बुधवार, 30 नवंबर 2016

 मरीजों के लिए ‘कैशलेस इलाज’ बना मददगार
-भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत बिना खर्च लाभान्वित हो रहे मरीज

श्रीगंगानगर। केंद्र सरकार की ओर से 500 व 1000 के पुराने नोट बंद करने के निर्णय के बीच भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना लाभार्थी मरीजों के मुफीद साबित हो रही है। इस योजना के कारण लाभार्थी मरीजों को अब न किसी से कर्ज लेना पड़ रहा है और न ही छोटे-बड़े नोटों के झंझट से रूबरू होना पड़ रहा है। योजना के तहत लाभार्थी बिना किसी परेशानी शहर के प्रतिष्ठित व बड़े निजी हॉस्पीटलों में नि:शुल्क इलाज करवा पा रहे हैं। ऐसे में मरीज राज्य सरकार की इस अतिमहत्वाकांक्षी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ लेते हुए सरकार का शुक्राना अदा कर रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 13 दिसंबर 2015 से शुरू हुई योजना को आगामी 13 तारीख को पहला सफलम एक वर्ष पूरा होने जा रहा है। योजना से लाभान्वित ऐसे ही तीन मरीजों की दास्तां, उन्हीं की जुबानी। 


शहर के एक निजी हॉस्पीटल में किशनपुरा पंचायत के बिजारणियांवाली ढाणी निवासी 70 वर्षीय हरीराम सहू आज बेहद खुश नजर आ रहे हैं। वजह साफ है, दो दिन पहले उनका हार्ट का सफल ऑपरेशन हुआ और वो भी पूर्णत: नि:शुल्क। अपना दर्द साझा करते हुए बुजूर्ग हरीराम सहू बताते हैं कि उनका कुछ महीने पहले आंत का भी ऑपरेशन हुआ था, जिस कारण काफी खर्चा हो गया। अब ईलाज के लिए पैसा नहीं था, क्योंकि हार्ट के लिए करीब तीन लाख रूपए खर्च अनुमानित था। इसी बीच उन्हें किसी ने भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में बताया तो उन्होंने स्थानीय आस्था हॉस्पीटल में संपर्क किया। यहां आते ही जांच के बाद ऑपरेशन की सलाह दी और चिकित्सकों ने बताया कि सबकुछ नि:शुल्क होगा। बकौल हरीराम, ‘‘आज मैं योजना की बदौलत स्वस्थ हूं, नहीं तो न जाने क्या होता। वाकई में सरकार की यह बहुत अच्छी योजना है जो मुझ जैसे जरूरतमंद को जिंदगी दे रही है।’’ कमोबेश ऐसी ही दास्तां कोनी पंचायत के पांच पी बड़ी निवासी सदांकौर पत्नी जंगीरसिंह की है। दरअसल, ध्याड़ी-मजदूरी करने वाले जंगीरसिंह की पत्नी सदांकौर सांस की बीमारी से पीडि़त थीं। वे लंबे अर्से से इधर-उधर भटके, जिन पर करीब चालीस से पच्चास हजार रूपए खर्च हो गया। अब योजना का पता चला तो सदांकौर को स्थानीय निजी हॉस्पीटल में भर्ती करवाया गया, जहां नि:शुल्क इलाज तो हुआ ही साथ में बेहतर सुविधा भी मिली। जंगीरसिंह बताते हैं कि, एक तो बीमारी दूसरा इलाज करवाने के चलते मजदूरी भी नहीं कर पा रहा हूं, जिस कारण हालात बहुत खस्ता हो गए थे और डर था कि अब क्या होगा। लेकिन योजना के तहत हमें न पैसे की जरूरत हुई और न ही किसी सिफारिश की। हरीराम और सदांकौर से कहीं ज्यादा पीड़ादाई दास्तां है दीपक की। कक्षा आठवीं में पढऩे वाले दीपक के किडनी में स्टोन था, जिस कारण वह अक्सर बीमार रहता। दीपक के सिर से पिता का साया उठ चुका है और उसकी मां लिक्ष्मादेवी मजदूरी कर घर चलाती हैं और दवा का खर्च भी उठाती हैं। बार-बार भयानक दर्द से आहत दीपक को चिकित्सकों ने ऑपरेशन की सलाह दी तो लिक्ष्मादेवी के पांव तले जमीन खिसक गर्ई। आखिरकार किसी ने स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में बताया, जिसके बाद दीपक को योजना से जुड़े हॉस्पीटल में भर्ती करवाया। आज दीपक पूरी तरह स्वस्थ है और बार-बार राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे का शुक्रिया अदा करता है। लिक्ष्मादेवी भी कहती हैं, मैडम यह योजना नहीं लाती तो आज हम जैसे गरीबों का क्या होता, यह सोच कर भी डर लगता है। वो बताती हैं कि अभी हमारे पैसे नहीं थे, लेकिन ऑपरेशन के दौरान व बाद में पैसे की जरूरत ही महसूस नहीं हुई और अब बेटा ठीक है तो सब ठीक है। 


‘भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना कैशलेस इलाज मुहैया करवाती है। भर्ती होने वाले योजना के लाभार्थी मरीजों का भामाशाह कार्ड के माध्यम से नि:शुल्क इलाज किया जा रहा है। मरीज या उसके परिजन का एक पैसा भी इलाज के दौरान नहीं लगता, यही वजह है कि उपचार के दौरान परिजनों व मरीज को पैसे की जरूरत नहीं होती। आमजन सरकारी व अधिकृत निजी अस्पतालों में योजना का लाभ ले सकते हैं’
डॉ. नरेश बंसल, सीएमएचओ
‘भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के व्यापक प्रचार-प्रसार का नतीजा है कि आज जिले के दूर-दराज क्षेत्र के लोग भी योजना के तहत लाभान्वित हो रहे हैं। गरीब से गरीब तबका भी योजना का लाभ ले रहा है और वे स्वस्थ होकर खुशी-खुशी घर लौट रहे हैं। हमारे लिए इससे बड़ी उपलब्धि कुछ नहीं हो सकती कि एक जरूरतमंद परिवार बिना कर्ज, बिना किसी झंझट के इलाज करवा पा रहा है’
विनोद बिश्रोई, सीओआईईसी

सोमवार, 28 नवंबर 2016

जहां हर माह होती है ‘दिल की बात’
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में मनाया जाता है हर माह ह्रदय दिवस

श्रीगंगानगर। भले ही विश्व में 29 सितंबर को ह्रदय  दिवस मनाया जाता हो, लेकिन संभवत: पूरे विश्व में श्रीगंगानगर एक मात्र ऐसा जिला है जहां हर माह ह्रदय  दिवस मनाया जाता है। वो भी उन मासूम बच्चों के लिए जिनके परिजन इतने अस्मृद्ध हैं कि वे उनका इलाज नहीं करवा सकें। यही नहीं, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग द्वारा मनाए जाने वाले इस दिवस से पूर्व ह्रदय रोग से पीडि़त बच्चों को बकायदा विभागीय टीमें गांव-गांव जाकर चिन्हित करती हैं। दरअसल, यह संभव हो पाया है राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के प्रभावी क्रियान्वयन के चलते, जो जिले में बदस्तूर जारी है। इसी कार्यक्रम के तहत ही हर माह की 28 तारीख ह्रदय 

