गुरुवार, 27 अक्टूबर 2016

आज पंचायत शिविरों में मिलेगी स्वास्थ्य सुविधा
-भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की देंगे जानकारी, करेंगे जागरूक
श्रीगंगानगर। जिले की विभिन्न पंचायतों में शुक्रवार को जन कल्याण पंचायत शिविर लगाए जाएंगे, जहां चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अहम भूमिका रहेगी। विभाग की आरे से न केवल चिकित्सा जांच व उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी बल्कि आमजन को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार सामग्री भी दी जाएगी। वहीं जिलाधिकारी इन शिविरों का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। मुख्यत: इन शिविरों में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की जानकारी आमजन को प्रदान की जाएगी। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि शुक्रवार को श्रीगंगानगर खण्ड के गांव ततारसर एवं पांच एलएल, श्रीकरणपुर खण्ड के दो एफएफ व मोटासर, पदमपुर के 23 बीबी व जलौकी, रायसिंहनगर खण्ड के खाटां व 43 पीएस, अनूपगढ़ के 72जीबी व दो पीजीएम, घड़साना के आठ एमडी व दो जीडीबी, श्रीविजयनगर खण्ड के 29 जीबीए व 26 जीबी, सूरतगढ़ के सरदारगढ़ व गोविंदसर और सादुलशहर खण्ड के मनफूलसिंह एवं लाधूवाला में शिविरों का आयोजन होगा। इसी तरह आगामी शुक्रवार, चार नवंबर को जन कल्याण पंचायत शिविरों का आयोजन किया जाएगा।

