बुधवार, 31 जनवरी 2018

दिल में छेद लिए जन्मी टीया, आरबीएसके ने लौटाई जिंदगी
-मासूम टीया का हुआ जयपुर के प्रतिष्ठित हॉस्पीटल में हुआ नि:शुल्क उपचार
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श्रीगंगानगर। सात साल की मासूम टीया लंबे अर्से से दिल में छेद की बीमारी से जूझ रही थी। टीया, सामान्य बच्चों की तरह न खेल सकती थी, न चल सकती और न ही चहक सकती थी। जिंदगी इक बोझ सी थी और परिजन मासूम टीया की इस गंभीर समस्या को लेकर बेहद परेशान थे। साधारण परिवार में जन्मी टीया के परिजन महंगा उपचार करवाने में भी अक्षम थे। लेकिन अचानक, आरबीएसके टीम टीया व उसके परिजनों के लिए भगवान का दूत बन गांव में पहुंची। टीम ने न केवल टीया को चिन्हित कर नि:शुल्क ईको करवाई बल्कि जयपुर के प्रतिष्ठित हॉस्पीटल में नि:शुल्क उपचार भी करवाया। आज टीया पूरी तरह से स्वस्थ है और बेहद खुश भी। आरबीएसके टीम में डॉ. नेहा छाबड़ा, डॉ. प्रताप सिंह, फार्मासिस्ट सुरेंद्र कुमार व एएनए प्रवीण कुमारी शामिल रहे, जिन्होंने पहले भी कई गंभीर बीमारियों से पीडि़त बच्चों को उपचार करवाया है। 
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टीम की डॉ. नेहा छाबड़ा ने बताया कि गांव चार बीपीएम, अनूपगढ़ निवासी पवन कुमार साधारण किसान हैं और टीया उनकी लाडली बेटी है। जन्म से टीया के दिल में छेद था, लेकिन उन्हें तब मालूम हुआ जब टीया बचपन में नियमित बीमार रहने लगी। जांच में पता चला कि हृदï्य संबंधी गंभीर बीमारी है तो परिजनों के पैंरो तले जमीन खिसक गई। इधर-उधर इलाज के लिए प्रयास किए लेकिन महंगा उपचार होने के कारण प्रयास नाकाफी साबित हुए। संभवत: परिजनों की दुआओं का असर रहा कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत अनूपगढ़ में नियुक्त डॉ. नेहा छाबड़ा अपनी टीम सहित चार बीपीएम के राजकीय स्कूल में पहुंची। यहां उन्होंने टीया को जांचा तो बीमारी पकड़ में आई और डॉ. नेहा ने टीया के परिजनों से संपर्क किया। पता चला कि उसे दिल की बीमारी है, वो भी जन्म से। आखिरकार, टीया की जिला मुख्यालय पर ईको करवाई और रिपोर्ट आने के बाद उसे जयपुर के प्रतिष्ठित हॉस्पीटल में ऑपरेशन के लिए भेजा। जहां जटिल ऑपरेशन के बाद टीया को आईसीयू में रखा गया और ठीक होने पर छुट्टी दे दी गई। आज टीया पूरी तरह से ठीक है और वह सामान्य बच्चों की तरह जिंदगी जी रही है। इलाज पर करीब तीन लाख रुपए तक खर्च संभावित था, जो नि:शुल्क हुआ। अनूपगढ़ टीम ने ऐसे ही 12 बीएलडी के अंकित, रामसिंहपुर के लक्की सहित कई बच्चों को दिल से संबंधी बीमारियों व अन्य बीमारियों का नि:शुल्क उपचार करवा राहत दिलवाई है। 
मोबाइल डेंटल वैन से मिली सैंकड़ों को राहत
-जिले के 10 स्थानों पर आयोजित हुए शिविर, मुख व दांतों का नि:शुल्क उपचार
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार की ओर से जिले में भेजी गई मोबाइल डेंटल वैन के जरिए जिले के अनेक लोग लाभान्वित हुए। उनकी न केवल नि:शुल्क जांच हुई बल्कि नि:शुल्क उपचार व दवा भी मिली। एक माह तक करीब दस स्थानों पर 20 दिन तक लगे शिविरों में 972 लोगों को प्रत्यक्ष लाभ दिया गया, जबकि अन्य आमजन को मुंह व दांतों के प्रति जागरूक भी किया गया। आखिरी दिन चूनावढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर शिविर का आयोजन किया गया, जहां बच्चों के साथ बड़ों को भी राहत मिली। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले को एक माह के लिए मोबाइल डेंटल वैन मिली, जिसके जरिए 20 दिनों तक दस शिविर लगाए गए। शिविर के दौरान मुख एवं दंत रोग की नि:शुल्क जांच, नि:शुल्क दवाएं और बीमारियों के प्रति जागरूक किया गया। वहीं दांतों में मसाला भर, दांतों के कीड़े निकाल, दांतों की सफाई, हिलते हुए दांतों को निकाल एवं उन्हें सुरक्षित रखने का उपचार किया गया। अत्याधुनिक व्यवस्थाओं सुसज्जित इस वैन में दांतों का एक्सरे भी किया गया। वहीं रूट कैनाल, फिलिंग, स्केलिंग, डेंटल एक्सट्रेक्शन एंड इंफेक्शन सहित अन्य सुविधाएं मुहैया करवाई गई। वैन में विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. सचिन सारस्वत व डॉ. अल्केश चौधरी सहित जीएनएम विनोद पूनिया व सहायक कर्मचारी महेश भांभू ने सेवाएं दी, जबकि संंबंधित ब्लॉक में आरबीएसके टीम मौजूद रही। आईईसी समन्वयक विनोद बिश्रोई ने बताया कि शिविर के दौरान घड़साना में 47, रावला में 24, अनूपगढ़ में 111, श्रीविजयनगर में 90, समेजाकोठी में 124, रायसिंहनगर में 118, रिड़मलसर में 107, पदमपुर में 113, श्रीकरणपुर में 111 और चूनावढ़ में 127 लोगों को उपचारित किया गया। चूनावढ़ में डॉ. नेहा छाबड़ा, डॉ. अमित शर्मा, फार्मासिस्ट दिव्या स्वामी, जीएनएम गायत्री देवी, एएनएम कांता ने सेवाएं दी। 