दिवस मनाया जाता है। कार्मिकों की कर्तव्यनिष्ठता व संवेदनशीलता का ही नतीजा है कि अब तक जिले में 60 ऐसे बच्चों को चिन्हित किया जा चुका है जो ह्रदय  रोग से पीडि़त हैं। अच्छी बात ये है कि अब
तक 13 बच्चों को सफल व नि:शुल्क ऑपरेशन करवाया जा चुका है और शेष का होना बाकी है।
जिला आईईसी समन्व्यक विनोद बिश्रोई ने बताया कि हर माह की 28 तारीख को मनाए जाने वाले ह्रदय  दिवस के चलते जिला अस्पताल के कमरा नंबर 15 में चिन्हित बच्चों को बुलाया जाता है। जहां वे अपने परिजनों के साथ आते हैं। ये वही बच्चे होते हैं जिन्हें आरबीएसके टीमें आंगनबाड़ी केंद्रों व राजकीय स्कूलों से संभावित ह्रदय  रोगी मानकर चिन्हित करती हैं। इन बच्चों के संबंध में टीम में शामिल चिकित्सक व जिला समन्वयक वाट्सएप व टेलीफोनिक वार्ता कर दिवस से एक सप्ताह पूर्व जानकारी जुटाते हैं और परिजनों को इस संबंध में जानकारी देते हैं। इसके बाद परिजन इन बच्चो को जिला अस्पताल में लगे आरबीएसके समनव्यक किशोर गौड़ व पलविंद्र कौर से मिलते हैं। वे बच्चों की एंट्री कर शिशु रोग विशेषज्ञों से जांच करवाते हैं। जरूरत होने पर इन बच्चों को आस्था हॉस्पीटल भेजा जाता है, जहां डॉक्टर प्रेम मित्तल इनकी नि:शुल्क इकोकार्डियोग्राफी करते हैं। रिपोर्ट के बाद सामान्य व पीडि़त बच्चों की सूची तैयार की जाती है और पीडि़त बच्चों के परिजनों की बकायदा बैठक कर उन्हें ऑपरेशन करवाने के लिए प्रेरित किया जाता है तथा सरकार की ओर से नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार की जानकारी दी जाती है। इसके बाद गंभीर बच्चों को प्राथमिकता से जयपुर स्थित उच्च चिकित्सा संस्थानों में नि:शुल्क ऑपरेशन के लिए भेजा जाता है। वहां ऑपरेशन होने और वापसी तक संबंधित टीमें परिजनों के संपर्क में रहती है और निरंतर फॉलोअप करती है। जुलाई से प्रारंभ किया गया ह्रदय दिवस 28 की बजाए 29 तारीख को तभी होता है जब 28 को राजकीय अवकाश होता है।
इनका दिल था नासाज, अब जगी जीने की आस
आरबीएसके सह प्रभारी डॉ. भारत भूषण ने बताय कि आरबीएसके टीमों ने ह्रदय  रोग से पीडि़त अब तक 60 बच्चों की सूची तैयार की है, जिनमें से 13 बच्चों को सफल ऑपरेशन करवाया जा चुका है। आरबीएसके के डॉ. सुनील बिश्रोई के मुताबिक सूतरगढ़ निवासी आरजू पुत्री भजनलाल, दस ए छोटी निवासी गजेंद्र पुत्र रामस्वरूप, सागरवाला निवासी नेहा, चूनावढ़ निवासी पुत्र राजेंद्र सुथार, घड़साना निवासी चंद्रकांता, पीपरेन, सूरतगढ़ निवासी द्रोपती पुत्री दीनदयाल, सूरतगढ़ निवासी भैरों, अनूपगढ़ निवासी अजय, श्रीकरणपुर निवासी सिमरन पुत्री सुरेंद्र सिंह, ओडक़ी निवासी कपिल, पदमपुर निवासी नीतू पुत्री बीरबल, श्रीकरणपुर निवासी माया पुत्री प्रेमसिंह और रामसिंहपुर निवासी लक्की पुत्री सुभाष का सफल ऑपरेशन करवाया जा चुका है। शेष बच्चों की सूची जयपुर भिजवाई गई है, जिनका हॉस्पीटल में नंबर आते ही ऑपरेशन करवाया जाएगा। 
विश्व ह्रदय दिवस
हर वर्ष 29 सितंबर को विश्व ह्रदय  दिवस मनाया जाता है, जिसकी शुरूआत वर्ष 2000 से हुई। दिवस मनाने का मुख्य उदï्देश्य आमजन में जागरूकता पैदा करना है। क्योंकि वर्तमान में निष्क्रिय जीवन शैली, अत्यधिक तनाव, हाइपरटेंशन, मधुमेह, अधिक धूम्रपान, मोटापा व वसायुक्त भोजन के कारण ह्रदय रोग बढ़ता जा रहा है। वहीं जिनका कोलेस्ट्रोल ज्यादा होता है उनमें ह्रदय  रोग का अधिक खतरा होता है। एक अनुमान के अनुसार, भारत में 10.2 करोड़ लोग इस बीमारी की चपेट में है। जानकारी के मुताबिक हर साल होने वाले 29 फीसदी मौतों की एक प्रमुख वजह ह्रदय  संबंधी बीमारियां या ह्रदयघात होता है। 

‘‘मिशन निदेशक नवीन जैन के निर्देशानुसार जिले में 11 जुलाई से राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम चलाया जा रहा है, जिसके तहत विभाग की 16 टीमें आंगनबाड़ी केंद्रों व राजकीय स्कूलों में जाकर 19 वर्ष तक के बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण करती है। जो बच्चे विभिन्न बीमारियों से पीडि़त होते हैं उनका सरकार नि:शुल्क इलाज करवा रही है। वहीं जिलास्तर पर नवाचार करते हुए हर माह की 28 तारीख को ह्रदय  दिवस मनाया जा रहा है और इसी का परिणाम है कि अब तक 60 बच्चों को चिन्हित कर 13 का नि:शुल्क ऑपरेशन करवा जा चुका है। हमारे जिले की आरबीएसके टीमें पूरे राज्य में सबसे बेहतर कार्य कर रही हैं’’
डॉ. नरेश बंसल, सीएमएचओ, श्रीगंगानगर

