर, यहां का वातानुकूलित प्रसव केंद्र न केवल सुविधाओं के लिहाज से बल्कि यहां स्टाफ की 24 घण्टे उपलब्धता व कुशलता के चलते आस-पास में विख्यात है। हिंदुमलकोट आदर्श पीएचसी बनने के बाद कई अवार्ड लेकर स्वास्थ्य महकमे में दूसरे केंद्रों के लिए प्रेरणास्रोत बनी हैं। 
केंद्र प्रभारी डॉ. अतिशा लीला बताती हैं कि हिंदुमलकोट पीएचसी वर्ष 2007 में बनी और इसके बाद 15 अगस्त 2016 को आदर्श पीएचसी बनी। वर्तमान में एपीएचसी पर प्रतिदिन करीब 70 से 80 मरीज आते हैं, जिनमें बॉर्डर पर तैनात जवान भी शामिल होते हैं। वहीं करीब 30-40 प्रसव हर माह होते हैं। यहां पंजाब से भी मरीज व गर्भवती महिलाएंबड़ी संख्या में आते हैं। केंद्र पर हर माह की आठ तारीख को परिवार कल्याण शिविर निर्धारित हैं और हर माह की नौ तारीख को प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाता है। जिसमें गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही प्रसव काल के लिए जागरूक किया जाता है। चिन्हित गर्भवती महिलाओं को हर सोमवार व शुक्रवार विशेष सुविधा देते हुए आयरन सुक्रोज इंजेक्शन भी लगाया जाता है। केंद्र पर एम्बुलेंस 104 की सेवाएं भी उपलब्ध है और यहां मोर्चरी रूम भी बना हुआ है। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि यहां डॉक्टर अतिशा लीला टीम में अकाउटेंट सुभाष राव, नर्सिंग स्टाफ राकेश कुमार, द्वितीय सन्नी चराया, अंजू बाला व शिला, एएनएम सोनू शर्मा, एलटी श्रवण कुमार, फार्मासिस्ट सरोज बिश्रोई, ऑपरेटर रविंद्र कुमार व अनिल नेहरा, आशा सुपरवाइजर राज कौर और बंशीलाल व श्यामलाल शामिल हैं। केंद्र की पहचान यहां की एलएचवी मेरी कुटी हैं, जिनसे प्रसव करवाने के लिए दूर-दराज से गर्भवती महिलाएं आती हैं।  
मिल चुके हैं अवार्ड
हिंदुमलकोट एपीएचसी बेहतरीन कार्य की बदौलत कायाकल्प अवार्ड हासिल कर चुकी है। वर्ष 2017-18 में यह केंद्र प्रथम स्थान पर रहा। इस वर्ष परिवार कल्याण में अव्वल रहते हुए 50 हजार रुपए व प्रशस्ति चिन्ह हासिल किया। इसी तरह टीम को जिलास्तरीय समारोह स्वतंत्रा दिवस व विभागीय कार्यक्रम में भी सम्मानित किया जा चुका है। वहीं सेंटर के अधीन आने वाले चार उप स्वास्थ्य केंद्रोंं मसलन सुजावलपुर, खखां, पक्की व कोठां में से सुजावलपुर को केंद्र सरकार की आयुष्मान भारत योजना के तहत चयनित किया गया है। 

बुधवार, 1 अगस्त 2018

अगस्त में 48 स्वास्थ्य केंद्रों पर लगेंगे परिवार कल्याण शिविर
- जिलास्तरीय अधिकारी करेंगे मोनिटरिंग, जिला अस्पताल में चार, 10, 18 व 26 अगस्त को शिविर 
श्रीगंगानगर। चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की ओर से अगस्त माह में दो 48 परिवार कल्याण शिविर लगाए जाएंगे। इस दौरान महिला एवं पुरुषों की नसबंदी की जाएगी। शिविरों के सफल व गुणवत्तापूर्ण आयोजन के लिए विभाग ने अधिकारियों-कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई है एवं पाबंद किया है कि किसी भी तरह की लापरवाही पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि दो अगस्त को पीएचसी घमूड़वाली व सीएचसी शिवपुर, चार अगस्त को जिला अस्पताल में, पांच को सीएचसी श्रीविजयनगर में, आठ को हिंदुमलकोट, पतरोड़ा व रायसिंहनगर, नौ को सीएचसी अनूपगढ़ व रोजड़ी, दस को सरदारगढ़ व जिला अस्पताल, 11 अगस्त को सोमासर व केसरीसिंहपुर, 12 को सीएचसी सादुलशहर व पीएचसी ख्यालीवाला, 13 को सीएचसी घड़साना, 14 को मिर्जेवाला व जैतसर, 15 को सीएचसी सूरतगढ़ व रायसिंहनगर, 16 को बीरमाना व लालगढ़, 17 को राजियासर व पीएचसी 17 जेड, 18 को जिला अस्पताल व सीएचसी श्रीकरणपुर, 19 को पीएचसी कमरानिया, 20 को पीएचसी सुखचैनपुरा व ढाबां, 21 को श्रीविजयनगर, चूनावढ़ व पीएचसी हाकमाबाद, 22 को सीएचसी सादुलशहर, 23 को अनूपगढ़, रायसिंहनगर, नाहरांवाली, 24 को रामसिंहपुर व समेजा कोठी, 25 को पदमपुर, 26 को जिला अस्पताल, 27 को गजसिंहपुर व सूरतगढ़, 28 को घड़साना व श्रीकरणपुर, 29 सीएचसी रावला, 30 जुलाई को पीएचसी 365 आरडी व सीएचसी रायसिंहनगर में परिवार कल्याण शिविर लगाए जाएंगे।