सोमवार, 29 जनवरी 2018

पोलियो दवा पिलाने घर-घर पहुंच रही टीमें
-राज्य व संभागस्तरीय अधिकारियों ने किया निरीक्षण, आज वंचितों को पिलाई जाएगी पोलियो दवा
श्रीगंगानगर। पोलियो महाअभियान के तहत दूसरे दिन सोमवार को चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की टीमें बच्चों को पोलियो रोधी दवा पिलाने के लिए घर-घर पहुंची। वंचित रहे बच्चों को मंगलवार के दिन भी पोलियो दवा पिलाई जाएगी। इससे पहले रविवार को आमजन ने जागरूकता का परिचय देते हुए बच्चों को बूथ पर लाकर पोलियो रोधी दवा पिलाई, जिसके चलते लक्षित बच्चों में से 68 फीसदी ने दवा गटकी। बूथ स्तर पर सर्वाधिक बच्चे सूरतगढ़ क्षेत्र में पहुंचे। विभाग मंगलवार को भी वंचित बच्चों को पोलियो दवा पिलाएगा। 
आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि जिले में दो लाख 89 हजार आठ सौ 23 बच्चों को पोलियो दवा पिलाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है, जिसमें रविवार को ही एक लाख 96 हजार 761 बच्चों ने पोलियो दवा पिला दी गई। उन्होंने बताया कि सूरतगढ़ में 36501 (76.94), रायसिंहनगर में 21796 (74.23), श्रीगंगानगर ग्रामीण में 19025 (73.8), श्रीकरणपुर में 13472 (70.74), श्रीविजयनगर में 15611 (70.13), सादुलशहर में 16677 (69.2), घड़साना में 20224 (64.36), श्रीगंगानगर शहरी क्षेत्र में 21898 (62.45 फीसदी), पदमपुर में 13601 (61.83) एवं अनूपगढ़ में 16796 (53.34) फीसदी बच्चों को पोलियो दवा पिलाई गई। डॉ. असीजा ने बताय कि पहले दिन जिले में स्थापित 1200 बूथ पर पोलियो दवा पिलाई गई, जबकि सोमवार को डोर टू डोर दवा पिलाने के लिए 2264 टीमों ने कार्य किया। यही टीमें मंगलवार को कार्य करेंगी। इस दौरान स्वास्थ्य विभाग के 186, आईसीडीएस के 18, आयुर्वेद विभाग के 10 एवं अन्य विभागों के छह पर्यवेक्षक टीमों व गतिविधियों की मोनिटरिंग कर रहे हैं। 
राज्य व संभाग टीमों ने किया निरीक्षण, टीमों की सराहना
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि पोलियो अभियान का निरीक्षण करने जयपुर व बीकानेर संभाग से टीम भी पहुंची। जयपुर से डब्ल्यूएचओ की डॉ. आरती, बीकानेर से डॉ. मंजू लता एवं नोडल प्रभारी आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा ने अनूपगढ़, रायसिंहनगर व रामसिंहपुर आदि के क्षेत्र के हाईरिस्क एरिया में आकस्मिक निरीक्षण किया। इस दौरान अधिकारियों ने घर-घर जाकर चेक किया कि कहीं कोई बच्चा पोलियो दवा से वंचित तो नहीं, जिसमें बेहतर सकारात्मक कार्य देखने को मिला। जिस पर अधिकारियों ने टीमों को सराहा। इसी तरह फील्ड में जाकर भी व्यवस्थाएं देखीं। उन्होंने रामसिंहपुर, रायसिंहनगर व अनूपगढ़ के ईंट भट्टों पर भी जाकर बच्चों को चेक किया।

रविवार, 21 जनवरी 2018

बेटियों की खातिर फिर से इतिहास रचेंगे ’डेप-रक्षक’
-आप भी जुड़ें महाअभियान से, 24 जनवरी को राष्ट्रीय बालिका दिवस पर स्कूल-कॉलेजों में होंगे कार्यक्रम
श्रीगंगानगर। कोख में कत्ल हो रही बेटियों को बचाने और बेटा-बेटी भेद मिटाने के लिए राष्ट्रीय बालिका दिवस पर इस बार जिले के युवा एक साथ एतिहासिक हुंकार भरेंगे। इस दिन बेटी बचाओ अभियान के तहत 24 जनवरी को डॉटर्स आर प्रीसियस कार्यक्रम का आयोजन जिले सहित पूरे राज्य में होगा, जिसमें स्कूल, कॉलेजों व अन्य शिक्षण संस्थाओं के स्टूडेंट्स भाग लेंगे। कार्यक्रम में प्रशिक्षित डेप रक्षक युवाओं को जागरूक करेंगे, वहीं अन्य कोई भी स्वयंसेवक इस कार्यक्रम से जुडक़र महत्ती भूमिका अदा कर सकते हैं। उल्लेखनीय है कि एनएचएम के एमडी नवीन जैन के नेतृत्व में डेप कार्यक्रम का आयोजन किया जाएगा।
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि विगत 17 नवंबर को जिले सहित राज्य में आयोजित डॉटर्स आर प्रीसियस कार्यक्रम को वल्र्ड रिकॉर्ड में शामिल किया गया है। इस बार उससे भी बड़ा आयोजन राज्य में किया जा रहा है, ताकि जागरूक के जरिए कोख में पल रही बेटियों को बचाया जा सके। वहीं भू्रण लिंग जांच करने वाले एवं कन्या भू्रण हत्यारों के खिलाफ डिकॉय के जरिए अपराधियों पर प्रहार जारी है। उन्होंने बताया कि सोमवार को सुबह 11 बजे सीएमएचओ ऑफिस, रेलवे स्टेशन रोड पर बैठक कर इस पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। कार्यक्रम के सफल आयोजन को लेकर जिले के विभागीय कार्मिकों सहित अन्य स्वयंसेवक भी जोर-शोर से जुटे हुए हैं। इस कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए स्कूल व कॉलेज संचालक भी विभाग से संपर्क कर सकते हैं। 

