बुधवार, 31 मई 2017

स्वास्थ्य विभाग ने तम्बाकू निषेध दिवस पर काटे चालान
नहीं चलेंगे हुक्का-बार, एक पखवाड़ा होगी सख्त कार्रवाई, सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान पड़ेगा महंगा

श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने विश्व तंबाकू निषेध एवं माह के आखिरी दिन नो टोबेको डे पर बुधवार को जिलेभर में कार्रवाई की। इस दौरान विभाग के साथ ही पुलिस विभाग एवं औषधि नियंत्रण विभाग ने भी चालान काटे। विभाग ने तंबाकू उत्पाद बेचने, प्रचार-प्रसार करने वालों सहित सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों के चालान काटे। तंबाकू को लेकर एक पखवाड़े तक निरंतर अभियान के तौर पर कार्रवाई होगी, जबकि इसके बाद भी नियमित कार्रवाई जारी रहेगी। विभागीय टीम ने हुक्का-बार, विभिन्न दुकानों एवं होलसेल डीलरों के यहां निरीक्षण भी किया। अनेक स्थलों से सिगरेट व तंबाकू उत्पाद संबंधी होर्डिंग व अन्य सामग्री भी उतरवाई गई। 

सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि विश्व तंबाकू निषेध दिवस एवं नो टोबेको डे को लेकर टीम को कार्रवाई के आदेश दिए गए, जिस पर दिन-भर कार्रवाई की गई। जवाहरनगर में हुक्का बार संचालित होने की सूचना पर तंबाकू सेल के जिला प्रभारी अजय सिंह, सहायक प्रभारी नीपेन शर्मा, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई, डीआई श्वेता छाबड़ा, डीईओ त्रिलोकेश्वर शर्मा सहित मीरा चौक प्रभारी जयसिंह भादू पुलिस बल सहित पहुंचे। यहां चिलम हुक्काबार पर सघन तलाशी ली गई लेकिन कुछ संदिग्ध नहीं मिला। मौके पर मौजूद हुक्का बार प्रतिनिधि के अनुसार विगत एक दस दिनों से हुक्काबार बंद है और किसी तरह का संचालन नहीं किया जा रहा है। हालांकि टीम ने मौके पर ही लगी सामग्री को उतरवाया और चिलम नाम को हटाने के लिए पाबंद किया। वहीं टीम ने हुक्काबार नहीं चलाने के लिए भी पाबंद किया। इसी तरह एक अन्य हुक्का बार के चलने की सूचना पर टीम शिव चौक पहुंची, लेकिन वहां कोई हुक्का बार नहीं मिला। टीम गंगवानी ट्रेडर्स का अधिनियम की धारा सात के तहत निरीक्षण किया और चालान काटा। इस दौरान टीम के साथ कोतवाली के सबइंस्पेक्टर राकेश स्वामी मौजूद रहे। सहायक प्रभारी नीपेन शर्मा ने बताया कि टीम सहित खण्ड मुख्यालयों पर भी नो टोबेको डे पर तंबाकू उत्पाद बेचने वालों और सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों के 154 चालान काटे गए। वहीं 17 जगहों का निरीक्षण किया गया और दस जगहों पर प्रचार-प्रसार सामग्री उतरवाई गई। करीब 100 शपथ पत्र भरवाए गए। उन्होंने बताया कि आगामी एक पखवाड़े के दौरान कार्रवाई जारी रहेगी और तंबाकू उत्पाद के प्रचार-प्रसार पर पूर्णत: पाबंदी लगवाई जाएगी। साथ ही सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने वालों पर अंकुश लगाने के लिए निरंतर चालान काटे जाएंगे। पुलिस विभाग भी आगामी दिनों में चालान काटकर कार्रवाई करेगी। तंबाकू निषेध दिवस पर बुधवार को जिले में जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित किए गए। 


मंगलवार, 30 मई 2017

शुरू हुआ विटामिन-ए अभियान
-30 जून तक पिलाई जाएगी दवा, नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चे होंगे लाभान्वित
श्रीगंगानगर। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने और रतौंधी सहित अन्य आंखों की बीमारियों से बचाव के लिए जिले में मंगलवार स्े विटामिन-ए का 33वां चरण शुरू हुआ। जिला मुख्यालय पर पुरानी आबादी शहरी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र से एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता, यूपीएचसी प्रभारी डॉ. दीपिका मोंगा, डीपीएम विपुल गोयल, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई, पीएचएन सविंद्रसिंह, कुलदीप स्वामी एवं सुखजीत कौर ने नौनिहालों को दवा पिलाकर कार्यक्रम की शुरूआत की। मंगलवार से प्रारंभ हुआ यह चरण संपूर्ण राज्य में एक साथ 30 जून तक चलेगा। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि इस दौरान नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जाएगी।
इस मौके पर डॉ. दीपिका मोंगा ने कहा कि परिजनों को चाहिए कि वे अपने नौ माह से पांच वर्ष आयु तक के बच्चों को नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर ले जाकर बच्चों को विटामिन ए की दवा अवश्य पिलाएं। क्योंकि यह उनकी शारीरिक क्षमता, रोग प्रतिरोधक क्षमता एवं आंखों के लिए बेहद फायदे मंद हैं। उन्होंने बताया कि विटामिन ए की दवा आंगनबाड़ी केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप जिला अस्पताल एवं जिला अस्पताल पर पिलाई जा रही है। जिन बच्चों को एक बार दवा पिलाई गई है उन्हें छह माह से पूर्व दवा न पिलाएं, क्योंकि यह दवा 6 माह के अन्तराल से पिलाई जाती है। उन्होंने बताया कि विटामिन-ए आखों की बीमारियों जैसे रतौंधी व अंधता से बचाव के साथ-साथ बच्चों में शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि के लिए भी आवश्यक है। विटामिन-ए से बच्चों में दस्त एवं निमोनिया आदि बीमारियों के घातक प्रभाव में कमी लाई जा सकती है। इस विटामिन के जरिए पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर में भी कमी आती है। 33वें चरण के दौरान एक से पांच साल तक के बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों को विटामिन-ए की दो एमएल खुराक पिलाई जाएगी एवं 9 माह के बच्चों को जिन्हें मिजल्स के साथ विटामिन-ए नहीं दी गई है, को विटामिन-ए की एक एमएल खुराक पिलाई जाएगी। जिन स्थानों पर आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं हैं, वहां एएनएम एक से पांच साल तक के बच्चों को यह खुराक पिलाएगी। शुक्रवार को जिला मुख्यालय सहित जिले के सभी खण्ड मुख्यालयों सहित सीएचसी, पीएचसी, आंगनबाड़ी व अन्य स्वास्थ्य केंद्रों पर दवा पिलाई गई। 

सोमवार, 29 मई 2017

मंगलवार से पिलाई जाएगी विटामिन-ए
-एक माह चलेगा 33वां चरण, नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों दी जाएगी दवा
श्रीगंगानगर। बच्चों में रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने और रतौंधी सहित अन्य आंखों की बीमारियों से बचाव के लिए जिले में शुक्रवार से विटामिन-ए का 33वां चरण शुरू होगा। यह चरण संपूर्ण राज्य में एक साथ होने जा रहा है जो आगामी 30 जून तक निरंतर चलेगा। इस दौरान नौ माह से पांच वर्ष तक के बच्चों को विटामिन ए की खुराक दी जाएगी। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि मंगलवार को पुरानी आबादी यूपीएचसी में सुबह 11 बजे विधिवत रूप से बच्चों को दवा पिलाकर कार्यक्रम शुरू किया जाएगा। इस दौरान कार्यक्रम प्रभारी आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, यूपीएचसी प्रभारी डॉ. दीपिका मोंगा सहित अन्य अधिकारीगण मौजूद रहेंगे। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि विटामिन ए की दवा आंगनबाड़ी केन्द्र, उप स्वास्थ्य केन्द्र, प्राथमिक स्वास्थ्य केन्द्र, सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र, उप जिला अस्पताल एवं जिला अस्पताल पर पिलाई जाएगी। यह खुराक 6 माह के अन्तराल से पिलाई जाती है। उन्होंने बताया कि विटामिन-ए आखों की बीमारियों जैसे रतौंधी व अंधता से बचाव के साथ-साथ बच्चों में शारीरिक रोग प्रतिरोधक क्षमता वृद्धि के लिए भी आवश्यक है। विटामिन-ए से बच्चों में दस्त एवं निमोनिया आदि बीमारियों के घातक प्रभाव में कमी लाई जा सकती है। इस विटामिन के जरिए पांच वर्ष से कम उम्र के बच्चों की मृत्युदर में भी कमी आती है। 33वें चरण के दौरान एक से पांच साल तक के बच्चों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, आंगनबाड़ी केन्द्र के बच्चों को विटामिन-ए की दो एमएल खुराक पिलाई जाएगी एवं 9 माह के बच्चों को जिन्हें मिजल्स के साथ विटामिन-ए नहीं दी गई है, को विटामिन-ए की एक एमएल खुराक पिलाई जाएगी। जिन स्थानों पर आंगनबाड़ी केन्द्र नहीं हैं, वहां एएनएम एक से पांच साल तक के बच्चों को यह खुराक पिलाएगी। 