शुक्रवार, 21 अक्टूबर 2016

‘‘जागरूक हो जाएं, आयोडीन युक्त आहार खाएं’’
-विश्व आयोडीन सप्ताह के दौरान स्वास्थ्य केंद्रों पर एक सप्ताह के दौरान विभाग के जागरूक
श्रीगंगानगर। लोग अक्सर आयोडीन युक्त आहार अपने खाने में शामिल नहीं करते हैं। यही कारण है कि सरकार ने आयोडीन युक्त आहार को लेकर आमजन को जागरूक करने का निर्णय लिया, जो लगातार चल रहा है। आयोडीन थायरॉयड ग्रंथि को अच्छे से काम करने में मदद करता है, जिससे इसमें हार्मोन ठीक से बनने लगते हैं। यह हार्मोन दिमाग को अच्छे से काम करने, वजन नियंत्रण करने में और चयापचय को मजबूत करने में मदद करता है। अगर आयरन सही मात्रा में ना खाया जाए तो कुछ लोगों को थायराइड हार्मोन (हाइपोथायरायडिज्म) की कमी का सामना करना पड़ सकता है। दिमागी विकास के लिए आयोडीन बहुत जरुरी है। जो लोग आयोडीन नहीं खाते हैं उनके सोचने समझने की छमता में कमी और मानसिक एकाग्रता की कमी आ जाती है। यह बात विश्व आयोडीन दिवस के मौके पर सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने कही। उन्होंने बताया कि एक सप्ताह के दौरान जिले के विभिन्न स्वास्थ्य केंद्रों यथा सीएचसी व पीएचसी स्तर पर आमजन को आयोडीन नमक के प्रति जागरूक किया जाए। 
उन्होंने कहा कि आयोडीन प्रजनन के लिए और स्तनपान के दौरान भी महत्वपूर्ण है। इसीलिए आज हम आपको कुछ आयोडीन युक्त खाद्य पदार्थों को आहार में शामिल करना बेहद जरुरी है। खासकर आयोडीन शिशु के लिए बेहद जरूरी है, क्योंकि आयोडीन बढ़ते शिशु के दिमाग के विकास और थायराइड प्रक्रिया के लिए अनिवार्य है। यह एक माइक्रोपोशक तत्व है जिसकी हमारे शरीर को विकास एवं जीने के लिए बहुत थोड़ी मात्रा में आवश्यकता होती है। थायराइड ग्रंथि गर्दन के सामने है और यह उन हार्मोन का उत्पादन करता है जो शरीर की चयापचय का नियंत्रण करते हैं। आयोडीन हमारे शरीर के तापमान को भी विनियमित करता है, विकास में सहायक है और भ्रूण के पोशक तत्वों का एक अनिवार्य घटक है। दरअसल, एक व्यक्ति को जीवनभर में एक छोटे चम्मच से भी कम आयोडीन की आवश्यकता पड़ती है। चूंकि आयोडीन शरीर में जमा नहीं रह सकता इसे दैनिक आधार पर लेना पड़ता है। रिसर्च से पता चला है कि महिलाओं को गर्भावस्था एवं स्तनपान के दौरान अपने आहार में पर्याप्त आयोडीन नहीं मिलता। 
आयोडीन की कमी से हो सकते हैं कई कुप्रभाव
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई बताते हैं कि आयोडीन की कमी से आप मानसिक तथा शारीरिक तौर पर प्रभावित हो सकते हैं। इसके आम लक्षण हैं त्वचा का सूखापन, नाखूनों और बालों का टूटना, कब्ज़ और भारी और कर्कश आवाज। इनमें से कुछ लक्षण गर्भावस्था में आम पाए जाते हैं इसलिए इस बारे में चिकित्सीय सलाह लेना सुरक्षित है। आयोडीन की कमी से वजऩ बढऩा, रक्त में कोलेस्ट्रोल का स्तर बढऩा और ठंड बर्दाश्त न होना आदि लक्षण होते हैं। वस्तुत: आयोडीन की कमी से मस्तिष्क का धीमा होना और दिमाग को क्षति आदि हो सकते हैं जिन्हें समय से रोका जा सकता है। आयोडीन की लगातार कमी से चेहरा फूला हुआ, गले में सूजन (गले के अगले हिस्से में थाइराइड ग्रंथि में सूजन) थाइराइड की कमी (जब थाइराइड हार्मोन का बनना सामान्य से कम हो जाए) और मस्तिष्क की कार्यप्रणाली में बाधा आती है। गर्भवती महिलाओं में आयोडीन की कमी से गर्भपात, नवज़ात शिशुओं का वजऩ कम होना,शिशु का मृत पैदा होना और जन्म लेने के बाद शिशु की मृत्यु होना आदि लक्षण होते हैं। एक शिशु में आयोडीन की कमी से उसमें बौद्धिक और विकास संबंधी समस्याएं हो सकती हैं। आयोडीन के सर्वोत्तम प्राकृतिक स्रोत हैं अनाज, दालें एवं ताजे खाद्य पदार्थ। दूध आदि मेंं भी कुछ मात्रा में आयोडीन होता है। 
सर्वाेत्तम उपाय है आयोडीन युक्त नमक 
आयोडीन युक्त नमक अपने आहार में आयोडीन शामिल करने का सबसे बेहतर तरीका है। एक औसत भारतीय प्रतिदिन लगभग 10-15 ग्राम नमक का सेवन करता है। अपने दैनिक भोजन में आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल करने से आपकी आयोडीन की दैनिक मात्रा पूरी हो जाती है। नमक में आयोडीन नष्ट नहीं होता यदि इसे उचित ढंग से रखा जाए। बहरहाल, लम्बे समय तक सूर्य की रोशनी तथा नमी पडऩे से नमक में मौजूद आयोडीन नष्ट हो सकता है। आपको आयोडीन युक्त नमक शीशे या प्लास्टिक के बंद कंटेनर में रखना चाहिए और उस पर लिखी निर्माण की तारीख हमेशा देखें। आयोडीन युक्त नमक का इस्तेमाल पैकिंग की तारीख से 12 महीने के अंदर कर लेना चाहिए। बहरहाल, यदि आपको उच्च रक्तचाप तथा कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है जिसके कारण आप अपने आहार में नमक का इस्तेमाल कर पाने में असमर्थ हैं तो इसके विकल्प के लिए अपनी डाक्टर से सलाह करें।


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आमजन में शिविरों में जाना कैसे मिलता है स्वास्थ्य योजनाओं का लाभ
-जन कल्याण पंचायत शिविरों में दी बीएसबीवाई की जानकारी, अधिकारियों ने किया निरीक्षण