बुधवार, 17 जनवरी 2018

टेलीमेडिसिन से हो अधिकाधिक लाभान्वित - एमडी नवीन जैन
- वीसी के जरिए दिए दिशा-निर्देश, जिला अस्पताल व अनूपगढ़ सीएचसी पर मिल रही सुविधा
श्रीगंगानगर। राज्य में संचालित टेलीमेडिसिन परियोजना (टेली-हैल्थ) में व्यापक सुधार एवं आम मरीजों को सहज सुलभता को लेकर बुधवार को राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के एमडी नवीन जैन ने संबंधित अधिकारियों को विस्तृत दिशा-निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि मरीजों को इस योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिले ताकि जहां विशेषज्ञ नहीं है वहां भी मरीजों को बेहतर उपचार मिल सके। वीसी में जिला मुख्यालय से संयुक्त निदेशक डॉ. एचएस बराड़, सीएमएचओ डॉ. वीपी असीजा, डीपीएम विपुल गोयल, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई सहित अन्य अधिकारीगण शामिल हुए। 
वीसी के दौरान श्री जैन ने कहा कि सेंट्रल साइट के जरिए समय निर्धारित करते हुए विभिन्न रोगों के विशेषज्ञ सेवाएं दे रहे हैं और इससे अनेक मरीज लाभान्वित भी हुए हैं। लेकिन अब इसे और अधिक विस्तार देने की जरूरत है ताकि ज्यादा से ज्यादा मरीजों को इसका लाभ मिले। राज्य में अब तक करीब छह हजार मरीजों को लाभान्वित किया जा चुका है। वहीं उन्होंने कम प्रगति वाले संस्थानों को सुधार लाने के निर्देश देते हुए कहा कि आगामी वीसी से पहले व्यापक सुधार आना चाहिए अन्यथा टेलीमेडिसिन कक्ष दूसरे संस्थान में संथानांतरण किया जाएगा। उल्लेखनीय है कि जिला अस्पताल में यह योजना संचालित है, जहां अगस्त 2017 से बुधवार तक 98 मरीज लाभान्वित हुए हैं। एमडी नवीन जैन ने बताया कि टेलीमेडिसिन के जरिए मरीजों को कम समय और कम खर्च में गुणवत्तापुर्ण विशेषज्ञ चिकित्सीय सेवाएं प्राप्त हो रही हैं। पहले जहां मरीजों को विशेषज्ञ परामर्श की आवश्यकता होने पर उच्च चिकित्सा संस्थान रैफर होना पड़ता था, वहीं अब उसी चिकित्सा संस्थान पर इस परियोजना के माध्यम से विशेषज्ञ चिकित्सकीय सेवाएं मिल पा रही हैं। इससे दूरस्थ क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को काफी फायदा हुआ है। मरीजों को अब विशेषज्ञ परामर्श के लिये उच्च चिकित्सा संस्थान जाने की आवश्यकता नहीं है। सेंट्रल साइट पर निर्धारित समयानुसार सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक स्त्री रोग विशेषज्ञ, बाल रोग विशेषज्ञ, जनरल फिजिशियन विशेषज्ञों की सेवाएं अब उपलब्ध हैं। उन्होंने बताया कि निर्धारित दिवस में प्रात: 11 बजे से दोपहर चार बजे तक आर्थोपेडिशियन, पीएमआर, गैस्ट्रोएन्ट्रोलॉजिस्ट, आन्कोलॉजिस्ट, एंडोक्राईनोलॉजिस्ट, स्कीन एवं वीडी, कार्डियोलॉजिस्ट, नेफ्रोलॉजिस्ट, न्यूरोलॉजिस्ट व यूरोलाजिस्ट का परामर्श दिया जाता है। उन्होंने बताया कि टेलीमेडिसिन सेवा परियोजना वाले इन चिकित्सा संस्थानों पर स्थापित कक्ष में डिजिटल ईसीजी, डिजिटल स्टेथोस्कोप, डिजिटल डर्मोस्कोप, बीपी उपकरण, पल्स आक्सीमीटर, थर्मामीटर व स्केनर इत्यादि उपकरण उपलब्ध हैं। 

रविवार, 14 जनवरी 2018

राजस्थान टीम की पंजाब में चौथी कार्रवाई, दो दलाल सहित रजिस्ट्रड मशीन जब्त
-300 किलोमीटर पीछा कर कपूरथला जिले में की कार्रवाई, राज्य सहित देशभर में अब तक 101वीं और श्रीगंगानगर टीम की 11वीं कार्रवाई
श्रीगंगानगर। राजस्थान पीसीपीएनडीटी टीम का भू्रण लिंग जांच करने एवं भू्रण हत्या करने वालों के खिलाफ कार्रवाईयों का सिलसिला लगातार जारी है। इसी कड़ी में रविवार के दिन टीम ने राजस्थान से करीब तीन सौ किलोमीटर दलालों का पीछा कर पंजाब के कपूरथला जिले में कार्रवाई की। टीम ने मुख्य सरगना श्रीगंगानगर निवासी दलाल सहित हरियाणा के एक दलाल को गिरफ्तार किया है। वहीं रजिस्ट्रड सोनोग्राफी मशीन जब्त कर चिकित्सक सहित दो अन्य को मुलजिम बनाया है। पंजाब के चिकित्सक सहित दो अन्य को पकडऩे के लिए पंजाब पुलिस भी जुटी है। वहीं राजस्थान टीम शाम को कार्रवाई कर श्रीगंगानगर रवाना हुई। कार्रवाई के दौरान मिशन निदेशक नवीन जैन एवं एएसपी रघुवीर सिंह राज्य मुख्यालय से लगातार संपर्क में रहे। 
मिशन निदेशक नवीन जैन ने बताया कि राजस्थान में हो रही ताबड़तोड़ कार्रवाईयों के भय से यहां के चिकित्सक भू्रण लिंग जांच नहीं कर रहे हैं, लेकिन अन्य राज्यों में जाकर भू्रण लिंग जांच करवाने के मामले लगातार पकड़  में आ रहे हैं। ऐसी ही सूचना श्रीगंगानगर में सक्रिय एक दलाल गिरोह की मुखबिर के जरिए श्रीगंगानगर टीम को मिली। जिस पर कई दिनों तक नजर रखते हुए पुष्टि की कि यहां का दलाल लालगढ़ निवासी 44 वर्षीय जगदीश कुम्हार पुत्र राजाराम वर्मा नजदीकी एरिया में गर्भवती महिलाओं को लेकर भू्रण लिंग जांच करवाता है। दलाल स्थानीय निजी हॉस्पीटलों में पीआरओ का काम करता है। टीम ने डिकॉय कार्रवाई के लिए गर्भवती महिला के जरिए दलाल से संपर्क साधा, जिस पर दलाल जगदीश ने चालिस हजार भू्रण लिंग जांच और लाने-लेजाने सहित पूरे पैकेज के 60 हजार रुपए मांगे। इसके बाद रविवार सुबह आठ बजे का समय देते हुए मीरां चौक बुलाया और तय की गई राशि ले ली। इसके बाद शहर में घुमाते हुए साधुवाली पहुंचा और बताया कि यहां डॉक्टर आज उपलब्ध नहीं इसलिए पंजाब के मोगा शहर में जांच करवाने की बात कही। इसके बाद कोटकपूरा शहर में ले जाकर घूमाता रहा। वहां से मखू शहर में पहुंचा, जहां एक अन्य दलाल जगदीश राम पुत्र रणवीर सिंह निवासी घुंकावाली, जिला डबवाली मिला, जो उनके साथ मिल गया। इसके बाद अमृतसर हाइवे होते हुए जलधंर जिले में ले गया और लोहियां गांव में तीसरा दलाल मिला एवं फिर नजदीक ही कपूरथला जिले के सुल्तानपुर लोधी शहर में ले गया। जहां पहले आजाद हॉस्पीटल और फिर उसके सामने स्थित दोआबा अल्ट्रासाउंड केंद्र ले गया और भू्रण लिंग जांच की। इसके बाद इशारा मिलते ही टीम ने दोनों दलालों को पकड़ लिया, जबकि चिकित्सक डॉ. अशोक धींगड़ा, दो अन्य नवीन कुमार व सोनू फरार हो गए। जिनकी तलाश मेें पंजाब पुलिस ने कुछ ठिकानों पर दबिश भी दी। वहीं पंजाब पुलिस के अधिकारी व आईपीएस मनजीत सिंह भी मौके पर पहुंचे और संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि जल्द ही तीनों आरोपियों को पकड़ें। कार्रवाई टीम में सीआई उमेश निठारवाल, सीआई ईश्वर प्रसाद, कांस्टेबल शंकर व राजेंद्र कुमार, पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीप सिंह, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई, डीपीसी अर्श बराड़, हेमंत शर्मा, इंद्र यादव शामिल रहे। 