फ्लोराइड युक्त पानी भी दे सकता है फ्लोरोसिस
-आधा पीपीएम से ज्यादा पेयजल पर अंतरराष्ट्रीय कॉन्फें्रस में विशेषज्ञों ने जताई चिंता
श्रीगंगानगर। यदि आप अधिक फ्लोराइड वाला पानी पी रहे हैं तो यह आपके लिए घातक साबित हो सकता है। क्योंकि अधिक फ्लोराइड वाले पेयजल से फ्लोरासिस की बीमारी निश्चित है। सामान्य तौर पर इस बीमारी से हडिï्डयों में दर्द व जकडऩ और दांतों में सडऩ व पीलापन हो सकता है। इसके अलावा शारीरिक क्षमता भी कमजोर हो सकती है। इस गंभीर समस्या को लेकर हाल ही हैदराबाद में आयोजित अंतरराष्ट्रीय कॉन्फें्रस में चर्चा की गई। जिसमें श्रीगंगानगर से स्वास्थ्य विभाग के फ्लोरोसिस प्रभारी डॉ. सुनील बिश्रोई सम्मिलित हुए। उन्होंने बताया कि पेयजल में फ्लोराइड की मात्रा 0.5 पीपीएम से ज्यादा हो तो ये आपकी हड्डियों व दांतों के लिए घातक है। लगातार ऐसे पानी का सेवन करने से फ्लोरोसिस जैसी गंभीर बीमारी हो सकती है। 
उन्होंने बताया कि हाल ही में फ्लोराइड अनुसंधान पर अंतरराष्ट्रीय सोसाइटी के हैदराबाद स्थित राष्ट्रीय पोषण संस्थान में आयोजित 33 वीं कॉन्फें्रस में विशेषज्ञों ने इस बात का पुर जोर समर्थन किया कि फ्लोरोसिस पर प्रभावी नियंत्रण के लिए भारत में पानी में फ्लोराइड के वर्तमान स्वीकृत मानक स्तर एक पीपीएम को घटा कर 0.5 पीपीएम कर देना चाहिए क्योंकि गरीब व दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों में निवास कर रहे भारतीयों के भोजन में कैल्सियम, विटामिन व आयरन के अभाव के चलते एक पीपीएम से अधिक मात्रा वाले पानी का लगातार सेवन भी फ्लोरोसिस दे सकता है। कॉन्फें्रस में यह तथ्य भी उभरकर आया कि मात्र स्वास्थ्य विभाग के प्रयासों के बजाय जलदाय विभाग, नगर व ग्रामीण निकाय, केमिस्ट व डेंटिस्ट का भी समन्वय आवश्यक है। तीन दिवसीय कांफ्रेंस में सोसाइटी के अध्यक्ष अरुण एल खंडारे द्वारा ग्रामीण क्षेत्रों में फ्लोराइड टेस्टिंग लैब की स्थापना का प्रस्ताव रखा गया। डॉ. बिश्रोई ने बताया कि लगातार अधिक फ्लोराइड युक्त पानी, तम्बाकू, सुपारी, काली चाय, काला नमक इत्यादि का सेवन व फ्लोराइड युक्त टूथपेस्ट का उपयोग करने से होने वाले हड्डियों में टेढ़ापन, कुबड़ापन व दांतों में पीलापन को फ्लोरोसिस कहते है। फ्लोरोसिस से बचने के लिए वर्षा जल एकत्र कर पीएं, इमली, आंवला, नीम्बू, हरी सब्जियां, दूध-दही, विटामिन सी, डी, कैल्सियम व आयरन युक्त खाद्य पदार्थों का सेवन करें। 

परिवार नियोजन में साझेदारी, पुरूषों की सक्रिय भागीदारी
-सीएमएचओ ने दिखाई प्रचार-प्रसार वाहन को हरी झंडी, नसबंदी पर मिल रहे तीन हजार रूपए
 श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के परिवार कल्याण अनुभाग की ओर से चार दिसंबर तक पुरूष नसबंदी पखवाड़ा चलाया जा रहा है। जिसके तहत नसबंदी शिविरों के साथ ही प्रचार-प्रसार गतिविधियां की जा रही है। इसी कड़ी में शुक्रवार को विभाग की ओर से तैयार प्रचार-प्रसार वाहन को मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेश बंसल ने हरी झंडी दिखाकर रवानगी दी है। इस दौरान जिला आईईसी समन्वयक विनोद बिश्रोई, फलोरोसिस सलाहकार डॉ. सुनील बिश्रोई, कर्मचारी यूनियन के जिलाध्यक्ष संदीप जाखड़, संदीप वर्मा, गगनदीपसिंह आदि मौजूद रहे। 
सीएमएचओ डॉ. बंसल ने बताया कि प्रचार-प्रसार वाहन शहर के सभी वार्डों में जाएगा और वहां पखवाड़े की जानकारी देकर पुरूषों को नसबंदी के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने बताया कि पुरूष नसबंदी बेहद आसान है और बिना किसी दर्द या समय से नसबंदी की जाती है। नसबंदी करने के एक घण्टे के अंतराल में छुटï्टी दी जाएगी और किसी तरह की कोई परेशानी नहीं होगी। राज्य सरकार की ओर से पुरूष नसबंदी पर दो हजार रूपए प्रोत्साहन राशि भी दी जा रही है, जबकि जिलास्तर पर एक हजार रूपए अतिरिक्त राशि दी जा रही है। यानी पखवाड़े के दौरान नसबंदी करवाने वालों को तीन हजार रूपए राशि दी जाएगी। वहीं जो कोई भी पुरूष को नसबंदी के लिए प्रेरित करता है उसे भी तीन सौ रूपए प्रोत्साहन राशि दी जाती है। उन्होंने बताया कि इस बार पखवाड़े को लेकर विशेष तैयारियांं की गई हैं और इसका ब्लॉकस्तर से व्यापक प्रचार-प्रसार भी किया जा रहा है। इस बार पखवाड़़़़़़़े की थीम ‘परिवार नियोजन में साझेदारी, अब होगी पुरूषों की सक्रिय भागीदारी’ रखी गई है, वहीं जिम्मेदारी निभाओ, प्लान बनाओ का नारा दिया गया है

गुरुवार, 24 नवंबर 2016

बालकों के स्वास्थ्य सुधार रहा बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम
-आरबीएसके के तहत दूर-दराज के बच्चे भी हो रहे हैं लाभान्वित

श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जिले के मासूम बच्चों के मुफीद साबित हो रहा है। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर लगने वाले शिविरों में न केवल बच्चों का स्थानीय स्तर पर इलाज हो रहा है बल्कि आवश्यकता होने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों में भी रैफर किया जा रहा है। गुरूवार को श्रीविजयनगर व अनूपगढ़ में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम का आयोजन किया गया। अनूपगढ़ में 285 और श्रीविजयनगर में 155 बच्चों की जांच की गई। 

सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए गए इस शिविर में सुरेंद्र डेंटल कॉलेज की टीम ने सहयोग किया। अनूपगढ़ में लगे शिविर में 285 बच्चे पहुंचे। वहीं श्रीविजयनगर में 155 बच्चे पहुंचे, जिनमें से 93 बच्चों का नि:शुल्क उपचार किया गया, जबकि 61 बच्चों को जिला अस्पताल और एक बच्चे को मेडिकल कॉलेज के लिए रैफर किया गया। आरबीएसके प्रभारी डॉ. भारत भूषण ने बताया कि शिविर में शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शिव बिश्रोई, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. दिनेश भारद्वाज, नाक-कान-गला के डॉ. ओपी गोयल, एवं डॉ. नेहा छाबड़ा, डॉ. निशा चावला, डॉ. प्रदीप कुमार, डॉ. सोहनलाल आदि ने सेवाएं दी। वहीं सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज के चिकित्सकों ने भी अपनी सेवाएं दी और बच्चों के दांतों की नि:शुल्क जांच की। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे आरबीएसके के तहत विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन विभाग के साथ किया जा रहा है। आगामी दिनों में भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र स्तर पर इस तरह के शिविर लगाए जाएंगे।


सोमवार, 21 नवंबर 2016

तम्बाकू उत्पाद के मामले में अब होगी सख्त कार्रवाई
-सार्वजनिक स्थलों व कार्यालयों का होगा आकस्मिक निरीक्षण, विभागाध्यक्ष पर कार्रवाई संभव