शनिवार, 27 मई 2017

राजश्री योजना के लिए भामाशाह कार्ड जरूरी, दूसरी किश्त एक जून से
-अब तक दस हजार से अधिक बेटियां लाभान्वित, योजना के तहत मिलेंगे 50 हजार रुपए
श्रीगंगानगर। बेटियों के लिए राज्य सरकार की ओर से शुरू की गई राजश्री योजना एक जून 2017 को दूसरे वर्ष में प्रवेश करने जा रही है। इसके साथ जिन बेटियों का टीकाकरण पूर्ण हो गया उन्हें दूसरी किश्त मिल सकेगी। वहीं राज्य सरकार ने किश्त का भुगतान ऑनलाइन कर इसे बेहद सुगम बना दिया है। साथ ही दस्तावेजी झंझट खत्म करते हुए योजना को भामाशाह कार्ड से जोड़ा गया है, इस कारण अब केवल भामाशाह कार्ड के जरिए ही योजना का लाभ दिया जा रहा है। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि जिले में अब तक दस हजार छह सौ 20 बालिकाओं को इस योजना का लाभ दिया जा चुका है। उन्होंने बताया कि जिन महिलाओं को जून 2016 में योजना की पहली किश्त मिली वे टीकाकरण कार्ड आदि लेकर दूसरी किश्त का लाभ अवश्य उठाएं ताकि उन्हें आगामी किश्त मिल सके।  

 सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि टीकाकरण कार्ड, बैंक खाता नंबर, भामाशाह कार्ड व स्थाई मोबाइल नंबर सहित अपने नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र पर दूसरी किश्त के लिए आवेदन करें ताकि निर्धारित समय पर ऑनलाइन भुगतान हो सके। इस संबंध में किसी भी तरह की समस्या आने पर जिलास्तर पर डीएनओ डॉ. कमल गुप्ता से संपर्क (7597823003) किया जा सकता है। उन्होंने बताया कि बेटी जन्म को प्रोत्साहन देने वाली मुख्यमंत्री राजश्री योजना विगत एक जून 2016 को प्रारंभ हुई थी। जिसके तहत 12वीं उत्तीर्ण होने तक विभिन्न किश्तों में पच्चास हजार रुपए दिए जा रहे हैं। भुगतान वर्तमान में ऑनलाइन ओजस सॉफ्टवेयर के जरिए किया जा रहा है, जिसकी मोनिटरिंग स्वयं मिशन निदेशक नवीन जैन कर रहे हैं। योजना के तहत एक जून या उसके बाद जन्म लेने वाली बालिकाएं लाभ की पात्र हैं और योजना का लाभ केवल राजस्थान मूल की प्रसूताओं को दिया जा रहा है। बिश्रोई ने बताया कि राजकीय अथवा अधिस्वीकृत चिकित्सा संस्थान में जन्म लेने वाली बालिकाओं को जन्म पर 2500 रुपए और उसकी प्रथम वर्षगांठ पर पूर्ण टीकाकरण होने के बाद 2500 रुपए दिए जाते हैं। इसके बाद राजकीय विद्यालय में प्रथम कक्षा में प्रवेश लेने पर चार हजार रुपए, राजकीय विद्यालय में कक्षा छह में प्रवेश लेने पर पांच हजार रुपए और 10 में प्रवेश लेने पर 11 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। इसके बाद 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को 25 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। अब योजना का लाभ लेने के लिए हितग्राही का भामाशाह कार्ड होना अनिवार्य है। गर्भवती महिला प्रसव पूर्व जांच के दौरान भामाशाह कार्ड व भामाशाह कार्ड से जुड़ा बैंक खाते का विवरण निकटतम आंगनबाड़ी केंद्र पर एएनएम, आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा राजकीय चिकित्सा संस्थान में जमा करवाएं। जिन लाभार्थी महिलाओं ने भामाशाह नामांकन नहीं करवाया है वे अपने निकटतम ई-मित्र केंद्र से भामाशाह कार्ड बनवाकर विवरण चिकित्सालय में उपलब्ध करवाएं। 


शुक्रवार, 26 मई 2017

शैक्षणिक व चिकित्सा संस्थाओं के पास तंबाकू उत्पाद बिकने पर होगी कार्रवाई
-कोटपा अधिनियम के तहत की जाएगी छापेमारी, 31 को मनाएंगे तंबाकू निषेध दिवस
श्रीगंगानगर। स्वास्थ्य विभाग आगामी दिनों में शैक्षणिक व चिकित्सा संस्थाओं के पास तंबाकू उत्पाद बेचने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई करेगा। इसके लिए जिलास्तरीय टीम संबंधित संस्थाओं का निरीक्षण कर न केवल तंबाकू उत्पाद बेचने वालों बल्कि जिन संस्थाओं के पास तंबाकू बिक रहा है उन संस्थाओं के प्रभारियों के खिलाफ भी कार्रवाई करेगी। यह कार्रवाई सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद (विज्ञापन का प्रतिषेध और व्यापार व वाणिज्य उत्पादन, प्रदाय और वितरण का विनियमन) अधिनियम 2003 के तहत जाएगी। इस संबंध में सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने संबंधित चिकित्सा प्रभारी अधिकारियों, बीसीएमओ एवं जिला तंबाकू नियंत्रण प्रकोष्ठ को निर्देशित किया है ताकि इन संस्थाओं के पास तंबाकू उत्पाद विक्रय पर पूर्ण पाबंदी लग सके। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि शैक्षणिक संस्थाओं, आंगनबाड़ी केंद्रों सहित अन्य चिकित्सा संस्थाओं के 100 गज दायरे में तंबाकू उत्पाद बेचना कानून अपराध है। उन्होंने बताया कि तंबाकू उत्पाद के पैकेट्स के 85 फीसदी क्षेत्र पर सचित्र चेतावनी प्रकाशित होना भी जरूरी है। यदि इसके बिना कोई तंबाकू उत्पाद बेचता है तो यह भी अपराध की श्रेणी में आता है और विभाग की ओर से ऐसे लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। डॉ. बंसल ने बताया कि आगामी दिनों में जिले सभी स्कूल, कॉलेजों, कोचिंग संस्थाओं व चिकित्सा संस्थाओं के नजदीकी क्षेत्र को पूर्णत: तंबाकू उत्पाद मुक्त बना दिया जाएगा। विभाग की ओर से ऐसे लोगों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई होगी। वहीं सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करने वालों पर भी विभागीय टीमों सहित पुलिस को कार्रवाई के लिए कहा गया है। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक की ओर से भी पुलिस थानों को निर्देशित किया गया है ताकि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान पूर्णत: प्रतिबंध किया जा सके। जिला प्रकोष्ठ के अजय सिंह शेखावत, नीपेन शर्मा, त्रिलोकेश्वर शर्मा आदि को कोटपा के तहत कार्रवाई के लिए निर्देशित किया गया है। वहीं विभाग ने 31 मई, यानी तंबाकू निषेध दिवस तक कार्रवाई करने व जागरूक कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया है। विभाग की ओर से 31 मई को विभिन्न संस्थाओं के साथ समन्वय कर जागरूकता कार्यक्रम भी आयोजित करवाए जाएंगे। 