श्रीगंगानगर। पंचायत स्तर पर लग रहे जन कल्याण पंचायत शिविरों में इन दिनों ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाओं से खासे लाभान्वित हो रहे हैं। उन्हें न केवल नि:शुल्क उपचार व दवा मुहैया करवाई जा रही है बल्कि उन्हें विभिन्न बीमारियों के प्रति भी जागरूक किया जा रहा है। इसके साथ ही इन शिविरों के माध्यम से आमजन को स्वास्थ्य सेवाओं व योजनाओं के प्रति जागरूक किया जा रहा है। शुक्रवार को जिले के आठ ब्लॉकों में लगे 16 जन कल्याण पंचायत स्वास्थ्य शिविरों का स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा की। इस दौरान मुख्यत: भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना पर जोर रहा ताकि आमजन को इस महत्ती योजना का ज्यादा से ज्यादा लाभ मिल सके। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि शुक्रवार को श्रीगंगानगर खण्ड के गांव जोधेवाला एवं चूनावढ़, श्रीकरणपुर खण्ड के मुकन व 61 एफ, पदमपुर के सात डीडी व 20 बीबीए, रायसिंहनगर खण्ड के 71 आरबी व फोजूवाला, अनूपगढ़ के दो एलएम, घड़साना के दो जीएमबी व पांच एमएलडी, श्रीविजयनगर खण्ड के दो जीबीए व 24 जीबी, सूरतगढ़ के मानेवाला व सादकवाला और सादुलशहर खण्ड के ताखरंांवाली एवं 15 ए में शिविर लगाए गए। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि आगामी जन कल्याण पंचायत शिविरों का आयोजन 28 अक्टूबर को किया जाएगा। उन्होंने बताया कि शुक्रवार को आयोजित शिविरों का आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला, बीसीएमओ डॉ. मुकेश मित्तल, बीपीएम पितृसेन, मनोज जांगिड़ आदि ने निरीक्षण किया। उल्लेखनीय है कि इन शिविरों में स्वास्थ्य विभाग की ओर से मरीजों की जांच भी की जा रही है और उनका नि:शुल्क उपचार कर उन्हें दवाएं उपलब्ध करवाई जा रही है। 



 

गुरुवार, 20 अक्टूबर 2016


स्वास्थ्य केंद्र पर लगा कैंसर आउटरीच कैंप
अनेक मरीज हुए लाभान्वित, कैंसर के प्रति किया जागरूक
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के एनसीडी अनुभाग की ओर से लगाए जा रहे स्वास्थ्य जांच शिविरों में ग्रामीण लाभान्वित हो रहे हैं। यहां अनेक ग्रामीण ऐसे भी पहुंच रहे हैं, जो अनजाने में अपने स्वा
स्थ्य के प्रति लापरवाही बरत रहे थे। स्वास्थ्य जांच शिविर के दौरान अनेक लोगों को पता लग रहा है कि उन्हें शुगर या अन्य समस्याएं भी हैं। ऐसे में शिविर के दौरान जांच के साथ ही ग्रामीणों को जागरूक किया जा रहा है कि वे अपनी नियमित जांच करवाएं ताकि समय रहते बीमारी का पता लगाकर उपचार करवाया जा सके। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि इस बार सूरतगढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र के अधीन आने वाले गांव पीपरेन गांव में आउटरीच स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। जहां चिकित्सक डॉ. सोनिया राहड़ एवं अन्य स्टाफ ने सेवाएं दी। शिविर के दौरान दोपहर बाद तक 66 मरीजों की जांच की गई। यहां डायबिटीज एवं हायपरटेंशन आदि की जांच भी की गई। अनुभाग के अर्शदीप बराड़ ने बताया कि आगामी दिनों में में सभी खण्डों में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाए जाएंगे ताकि ग्रामीणों के स्वास्थ्य की नियमित जांच हो सके।