श्रींगगानगर। तम्बाकू उत्पाद के मामले में अब चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग धूम्रपान करने वालों और तम्बाकू उत्पाद बेचने वालों पर शिकंजा कसेगा। विभाग ने अब तक व्यापारियों व आमजन से समझाइश के प्रयास किए, लेकिन अब कार्रवाई की जाएगी। विभाग केंद्र सरकार की ओर से लागू किए गए सिगरेट एवं अन्य उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य उत्पादन, आपूर्ति व वितरण का विनियमन) अधिनियम 2003 की विभिन्न धाराओं के तहत कार्रवाई करेगा। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि इससे पूर्व भी लगातार कार्रवाई की जा रही थी, लेकिन विगत तीमाही में विभिन्न जागरूकता कार्यक्रमों व बैठकों के माध्यम से व्यापारियों, प्रशासनिक अधिकारियों व शैक्षणिक संस्थाओं के प्रबंधकों को अधिनियम के बारे में अवगत करवाया गया। 

सामाजिक कार्यकर्ता नीपेन शर्मा ने बताया कि विगत तीमाही में जिले के सभी व्यापारिक संगठनों, शैक्षणिक व प्रशासनिक अधिकारियों के साथ बैठक कर उनसे धूम्रपान उत्पाद बेचान न करने, नियमों की पालना करने तथा करवाने की गुजारिश की गई। व्यापारियों आदि को एक माह का समय दिया गया था ताकि वे निर्धारित बोर्ड आदि लगा सके। अब एक माह गुजरने के बाद विभाग की ओर से सख्त कार्रवाई की जाएगी। वहीं खण्ड स्तर पर भी टीमों का गठन का मासिक लक्ष्य दिए गए हैं ताकि जिले के हर कोने में कार्रवाई हो सके। सिगरेट एवं अन्य उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार तथा वाणिज्य उत्पादन, आपूर्ति व वितरण का विनियमन) अधिनियम 2003 की धारा चार, पांच, छह व सात के तहत विभिन्न प्रावधान किए गए हैं। अधिनियम की धारा चार के तहत सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना वर्जित है। धारा की अवहेलना पर जुर्माना लगाया जाता है। इसके अलावा पान विक्रेता, किरयाना स्टोर, रेहड़ी संचालक व अन्य जो भी तंबाकू उत्पाद बेचते हैं उन्हें अधिनियम के तहत निर्धारित बोर्ड लगाना होगा। इसी तरह प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से तंबाकू उत्पादों के विज्ञापन पर प्रतिबंध रहेगा। नियमों के उल्लंघन पर धारा पांच के तहत एक से पांच साल की कैद और एक से पांच हजार रूपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। धारा छह ए के तहत यदि कोई नाबालिग तंबाकू उत्पाद बेचता है या उससे बिकवाया जाता है तो उसके खिलाफ जुर्माने का प्रावधान है। वहीं बाल अपराध की विभिन्न धाराओं के तहत भी सजा का प्रावधान है। वहीं धारा छह बी के तहत सभी शिक्षण संस्थान मसलन राजकीय व निजी स्कूल, कॉलेज, कॉचिंग सेंटर, आंगनबाड़ी केंद्र आदि के सौ गज के दायरे में तंबाकू बेचान करना गैर कानूनी है। 

रविवार, 20 नवंबर 2016

असुविधा हुई तो करें शिकायत
-एम्बूलेंस है आपातकालीन सेवाएं, करें आवश्यक सहयोग भी
श्रीगंगानगर। आपातकालीन सेवाओं के लिए राज्य सरकार की ओर से प्रारंभ की गई डायल एन एम्बूलेंस ‘जीवनवाहिनी’ को लेकर यदि आपको किसी तरह की कोई असुविधा होती है या अन्य कोई मामला सामने आता है तो आमजन इसकी शिकायत सीधे राज्यस्तर पर कर सकेंगे। इस संबंध में विभाग की ओर से राज्यस्तरीय दो मोबाइल नंबर जारी किए गए हैं, जिन पर कोई भी शिकायत दर्ज करवा सकता है। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल के मुताबिक 108-एम्बूलेंस और 104-जननी एक्सप्रेस के संबंध में विभाग के नंबर 8764835254 एवं 8764835255 पर शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। इन शिकायतों पर राज्यस्तर से लेकर जिलास्तर पर मोनिटरिंग की जाएंगी और किसी भी स्तर पर लापरवाही मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई होगी। 
आईईसी समन्वयक विनोद बिश्रोई ने बताया कि 15 अगस्त से जिले सहित राज्य में राजकीय आपातकालीन 108 सेवा, 104 जननी एक्सप्रेस सेवा व चिकित्सालयों की बेस एम्बुलेंस सेवाओं का एकीकरण कर डायल एन एम्बूलेंस ‘जीवनवाहिनी’ की शुरूआत की गई है। इन सेवाओं को लेने के लिए विभाग का टोल फ्री नंबर 108 अथवा 104 डायल करना पड़ता है। दोनों में से किसी भी नंबर पर कॉल करने पर यह सुविधाएं तत्काल मिलती हैं। खासकर, मातृ-शिशु से सम्बंधित ट्रांसपोर्ट के लिए 104 व दुर्घटना जैसी आपातकालीन स्थितियों के लिए 108 एम्बुलेंस का उपयोग लिया जा रहा है। नॉन इमरजेंसी वाली स्थिति में मरीज को ट्रांसपोर्ट बेस एम्बुलेंस से दिया जा रहा है, जो मामूली चार्ज के साथ उपलब्ध है। दूसरी एम्बुलेंस की तरह बेस एम्बुलेंस में भी ऑक्सीजन, बीपी मशीन व अन्य जीवन रक्षक उपकरण लगाए गए हैं ताकि मरीज को किसी तरह की परेशानी न हो। जिले में 108 एम्बुलेंस सेवा के 19 वाहन, 104 जननी एक्सप्रेस के 18 वाहन एवं पांच बेस एम्बुलेंस संचालित हैं