गुरुवार, 25 मई 2017

‘‘एक खामी पूरी व्यवस्था पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर सकती है’’
-जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में एडीएम और सीएमएचओ ने दिए सख्त निर्देश, जल्द होगा पूरे जिले का निरीक्षण 
श्रीगंगानगर। आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाने और चिकित्सा व्यवस्था में किसी तरह की कोई कमी न रहे इसके लिए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के जिलास्तरीय अधिकारी जल्द ही पूरे जिले के स्वास्थ्य केंद्रों का निरीक्षण करेंगे। यह निर्णय गुरुवार को जिला कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित बैठक में लिया गया। सीएमएचओ डॉक्टर नरेश बंसल ने सभी बीसीएमओ एवं अन्य प्रभारियों को भी निर्देशित किया कि वे भी अपने अधीन आने वाले चिकित्सा संस्थाओं का निरीक्षण कर वहां संपूर्ण व्यवस्था की जांच करें। उन्होंने कहा कि किसी भी संस्थान की एक खामी पूरी व्यवस्था, पूरे जिले की स्वास्थ्य सेवाओं पर प्रश्नचिन्ह खड़ा कर सकती है। उल्लेखनीय है कि विगत दिनों एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन ने जालौर जिले के नियमित निरीक्षण के दौरान बड़े स्तर पर खामियां व अव्यवस्थाएं पकड़ी थी, जिसे लेकर न केवल संबंधित कार्मिकों व चिकित्सकों के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है बल्कि आपराधिक मुकदमें भी दर्ज किए जाएंगे। जालौर में मिली खामियों के बाद बुधवार को मिशन निदेशक श्री जैन ने वीडियो कॉन्फें्रसिंग के जरिए इन अव्यवस्थाओं के बारे में विस्तार से चर्चा की थी। साथ ही उन्होंने चेतावनी दी कि यदि ऐसी लापरवाही किसी जिले में मिली तो सख्त से सख्त कार्रवाई होगी।
सीएमएचओ डॉ. बंसल ने कहा कि प्रभारी खुद स्वास्थ्य केंद्र की मोनिटरिंग करें, ऐसा न हो कि केंद्र किसी कार्मिक के भरोसे ही चल रहा हो। उन्होंने एमएमयू व एमएमवी का निरीक्षण करने के लिए बीपीएम और बीसीएमओ को पाबंद करते हुए कहा कि यदि वहां कोई खामी मिली तो जिम्मेदारी आपकी होगी। साथ ही संबंधित ग्रामीणों को एक सप्ताह पहले शिविर की जानकारी पहुंचाना सुनिश्चित करें। परिवार कल्याण कार्यक्रम के पिछडऩे पर चिंता जाहिर करते हुए एडीएम व सीएमएचओ ने कहा कि पहले जहां जिला पहले व दूसरे स्थान पर रहता था अब लगातार पिछड़ रहा है, जो सही नहीं है। इसके लिए सामूहिक प्रयास की जरूरत है ताकि जिला फिर से अव्वल आ सके। बैठक में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस की सराहना हुई। वहीं भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना पर चर्चा करते हुए एडीएम बारहठ ने कहा कि व्यापक प्रचार-प्रसार की बदौलत आमजन योजना से लाभान्वित हो रहा है और वह संस्थानों पर लाभ लेने के लिए लगातार पहुंच रहा है। लेकिन मार्गदर्शक व अन्य स्टाफ की भूमिका व उपलब्धता प्रभारी अधिकारी सुनिश्चित करें ताकि राज्य सरकार की इस अतिमहत्वाकांक्षी योजना का शत-प्रतिशत लाभार्थियों को लाभ मिल सके। पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना ने कहा कि जिला अस्पताल में रैफर केस ज्यादा आते हैं इसलिए गुरुवार से ही व्यवस्था की है हर रैफर केस की जानकारी हासिल करते हुए यह देखा जाएगा कि आखिर क्यों व किस आधार पर रैफर किया गया। एम्बुलेंस सेवा 108 व 104 में खामियों को लेकर चिकित्सकों ने कंपनी के प्रति गुस्सा जाहिर किया। उन्होंने कहा कि ड्राइवरों की व्यवस्था सुचारू नहीं है, जबकि आपातकाल सेवा 24 घण्टे उपलब्ध होनी चाहिए। इस पर एडीएम ने कंपनी प्रतिनिधि को हिदायत देते हुए एक सप्ताह में व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए। आशा भर्ती को लेकर एडीएम ने निर्देशित किया कि आगामी ग्राम सभाओं में वंचित पदों पर आशा सहयोगिनियों की भर्ती करें। डिकॉय पर चर्चा करते हुए सीएमएचओ डॉ. बंसल ने कहा कि पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीप सिंह व आईईसी प्रभारी विनोद बिश्रोई की बदौलत जिले में लगातार छह डिकॉय हो चुके हैं जो अपने आप में बड़ी उपलब्धि है। दोनों प्रभारियों की राज्यस्तर पर मिशन निदेशक नवीन जैन सहित अन्य अधिकारी सराहना कर चुके हैं। यही नहीं पंजाब में हुए डिकॉय के बाद वहां की टीम भी सक्रिय हुई है तो पंजाब में भी लगातार डिकॉय हो रहे हैं। डॉ. बंसल ने कहा कि आगामी दिनों में भी कार्रवाई जारी रहेगी। एडीएम नख्तदान बारहठ की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, पीएमओ डॉ. सुनीता सरदाना, एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला, डीपीएम विपुल गोयल, सीओआईईसी विनोद बिश्रोई, डीएनओ डॉ. कमल गुप्ता, डीएसी रायसिंह सहारण, पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीप सिंह आदि मौजूद रहे। 
पूरे स्टाफ का होगा तबादला
सीएमएचओ डॉ. बंसल ने बताया कि स्वास्थ्य मंत्री ने आगामी दिनों में चिकित्सा व्यवस्था पूरी तरह से सुधार कर आमजन को हर संभव राहत देने के आदेश दिए हैं। वहीं लापरवाही अधिकारियों व कार्मिकों पर कार्रवाई के लिए निर्देशित किया है। उन्होंने बताया कि राज्य सरकार ने हाल ही में हर जिले से पांच सबसे कमजोर पीएचसी की सूची मांगी है, जिस पर राज्य स्तरीय कार्रवाई होगी और संभवत: पूरे स्टाफ का तबादला किया जाएगा। डॉ. बंसल ने बताया कि जिले से पांच की बजाए दस पीएचसी की सूची राज्यस्तर पर भिजवाई गई है ताकि तुलनात्मक निर्णय के बाद लापरवाह अधिकारियों व कार्मिकों पर कार्रवाई की जा सके। उन्होंने बताया कि इसी तरह जिलास्तर पर भी समीक्षा की जाएगी। 

बुधवार, 24 मई 2017

अब घर बैठे लें आयुष चिकित्सकों से सलाह
-स्वास्थ्य विभाग का नवाचार, 104 या 108 करें डायल, नि:शुल्क सेवा एक जून से
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग राज्य में आयुष पद्धति को लेकर पहली बार वृहï्द स्तर पर नवाचार करने जा रहा है। इसके तहत अब कोई भी, कहीं से भी एक डायल के जरिए आयुष पद्धति से संबंधित सलाक नि:शुल्क प्राप्त कर सकेगा। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से मिशन निदेशक नवीन जैन के निर्देशन में यह सेवाएं एक जून से प्रारंभ हो रही है। इसके बाद विभाग के टोल फ्री नंबर 104 व 108 पर फोन कर सेवाएं ली जा सकेंगी। विभाग ने इसे लेकर प्रारंभिक तैयारियां पूर्ण कर ली हैं और सेवाएं देने वाले चिकित्सकों व अन्य स्टाफ को प्रशिक्षित किया गया है। 
एमडी नवीन जैन ने बताया कि एक जून से राज्य के वाशिंदे होम्योपैथी, यूनानी व आयुर्वेदिक चिकित्सा सलाह घर बैठे ले सकेंगे। उन्होंने बताया कि यूनानी चिकित्सका की सलाह सुबह आठ से 11 बजे, होम्योपैथिक की चिकित्सक सलाह सुबह 11 बजे से दोपहर दो बजे और आयुर्वेदिक चिकित्सा सलाह दोपहर दो बजे से सांय छह बजे तक ली जा सकेगी। इस दौरान प्रशिक्षित चिकित्सक आमजन को विभिन्न बीमारियों से संबंंधित चिकित्सक सलाह देंगे। यही नहीं उन्हें जरूरत पडऩे पर नजदीकी चिकित्सालय में जाने के लिए आवश्यकता पर चिकित्सालय के बारे में भी बताएंगे। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि जिले की आदर्श पीएचसी पर भी इन पद्धतियों के तहत आयुष चिकित्सा आमजन के लिए सुलभ करवाई गई है, जहां आमजन बेहतर सेवाएं ले रहे हैं। 
होम्योपैथी - 
होम्योपैथी, एक चिकित्सा पद्धति है। यह चिकित्सा के समरूपता के सिंद्धात पर आधारित है जिसके अनुसार औषधियाँ उन रोगों से मिलते जुलते रोग दूर कर सकती हैं, जिन्हें वे उत्पन्न कर सकती हैं। औषधि की रोगहर शक्ति जिससे उत्पन्न हो सकने वाले लक्षणों पर निर्भर है। जिन्हें रोग के लक्षणों के समान किंतु उनसे प्रबल होना चाहिए। अत: रोग अत्यंत निश्चयपूर्वक, जड़ से, अविलंब और सदा के लिए नष्ट और समाप्त उसी औषधि से हो सकता है जो मानव शरीर में, रोग के लक्षणों से प्रबल और लक्षणों से अत्यंत मिलते जुलते सभी लक्षण उत्पन्न कर सके। 
यूनानी - 
यूनानी चिकित्सा पद्धति को केवल यूनानी या हिकमत के नाम से भी पुकारा जाता है। इसे भारत में वैकल्पिक चिकित्सा माना गया है। कफ़, बलगम, पीला पित्त और काला पित्त प्रधानता के आधार पर रोग के लक्षणों का पता किया जाता है। मानव शरीर में आग, जल, पृथ्वी और वायु प्रधानता का मानव शरीर पर प्रभाव ही मूल रोग लक्षण और निदान देखा गया है। यूनानी चिकित्सा के अनुयायियों के अनुसार इन तत्वों के विभिन्न तरल पदार्थ में और उनके शेष राशि की उपस्थिति से स्वास्थ्य के असंतुलन का सुराग लगता है। इन पदार्थों का प्रत्येक आदमी में अनूठा मिश्रण उसके स्वभाव और रक्त की विशेषता तय करता है। 
आयुर्वेद - 
आयुर्वेदिक एक प्राचीन चिकित्सा पद्धति है। यह पद्धति अपने आपको केवल मानवीय शरीर के उपचार तक ही सीमित रखने की बजाय, शरीर मन, आत्मा व मनुष्य के परिवेश पर भी निगाह रखती है।इस पद्धति की एक और उल्लेखनीय विशिष्टिता है कि यह औषधीय गुण रखने वाली वनस्पतियों व जड़ी-बूटियों के जरिए बीमारियों का इलाज करती है। आयुर्वेद में, निदान व उपचार से पहले मनुष्य के व्यक्तित्व की श्रेणी पर ध्यान दिया जाता है। आयुर्वेद पद्धति जिले के आदर्श प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर सहज उपलब्ध है। इसके साथ ही टोल फ्री नंबर के जरिए इन पद्धतियों की सलाह सेवाएं अब एक जून से उपलब्ध होगी। 