शुक्रवार, 12 जनवरी 2018

खाद्य पदार्थ बनाते समय जरूरी होंगे दस्ताने पहनने, नहीं तो होगी कार्रवाई
-रेहडिय़ों का किया जाएगा निरीक्षण, गोल-गप्पे खिलाते समय भी दस्ताने जरूरी
श्रीगंगानगर। गली-मोहल्लों व मुख्य चौराहों पर रेहड़ी लगाकर छोले-कुलचे, गोल-गप्पे आदि खाद्य पदार्थ बेचने वालों को अब हाथों में दस्ताने पहनने होंगे। यही नहीं गोल-गप्पे खिलाते समय भी उन्हें नियमित दस्ताने पहनने होंगे। स्वास्थ्य विभाग आगामी दिनों में रेहडिय़ों का निरीक्षण कर दस्तानों एवं स्वच्छता की जांच करेगा और ऐसा नहीं मिलने पर संबंधित के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि रेहड़ी चालकों द्वारा स्वच्छता नहीं रखने के संबंध में शिकायतें मिल रही थी, जिस संबंध में आज खाद्य सुरक्षा अधिकारी को निर्देशित किया गया है कि वे आगामी दिनों में नियमित कार्रवाई के दौरान रेहडिय़ों का भी निरीक्षण करें एवं दस्ताने पहनने के लिए पाबंद करें। साथ ही चेतावनी जारी की गई है कि दस्ताने नहीं पहनने वालों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने आमजन से भी अपील की कि वे रेहड़ी संचालकों को इसके प्रति न केवल जागरूक करें बल्कि जो रेहड़ी चालक दस्ताने नहीं पहनते हैं वहां खाद्य पदार्थ न खाएं। यही नहीं नियमित निरीक्षण के दौरान मिठाई की दुकानों व होटलों में बनने वाले खाद्य पदार्थों की साफ-सफाई भी देखी जाएगी ताकि स्वच्छता का पूरा ख्याल रखा जा सके। 

गुरुवार, 11 जनवरी 2018

30 साल के बाद 20 फीसदी शुगर व हाइपरटेंशन की चपेट में 
-महिला व पुरुष बराबर संख्या में, स्वास्थ्य विभाग कर रहा है 30 साल से ऊपर वालों की नि:शुल्क जांच
श्रीगंगानगर। इसे बिगड़ी दिनचर्या, बढ़ते तनाव या खानपान के प्रति लापरवाही का नतीजा कहें या कुछ और कि जिले के 20 फीसदी लोग शुगर व हाइपरटेंशन की चपेट में है। इस फेहरिस्त में 30 साल से ऊपर के महिला व पुरुष बराबर शामिल है। चिकित्सकों का मानना है कि शुगर व हाइपरटेंशन ही अन्य गंभीर बीमारियों की जनक है, लिहाजा समय रहते इनके प्रति सचेत होना बेहद जरूरी है। राहत की बात ये है कि स्वास्थ्य विभाग इन दिनों 30 साल से ऊपर के सभी लोगों की शुगर व हाइपरटेंशन की नि:शुल्क जांच करने में जुटा है। अभी तक चुनिंदा स्थलों पर शिविर लगाकर ये जांच की जा रही थी, लेकिन अब जिले के सभी लोगों की जांच की जाएगी। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि विभाग के एनसीडी अनुभाग की ओर से एनपीसीडीसीएस कार्यक्रम के तहत आयोजित शिविरों में ये जांचे नि:शुल्क की जा रही हैं। अप्रेल से दिसंबर तक विभाग ने दो लाख 62 हजार तीन लोगों की जांच की, जिसमें 12 हजार 311 नए लोग संभावित शुगर पीडि़त मिले। इसमें शामिल 41 हजार 445 लोगों में पहले से ही शुगर की शिकायत थी, जिनकी फॉलोअप जांच की गई। इन्हीं दो लाख 62003 लोगों में से 12 हजार 635 लोग संभावित हाइपरटेंशन से पीडि़त मिले, जबकि 34698 लोग पहले से ही हाइपरटेंशन की चपेट में थे। यही वजह है कि विभाग लगातार हर संभव प्रयास कर नए लोगों को चिन्हित करने में जुटा है। विभाग ने जहां अपे्रल 2017 में शुरुआत केवल छह शिविरों से की, वहीं जुलाई-अगस्त तक प्रति माह करीब 60 शिविर आयोजित किए गए। इसके बाद सितंबर से दिसंबर 2017 के अंतराल में प्रतिमाह करीब 175 शिविर आयोजित किए गए। विभाग ने अपे्रल 2017 से दिसंबर 2017 तक 855 शिविर आयोजित किए। नए साल में नए मरीजों की तलाश में नए सिरे से प्रयास करते हुए विभाग लगातार शिविर आयोजित करेगा। अब 30 साल से ऊपर हर महिला व पुरुष की जांच करने का लक्ष्य रखा गया है। 
अब डोर-टू-डोर जांच शुरु
विभाग ने ग्रामीण क्षेत्र में घर-घर जांच शुरु कर दी है। शुरुआत 17 जैड पीएचसी के अधीन आने वाले गांवों से की, जहां तकरीबन 60 फीसदी लोगों की जांच की जा चुकी है। वहीं डाबला, ऊड़सर, रिड़मलसर व ढाबां में डोर-टू-डोर जांच जारी है। मोनिटरिंग के लिए जीएनएम नवदीप सिंह एवं संदीप कुमार को लगाया गया है। वहीं जिलास्तर से डीपीओ डॉ. सोनिया चुघ व डीपीसी अर्श बराड़ निरीक्षण व समीक्षा कर रहे हैं। जल्द ही सभी सीएचसी व पीएचसी के अधीन आने वाले समस्त गांवों में जांच की जाएगी। साथ ही शहरी क्षेत्र का भी प्लान तैयार कर शुगर व हाइपरटेंशन की जांच की जाएगी। 
बीमारियों ही मुख्य वजह यही, हर दिन ‘कमाएं’ आधा घण्टा
वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. जयंत नाथ बताते हैं कि बढ़ता तनाव शुगर व हाइपरटेंशन की मुख्य वजह है। जिसमें घरेलू, सामाजिक व कार्यस्थल का तनावपूर्ण माहौल शामिल हैं। वहीं अपराधिक तत्वों की गतिविधियों, घपले-घोटाले, देश की अस्थिर राजनीतिक व आर्थिक स्थिति, असुरक्षा का भाव आदि से भी गहरा तनाव पैदा होता है। इसके अलावा बिगड़ी दिनचर्या व खानपान के प्रति लापरवाही से भी शुगर व हाइपरटेंशन होता है। वे बताते हैं कि किडनी फेल होने, हार्ट अटैक, शारीरिक कमजोरी आदि बीमारियों के पीछे मुख्य कारण शुगर व हाइपरटेंशन ही है। इसलिए जरूरी है कि समय रहते सचेत हो जाएं। भाग-दौड़ भरी जिंदगी में हर संभव प्रयास कर आधा या एक घण्टे का समय अपने लिए अवश्य निकालें, जिसमें ध्यान, योग, पूजा आदि शामिल करते हुए शारीरिक व्यायाम भी करें। शांतिपूर्ण माहौल बनाएं। पैसे की बजाए, यही आधा या एक घण्टा आपकी असल कमाई होगी। डॉ. जयंतनाथ बताते हैं कि किसी भी कार्य को आफत की बजाए साधारण रूप से लें। अनावश्यक रूप से देश-दुनिया, धर्म-जाति या समाज की टेंशन न लें। बच्चों व परिवार के साथ खुशनुमा माहौल में समय बिताएं। कार्यस्थल पर भी खुशनुमा व मित्रवत व्यवहार पैदा करें ताकि इन बीमारियों की चपेट में आने से बच सकें।