शुक्रवार, 18 नवंबर 2016

‘‘लाभार्थियों का भुगतान तुरंत हो, लापरवाही बर्दाश्त नहीं होगी’’
-ओजस को लेकर हुई वीसी में मिशन निदेशक नवीन जैन ने दिए सख्त निर्देश, 
श्रींगगानगर। ‘‘महिला और बालिकाओं का अधिकार है कि उन्हें सरकार की ओर से दी जाने वाली प्रोत्साहन राशि तुरंत प्रभाव से मिले। यदि इसमें किसी भी तरह की लापरवाही, किसी भी स्तर पर होती है तो संबंधित अधिकारी व कर्मचारी के खिलाफ सख्त कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। यही नहीं ब्लॉक व जिलास्तरीय अधिकारी भी यह सुनिश्चित करें कि लाभार्थियों के भुगतान में विलंब न हो। ये निर्देश शुक्रवार को एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन ने वीडियो कॉन्फे्रंसिंग के दौरान दिए। एक दिसंबर से पीएचसी स्तर पर शुरू हो रहे ओजस सॉफ्टवेयर के संबंध में आयोजित इस वीसी में जिलास्तर से सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, डीएएम सतीश गुप्ता, डीएनओ कमल गुप्ता, डीपीएम विपुल गोयल, डीएसी रायसिंह सहारण और सीओआईईसी विनोद बिश्रोई सहित अन्य अधिकारी व कार्मिक शामिल हुए। वहीं ब्लॉकस्तर से सभी बीसीएमओ, बीपीएम एवं अन्य कार्मिक शामिल हुए। 
वीसी में मिशन निदेशक नवीन जैन ने निर्देशित किया कि कुछेक जगहों पर चिकित्सा अधिकारियों की लापरवाही के चलते लाभार्थियों को विलंब से भुगतान किया जा रहा है, जो बर्दाश्त के लायक नहीं है। सभी संस्थान प्रभारी सुनिश्चित कर लें कि वे जेएसवाई, शुभलक्ष्मी योजना व राजश्री योजना का भुगतान तुरंत प्रभाव से करें। क्योंकि यह लाभार्थी का अधिकार है और इसमें किसी अधिकारी या कर्मचारी की इच्छा या लापरवाही नहीं चलेगी। श्री जैन ने अब तक बकाया भुगतान की समीक्षा करते हुए सभी स्वास्थ्य केंद्र प्रभारियों को आगामी 25 नंवबर तक का समय देते हुए कहा कि वे तुरंत प्रभाव से शत-प्रतिशत लाभार्थियों का भुगतान करवाने का प्रयास करें। श्रीगंगानगर जिले के सूरतगढ़ ब्लॉक में बकाया भुगतान को लेकर उन्होंने कड़ी नाराजगी जताते हुए बीसीएमओ को एक दिसंबर तक का समय देते हुए निर्देशित किया कि वे स्वयं अपनी टीम के साथ फील्ड में उतरे और लाभार्थियों का अकाउंट नंबर हासिल कर उनका भुगतान करवाएं। वहीं अन्य संबंधित कार्मिकों का एक माह का समय देते हुए कहा कि यदि लक्ष्य हासिल करने में असमर्थ रहते हैं तो इन्हें तुरंत एपीओ कर जयपुर भेजें। इसी तरह उन्होंने महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को निर्देशित किया कि वे बच्चे का पूर्ण टीकाकरण कर पीसीटीएस में एंट्री करवाएं और प्रमाणित करें ताकि शुभलक्ष्मी योजना की दूसरी किश्त मिल सके। इसके साथ ही महिलाओं व उनके परिजनों को प्रेरित करें कि वे शुभलक्ष्मी योजना की हर किश्त लें। उन्होंने जिलाधिकारियों से कहा कि वे भी नियमित मोनिटरिंग करें और हर कार्य की समीक्षा करें। साथ ही पीएचसी पर शुरू हो रहे ओजस सॉफ्टवेयर को लेकर उन्होंने कहा कि पीएचसी पर प्रसूता को 48 घण्टे के बाद ही डिस्चार्ज किया जाए और इसी दौरान बैंक खाता सहित अन्य वांछित दस्तावेज हासिल किए जाएं ताकि प्रसूता को भुगतान के लिए चक्कर न निकालने पड़े। बीसीएमओ एवं बीपीएम को हर माह सेक्टर मिटिंग लेने एवं मोनिटरिंग करने के निर्देश दिए। 
तो आशाओं को नहीं मिलेगा भुगतान
वीसी के दौरान एमडी नवीन जैन ने कहा कि आशाओं की जिम्मेदारी बनती है कि वे गर्भवती महिला के पंजीकरण के दौरान ही उसका बैंक अकाउंट नंबर लें अन्यथा आगामी एएनसी के दौरान उससे अकाउंट नंबर हासिल करे। यदि प्रसव के दौरान तक महिला का बैंक अकाउंट नंबर लापरवाही के कारण नहीं लिया जाता है तो दो-तीन मामलों के बाद आशाओं का एएनसी संबंधी भुगतान नहीं दिया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने हिदायत दी कि आशाएं घर-घर जाने के दौरान महिलाओं को बैंक खाता खुलवाने के लिए प्रेरित करें। श्री जैन ने इस कार्य के लिए ब्लॉक हेल्थ सुपरवाइजर और पीएचसी हेल्थ सुपरवाइजर सहित चिकित्सा प्रभारी की जिम्मेदारी तय करते हुए कहा कि वे भी बैंक अकाउंट के संबंध में मोनिटरिंग करें अन्यथा उनके खिलाफ भी सख्त कार्रवाई की जाएगी। वीसी के दौरान ही कुछेक कार्मिकों की लापरवाही पर उन्हें तत्काल एपीओ करने के निर्देश दिए गए। 
एक दिसंबर से ओजस पीएचसी पर शुरू
अब एक दिसंबर 2016 से प्रसव पर महिलाओं व बालिकाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान नगद या चेक के माध्यम से नहीं किया जाएगा, बल्कि ओजन सॉफ्टवेयर के जरिए ऑनलाइन भुगतान होगा। एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन ने आहï्वान किया है कि राज्य की हर महिला का बैंक खाता खुलवाया जाए ताकि कोई भी इस राजकीय राशि से वंचित न रहे। उल्लेखनीय है कि प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के तहत शहरी क्षेत्रों में 1000 व ग्रामीण क्षेत्रों में 1400 रुपए सहायता राशि दी जा रही है, जो एक दिसंबर से ऑनलाइन मिलेगी। वहीं मुख्यमंत्री राजश्री योजना के तहत बेटी पैदा होने पर छह किस्तों में 50 हजार रुपए की राशि भी ऑनलाइन दी जाएगी। शुभलक्ष्मी योजना के संबंध में निर्देशित करते हुए मिशन निदेशक ने कहा कि योजना की दूसरी किश्त राज्य के किसी भी स्वास्थ्य केंद्र से ली जा सकती है, भले ही प्रसव राज्य के किसी भी स्वास्थ्य केंद्र मेंं हुआ हो।  