आज पंचायत शिविरों में मिलेगी स्वास्थ्य सुविधा
-विभाग करेगा आमजन को जागरूक, जिलाधिकारी करेंगे शिविरों का निरीक्षण
श्रीगंगानगर। जिले की विभिन्न पंचायतों में शुक्रवार को जन कल्याण पंचायत शिविर लगाए जाएंगे, जहां चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अहम भूमिका रहेगी। विभाग की आरे से न केवल चिकित्सा जांच व उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी बल्कि आमजन को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार सामग्री भी दी जाएगी। वहीं जिलाधिकारी इन शिविरों का आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लेंगे। मुख्यत: इन शिविरों में भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना की जानकारी आमजन को प्रदान की जाएगी।
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि शुक्रवार को श्रीगंगानगर खण्ड के गांव जोधेवाला एवं चूनावढ़, श्रीकरणपुर खण्ड के मुकन व 61 एफ, पदमपुर के सात डीडी व 20 बीबीए, रायसिंहनगर खण्ड के 71 आरबी व फोजूवाला, अनूपगढ़ के दो एलएम, घड़साना के दो जीएमबी व पांच एमएलडी, श्रीविजयनगर खण्ड के दो जीबीए व 24 जीबी, सूरतगढ़ के मानेवाला व सादकवाला और सादुलशहर खण्ड के ताखरंांवाली एवं 15 ए में शिविरों का आयोजन होगा। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि आगामी जन कल्याण पंचायत शिविरों का आयोजन 28 अक्टूबर को किया जाएगा।

बुधवार, 19 अक्टूबर 2016


विद्यार्थियों के लिए सौगात बना आरबीएसके शिविर
-जांच के साथ नि:शुल्क स्वास्थ्य उपचार भी मिल रहा, 21 को गजसिंहपुर में  

श्रीगंगानगर। भारत सरकार के राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के जरिए जिले में आंगनबाड़ी और राजकीय स्कूलों में जाने वाले 19 वर्ष आयु तक के विद्यार्थी लाभान्वित हो रहे हैं। कार्यक्रम के तहत न केवल उनका चिन्हिकरण हो रहा है बल्कि स्वास्थ्य शिविरों के माध्यम से उनका नि:शुल्क जांच व उपचार भी किया जा रहा है। इस कार्य में निजी चिकित्सालय भी साथ दे रहे हैं और विभागीय टीम भी अहम भूमिका निभा रही है। पदमपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में भी लगे स्वास्थ्य शिविर में 282 बच्चों को लाभान्वित किया गया। बीसीएमओ डॉ. मुकेश मित्तल के निर्देशन में आयोजित इस शिविर का आरबीएसके प्रभारी डॉ. भारत भूषण, डॉ. सुनील बिश्रोई व सीओआईईसी विनोद बिश्रोईने निरीक्षण किया। इस दौरान आरबीएसके टीम सहित सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज के स्टूडेंटï्स ने भी अपनी सेवाएं दी। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि शिविर में 282 बच्चों की जांच की गई, जिनमें 190 बच्चों का नि:शुल्क उपचार किया गया, जबकि एक बच्चे को जिला अस्पताल, दो को मेडिकल कॉलेज और 89 बच्चों को सहयोगी निजी चिकित्सालय में रैफर किया गया। उन्होंने बताया कि शिविर में 84 बच्चों की नेत्र जांच, 76 बच्चों की दंत जांच सहित नौ बच्चों की चर्म रोग, पांच ईएनटी, 30 एनिमिया और 78 अन्य रोगों से संबंधित बच्चों की जांच की गई। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि 21 अक्टूबर को गजसिंहपुर में, चार नवंबर को रिड़मलसर में, आठ नवंबर को घड़साना में, दस नवंबर को रावला में, 16 नवंबर को सूरतगढ़ में, 17 नवंबर को राजियासर और 22 नवंबर को अनूपगढ़ में आरबीएसके शिविर लगाए जाएंगे। उन्होंने बताया कि इसके बाद भी नियमित रूप से शिविर लगेंगे, वहीं मोबाइल टीमें भी लगातार बच्चों  की स्वास्थ्य जांच कर चिन्हिकरण कर रही है। इस दौरान स्टूडेंट्स को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी दी गई। वहीं उन्हें दांतो सहित शारीरिक साफ-सफाई की जानकारी भी प्रोजेक्टर के जरिए दी गई। 