मंगलवार, 23 मई 2017

आरोपी डॉक्टर की अपील खारिज

-क्षेत्राधिकार को लेकर पंजाब के डॉक्टर ने उच्च न्यायालय में दायर की थी अपील
श्रीगंगानगर। भू्रण लिंग जांच मामले में आरोपी बने एक चिकित्सक की अपील को माननीय राजस्थान उच्च न्यायालय ने खारिज कर दी है। पंजाब के इस चिकित्सक ने मुकदमा दर्ज करने संबंधी क्षेत्राधिकार एवं अन्य कुछ तथ्यों को लेकर राजस्थान उच्च न्यायालय में अपील दायर की थी। जिसमें अपील खारिज करते हुए न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि जहां से अपराध शुरु हुआ है, वहीं एफआईआर दर्ज करते हुए पुलिस को जांच का अधिकार है। वहीं अन्य बिंदुओं पर न्यायालय ने स्पष्ट किया है कि उन पर ट्रालय के दौरान तय होगा कि तथ्य सही है या नहीं। पीबीआई थाने के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक रघुवीर सिंह ने बताया कि निश्चित ही यह सराहनीय निर्णय है और इससे टीम का मनोबल बढ़ेगा एवं ऐसे लोगों पर कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। 
पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीप सिंह ने बताया कि सूचना मिली थी कि रायसिंहनगर में भू्रण लिंग जांच व कन्या भू्रण हत्या का गौरखधंधा चल रहा है। प्रारंभिक जानकारी जुटाने के बाद मिशन निदेशक नवीन जैन के निर्देशानुसार टीम गठित कर कार्रवाई शुरू की गई। इसी दौरान रायसिंहनगर स्थित न्यू महावीर नर्सिंग होम के चिकित्सक अशोक गुप्ता व उसकी नर्स संदीप कौर से विभाग की बोगस ग्राहक से वार्ता हुई। जिसमें 35 हजार रुपए लेन-देन तय हुआ और लडक़ी होने पर गर्भपात के अलग से 15 हजार लेन-देन की बात हुई। अगले दिन 17 मार्च 2017 को नर्स संदीप कौर निर्धारित राशि लेकर डॉक्टर गुप्ता के बताए अनुसार बोगस ग्राहक को लेकर पंजाब स्थित फिरोजपुर के केंट चौराहे पर पहुंची। जहां से दलाल अमनदीप सिंह डॉक्टर उमेश कुमार शर्मा के एसएसके सोनोग्राफी सेंटर पर बोगस ग्राहक गर्भवती महिला को लेकर गया। जहां सोनोग्राफी कर उसके भ्रूण लिंग की जानकारी दी गई, जिस पर टीम ने कार्रवाई कर तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया। इस मामले में सेंटर संचालक डॉ. उमेश कुमार शर्मा, चिकित्सक संदीप सिंह, दलाल अमनदीप सिंह, नर्स प्रवीण बॉबी सहित रायसिंहनगर के डॉक्टर अशोक गुप्ता व उसकी नर्स संदीप कौर को आरोपी बनाया गया। इसी मामले में सेंटर संचालक डॉक्टर उमेश शर्मा ने उच्च न्यायालय में अपील करते हुए कहा कि चूंकि घटना पंजाब में हुई है इसलिए एफआईआर वहीं दर्ज हो। न्यायालय ने सुनवाई करते हुए अपील खारिज की और प्रारंभिक जांच व क्षेत्राधिकार को सही माना।
हर ग्राम पंचायत पर लगेंगे कैंसर जागरूकता शिविर
-टीम करेगी ग्रामीणों की शुगर व बीपी जांच, चिन्हित हुए मरीज होंगे लाभान्वित
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने जिलास्तर पर नवाचार करते हुए ग्रामीण लोगों को कैंसर के प्रति जागरूक करेगा। ग्रामीणों को खान-पान, रहन-सहन व दैनिक व्यवहार के बारे में जानकारी दी जाएगी। इसके साथ ही विभागीय टीम ग्रामीणों की शुगर व उच्चरक्तचाप आदि की जांच करेंगी ताकि उन्हें बरती जा सकने वाली सावधानियों के बारे में बताया जा सके। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि शिविर हर माह की पांच व 20 तारीख को निर्धारित ग्राम पंचायतों में लगेंगे। शिविरों को लेकर विभाग ने राज्यस्तर के साथ ही जिला प्रशासन, जिला परिषद, विकास अधिकारियों को अवगत करवाया है। शुरुआत श्रीगंगानगर पंचायत समिति से की गई है। उन्होंने बताया कि 20 मई को साहिबसिंह वाला व मटीलीराठान में शिविर लगाया गया। पांच जून को मिर्जेवाला व 11 क्यू, 20 जून दौलतपुरा व संगतपुरा, पांच जुलाई को कोनी व मोहनपुरा, 20 जुलाई को रोहिड़ांवाली व मदेंरा, पांच अगस्त को कोठां व पक्की और 20 अगस्त को हिंदुमलकोट व ओडक़ी में शिविर लगाया जाएगा। 

शनिवार, 13 मई 2017

मासूमों की आंखों के लिए चार दिन लगाए शिविर
-आरबीएसके के तहत चलाया मिशन आंखें, २४४ बच्चों की हुई जांच, ९१ की आंखें कमजोर, पांच को कालामोतीया

श्रीगंगानगर। मासूम बच्चों के स्वास्थ्य के लिए मिशन रूप में चलाया जा रहा राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम नित-नए सकारात्मक नतीजे दे रहा है। इस बार मासूमों की आंखों के लिए मिशन आंखें चलाया गया जिसमें दो ब्लॉक के बच्चों के लिए चार दिन विशेष शिविर लगाए गए। जहां न केवल बच्चों की आंखें जांची गई बल्कि उन्हें चश्मे भी दिए जा रहे हैं और आवश्यकतानुसार ऑपरेशन भी करवाए जाएंगे। विगत दस मई से शुरू हुए शिविर शनिवार को संपन्न हुए। इन शिविरों में 244 बच्चों की जांच की गई, जिनमें 91 को चश्में लगेंगे, 24 को उच्च संस्थान में रैफर, 10 को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत स्थानीय हॉस्पीटलों में ऑपरेशन और शेष को नि:शुल्क दवा के जरिए उपचारित किया गया। 


आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि आरबीएसके के तहत जिलास्तर पर नवाचार करते हुए बच्चों के लिए मिशन आंखें चलाया जा रहा है। इसी कड़ी में लगातार सभी ब्लॉकों में शिविर लगाए जा रहे हैं और इसी कड़ी में श्रीगंगानगर व सादुलशहर ब्लॉक के बच्चों के लिए जिला मुख्यालय पर चार दिवसीय शिविर लगाए गए। डॉक्टर भारत भूषण ने बताया कि पहले दिन 101 बच्चों की नि:शुल्क जांच,  की गई। जिनमें से 37 बच्चों को चश्में दिए जाएंगे। वहीं चार बच्चों को रैफर व दो को बीएसबीवाई के तहत चिन्हित किया गया। दूसरे दिन श्रीगंगानगर ए टीम ने 37 बच्चों की जांच, 12 के चश्मे, चार को रैफर व तीन को बीएसबीवाई का लाभ दिलवाया। इसी तरह तीसरे दिन श्रीगंगानगर टीम बी ने 46 की जांच, 13 को चश्मे, 11 को रैफर व तीन को बीएसबीवाई के जरिए लाभान्वित करवाया। आखिरी दिन शनिवार को सादुलशहर ए टीम ने 61 बच्चों की जांच करवाई, जिनमें 29 बच्चों को चश्मे दिए जाएंगे और पांच को रैफर किया जाएगा, जबकि दो को भामााशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाभान्वित किया जाएगा। बच्चों की जांच बहल हॉस्पीटल में डॉक्टर पल्लवी सहारण ने की। इन चार दिनों में पांच बच्चे ग्लूकोमा (कालामोतीया) से पीडि़त मिले। सभी की आगामी जांच करवा उपचार करवाया जाएगा। 