गुरुवार, 17 नवंबर 2016

प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी ऑनलाइन होगा भुगतान
-एक दिसंबर से ओजस पीएचसी पर शुरू, हर महिला का बैंक खाता खुलवाने का आहï्वान, आज होगी वीसी
श्रीगंगानगर। ऑनलाइन भुगतान के मामले में बेहतरीन कार्य कर रहा स्वास्थ्य विभाग अब एक और कदम आगे बढ़ाते हुए प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी ऑनलाइन भुगतान सुनिश्चित करेगा। अब एक दिसंबर 2016 से प्रसव पर महिलाओं व बालिकाओं को मिलने वाली प्रोत्साहन राशि का भुगतान नगद या चेक के माध्यम से नहीं किया जाएगा, बल्कि ओजन सॉफ्टवेयर के जरिए ऑनलाइन भुगतान होगा। एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन ने आहï्वान किया है कि राज्य की हर महिला का बैंक खाता खुलवाया जाए ताकि कोई भी इस सरकार राशि से वंचित न हो। इस कार्यक्रम को सुचारू रूप से चलाने के लिए शुक्रवार को मिशन निदेशक श्री जैन जिलाधिकारियों सहित ब्लॉकस्तरीय अधिकारियों व कार्मिकों से वीडियो कॉन्फे्रंसिंग के जरिए मुखातिब होंगे। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्रों (पीएचसी) में प्रसव के बाद प्रसूताओं को जेएसवाई के तहत सहायता राशि दी जाती है और इसी तरह बेटियों के जन्म पर भी चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से प्रोत्साहन राशि दी जाती है। यही राशि अब पीएचसी से ऑनलाइन प्रसूता के बैंक खाते में जमा करवाई जाएगी। वहीं पीएचसी के अधीन आने वाले उप स्वास्थ्य केंद्रों में होने वाले प्रसवों पर भी भुगतान ऑनलाइन होगा। डीएएम सतीश गुप्ता ने बताया कि ओजस सॉफ्टवेयर के माध्यम से अभी केवल जिला अस्पताल व सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्रों  में ही ऑनलाइन भुगतान किया जा रहा है। लेकिन अब एक दिसम्बर से पीएचसी पर भी ओजस लागू किया जाएगा। प्रसूताओं को जननी सुरक्षा योजना (जेएसवाई) के तहत शहरी क्षेत्रों में 1000 व ग्रामीण क्षेत्रों में 1400 रुपए सहायता राशि चैक के माध्यम से दी जा रही है, जो एक दिसंबर से ऑनलाइन मिलेगी। वहीं मुख्यमंत्री राजश्री योजना के तहत बेटी पैदा होने पर छह किस्तों में 50 हजार रुपए की राशि भी ऑनलाइन दी जाएगी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि योजना का लाभ लेने के लिए सभी प्रसूताओं को प्रसव से पहले अपना बैंक खाता खुलवाना अनिवार्य होगा। खाता नहीं होने की स्थिति में प्रसूता को प्रोत्साहन राशि नहीं मिलेगी। खाता खुलवाने के लिए आशा सहयोगिनियों सहित विभागीय अधिकारियों को पाबंद किया है और इस संबंध में निर्देश भी दिए गए हैं। खाता खुलवाने के बाद संबंधित पीएचसी पर एएनएम खाते का वैरीफिकेशन करेगी। उन्होंने बताया कि गुरूवार को इस संबंध में विस्तृत दिशा-निर्देश वीसी के माध्यम से दिए जाएंगे। जिलास्तर से सीएमएचओ, आरसीएचओ, डीपीएम, डीएनओ, सीओआईईसी, डीएसी और ब्लॉकस्तर से बीसीएमओ सहित अन्य अधिकारी व कर्मचारी शामिल होंगे। 
श्रीकरणपुर में हुई बैठक
ओजस के जरिए भुगतान संबंधी दिशा-निर्देश के संबंध में श्रीकरणपुर खण्ड में गुरूवार को बैठक कर जिलाधिकारियों ने एलएचवी, अकाउटेंट व पीएचएस को जानकारी दी। डीएएम सतीश गुप्ता ने सीएचसी स्तर पर किए जा रहे भुगतान की समीक्षा करते हुए भुगतान से वंचित महिलाओं के बारे में चर्चा की। उन्होंने संबंधित एलएचवी को तीन दिवस का समय देते हुए निर्देशित किया कि वे जल्द से जल्द इन महिलाओं का भुगतान करवाएं। बैठक में लेखाधिकारी सुआलाल, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई सहित खण्डस्तर से बीपीएम सुनील कुमार, जगदीश इंदलिया आदि मौजूद रहे। 
आज लगेंगे पंचायत शिविर
-जन कल्याण पंचायत शिविरों में दी जाएगी स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी
श्रीगंगानगर। जिले में शुक्रवार को पंचायत स्तर जन कल्याण पंचायत शिविर लगाए जाएंगे, जहां चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से स्वास्थ्य सेवाओं के साथ ही स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी दी जाएगी। जिले में आठ ब्लॉकों की 16 पंचायतों में यह शिविर लगेंगे। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल के अनुसार शिविरों में आने वाले मरीजों को जांच व उपचार की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी और जरूरत होने पर उन्हें उच्च चिकित्सा संस्थानों में रैफर भी किया जाएगा। शिविर में आने वाले लोगों से पंजीयन के समय बीएसबीवाई, आधार कार्ड, राशन कार्ड आदि की संख्या भी इन्द्राज की जाएगी, इसलिए कैम्प में आने वाले अपना पहचान पत्र लेकर आवें। शिविरों में आने वाले मरीजों को आवश्यकतानुसार नि:शुल्क दवा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। वहीं शिविरों के जरिए आमजन में स्वास्थ्य जन चेतना जाग्रत करने के लिहाज से उन्हें प्रचार-प्रसार सामग्री मुहैया करवाई जाएगी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई के मुताबिक गर्भवती महिलाओं एवं 30 वर्ष से अधिक आयु के पुरुषों की नि:शुल्क हिमोग्लोबिन, ब्लड शुगर व ब्लड प्रेशर आदि की जांच की जाएगी। शिविरों में टीबी रोगियोंं को जांच के लिए नजदीकी टीबी जांच केंद्र पर रैफर किया जाएगा।

निष्क्रियों को नोटिस, उत्कृष्ट को पुरस्कार
-भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर हुई उच्चस्तरीय समीक्षा
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार की महत्वाकांक्षी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर उत्कृष्ट कार्य करने वाले चिकित्सालयों को पुरस्कृत किया जाएगा, वहीं इस योजना में रूचि नहीं रखने वालों को नोटिस दिया जाएगा। यह निर्णय राज्यस्तर पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ और बीसूका समिति के उपाध्यक्ष डॉ. दिगम्बर सिंह की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में लिया गया। बैठक में बीएसबीवाई की समीक्षा की गई, जिसमें राज्य स्वास्थ्य एश्योरेंस एजेंसी, न्यू इंडिया एश्योरेंस एजेंसी और आईटी विभाग सहित निजी चिकित्सालयों के प्रतिनिधि भी शामिल हुए। यहां चिकित्सकों ने योजना को लेकर अनेक सुझाव भी दिए।

चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़ ने बताया कि बीएसबीवाई पात्र परिवारों के लिए वरदान साबित हो रही है। योजना के तहत प्रदेश में 494 राजकीय व 623 निजी चिकित्सालय शामिल हैं, जहां आमजन को निर्धारित 1715 पैकेजों के माध्यम से लाभ मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जल्द ही योजना में शामिल पैकेज एवं सूचीबद्ध चिकित्सालयों में बढ़ोतरी सहित योजना के दायरे को ओर विस्तृत किया जाएगा। इसके साथ ही राज्य में सूचीबद्ध एवं निष्क्रिय 141 निजी चिकित्सालयों को नोटिस जारी कर विभिन्न सरकारी योजनाओं से उन्हें हटाने की कार्रवाई प्रारंभ करने के निर्देश दिए। साथ ही बीएसबीवाई में सूचीबद्ध नहीं होने वाले चिकित्सा संस्थानों को भी मुख्यमंत्री जीवन रक्षा कोष योजना सहित अन्य राजकीय योजनाओं से हटाने के सम्बंध में कार्रवाई के निर्देश चिकित्सा मंत्री ने दिए। वहीं उन्होंने कहा कि बीएसबीवाई में कुशल प्रबंधन एवं अत्यधिक उपचार सुविधा देने वाले सूचीबद्ध निजी व राजकीय चिकित्सालयों को राज्यस्तर पर सम्मानित किया जाएगा। इसके साथ ही बीएसबीवाई के तहत लगे स्वास्थ्य मार्गदर्शकों में से श्रेष्ठ मार्गदर्शकों को भी सम्मानित किया जाएगा। 