शुरू हुआ स्तनपान जागरूकता सप्ताह
-माँ का दूध शिशु के लिए जरूरी, इसी थीम पर स्वास्थ्य केंद्रों पर आयोजित होंगे कार्यक्रम
श्रीगंगानगर। स्तनपान के प्रति जन-जागरूकता लाने के मक़सद से अगस्त माह के प्रथम सप्ताह को पूरे विश्व में स्तनपान सप्ताह के रूप में मनाया जाता है। इसी कड़ी में बुधवार को जिले में भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने स्तनपान जागरूकता सप्ताह प्रारंभ किया। स्तनपान सप्ताह के दौरान माँ के दूध के महत्व की जानकारी देने के साथ ही उन्हें बताया जाता है कि नवजात शिशुओं के लिए माँ का दूध अमृत के समान है। माँ का दूध शिशुओं को कुपोषण व अतिसार जैसी बीमारियों से बचाता है। स्तनपान को बढ़ावा देकर शिशु मृत्यु दर में कमी लाई जा सकती है। शिशुओं को जन्म से छ: माह तक केवल माँ का दूध पिलाने के लिए महिलाओं को इस सप्ताह के दौरान विशेष रूप से प्रोत्साहित किया जाता है।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि विश्व स्तनपान सप्ताह, विश्वभर के बच्चों के स्वास्थ्य में सुधार और स्तनपान कराने को प्रोत्साहित करने के लिए एक सौ सत्तर देशों से अधिक देशों में प्रतिवर्ष अगस्त माह के पहले सप्ताह (एक अगस्त से सात अगस्त) में मनाया जाता है। इसका उद्देश्य मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में कमी लाना भी है। माँ का दूध बच्चे के लिए अनमोल उपहार है। मां का दूध, बच्चे के सम्पूर्ण विकास के लिए पोषण का सबसे अच्छा स्रोत है तथा बच्चे को छह महीने की अवस्था तक मां के दूध के अलावा अन्य कोई वैकल्पिक आहार नहीं दिया जाना चाहिए। प्रत्येक माँ को स्तनपान कराने की तकनीकों जैसे कि स्तनपान कैसे कराएँ? और स्तनपान कब कराना चाहिए? तथा स्तनपान से संबंधित अन्य पहलुओं के बारे में जानकारी प्राप्त करनी चाहिए। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि डब्ल्यूएचओ के अनुसार, नवजात शिशु के लिए कोलोस्ट्रम, पीला, चिपचिपा/गाढ़ा दूध संपूर्ण आहार है। जन्म के तुरंत बाद, एक घंटे के भीतर ही स्तनपान शुरू किया जाना चाहिए। शिशु को छह महीने की अवस्था के बाद और दो वर्ष अथवा उससे अधिक समय तक स्तनपान कराने के साथ-साथ पौष्टिक पूरक आहार भी दिया जाना चाहिए। स्तनपान कराने के दौरान, धूम्रपान अथवा शराब का सेवन न करें। यह बच्चे के लिए हानिकारक हो सकता है। स्तनपान कराने से पहले अथवा बाद में उचित स्वच्छता बनाई रखनी चाहिए। बच्चे को उसकी आवश्यकता के अनुसार अथवा चौबीस घंटों में आठ बार स्तनपान अवश्य करवाना चाहिए। बच्चे के लिए बोतल से दूध पीना हानिकारक हो सकता है, क्योंकि इससे शिशु को पतले दस्त/मल होने की समस्या हो सकती है।
शिशु के लिए स्तनपान के लाभ -
शिशु को स्तनपान से प्रोटीन, वसा, कैलोरी, लैक्टोज, विटामिन, लोहा, खनिज, पानी और आवश्यक एंजाइम पर्याप्त मात्रा में प्राप्त होते है।
स्तन का दूध जल्दी और आसानी से पचता हैं।
यह बच्चे की प्रतिरोधक क्षमता को भी बढ़ाता है, जो कि बच्चे को भविष्य में कई प्रकार के संक्रमणों से भी बचाता हैं।
यह बच्चे के मस्तिष्क के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका का निर्वाह करता है।
यह संक्रमण से मुक्त होता हैं।
स्तनपान बच्चे और मां के बीच भावनात्मक संबंध को मजबूत बनाता है।
माँ लिए स्तनपान के लाभ - 
यह स्तन और डिम्बग्रंथि के कैंसर होने की संभावना को कम करता है।
यह प्रसव से पहले खून बहना और एनीमिया की संभावना को कम करता है।
यह माँ को अपनी पुरानी शारीरिक संरचना प्राप्त करने में सहायता करता हैं। स्तनपान कराने वाली माताओं के बीच मोटापा सामान्यत: कम पाया जाता है।
स्तनपान कराना, बच्चों में मृत्यु/मृत्यु दर को कम करता है।
स्तनपान करने वाले बच्चों में उत्कृष्ट प्रतिरक्षा प्रणाली का विकास होता हैं तथा वे कई प्रकार की घातक की बीमारियों की रोकथाम में सक्षम बनते है।