मरीजों के लिए ‘कैशलेस इलाज’ बना मददगार
-भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बिना खर्च लाभान्वित हो रहे मरीज

श्रीगंगानगर। केंद्र सरकार की ओर से 500 व 1000 के पुराने नोट बंद करने के निर्णय के बीच भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना लाभार्थी मरीजों के मुफीद साबित हो रही है। इस योजना के कारण लाभार्थी मरीजों को अब न किसी से कर्ज लेना पड़ रहा है और न ही छोटे-बड़े नोटों के झंझट से रूबरू होना पड़ रहा है। योजना के तहत लाभार्थी बिना किसी परेशानी शहर के प्रतिष्ठित व बड़े निजी हॉस्पीटलों में नि:शुल्क इलाज करवा पा रहे हैं। ऐसे में मरीज राज्य सरकार की इस अतिमहत्वाकांक्षी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ लेते हुए सरकार का शुक्राना अदा कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 13 दिसंबर 2015 से शुरू हुई योजना को आगामी 13 तारीख को पहला सफलम एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। योजना से लाभान्वित ऐसे ही तीन मरीजों की दास्तां, उन्हीं की जुबानी।
शहर के एक निजी हॉस्पीटल में किशनपुरा पंचायत के बिजारणियांवाली ढाणी निवासी 70 वर्षीय हरीराम सहू आज बेहद खुश नजर आ रहे हैं। वजह साफ है, दो दिन पहले उनका हार्ट का सफल ऑपरेशन हुआ और वो भी पूर्णत: नि:शुल्क। अपना दर्द साझा करते हुए बुजूर्ग हरीराम सहू बताते हैं कि उनका कुछ महीने पहले आंत का भी ऑपरेशन हुआ था, जिस कारण काफी खर्चा हो गया। अब ईलाज के लिए पैसा नहीं था, क्योंकि हार्ट के लिए करीब तीन लाख रूपए खर्च अनुमानित था। इसी बीच उन्हें किसी ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में बताया तो उन्होंने स्थानीय आस्था हॉस्पीटल में संपर्क किया। यहां आते ही जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी और चिकित्सकों ने बताया कि सबकुछ नि:शुल्क होगा। बकौल हरीराम, ‘‘आज मैं योजना की बदौलत स्वस्थ हूं, नहीं तो न जाने क्या होता। वाकई में सरकार की यह बहुत अच्छी योजना है जो मुझ जैसे जरूरतमंद को जिंदगी दे रही है।’’ कमोबेश ऐसी ही दास्तां कोनी पंचायत के पांच पी बड़ी निवासी सदांकौर पत्नी जंगीरसिंह की है। दरअसल, ध्याड़ी-मजदूरी करने वाले जंगीरसिंह की पत्नी सदांकौर सांस की बीमारी से पीडि़त थीं। वे लंबे अर्से से इधर-उधर भटके, जिन पर करीब चालीस से पच्चास हजार रूपए खर्च हो गया। अब योजना का पता चला तो सदांकौर को स्थानीय निजी हॉस्पीटल में भर्ती करवाया गया, जहां नि:शुल्क इलाज तो हुआ ही साथ में बेहतर सुविधा भी मिली। जंगीरसिंह बताते हैं कि, एक तो बीमारी दूसरा इलाज करवाने के चलते मजदूरी भी नहीं कर पा रहा हूं, जिस कारण हालात बहुत खस्ता हो गए थे और डर था कि अब क्या होगा। लेकिन योजना के तहत हमें न पैसे की जरूरत हुई और न ही किसी सिफारिश की। हरीराम और सदांकौर से कहीं ज्यादा पीड़ादाई दास्तां है दीपक की। कक्षा आठवीं में पढऩे वाले दीपक के किडनी में स्टोन था, जिस कारण वह अक्सर बीमार रहता। दीपक के सिर से पिता का साया उठ चुका है और उसकी मां लिक्ष्मादेवी मजदूरी कर घर चलाती हैं और दवा का खर्च भी उठाती हैं। बार-बार भयानक दर्द से आहत दीपक को चिकित्सकों ने ऑपरेशन की सलाह दी तो लिक्ष्मादेवी के पांव तले जमीन खिसक गर्ई। आखिरकार किसी ने स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में बताया, जिसके बाद दीपक को योजना से जुड़े हॉस्पीटल में भर्ती करवाया। आज दीपक पूरी तरह स्वस्थ है और बार-बार राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का शुक्रिया अदा करता है। लिक्ष्मादेवी भी कहती हैं, मैडम यह योजना नहीं लाती तो आज हम जैसे गरीबों का क्या होता, यह सोच कर भी डर लगता है। वो बताती हैं कि अभी हमारे पैसे नहीं थे, लेकिन ऑपरेशन के दौरान व बाद में पैसे की जरूरत ही महसूस नहीं हुई और अब बेटा ठीक है तो सब ठीक है।
‘भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना कैशलेस इलाज मुहैया करवाती है। भर्ती होने वाले योजना के लाभार्थी मरीजों का भामाशाह कार्ड के माध्यम से नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है। मरीज या उसके परिजन का एक पैसा भी इलाज के दौरान नहीं लगता, यही वजह है कि उपचार के दौरान परिजनों व मरीज को पैसे की जरूरत नहीं होती। आमजन सरकारी व अधिकृत निजी अस्पतालों में योजना का लाभ ले सकते हैं’
डॉ. नरेश बंसल, सीएमएचओ
‘भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार का नतीजा है कि आज जिले के दूर-दराज क्षेत्र के लोग भी योजना के तहत लाभान्वित हो रहे हैं। गरीब से गरीब तबका भी योजना का लाभ ले रहा है और वे स्वस्थ होकर खुशी-खुशी घर लौट रहे हैं। हमारे लिए इससे बड़ी उपलब्धि कुछ नहीं हो सकती कि एक जरूरतमंद परिवार बिना कर्ज, बिना किसी झंझट के इलाज करवा पा रहा है’
विनोद बिश्रोई, सीओआईईसी