योजना के प्रति बढ़ा उत्साह
एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन ने बीएसवाई की प्रगति की विस्तृत जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लाभार्थियों को सुलभ कैशलेस सुविधा मिलने से आमजन का योजना से जुड़ाव बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि योजना की शुरूआत की प्रथम तिमाही समीक्षा में क्लेम अपरूवल 15 से बढक़र 74.4 प्रतिशत हो गया है। साथ ही क्लेम पेंडिग रहने की दर 50 प्रतिशत से घट कर आज मात्र 3.9 प्रतिशत ही रह गई है।


बुधवार, 16 नवंबर 2016

चयनित जीएनएम 25 नवंबर तक कर सकते हैं ज्वाइनिंग
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग में एनएचएम के तहत स्थाई पदों के लिए चयनित वंचित जीएनएम को मौका देते हुए 25 नंवबर तक का समय दिया गया है। इसके बाद इन अभ्यर्थियों में से किसी को नियुक्ति नहीं दी जाएगी। इस संबंध में एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन ने निर्देशित करते हुए अभ्यर्थियों की सूची जारी है। इस सूची में पूरे राज्य के 212 और श्रीगंगानगर जिले में नियुक्ति के लिए 19 अभ्यर्थी शामिल हैं।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि राज्यस्तरीय निर्देशानुसार स्थाई पदों से वंचित जीएनएम अभ्यर्थियों की सूची जारी की गई है, जिन्हें आगामी 25 नवंबर से पूर्व पद ग्रहण करना है। लिहाजा वंचित अभ्यर्थी निर्धारित तिथि से पूर्व पद ग्रहण करें। अभ्यर्थियों को स्वास्थ्य प्रमाण-पत्र, पुलिस वेरीफिकेशन, शैक्षणिक व तकनीकी योगï्यता, जाति, आरएनसी पंजीयन एवं कार्यग्रहण करने की तिथि तक नवीनीकृत पंजीयन प्रमाण पत्र व अन्य वांछित असल दस्तावेज प्रस्तुत करने होंगे। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि इस सूची प्रवीण सोनी पुत्र केवलकृष्ण सोनी, किरण बाला पुत्री अमीलाल, राजेश कुमार सुथार पुत्र महावीर प्रसाद, हरदीप सिंह पुत्र बलतेज सिंह, मनप्रीत कौर पुत्री जगरूपसिंह, रजनीश कुमार पुत्र प्रभुदयाल वर्मा, रविंद्र सिंह पुत्र अमरीकसिंह, सोमेश वर्मा पुत्र जगमालसिंह, राजेंद्र कुमार पुत्र भगवानदास, पवन कुमार पुत्र सत्यनारायण, रमनदीप कौर पुत्री अवतारसिंह, कंवर प्रीत कौर पुत्री कवंलजीत सिंह, चंद्र कला पुत्र रामप्रताप, रणजीत सिंह पुत्र गुरदाससिंह, सुरजीसिंह बराला पुत्र तनसिंह, रमेश कुमार पुत्र सुरजाराम, राजदीपसिंह पुत्र गुरप्रीतसिंह, राजेश कुमार पुत्र रामस्वरूप एवं नवदीपसिंह मान पुत्र लाभसिंह का नाम शामिल है।

गुरुवार, 10 नवंबर 2016

शिविरों के माध्यम से मासूमों का मिट रहा मर्ज
राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्वास्थ्य विभाग की टीमें बच्चों को कर रही हैं लाभान्वित
श्रीगंगानगर। जिला मुख्यालय के साथ ही जिले के दूर-दराज इलाकों में बैठे अनेक मासूम बच्चों को इन दिनों राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम की टीमें लाभान्वित कर रही हैं। इन बच्चों को स्वास्थ्य विभाग की ये टीमें इलाज के साथ ही नि:शुल्क दवाएं तक मुहैया करवा रही हैं। यही नहीं जरूरत पडऩे पर गंभीर बीमारी से पीडि़त बच्चों को राज्य के बड़े अस्पतालों में भी इलाज के लिए भेजा जा रहा है, जहां अनेक मरीजों का उपचार भी हुआ है। सकून देने वाली बात ये भी है कि जिले के अनेक निजी स्वास्थ्य संस्थान और लोग इस आहूति में अपना योगदान दे रहे हैं। खासकर, सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज की टीम, आस्था हॉस्पीटल की इको स्पेशलिस्ट टीम, स्माइल ट्रेन संस्थान और विभागीय कार्मिक। आरबीएसके के तहत बुधवार को घड़साना और गुरूवार को रावला में शिविरों का आयोजन किया गया। शिविरों की मोनिटरिंग आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, सहायक नोडल डॉ. भारत भूषण और डॉ. सुनील बिश्रोई कर रहे हैं।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि जिले में लगातार आरबीएसके शिविर लगाए जा रहे हैं, जहां टीमों द्वारा चिन्हित बच्चों का उपचार किया जा रहा है। हालांकि मौके पर जो दूसरे बच्चे आ रहे हैं उनकी भी जांच कर उपचार मुहैया करवाया जा रहा है। उन्होंने बताया कि घड़साना शिविर में 327 बच्चे पहुंचे, जहां 267 का उपचार और 60 को उच्च चिकित्सा संस्थान में रैफर किया गया। यहां 132 बच्चों के दांतों में समस्या थी, जबकि 68 बच्चे नेत्र रोग व 14 बच्चे नाक-कान-गला रोग से पीडि़त थे। शिविर में डॉ. कमल किशोर, डॉ. रामस्वरूप, डॉ. नम्रता, डॉ. शिव बिश्रोई, डॉ. दिनेश भारद्वाज व ओपी गोयल ने अपनी सेवाएं दी। इसी तरह रावला में आयोजित शिविर में 327 बच्चों की जांच की गई। जिनमें 163 बच्चे दंत रोग, 64 चर्म रोग एवं 17 बच्चे नाक-कान-गला रोग से पीडि़त थे। उन्होंने बताया कि यहां डॉ. कमल किशोर, डॉ. रामस्वरूप, डॉ. पवन गोयल, डॉ. दिनेश भारद्वाज और सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज की टीम ने अपनी सेवाएं दी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई मुताबिक आरबीएसके के तहत होंठ कटे व तालू में दिक्कत वाले अनेक बच्चों को टीमों ने चिन्हिकरण किया है, जिनका स्थानीय स्माइल संस्था द्वारा नि:शुल्क इलाज किया गया। इसी तरह जिन बच्चों में हृदïय से संबंधित बीमारियों मिली हैं, उन्हें चिन्हित कर स्थानीय आस्था हॉस्पीटल में नि:शुल्क इको करवाई जा रही है। जिनमें से अनेक बच्चों के हृदïय संबंधी गंभीर बीमारियां भी मिली। इन दिनों सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज की टीम भी शिविरों में अपनी सेवाएं देकर नि:शुल्क जांच व उपचार कर रही है।