जांच आंखों की, मिली गंभीर बीमारी
इसे अच्छी कहें या बूरी खबर कि शिविर के दौरान एक मासूम बालिका के गंभीर बीमारी मिली। बूरी इस लिहाज से की इस छोटी उम्र में वह गंभीर बीमारी से पीडि़त है और अच्छी ऐसे कि शिविर में समय से उसकी बीमारी पता चली, जिसका अब नि:शुल्क इलाज भी सरकार करवाएगी। यानी मासूम को राहत मिलेगी और वो सामान्य जीवन जी सकेगी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि शिविर में बबीता पुत्री कृष्णलाल को सादुलशहर टीम के डॉ. योगेंद्र ने चिन्हित किया। बालिका की आंखों में गंभीर भेेंगापन की समस्या थी। शनिवार को गहनता से जंाच के दौरान सामने आया कि बच्ची हाईड्रोसिफेलस बीमारी से भी पीडि़त है। डॉ. भारत भूषण के मुताबिक इस बीमारी से बच्चे के सिर में पानी भर जाता है, जिससे सिर सामान्य से बड़ा होने लगता है। यह ऑपरेशन के जरिए ही ठीक हो पाता है, लिहाजा बबीता को उच्च चिकित्सा संस्थान में रैफर कर नि:शुल्क इलाज करवाया जाएगा। बबीता भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत लाभार्थी की श्रेणी में आती है, ऐसे में उसका स्थानीय हॉस्पीटल में भी उपचार का प्रयास किया जाएगा। वहीं उसकी आंखों का इलाज भी आरबीएसके के तहत नि:शुल्क करवाया जाएगा। 
टीमें बनी प्रेरणास्रेात
बच्चों को विभिन्न बीमारियों से राहत दिलाने में आरबीएसके टीमें अन्य अधिकारियों व कार्मिकों के लिए प्रेरणास्रोत साबित हो रही हैं। अथक व लगन से जुटे ये लोग लगातार सराहनीय कार्य कर रहे हैं। डॉ. भारत भूषण के नेतृत्व में डॉ. मोनिका भूटिया, डॉ. सोनल कथूरिया, डॉ. एकता शर्मा, डॉ. योगेश कालड़ा, डॉ. योगेंद्र, फार्मासिस्ट केसर भाटी व ममता, एएनएम सोभना दूबे एवं आयुष कपांउडर अनिल शर्मा शामिल हैं। इसी तरह अन्य ब्लॉकों की टीमें भी लगातार बेहतरीन कार्य करने में जुटी हैं, जिनकी प्रशंसा राज्यस्तर पर भी हो रही है।

बुधवार, 10 मई 2017

मासूमों की धुंधली होती ‘नजर’ की सरकार ने ली सुध
-आरबीएसके के तहत चलाया मिशन आंखें, 101 बच्चों की हुई जांच, 37 की आंखें कमजोर
श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम जिले के बच्चों के लिए नजीर बनता दिख रहा है। यहां नित नए नवाचार कर बच्चों को हर संभव राहत दी जा रही है। यही वजह है कि एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन भी जिले की टीम की सराहना कर चुुके हैं। नवाचारों व संवेदनशीलता की इस कड़ी में मिशन आंखें चलाकार बुधवार को एक सौ एक बच्चों की नि:शुल्क जांच की गई। जिनमें से 37 बच्चों की आंखें कमजोर मिलीं, जिन्हें 16 मई को सीएचसी पर चश्में दिए जाएंगे। आंखों की हालत ज्यादा नाजुक पाए जाने पर चार बच्चों को उच्च चिकित्सा संस्थान के लिए रैफर किया गया है, जहां उनका नि:शुल्क ऑपरेशन व उपचार किया जाएगा। वहीं दो बच्चों का भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अधिकृत हॉस्पीटल में ऑपरेशन करवा राहत दिलवाई जाएगी। बुधवार को जिला मुख्यालय पर लगाए गए शिविर में सादुलशहर खण्ड के बच्चे सम्मिलित हुए।
जिला मुख्यालय पर बुधवार को लगे इस विशेष शिविर में आरबीएसके टीम के साथ ही बच्चों का उत्साह देखते ही बन रहा था। सभी बच्चों को एक साथ यहां टीम अपने खर्चे पर लेकर आई और सबकी नि:शुल्क जांच करवाई। इन बच्चों को विभागीय टीम ने भीषण गर्मी की परवाह न करते हुए विगत कई दिनों के अंतराल में स्कूलों में जाकर चिन्हित किया। आज जांच के दौरान सामने आया कि कुछ बच्चों को आंखों की सामान्य समस्याएं थीं, लिहाजा उन्हें नि:शुल्क दवा दी गई ताकि वे ठीक हो सकें। कुछ बच्चों को माइग्रेन, आंखों में इन्फेक्शन आदि की समस्या भी मिली है। इसी तरह 37 बच्चों की आंखें कमजोर मिलीं, जिन्हें पढऩे-लिखने और सामान्य कार्य में दिक्कत हो रही थी। सभी को सीएचसी सादुलशहर में एक साथ चश्में दिए जाएंगे। चार बच्चों को जयपुर और दो को गंगानगर में नि:शुल्क ऑपरेशन किया जाएगा। सभी बच्चों की जांच बहल हॉस्पीटल में डॉक्टर पल्लवी सहारण ने की। 
टीम का प्रयास काबिलेतारीफ 
मासूमों को राहत दिलाने में टीम लीडर डॉ. मोनिका भूटिया, डॉ. योगेश कालड़ा सहित फार्मासिस्ट ममता व आयुष कपांउडर अनिल शर्मा की बेहद सकारात्मक भूमिका रही। इन्होंने न केवल इन बच्चों को चिन्हित किया बल्कि विगत दस दिनों से इन्होंने व्यक्तिगत रूप से सभी बच्चों के परिजनों व स्कूल संचालकों से संपर्क साधा ताकि वे इन्हें उपचार के लिए भेज सकें। कुछेक परिजन ऐसे भी थे जिन्होंने बच्चों को भेजने के लिए तो हामी भर दी लेकिन लेकर आने में असमर्थता जता दी। आखिरकार डॉक्टर मोनिका ने अपने साथियों से मिलकर निजी वाहन के जरिए सभी बच्चों को गंगानगर लाने का निर्णय लिया और वे आज इन्हें लेकर भी आईं। यहां भी टीम ने बच्चों के रजिस्ट्रेशन से लेकर उनकी जांच आदि करवाने में अहम भूमिका अदा की। वहीं शिविर में नोडल प्रभारी डॉक्टर भारत भूषण सहित डॉ. सोनल कथूरिया, डॉ. शैलेंद्र नेहरा व डॉ. एकता शर्मा का सराहनीय योगदान रहा। आरसीएचओ डॉक्टर वीपी असीजा व सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने यहां पहुंचकर व्यवस्थाएं देखीं। वहीं कार्यालय के हेमंत कुमार, पंकज वर्मा व राकेश सचेदवा का भी खास सहयोग रहा। 




मंगलवार, 9 मई 2017

पीएमएसएमए पर गर्भवतियों को मिल रही स्वास्थ्य सुरक्षा
-प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस पर भीषण गर्मी में भी सैंकडों गर्भवती महिलाएं पहुंची जांच करवाने
 श्रीगंगानगर। पूरे देश के साथ ही हमारे जिले में हर माह की नौ तारीख को मनाए जा रहे प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस को लेकर महिलाओं में खासा उत्साह देखने को मिल रहा है। हर माह निर्धारित दिवस पर स्वास्थ्य केंद्रों पर जहां आशाएं व एएनएम महिलाओं को आमंत्रित कर रही हैं वहीं स्वयं जागरूक होकर भी महिलाएं जांच करवाने पहुंच रही हैं। मंगलवार को जिले में भीषण गर्मी के बावजूद स्वास्थ्य केंद्रों पर बड़ी संख्या में महिलाएं जांच करवाने पहुंची, जहां स्वास्थ्य विभाग के चिकित्सकों सहित निजी चिकित्सकों ने गर्भवतियों की जांच कर उन्हें स्वास्थ्य सुविधाएं मुहैया करवाई। वहीं महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाओं, गर्भकाल के दौरान बेहतर खान-पान आदि के बारे में जागरूक किया। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि हर माह की नौ तारीख को जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी, यूपीएचसी व जिला अस्पताल में प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जा रहा है। इसी कड़ी में मंगलवार को आयोजित इस दिवस पर जिले की गर्भवती महिलाओं को नि:शुल्क व गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं करवाई गईं। इसके साथ ही उनकी सेहत के लिए उन्हें जागरूक किया गया और उन्हें नियमित रूप से आयरन की गोलियां खाने, हरी सब्जी, गुड़ व अन्य पोष्टिक आहार खाने के लिए प्रेरित किया गया ताकि उनका बच्चा पूर्णत: स्वस्थ जन्म ले। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य को सुदृढ् करना और मातृ एवं शिशु मुत्यृ में कमी लाना है। इस दौरान यह सुनिश्चित किया जाता है कि द्वितीय व तृतीय तिमाही की गर्भवती महिला को कम से कम एक बार चिकित्सक द्वारा जांच हो। इस दिन प्रसव पूर्व जांच के लिए एक कक्ष निर्धारित किया जाता है, जहां चिकित्सक जांच करते हैं। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि जिले में 15 निजी चिकित्सक भी प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस में अपनी सेवाएं दे रहे, वहीं अन्य सीएचसी व पीएचसी पर सरकारी चिकित्सक गर्भवती महिलाओं को स्वास्थ्य सेवाएं दे रहे हैं। इस दौरान जिलास्तरीय अधिकारी भी निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखते हैं।