बुधवार, 10 जनवरी 2018

पोलियो से बचाने के लिए अभियान 28 जनवरी व 11 मार्च को
-जिला स्तर पर हुआ प्रशिक्षण, अब खण्ड स्तरीय कार्मिकों को करेंगे प्रशिक्षित
श्रीगंगानगर। नौनिहालों को पोलियो जैसी गंभीर बीमारी व स्थाई अपंगता से बचाने के लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग अभियान चलाकर पांच साल तक के ब"ाों को दवा पिलाएगा। इसके लिए विभाग ने तैयारियां शुरु करते हुए बुधवार को चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षण दिया। आगामी दिनों में यह प्रशिक्षण प्राप्त चिकित्सा अधिकारी अपने-अपने खण्ड में एएनएम, आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों, नर्सिंग कार्मिकों व स्टूडेंट्स को प्रशिक्षण देंगे ताकि वे राष्ट्रीय अभियान को सफल बनाने में अपना योगदान दे सकें। जिले में करीब दो लाख ब‘चों को इस बार दवा पिलाई जाएगी। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि पांच साल तक के ब‘चों को पोलियो वायरस से प्रतिरक्षित करने के लिए पल्स पोलियो अभियान इस बार 28 जनवरी व 11 मार्च को आयोजित किया जाएगा। इस दौरान ब"ाों को ओरल पोलियो वैक्सीन की दो बूंद दी जाएंगी ताकि वे पोलियो वायरस से प्रतिरक्षित हो सकें। इस संबंध में बुधवार को जिला स्तरीय कार्यशाला आयोजित कर चिकित्सा अधिकारियों व अभियान प्रभारियों को प्रशिक्षण दिया गया। इस दौरान अभियान की पुख्ता माइक्रोप्लानिंग करने, शत-प्रतिशत हाई रिस्क क्षेत्र शामिल करने, गुणवत्तापूर्ण सर्वे करने और तय कार्यक्रमानुसार फील्ड स्तर तक बैठकें व प्रशिक्षण आयोजित करने के निर्देश भी अधिकारियों ने दिए। प्रशिक्षण के दौरान डब्ल्यूएचओ अधिकारियों ने अभियान की गंभीरता के मदï्देनजर विस्तार से जानकारी देते हुए शत-प्रतिशत लक्षित ब"ाों तक पहुंचने का आह्वान किया। उल्लेखनीय है कि भारत पोलियो मुक्त हो चुका है, लेकिन अब भी अन्य देशों से भारत को खतरा है। 
शहर के 35 हजार ब"ो गटकेंगे दो बूंद जिंदगी की
जिला अस्पताल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. संजय राठी ने बताया कि अभियान के तहत जिला मुख्यालय के करीब &5 हजार ब"ो लक्षित हैं, जिन्हें पोलियो रोधी दो बूंद दवा पिलाई जाएगी। इसके लिए बुधवार को समीक्षा करते हुए 17 जनवरी से ही स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को प्रशिक्षण देने का निर्णय लिया गया। इस दौरान एएनएम, आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं, स्वयंसेवकों सहित नर्सिंग स्टूडेंट्स को प्रशिक्षित किया जाएगा। इस बार शत-प्रतिशत ब"ाों का दवा पिलाने एवं सभी हाई रिस्क एरिया को कवर करने का निर्णय लिया गया है।