सोमवार, 7 नवंबर 2016

‘बेटा है या बेटी, जांच करवाना पड़ सकता हैै भारी’
-अब बेटियां करेंगी समाज को जागरूक, छात्राओं को दी पीसीपीएनडीटी की जानकारी
श्रीगंगानगर। भू्रण लिंग जांच करना ही केवल अपराध नहीं है, बल्कि भू्रण लिंग जांच करवाने वाला भी दोषी होता है और उसे कानूननï् सजा भी मिलती है। यदि कोई डॉक्टर जागरूक और ईमानदार हो तो वह ऐसे लोगों की शिकायत कर सकता है जो गर्भ में पल रहे भू्रण की लिंग जांच करवाने आते हैं। ऐसे में न्यायालय अपराधी को तीन वर्ष की कैद और दस हजार रूपए जुर्माना दोनों की सजा सुना सकता है। इसलिए भू्रण लिंग जांच के बारे में कतई नहीं सोचें और बेटा-बेटी का एकसमान समझते हुए उनसे जीने का अधिकार नहीं छीनें। वैसे भी यदि कोई प्रकृति से छेड़छाड़ करते हुए भगवान के नियमों से खिलवाड़ करता है तो उसकी आध्यात्मिक सजा भी तय है। ये विचार सोमवार को गोदारा गल्र्स कॉलेज में आयोजित बेटी बचाओ जागरूकता अभियान के तहत वक्ताओं ने कही। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में बतौर अतिथि एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता, वरिष्ठ व्याख्याता मेघराज ओझा, डीपी सिंह, पवन कुमार, छात्रासंघ अध्यक्ष कुमारी मंजू, अभियान प्रभारी रणदीपसिंह एवं विनोद बिश्रोई शामिल रहे।
छात्राओं को संबोधित करते हुए एसीएमएचओ डॉ. मेहत्ता ने कहा कि बेटी बचाओ अभियान का मूल उदï्देश्य यही है कि बेटे-बेटी का भेद समाप्त हो और जिस दिन यह समस्या समाप्त हो गई उसके बाद भू्रण हत्या नहीं होगी। क्योंकि इसी भेद के इर्द-गिर्द कई प्रथाओं, धारणाओं व ओच्छी सामाजिक सोच जैसी अनेक उलझनें है जो इस भेद के समापन से ही नष्ट हो सकती हैं। उन्होंने कहा कि इस भेद को मिटाने में युवाओं की अहम भूमिका साबित हो सकती है और खासकर बालिकाएं दो-दो परिवारों के साथ पूरे समाज को जागरूक कर सकती हैं। पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीपसिंह ने कानूनी पहलूओं पर प्रकाश डालते हुए कहा कि कोई भी पंजीकरण के बिना सोनोग्राफी मशीन नहीं रख सकता है और यदि ऐसा कोई करता है एवं किसी को जानकारी है तो उसकी शिकायत करनी चाहिए। शिकायत टोल फ्री नंबर 104 और हमारी बेटी वेबसाइट पर दर्ज करवाई जा सकती है। यदि शिकायतकर्ता चाहे तो उसका नाम गुप्त रखा जाता है। इसी तरह भू्रण लिंग जांच संबंधित शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। भू्रण लिंग की जांच करवाना, करना और इसमें सहयोग करना तीनों ही अपराध है। ऐसा करने वालों को तीन साल की सजा व दस हजार रूपए जुर्माना लगाया जा सकता है। फिर से यही जुर्म दोहराने पर पांच साल की सजा और पचास हजार रूपए तक जुर्माना हो सकता है। इस मौके पर कॉलेज व्याख्याता एवं छात्राओं ने संकल्प करते हुए कहा कि वे इस सामाजिक बुराई को जड़ से उखाड़ फैंकने में अपना पूरा योगदान देंगे।

गुरुवार, 3 नवंबर 2016

एएनसी में सुधार लाएं, अन्यथा कार्रवाई के लिए तैयार रहें
-बैंक खाते की वजह से न अटके किसी का भुगतान, पहली जांच पर ही करें खाता खुलवाने के लिए प्रेरित
श्रीगंगानगर। जिला कलेक्ट्रेट सभागार में गुरूवार को आयोजित जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेश बंसल ने सभी बीसीएमओ एवं सीएचसी प्रभारियों को सख्त लहजे में कहा कि वे स्वास्थ्य सेवाओं व व्यवस्थाओं में सुधार लाएं अन्यथा संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी। खासकर, प्रसव पूर्व जांच (एएनसी) की समीक्षा करते हुए सीएमएचओ डॉ. बंसल ने कहा कि बीसीएमओ स्वयं मोनिटरिंग करें और जहां भी लापरवाही मिले वहां स्वास्थ्य कार्मिकों पर सख्त कार्रवाई करें अन्यथा खुद कार्रवाई के लिए तैयार रहें। इस दौरान एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला, डीएनओ कमल गुप्ता, डीएसी रायसिंह सहारण, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई एवं डीएएम सतीश गुप्ता आदि मौजूद रहे।
स्वास्थ्य अधिकारियों को निर्देशित करते हुए सीएमएचओ डॉ. बंसल ने कहा कि राजश्री योजना का लाभ सभी बालिकाओं को हर हाल में मिले। राजश्री योजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि कुछेक संस्थानों पर बैंक खाते की वजह से बालिका के जन्म पर भुगतान नहीं हुआ, जबकि रा’य सरकार बालिका जन्म को प्रोत्साहन देनेे के लिए 50 हजार रूपए तक की राशि दे रही है। इसलिए हर गर्भवती महिला की पहली जांच के दौरान ही उसे बैंक में खाता खुलवाने के लिए प्रेरित करें और उसे बताएं कि बालिका के जन्म पर रा’य सरकार 50 हजार रूपए तक की राशि दे रही है। वहीं अन्य योजनाओं व राशियों का लाभ भी बैंक खाते के जरिए दिए जा रहे हैं। उन्होंने पूर्ण टीकाकरण को लेकर सभी को सख्त हिदायत देते हुए कहा कि कोई भी ब"ाा टीकाकरण से वंचित नहीं रहना चाहिए। बैठक मेें जिला अस्पताल में सीसीयू का संचालन नहीं होने की जानकारी को गंभीरता से लिया गया और सीएमएचओ डॉ. बंसल ने पीएमओ प्रतिनिधि को निर्देशित किया कि जल्द से जल्द आवश्यक कार्रवाई कर सीसीयू शुरू किया जाए ताकि लाखों के संसाधन आमजन को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाए जाने में उपयोगी साबित हों।
निजी चिकित्सालय भी देंगे रिपोर्ट
टीबी कार्यक्रम की समीक्षा के दौरान टीबी अधिकारी डॉ. साक्षी मेहत्ता ने बताया कि सीबी-डॉट मशीन के जरिए टीबी मरीजों की जांच आसानी से की जा रही है लेकिन खण्ड स्तर से टीबी मरीज जांच के लिए कम रैफर किए जा रहे हैं। इसलिए जरूरी है कि टीबी की संभावना होने पर हर हाल में मरीज को जिला मुख्यालय पर भेजें ताकि उसकी सही रिपोर्ट की जा सके। उन्होंने सभी बीसीएमओ को निर्देशित किया कि वे निजी चिकित्सालयों के साथ बैठक कर उन्हें रिपोर्टिंग के लिए पाबंद करें ताकि टीबी मरीजों को सही उपचार मिल सके।