रविवार, 7 मई 2017

राजश्री योजना का लाभ अब भामाशाह कार्ड के जरिए
-15 मई से निर्णय होगा लागू, बेटियों के जन्म पर मिलता है योजना का लाभ
श्रीगंगानगर। बेटी जन्म को प्रोत्साहन देने वाली मुख्यमंत्री राजश्री योजना का लाभ अब केवल भामाशाह कार्ड के जरिए ही मिलेगा। राज्य सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी इस योजना के तहत बेटी के जन्म से लेकर उसके 12वीं उत्तीर्ण होने तक विभिन्न किश्तों में पच्चास हजार रुपए दिए जा रहे हैं। विगत एक जून 2016 से प्रारंभ हुई योजना का प्रारंभिक भुगतान वर्तमान में ऑनलाइन ओजस सॉफ्टवेयर के जरिए किया जा रहा है। अब योजना का लाभ लेने के लिए भामाशाह कार्ड देना होगा और यह निर्णय 15 मई से लागू होगा। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि बालिकाओं के प्रति समाज में सकारात्मक सोच विकसित करने एवं उनके स्वास्थ्य तथा शैक्षणिक स्तर में सुधार के लिए एक जून 2016 से प्रदेश में मुख्यमंत्री राजश्री योजना प्रारंभ की गई। इस योजना के तहत एक जून या उसके बाद जन्म लेने वाली बालिकाएं लाभ की पात्र हैं और योजना का लाभ केवल राजस्थान मूल की प्रसूताओं को दिया जा रहा है। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि राजकीय अथवा अधिस्वीकृत चिकित्सा संस्थान में जन्म लेने वाली बालिकाओं को जन्म पर 2500 रुपए और उसकी प्रथम वर्षगांठ पर पूर्ण टीकाकरण होने के बाद 2500 रुपए दिए जाते हैं। इसके बाद राजकीय विद्यालय में प्रथम कक्षा में प्रवेश लेने पर चार हजार रुपए, राजकीय विद्यालय में कक्षा छह में प्रवेश लेने पर पांच हजार रुपए और 10 में प्रवेश लेने पर 11 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। इसके बाद 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करने वाली बालिकाओं को 25 हजार रुपए दिए जा रहे हैं। अब योजना का लाभ लेने के लिए हितग्राही का भामाशाह कार्ड होना अनिवार्य है। गर्भवती महिला प्रसव पूर्व जांच के दौरान भामाशाह कार्ड व भामाशाह कार्ड से जुड़ा बैंक खाते का विवरण निकटतम आंगनबाड़ी केंद्र पर एएनएम, आशा या आंगनबाड़ी कार्यकर्ता अथवा राजकीय चिकित्सा संस्थान में जमा करवाएं। जिन लाभार्थी महिलाओं ने भामाशाह नामांकन नहीं करवाया है वे अपने निकटतम ई-मित्र केंद्र से भामाशाह कार्ड बनवाकर विवरण चिकित्सालय में उपलब्ध करवाएं। 

कल प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व दिवस
-हर माह की नौ तारीख को मनाया जा रहा है दिवस
श्रीगंगानगर। गर्भवती महिलाओं को आवश्यक सुविधाएं व चिकित्सकीय सुविधा सुचारु रूप से दिए जाने के लिए प्रारंभ किए गए प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के तहत नौ मई को जिले की सभी सीएचसी, पीएचसी सहित जिला अस्पताल में सुरक्षित मातृत्व दिवस मनाया जाएगा। हर माह की नौ तारीख को मनाए जाने वाले इस दिवस पर गर्भवती महिलाओं की समस्त जांच की जाती है और उन्हें परामर्श भी दिया जाता है। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि जिले में निजी चिकित्सकों के अलावा राजकीय चिकित्सक भी अपनी बेहतर सेवाओं के जरिए गर्भवती महिलाओं को लाभान्वित कर रहे हैं। विभाग की ओर से न केवल उनकी नि:शुल्क जांच की जाती है बल्कि हाईरिस्क प्रेग्रेंसी होने पर उन्हें उचित देखभाल के साथ नजदीकि उच्च चिकित्सा संस्थानों में रैफर भी किया जाता है।  

आज से मिशन इंद्रधनुष का दूसरा चरण
-बच्चों को नौ बीमारियों से बचाने की कवायद
श्रीगंगानगर। मिशन इंद्रधनुष का दूसरा चरण सोमवार से शुरू होगा। बच्चों को नौ बीमारियों से बचाने के लिए शुरू किया गया यह अभियान राज्यस्तर से सादुलशहर ब्लॉक में चलाने का निर्णय लिया गया है लेकिन जिलास्तर से इसे पूरे जिले में चलाया जा रहा है। हर माह की सात तारीख से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम इस बार रविवार के चलते आठ तारीख से शुरू होकर आगामी सात दिन तक चलेगा। आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ ही सभी बीडीओ एवं आईसीडीएस विभाग के अधिकारियों को मिशन के चलते पाबंद किया कि वे बेहतर समन्वय बनाते हुए कार्यक्रम के प्रति गंभीरता दिखाएं। वहीं वंचित बच्चों के परिजनों को टीकाकरण सत्र की सूचना देने के लिए आशा सहयोगिनियों को निर्देशित किया गया है। मिशन इंद्रधनुष के तहत नियमित टीकाकरण के अलावा वहां सत्र आयोजित किए जाएंगे जहां अक्सर सत्र नहीं होते और बच्चे टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं। 

शनिवार, 6 मई 2017

सोमवार से मिशन इंद्रधनुष का दूसरा चरण 
-बच्चों को बचाएगा नौ बीमारियों से, सादुलशहर के अलावा पूरे जिले में चलेगा मिशन 
श्रीगंगानगर। विगत सात अप्रेल से शुरू हुए मिशन इंद्रधनुष का दूसरा चरण सोमवार से शुरू होगा। राज्यस्तर से यह मिशन केवल सादुलशहर ब्लॉक में चलाने का निर्णय लिया गया है लेकिन जिला कलेक्टर ज्ञानाराम की ओर से किए गए नवाचार के बाद इसे पूरे जिले में चलाया जा रहा है। हर माह की सात तारीख से शुरू होने वाला यह कार्यक्रम इस बार रविवार के चलते सोमवार से यानी आठ तारीख से शुरू होकर आगामी सात दिन तक चलेगा। मिशन इंद्रधनुष को लेकर जिला कलेक्टर ज्ञानाराम ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि संबंधित बीसीएमओ, बीपीएम एवं अन्य जिलास्तरीय अधिकारी पूरी गंभीरता के साथ कार्य करें और हर वंचित बच्चे का टीकाकरण करवाएं। टीकाकरण से वंचित रहने की कोई शिकायत मिलने पर संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा ने बताया कि स्वास्थ्य अधिकारियों के साथ ही सभी बीडीओ एवं आईसीडीएस विभाग के अधिकारियों को मिशन के चलते पाबंद किया कि वे बेहतर समन्वय बनाते हुए कार्यक्रम के प्रति गंभीरता दिखाएं। वहीं वंचित बच्चों के परिजनों को टीकाकरण सत्र की सूचना देने के लिए आशा सहयोगिनियों को निर्देशित किया गया है। मिशन इंद्रधनुष के तहत नियमित टीकाकरण के अलावा वहां सत्र आयोजित किए जाएंगे जहां अक्सर सत्र नहीं होते और बच्चे टीकाकरण से वंचित रह जाते हैं। ऐसे बच्चों को आशा डायरी के साथ ही आशा सर्वे के  जरिए चिन्हित किया जा रहा है। सादुलशहर ब्लॉक में कम टीकाकरण के चलते वहां विशेष नजर रखी जा रही है और जिलास्तरीय अधिकारी मोनिटरिंग कर रहे हैं। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि नौ बीमारियों से संबंधित ये टीके टीबी, गल घोण्टू, काली खांसी, टिटनेस, निमोनिया, डायरिया, पोलियो, हेपेटाइटिस-बी व खसरा जैसी गंभीर बीमारियों से बचाते हैं। उन्होंने बताया कि सादुलशहर के वार्ड नंबर सात, गांव 19 केएसडी, करड़वाला, अमरगढ़, सात केआरडब्ल्यू, केसीसी ईंट उद्योग, 26 पीटीपी, खैरूवाला, नारायण ईंट उद्योग, बुधसिंहवाला, आरबीआई ईंट उद्योग, एसकेआर ईंट उद्योग, 15 केआरडब्ल्यू, चक सोहनेवाला, बराड़ ईंट उद्योग, पेड़ीवाल ईंट उद्योग, चक दुलरासर, सात बीएनडब्ल्यू, चुघ ईंट उद्योग, केडी ईंट उद्योग, केके ईंट भटï्ठा, एक एलएनपी, आठ एसडीपी, 12 बीएनडब्ल्यू, श्यामसिंह वाला, यादव ईंट उद्योग, तीन एसपीएम, 12 एसडीपी, गुरदयाल ईंट उद्योग, विश्वकर्मा ईंट उद्योग, नौ एलएलजी, मलेठिया ईंट उद्योग, रोटावाली, 19 एलएनपी, 28 एलएनपी प्रथम एवं 10 टीकेडब्ल्यू को मिशन इंद्रधनुष के लिए हाई रिस्क मानते हुए चिन्हित किया गया है। 