जिले की स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं से पीएचएस व एमडी कर रहे ‘सीधा संवाद’
ताकि तालमेल बिठा आमजन को कर सकें लाभान्वित, करीब साढ़े तीन हजार से अधिक आशा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता व एएनएम होंगी सम्मिलित
श्रीगंगानगर। स्वास्थ्य सेवाओं को सुदृढ़ करने एवं ग्रामीण क्षेत्र में घर-घर तक बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने के उदï्देश्य से स्वास्थ्य विभाग के आलाधिकारी इन दिनों आशा सहयोगिनी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं व एएनएम से वीडियो कॉन्फे्रंसिंग के जरिए सीधा संवाद कर रहे हैं। विभाग की प्रमुख शासन सचिव वीनू गुप्ता व एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन व्यक्तिगत रूप से इस मिशन से जुडक़र संवाद करने में जुटे हैं। जिले के करीब साढ़े तीन हजार से अधिक कार्मिक इसमें सम्मिलित होंगे, जिनसे अलग-अलग बैच के जरिए संवाद किया जाएगा। बुधवार को पहले बैच में जिले की करीब &50 कार्मिकों को अधिकारियों ने संवाद कार्यक्रम के जरिए प्रशिक्षित किया। जिलास्तर से सीएमएचओ, आरसीएचओ, डीपीएम व डीएसी सहित ब्लॉकस्तर से बीसीएमओ, बीपीएम, बीएचएस, सीडीपीओ व एलएस भी सम्मिलित हुए।
मिशन निदेशक नवीन जैन ने कार्यकर्ताओं को संबोधित करते हुए कहा कि वीसी का मुख्य उïद्देश्य आपमेंआपसी समन्वय स्थापित करना है, क्योंकि तीनों ही पद ग्रामीण क्षेत्र में स्वास्थ्य की मुख्य धूरी हैं। हालांकि वर्तमान में आपसी तालमेल के अभाव में अनेक बार ग्रामीण बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित रहते हैं या उन्हें व्यापक जानकारी नहीं मिलती। कुछ जगहों पर तालमेल में अभाव का ही नतीजा है कि तीनों कार्यकर्ताओं के पास गांव का एक जैसा डाटा तैयार नहीं मिलता, या अलग-अलग होता है। लिहाजा अब तीनों कार्यकर्ता एक साथ बैठकर पहले गांव का नक्शा तैयार करेंगी और उसके बाद घरों की मार्किंग करते हुए पूरा डेटा तैयार करेंगी। तीनों के पास हर रिकॉर्ड एक समान होगा तभी एकरूपता में स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाई जा सकेगी। उन्होंने कहा कि जिन गांवों में तीनों कार्यकर्ता समन्वय से चलती हैं, वहां के स्वास्थ्य सूचकांक बेहतर होंते हैं। ऐसे में यदि सभी गांवों में यह प्रयास किया जाए तो पूरे रा’य का स्वास्थ्य सूचकांक सुधरेगा। उन्होंने कहा कि गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं व नवजात शिशुओं को आपकी सबसे अधिक जरूरत पड़ती है। यदि आपमें बेहतर तालमेल होगा तो इन्हें समय पर उचित सुविधा मिलेगी और मातृ मृत्यु एवं शिशु मृत्यु में भी कमी आएगी। आशा प्रभारी रायसिंह सहारण ने बताया कि जिले में 15 बैच तैयार किए गए हैं, जिनमें करीब साढ़े तीन हजार से अधिक कार्मिक शामिल हैं। आगामी ‘एएए’ संवाद कार्यक्रम 1& जनवरी, 15, 16 व 17 जनवरी का आयोजित होंगे। उन्होंने बताया कि जिलास्तर से भी नियमित मोनिटरिंग करते हुए तीनों कार्यकर्ताओं में बेहतर समन्वय के प्रयास किए जाएंगे ताकि ग्रामीणों को स्वास्थ्य सुविधाएं सुचारू ढंग से मिल सके। 

सोमवार, 8 जनवरी 2018

हजारों की जांच, अब मिल रही नि:शुल्क
-जिला अस्पताल में नि:शुल्क जांच सुविधा शुुरू, पीपीपी मोड में 36 प्रकार की हो रही जांच
श्रीगंगानगर। स्वास्थ्य क्षेत्र में एक और नई सौगात नए साल में जिले को मिली है। नव वर्ष की शुरुआत के साथ ही जिला चिकित्सालय में 36 तरह की नई जांचें नि:शुल्क की जा रही है। इन जांचों में कई तरह की गंभीर बीमारियों के दौरान की जाने वाली जांचें भी शामिल हैं। वहीं ऐसी जांच भी है जिनके लिए अब तक मरीजों को हजारों रुपए खर्च करने पड़ते थे। पीपीपी मोड में शुुरु की गई इस जांच योजना से निश्चित ही मरीजों व उनके परिजनों को राहत मिलेगी। मरीज जिला अस्पताल के कमरा नंबर नौ में ये जांचे करवा सकते हैं। कुछ जांच ऐसी भी है, जो सामान्य लोगों को भी करवानी चाहिए ताकि समय रहते रोग के प्रति सतर्क हो सकें। 
प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. सुनीता सरदाना ने बताया कि पीपीपी मोड के तहत राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन एवं क्रस्ना डायग्रोस्टिक्स के संयुक्त गठबंधन में 36 तरह की नई जांचे शुरु की गई हैं। सभी जांचे मरीजों के लिए पूर्णत: नि:शुल्क हैं, हालांकि पीपीपी मोड में संचालित इन जांचों का शुल्क प्रदेश सरकार वहन करेगी। राहत की बात यह भी है कि अपातकालीन जांच की सुविधा 24 घण्टे संचालित रहेगी। इन जांचों में ऐसी जांच भी है, जो अब तक जिले की बजाए अन्य बड़े शहरों से करवानी पड़ती थी। उन्होंने बताया कि इन जांचों में मुख्यत: कैंसर, थैलेसिमिया, हदï्य, थाईरायड, स्वाइन फ्लू, डेंगू व टाईफाइड की जांच शामिल हैं, वहीं ऑपरेशन में रोग जांच के लिए ली जाने वाली बॉयोप्सी की भी जांच होगी। इसके अलावा जीजीटी, एचबी एवनसी, चिकनगुनिया, लिपिड प्रोफाइल, यूरिन कल्चरल, ब्लड कल्चरल, एपीटीटी, एलएच, टार्च, आयरन, विटामिन डी लेवल, बी-12, एएनए, पीएसए, एफडीपी, पीएपी सहित 36 प्रकार की जांचें की जा रही हैं। योजना के तहत एलाइजा मैथड़ के जरिए जांच की जा रही है। जिससे रोग के होने व नहीं होने की पूरी पुष्टि होती है। फिलहाल, कंपनी ने सेम्पल लेने के लिए कर्मचारी नियुक्त किए हैं, जो दोपहर दो बजे तक सेम्पल समीपवर्ती कंपनी प्रयोगशाला में भेजते हैं। वहां से जांच पश्चात अगले दिन ऑनलाइन रिपोर्ट आने पर मरीज को रिपोर्ट दी जाती है। व्यवस्था सुचारु रखने के लिए जिला चिकित्सालय में तीन सदस्यीय मोनिटरिंग कमेटी का गठन किया गया है, ताकि आमजन को किसी तरह की कोई परेशानी या असुविधा हो तो त्वरित समाधान हो सके। उल्लेखनीय है कि नि:शुल्क जांच योजना के तहत वर्तमान में इनके अलावा 56 प्रकार जांचें नि:शुल्क की जा रही है। 
आज मनाया जाएगा पीएमएसएमए 
- प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान में निजी सहित सरकारी चिकित्सक देंगे नि:शुल्क सेवाएं
श्रीगंगानगर। प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस नौ जनवरी को मनाया जाएगा। मंगलवार को मनाए जाने वाले इस दिवस पर जहां निजी चिकित्सक पूर्णत: नि:शुल्क सेवाएं देंगे, वहीं राजकीय चिकित्सक भी अपनी उत्कृष्ट सेवाओं के जरिए गर्भवती महिलाओं को लाभान्वित करेंगे। इस दिवस पर गर्भवती महिलाओं को विभाग की ओर से हर संभव स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी। गर्भवती महिलाओं को बेहतर व सहज स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए जिले में हर माह की नौ तारीख को सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान मनाया जा रहा है। इस दौरान जिला चिकित्सालय सहित शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र व सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुबह नौ बजे से तीन बजे तक महिलाओं को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई जाएंगी।