शुक्रवार, 5 मई 2017

मासूमों की आंखों के लिए ‘मिशन आंखें’
-आरबीएसके के तहत लगेगा तीन दिवसीय विशेष शिविर
श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत जिले में नवाचार करते हुए मासूम बच्चों के लिए  ‘मिशन आंखें’ कार्यक्रम चलाया गया है। जिसमें आरबीएसके के तहत आंखों की समस्या से संबंधित बच्चों को चिन्हित कर उन्हें चश्मा वितरण के अलावा उनका ऑपरेशन करवाया जा रहा है। इसी कड़ी में आरबीएसके बच्चों के लिए दस मई से तीन दिवसीय नि:शुल्क नेत्र रोग शिविर जिला मुख्यालय पर लगाया जा रहा है, जिसमें बच्चों की आंखों की गहनता से जांच की जाएगी, परामर्श दिया जाएगा और आवश्यकता होने पर नि:शुल्क ऑपरेशन भी करवाया जाएगा। 
कार्यक्रम के अतिरिक्त नोडल अधिकारी डॉ. भारत भूषण ने बताया कि आरबीएसके की नियमित जांच के दौरान बड़ी संख्या में बच्चे आंखों की बीमारी से संबंधित मिल रहे हैं। जिसके चलते ज्यादातर को ब्लॉकस्तर पर ही जांच कर उपचार के अलावा चश्मे दिए जा रहे हैं। वहीं दस मई से 12 मई तक लगने वाले शिविर में सादुलशहर व श्रीगंगानगर खण्ड के चिन्हित बच्चों को बुलाया गया है। जिला मुख्यालय पर लगने वाले इस शिविर का समय सुबह नौ बजे से दोपहर दो बजे का रखा गया है, जिसमें नेत्र रोग विशेषज्ञ चिकित्सक डॉ. पल्लवी सहारण अपनी सेवाएं देंगी। शिविर व्यवस्था के लिए डॉक्टर सोनल व डॉक्टर शैलेंद्र की टीम को लगाया गया है। आरबीएसके के तहत चिन्हित बच्चों को शिविर के दौरान आरबीएसके कार्ड, परिवार का राशन कार्ड व भामाशाह कार्ड अवश्य साथ लाना होगा। भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना में आने वाले बच्चों का स्थानीय अधिकृत हॉस्पीटलों में ऑपरेशन व उपचार करवाया जाएगा, जबकि इस योजना में शामिल नहीं होने वाले बच्चों को जयपुर रैफर कर आरबीएसके में नि:शुल्क ऑपरेशन करवाया जाएगा। 
कार्यक्रम से ली प्रेरणा, बन गए दानदाता
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि मासूमों के लिए दानदाता भी आगे आ रहे हैं और वे बच्चों के लिए नि:शुल्क चश्में उपलब्ध करवा रहे हैं। पदमपुर खण्ड में स्वयं बीसीएमओ डॉ. मुकेश मित्तल ने अपनी माँ की प्रेरणा से बच्चों को चश्मे उपलब्ध करवाए। इसी तरह गांव 13 क्यू निवासी विपिन सहारण ने श्रीकरणपुर खण्ड में बच्चों को चश्मे उपलब्ध करवाए। वे श्रीगंगानगर में लगने वाले तीन दिवसीय शिविर में भी बच्चों के लिए चश्मे वितरण करवाएंगे। दरअसल, विपिन सहारण के खेत में मजदूरी करने वाले परिवार के एक बच्चे को हृदï्य रोग था, जिसे विभाग ने आरबीएसके के तहत चिन्हित कर उसका नि:शुल्क उपचार करवाया। ऑपरेशन के बाद बच्चा अब पूरी तरह स्वस्थ है। विभाग के इस कार्यक्रम व टीम के बेहतर कार्य से विपिन इतने प्रेरित हुए कि उन्होंने ऐसे बच्चों की हर संभव सहायता के लिए हामी भर दी। इसके बाद उन्होंने चश्मे वितरण का निर्णय लेते हुए अब हर शिविर में सहयोग दे रहे हैं। 

बुधवार, 3 मई 2017

बीएसवीवाई से लाभान्वित हो रहे श्रमिक परिवार
-श्रमिक कार्ड बनवाएं, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ उठाएं
श्रीगंगानगर। राजस्थान की महत्वाकांक्षी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना आमजन के लिए मुफीद साबित हुई है, वहीं अब श्रमिक वर्ग भी इस योजना से लाभान्वित हो रहे हैं। जिले के 13 राजकीय और 34 निजी हॉस्पीटलों में योजना के तहत पंजीकृत श्रमिकों को लाभ दिया जा रहा है। उल्लेखनीय है कि पूर्व में केवल खाद्य सुरक्षा अधिनियम एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना के लाभार्थी ही इस योजना का लाभ ले सकते थे लेकिन इसके बाद राज्य सरकार ने श्रमिकों को भी योजना के साथ जोड़ दिया। इसके लिए श्रमिक का श्रम विभाग में पंजीकृत होना जरूरी है। इस संबंध में राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी के सीईओ नवीन जैन ने निर्माण श्रमिकों से अपील कि है कि वे न केवल इस योजना का लाभ उठाएं, बल्कि जो श्रमिक पंजीकृत नहीं है वे पंजीकरण करवाएं। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग की अधिसूचना के अनुसार श्रम विभाग में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम 2013 के तहत खाद्य सुरक्षा प्रदान करने के लिए पात्र परिवार माना गया है। इसके चलते बीएसबीवाई का फायदा भी श्रमिकों को दिया जा रहा है। हालांकि वर्तमान में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना का लाभ पात्र परिवार को केवल भामाशाह कार्ड के जरिए ही दिया जा रहा है। लेकिन श्रमिकों की भामाशाह कार्ड में पूर्ण सिडींग नहीं होने एवं सॉफ्टवेयर अपडेट नहीं होने के चलते इससे छूट प्रदान की गई है। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि राज्य स्तरीय निर्देशानुसार योजना से संबंधित सभी निजी व सरकारी अस्पतालों में पंजीकृत निर्माण श्रमिकों को इलाज मुहैया करवाया जाएगा। केवल वही इलाज मिलेगा जो संबंधित अस्पताल में पैकेज में लिया गया है। इलाज पर किसी तरह की कोई अतिरिक्त राशि संबंधित हॉस्पीटल द्वारा नहीं ली जाएगी। मरीज के पास श्रमिक कार्ड, राशन कार्ड या भामाशाह कार्ड, फोटो पहचान पत्र होना जरूरी है।
इन हॉस्पीटलों में मिल रहा योजना का लाभ
सीओआईईसी बिश्रोई ने बताया कि योजना के तहत जिले के 13 सरकारी और 34 निजी अस्पतालों में निशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। सरकारी अस्पतालों में जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केसरीसिंहपुर, श्रीकरणपुर, रायसिंहनगर, घड़साना, सूरतगढ़, अनूपगढ़, चूनावढ़, सादुलशहर, राजियासर, गजसिंहपुर, पदमपुर व श्रीविजयनगर में नि:शुल्क इलाज मुहैया करवाया जा रहा है। इसी तरह जिला मुख्यालय पर स्थित आदर्श नर्सिंग होम, बहल हॉस्पीटल, आंचल हॉस्पीटल, जुबिन मल्टीस्पेशलिस्ट हॉस्पीटल, मेक्सकेयर हॉस्पीटल, नयन मंदिर आई हॉस्पीटल, पेड़ीवाल नर्सिंग होम, टांटिया जनरल हॉस्पीटल, गौड़ हॉस्पीटल, आदित्य नर्सिंग होम, अर्पण हॉस्पीटल, नागपाल किडनी केयर, लालगढिय़ा हॉस्पीटल, तपोवन संस्थान, श्री जगदम्बा चेरीटेबल आई हॉस्प्ीटल, श्री बाला जी हॉस्पीटल, रिणवां ओर्थोपेडिक हॉस्पीटल, सिहाग हॉस्पीटल, महाराज अग्रसेन हॉस्पीटल, दिवोज हॉस्पीटल, सत्यम हॉस्पीटल, श्री ओम सांई हॉस्पीटल, राजोतिया हॉस्पीटल, थरेजा हॉस्पीटल, सुरेंद्रा जनरल हॉस्पीटल, एंजेल हॉस्पीटल, जिंदल आई हॉस्पीटल, डावर आई हॉस्पीटल, बाला जी हॉस्पीटल एण्ड डेंटल केयर एवं बंसल सुपरस्पेशलिटी हॉस्पीटल योजना से जुड़े हैं। श्रीकरणपुर का बेनीवाल हॉस्पीटल, घड़साना का शांति नर्सिंग होम, बुड्ढ़ा जोहड़ स्थित शहीद बीएसएसएमएस मेमोरियल हॉस्पीटल व रायसिंहनगर का अग्रवाल हॉस्पीटल भी योजना के तहत बेहतर कार्य कर रहा है।