शुक्रवार, 5 जनवरी 2018

संभावित स्वाइन फ्लू के चलते प्रार्थना सभा पर रहेगी पाबंदी
- स्टूडेंट्स के जरिए पैदा की जाएगी जागरूकता, भीड़ वाले क्षेत्र से बचने की सलाह
श्रीगंगानगर। संभावित स्वाइन फ्लू के चलते जिला प्रशासन एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से एहतियातन कदम उठाए जा रहे हैं। इसी के मदï्देनजर स्कूलों में होने वाली प्रार्थना सभाओं पर पाबंदी रहेगी। यह आदेश जिले के सभी सरकारी व गैर सरकारी स्कूलों पर लागू होंगे। इस संबंध में जिला कलेक्टर ज्ञानाराम ने प्रारंभिक एवं माध्यमिक जिला शिक्षा अधिकारी को आदेशों की पालना सुनिश्चित करने के लिए निर्देश दिए हैं। वहीं स्वास्थ्य विभाग ने सभी बीसीएमओ को पाबंद किया है कि वे स्वाइन फ्लू को लेकर पूरी सतर्कता बरतें एवं संभावित मरीज मिलने पर तुरंत जांच करवाएं। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि स्वाइन फ्लू के मरीज प्रदेश में मिल रहे हैं। खासकर बुजुर्ग, गर्भवती महिलाएं एवं बच्चे इसकी चपेट में आ सकते हैं। सोमवार से जिले के स्कूल लगने वाले हैं, इसी संवेदनशीलता को ध्यान में रखते हुए सर्दी के मौसम में प्रार्थना सभाएं जिला कलेक्टर की ओर से बंद की गई है। वहीं निर्देशित किया गया है कि स्वाइन फ्लू के प्रति आवश्यक जानकारी बच्चों की दैनिक डायरी में इंद्राज की जाए एवं उस पर परिजनों के हस्ताक्षर भी मंगवाए जाएं ताकि घर-घर स्वाइन फ्लू का संदेश पहुंच सके। गौरतलब है कि प्रदेश में स्वाइन फ्लू को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। आमजन से अपील की गई है कि स्वाइन फ्लू का लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करवाएं। विभाग की ओर से स्वाइन फ्लू की स्क्रीनिंग, दवाओं की उपलब्धता, सेम्पल एकत्रित करने की सुविधा, जांच की व्यवस्था, आईसोलेशन वार्ड की स्थिति, आईसीयू की व्यवस्था सुनिश्चित करते हुए नियंत्रण कक्ष भी स्थापित किया गया है। आमजन टोल फ्री नंबर 104 से स्वाइन फ्लू के लक्षण, जांच एवं उपचार के विषय में आवश्यक जानकारी ले सकते हैं। 
क्या करें, क्या नहीं करें
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि स्वाइन फ्लू को लेकर आमजन का जागरूक होना बेहद जरूरी है। छींक आना व नाक से पानी बहना, सांस लेने में कठीनाई, खांसी व गले में खरास, दस्त व उल्टी, तेज सिर दर्द व लगातार बुखार होने पर तुरंत जांच करवाएं। वहीं खांसते या छींकते समय अपने मुंह व नाक को रुमाल से ढकें, नाक, आंख या मुंह को छूने के बाद और पहले अपने हाथ अच्छे से धोएं, खांसी, बहती नाक, छींक व बुखार जैसे फ्लू के लक्षण से प्रभावित लोगों से दूरी बनाएं, भरपूर नींद लें, खूब पानी पीएं व पोषक भोजन करें, घर के दरवाजों के हैंडल, कीबोर्ड व मेज आदि को साफ रखें। वहीं हाथ मिलाने, गले मिलने आदि से परहेज करें, डॉक्टर से पूछे बगैर दवा न लें, इस्तेमाल किए गए रुमाल आदि का उपयोग न करें, स्वाइन फ्लू प्रभावित इलाके में जाने से परहेज करें, आवश्यकता होने पर मास्क लगाएं, घर के आस-पास गंदगी न होंने दें, भीड़ वाले स्थानों पर जाने से बचें और स्वाइन फ्लू रोगी से अधिक निकटता न बनाएं। 