मंगलवार, 2 मई 2017

नसबंदी शिविर बढ़ाए, मई में लगेंगे 54 शिविर
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने परिवार कल्याण शिविरों में इजाफा करते हुए हर माह लगने वाले शिविरों की संख्या 54 कर दी है। कुछ संस्थाओं को हर सप्ताह शिविर लगाने का निर्णय भी लिया गया है। वहीं शिविरों की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए संबंधित बीसीएमओ को पाबंद किया गया है। एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता ने बताया कि दो मई से 30 मई तक लगातार 54 नसबंदी शिविर लगाए जाएंगे। शिविरों का प्रचार-प्रसार के लिए संबंधित चिकित्सा प्रभारी, आशा व अन्य कार्मिकों को पाबंद किया गया है। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि दो मई को घमूड़वाली व शिवपुर में शिविर लगे। चार मई को जिला अस्पताल में शिविर लगाया जाएगा। वहीं पांच को श्रीविजयनगर, छह को पन्नीवाली व डाबला, सात को कोनी व फकीरवाली, आठ को हिंदुमलकोट व रायसिंहनगर, नौ को सरदारगढ़ व अनूपगढ़, दस को जिला अस्पताल, 11 को केसरीसिंहपुर व सोमासर, 12 को सादुलशहर व ख्यालीवाला, 13 को घड़साना व मांझूवास, 14 को जैतसर, रामसिंहपुर व मिर्जेवाला, 15 को सूरतगढ़, रायसिंहनगर व रत्तेवाला, 16 को बीरमाना, लालगढ़ व रावला, 17 को राजियासर, 18 को जिला अस्पताल व श्रीकरणपुर, 19 को कमरानिया व गुलाबेवाला, 20 को श्रीविजयनगर व ढाबां, 21 को नाहरांवाली व चूनावढ़, 22 को सादुलशहर, हिंदुमलकोट व खरलां, 23 को अनूपगढ़, चकमहाराजका व रायसिंहनगर, 24 को समेजा कोठी, 25 को पदमपुर व ठुकराना, 26 को जिला अस्पताल व डूंगरसिंहपुरा, 27 को गजसिंहपुर व सूरतगढ़, 28 को घड़साना, 29 को रावला और 30 मई को 365 आरडी व रायसिंहनगर में परिवार कल्याण शिविरों का आयोजन किया जाएगा। 

आज लगेगा कैंसर शिविर
-हर माह के पहले बुधवार को लगाया जा रहा है शिविर
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से हर माह के पहले बुधवार को जिला अस्पताल में कैंसर जांच व जागरूकता शिविर लगाया जा रहा है। इस कड़ी में तीन मई को भी जिला अस्पताल में कैंसर शिविर लगाया जाएगा, जिसमें कैंसर की प्राथमिक स्तर की जांच की जाएगी। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि शिविर में प्राथमिक जांच के अलावा महिलाओं के लिए नि:शुल्क मेमोग्राफी सुविधा उपलब्ध रहेगी। शिविर सुबह नौ बजे से शाम तीन बजे तक चलेगा, जिसमें आमजन जांच करवा सकते हैं।


सोमवार, 1 मई 2017

कठपुतली कर रही ग्रामीणों को जागरूक
-स्वास्थ्य विभाग पहुंच रहा गांवों में, स्वास्थ्य योजनाओं की दी जा रही जानकारी

श्रीगंगानगर। इन दिनों जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य विभाग की ‘कठपुतली’ आमजन को जागरूक करने में जुटी है। न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागृति बल्कि राजस्थान की सांस्कृतिक धरोहर कठपुतली का भी प्रचार-प्रसार हो रहा है। जागरूकता कार्यक्रम जिले के छह खण्डों में चल रहे हैं, जबकि सादुलशहर व रायसिंहनगर में आगामी दिनों में जागरूकता कार्यक्रम चलेेंगे। विगत 18 अप्रेल से शुरू हुए जागरूकता कार्यक्रम तीन मई तक लगातार चलेंगे। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि विभागीय योजनाओं व स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति आमजन को जागरूक करने के लिए ये कार्यक्रम करवाए जा रहे हैं। 

सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि जिले के श्रीकरणपुर, श्रीगंगानगर, अनूपगढ़, घड़साना, सूरतगढ़ व पदमपुर में विभागीय योजनाओं का कठपुतली, नुक्कड़ नाटक व अन्य सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से प्रचार-प्रसार करवाया जा रहा है। इस दौरान मुख्यत: भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना, राजश्री योजना, मुखबिर योजना, परिवार कल्याण कार्यक्रम, जीवन वाहिनी योजना, प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान, बालिका सम्बल योजना, रिचार्ज योजना व टीकाकरण के बारे में जानकारी दी जा रही है। ग्रामीणों को भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के तहत अधिकृत अस्पतालों की सूची के साथ ही अन्य योजनाओं की विस्तृत जानकारी के साथ पम्पलेंटï्स दिए जा रहे हैं। ग्रामीणों का उत्साह भी बरकरार हैं एवं वे बढ़-चढ़ कर इन कार्यक्रमों को देखने आ रहे हैं। सीएमएचओ डॉ. बंसल ने बताया कि आगामी दिनों में भी प्रयास कर और अधिक कार्यक्रम आयोजित करवाए जाएंगे। वहीं कोशिश रहेगी कि जिला मुख्यालय पर भी विभिन्न वार्डों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित करवाए जाएं। 
फिजियोथेरेपी शिविरों में सैंकड़ो मरीज हुए लाभान्वित 
-जिला अस्पताल सहित 14 सीएचसी में एक सप्ताह चले विशेष शिविर, सेवाएं अब भी जारी
श्रीगंगानगर। स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए गए फिजियोथेरेपी शिविरों में सैंकडो मरीज लाभान्वित हुए। एक सप्ताह चल इन शिविरों का शुभारंभ 25 अप्रेल को और समापन सोमवार को हुआ। जिला अस्पताल सहित ये शिविर जिले के 14 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी चलें। इस दौरान विभागीय फिजियोथेरेपिस्ट के अलावा निजी फिजियोथेरेपिस्टों ने भी अपनी नि:शुल्क सेवाएं दी। आमजन जिला अस्पताल सहित चयनित दस सीएचसी पर नियमित रूप से आउटडोर समय में फिजियोथेरेपी परामर्श व उपचार ले सकते हैं। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि चयनित सीएचसी सादुलशहर, केसरीसिंहपुर, श्रीकरणपुर, पदमपुर, गजसिंहपुर, रायसिंहनगर, अनूपगढ़, घड़साना, श्रीविजयनगर व सूरतगढ़ में ये शिविर लगाए गए। वहीं शिवपुर, चूनावढ़, रिड़लसर व समेजा कोठी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर भी शिविर लगे, जहां निजी फिजियोथेरेपिस्टों ने नि:शुल्क सेवाएं दी। उल्लेखनीय है कि ये शिविर पहले 25 से 27 अप्रेल तक ही लगने थे, लेकिन शिविरों की सफलता व आमजन की मांग को देखते हुए चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री कालीचरण सर्राफ ने इन्हें एक सप्ताह तक जारी रखने के निर्देश दिए। शिविरों में असंक्रामक बीमारियों जैसे कि डायबिटीज, हृदय रोग, पक्षाघात एवं तनाव से होने वाली जटिलताओं में कमी लाने के लिए परामर्श, गर्दन, कमर, जोड़ों, कोहनी, घुटनों, ऐडी, मांसपेशियों व पुरानी चोट का दर्द, रीढ़ की हड्डी के छल्लों का खिसकने का उपचार, फे्रक्टचर के बाद जोड़ों की जकडऩ, गठिया बाव, अस्थि रोगों के ऑपरेशन के बाद के विकार, कंधे का जाम होना, मुंह का टेढ़ापन, रिंगण बाव, सुन्नपन्न, बच्चों का समय पर विकास न होना, वृद्धावस्था की बीमारियां, पार्किसोनिज्म एवं चिकनगुनिया के बाद जोड़ों में दर्द आदि से संबंधित जागरुकता, परामर्श व चिकित्सा सुविधाएं दी गई।