गुरुवार, 4 जनवरी 2018

बचें स्वाइन फ्लू से, बरतें एहतियात
-स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखते ही तुरंत करवाएं जांच, रेड अलर्ट जारी, स्वास्थ्य विभाग हुआ सतर्क
श्रीगंगानगर। प्रदेश में स्वाइन फ्लू को लेकर रेड अलर्ट जारी किया गया है। स्वास्थ्य विभाग स्वाइन फ्लू के चलते आवश्यक कदम उठा रहा है और आमजन से एहतियात रखने की अपील की गई है। वहीं बचाव एवं रोकथाम के लिए स्वाइन फ्लू पॉजिटिव पाए गए प्रभावित क्षेत्रों में रेपिड एक्शन टीमें भेजकर स्क्रीनिंग करने के निर्देश जारी किए गए हैं। आमजन स्वाइन फ्लू का लक्षण दिखने पर तुरंत जांच करवाएं। जांच एवं दवाओं की व्यवस्था स्वास्थ्य केंद्रों पर सुनिश्चित करने के लिए विभाग ने संबंधित अधिकारियों को पाबंद किया है। इस संबंध में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सराफ ने वीडियो कॉन्फे्रंसिंग के जरिए सीएमएचओ व पीएमओ को स्वाइन फ्लू को लेकर एहतियात बरतने एवं आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि स्वाइन फ्लू की स्क्रीनिंग, दवाओं की उपलब्धता, सेम्पल एकत्रित करने की सुविधा, जांच की व्यवस्था, आईसोलेशन वार्ड की स्थिति, आईसीयू की व्यवस्था, नियंत्रण कक्ष की प्रभावशीलता एवं रेफरल सुविधाओं के बारे में समीक्षा कर आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। पूरे प्रदेश में रेड अलर्ट घोषित होने के साथ ही जिला अस्पताल में स्वाइन फ्लू की जांच के लिए नमूने एकत्रित करने की पर्याप्त व्यवस्था सुनिश्चित की गई है। एकत्रित नमूनों को जांच के लिए मेडिकल कॉलेजों में भिजवाया जाएगा और तत्काल जांच रिपोर्ट लेने एवं पॉजिटिव पाए जाने पर यथाशीघ्र उपचार किया जाएगा। प्रभावित क्षेत्रों में एएनएम एवं आशा कार्यकर्ताओं के जरिए घर-घर जाकर स्क्रीनिंग की जाएगी। स्वाइन फ्लू पर नियंत्रण, रोकथाम एवं उपचार के लिए की गई व्यवस्थाओं की जिला एवं निदेशालय स्तर से दैनिक मॉनिटरिंग की जा रही है। स्वाइन फ्लू की निगरानी एवं तत्काल आवश्यक कार्रवाई के लिए जिला नियंत्रण कक्ष स्थापित किया गया है। विभागीय टोल फ्री नंबर 104 से स्वाइन फ्लू के लक्षण, जांच एवं उपचार के विषय में आवश्यक जानकारी ली जा सकती हैं एवं आवश्यक सूचनाएं दी जा सकती हैं। 
दवा व जांच की पर्याप्त सुविधा, आमजन रखें सावधानी
डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला ने बताया कि स्वाइन फ्लू की जांच के लिए जिला अस्पताल में आवश्यक दवाओं के साथ ही मॉस्क एवं पीपीई किट उपलब्ध है। सभी सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र व प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र पर टेमी-फ्लू भी पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध है। वहीं जांच को लेकर आवश्यक कदम उठाए गए हैं और जांच में पॉजिटिव पाए जाने पर संबंधित व्यक्ति के मोबाईल पर एसएमएस द्वारा सूचना दी जाएगी। वहीं आमजन भीड़ वाले क्षेत्र से बचें, जरूरत हो तो मास्क का उपयोग करें, नियमित हाथ धोएं, खांसी-जुखाम होने पर तुरंत जांच करवाएं, आवश्यक दवाएं लें, बुजुर्गों खासकर 60 वर्ष से ऊपर की आयु के, बच्चों खासकर पांच वर्ष तक के, एवं गर्भवती महिलाओं का खास ख्याल रखें। 

बुधवार, 3 जनवरी 2018

नए साल पर नई सौगात, मोबाइल डेंटल वैन करेगी ‘मुख व दांतों’ का उपचार
-जिले में पहुंची वैन, एक्सरे से लेकर दवाओं व उपचार तक की सुविधा, पहला शिविर घड़साना में
श्रीगंगानगर। नए साल में नई सौगात के साथ चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जिले में एक नई मोबाइल डेंटल वैन शुरु की है। जिसके जरिए दूर-दराज बसे ग्रामीण इलाकों में मुख व दांतो संबंधी बीमारी झेल रहे आमजन को राहत दी जाएगी। वैन के माध्यम से बच्चे, बड़े व बुजुर्गों का पूर्णत नि:शुल्क उपचार किया जाएगा और साथ ही आवश्यक होने पर उन्हें नि:शुल्क दवा भी दी जाएगी। निश्चित ही नव वर्ष पर यह नई शुरुआत जिले के लिहाज से बेहतर साबित होगी। वैन की महत्ता को देखते हुए पहले दिन इसकी शुरुआत दूरुस्थ क्षेत्र घड़साना से की गई है, आगामी दिनों में यह वैन अनूपगढ़ होते हुए अन्य खण्डों तक पहुुंचेगी। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि आरबीएसके मोबाइल डेंटल वैन जिले में स्वास्थ्य सुविधाओं के लिहाज से एक सौगात है, क्योंकि वैन के जरिए संबंधित इलाके पर दो दिवसीय शिविर लगाकर आमजन को राहत पहुंचाई जाएगी। खासकर, आरबीएसके के तहत चिन्हित बच्चों को इसमें प्राथमिकता से उपचारित किया जाएगा। शिविर के दौरान मुख एवं दंत रोग की जांच कर नि:शुल्क उपचार दिया जाएगा। आवश्यकता पर नि:शुल्क दवाएं भी दी जाएंगी, वहीं उन्हें मुंह व दांतों संबंधी बीमारियों के प्रति जागरूक भी किया जाएगा। वैन में नियुक्त डॉक्टर सचिन सारस्वत ने बताया कि दांतों में मसाला भरना, दांतों के कीड़े निकालना, दांतों की सफाई, हिलते हुए दांतों को निकालना एवं उन्हें सुरक्षित रखने का उपचार कर उपाय भी बताए जा रहे हैं। इसमें मुख्यत: आरबीएसके के तहत चिन्हित बच्चों का उपचार किया जा रहा है, वहीं सामान्य मरीजों को भी राहत दी जा रही है। अत्याधुनिक व्यवस्थाओं सुसज्जित इस वैन में दांतों का एक्सरे भी किया जा रहा है। रूट  कैनाल, फिलिंग, स्केलिंग, डेंटल एक्सट्रेक्शन एंड इंफेक्शन सहित अन्य सुविधाएं भी हैं। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि वैन सुबह नौ बजे से पांच बजे तक संबंधित सीएचसी पर सेवाएं दे रही हैं। घड़साना के बाद चार व पांच जनवरी को रावला और आठ व नौ जनवरी को अनूपगढ़ में शिविर लगाया जाएगा। वैन के जरिए न केवल नि:शुल्क जांच की जा रही है, बल्कि उपचार के साथ ही नि:शुल्क दवाएं भी दी जा रही है। प्रतिदिन करीब 100 मरीजों का लक्ष्य रखा गया है ताकि अधिकाधिक लोगों को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाई जा सके। वैन में विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. सचिन सारस्वत व डॉ. अल्केश चौधरी सहित जीएनएम विनोद पूनिया व सहायक कर्मचारी महेश भांभू सेवाएं दे रहे हैं। यह वैन बीकानेर संभाग के लिए राज्य सरकार की ओर से दी गई है।