शुक्रवार, 14 अक्टूबर 2016

शिविरों में मिली स्वास्थ्य सुविधा, हुए जागरूक
-भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के प्रति आमजन में रही उत्सुकता, सीएमएचओ ने किया निरीक्षण
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार की ओर से जिले में शुक्रवार को जन कल्याण पंचायत शिविरों का आयोजन किया गया। शिविरों के दौरान चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अहम भूमिका रही। विभागीय टीमों ने आमजन को जहां स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाई और मरीजों का उपचार किया, वहीं आमजन को स्वास्थ्य सेवाओं व योजनाओं के प्रति जागरूक भी किया गया। इस दौरान आमजन मुख्यत: भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के बारे में जानकारी लेते हुए नजर आए। खासकर इस योजना की प्रचार-प्रसार सामग्री को हर ग्रामीण ने हासिल की और योजना के तहत शामिल अस्पतालों की जानकारी प्राप्त की। शिविर में नियुक्त स्वास्थ्य कार्मिकों ने ग्रामीणों की जिज्ञासाओं को दूर करते हुए उन्हें योजना के बारे में विस्तार से जानकारी दी।
 सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने विभिन्न जन कल्याण पंचायत शिविरों का निरीक्षण करते हुए स्वास्थ्य विभाग की ओर से दी जा रही सेवाओं की समीक्षा की। उन्होंने कार्मिकों को सख्त निर्देश दिए कि वे शिविरों के दौरान आमजन को बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाएं। इसी तरह आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा, डीपीएम विपुल गोयल, डीएसी रायसिंह सहारण आदि ने शिविरों का निरीक्षण कर व्यवस्थाएं देखी। शुक्रवार को श्रीगंगानगर खण्ड के गांव 13 जी एवं 27 जीजी, श्रीकरणपुर खण्ड के रडेवाला व नौ एफए, पदमपुर के 35 बीबी व पांच बीबीए, रायसिंहनगर खण्ड के समेजा व 75 एनपी, अनूपगढ़ के नौ एलएमबी व 20 एलएम, घड़साना के 13 एमडी व दो एमएलडी, श्रीविजयनगर खण्ड के 18 एएस व 17 जीबी, सूरतगढ़ के सरदारपुरा व रामसरा और सादुलशहर खण्ड के डूंगरसिंहपुरा एवं गणेशगढ़ में शिविर लगाए गए। आगामी शुक्रवार को श्रीगंगानगर खण्ड के गांव जोधेवाला व चूनावगढ़, श्रीकरणपुर खण्ड के मुकन व 61 एफ, पदमपुर के सात डीडी व 20 बीबीए, रायसिंहनगर के 71 आरबी व फौजूवाला, अनूपगढ़ खण्ड के दो एलएम, घड़साना के दो जीएमबी व पांच एमएलडी, श्रीविजयनगर के दो जीबीए व 24 जीबी, सूरतगढ़ के मानेवाला व सादकवाला और सादुलशहर खण्ड के ताखरांवाली और 15 ए गांव में पंचायत शिविर लगाए जाएंगे। 
‘‘युवा ही धो सकते हैं इस कलंक को’’
-स्वास्थ्य विभाग के कार्यक्रम में सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज के स्टूडेंट्स ने ली बेटी बचाने की शपथ
श्रीगंगानगर। युवाओं की बदौलत देश और समाज बदल रहा है। हर तबके में बदलते दौर के पीछे युवाओं का ही योगदान है तो ऐसे में बेटी बचाओ अभियान में भी युवाओं की सहभागिता अहम साबित हो सकती है। युवाओं को जाति, धर्म, वर्ग और क्षेत्रवाद से ऊपर उठते हुए बेटी बचाओ अभियान में देशव्यापी योगदान देना चाहिए। कुछ ऐसे ही ओजस्वी और प्रेरणादायी विचार शुक्रवार को वक्ताओं ने स्वास्थ्य विभाग के आईईसी एवं पीसीपीएनडीटी अनुभाग की ओर से सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज में आयोजित कार्यक्रम में व्यक्त किए। कार्यक्रम के दौरान एसीएमएचओ डॉ. मुकेश मेहत्ता, कॉलेज प्रबंधक सूरज अग्रवाल, पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीपसिंह और सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने विचार व्यक्त किए। वहीं डॉ. सुनील बिश्रोई, धीरज सैन सहित कॉलेज के चंद्रकिरण गोदारा, रमनदीप कौर, ज्योति रगिता और मयूर वर्मा मौजूद रहे।
इस दौरान बतौर मुख्य अतिथि युवाओं को संबोधित करते हुए अतिरिक्त मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मुकेश मेहता ने कहा कि यदि युवा ठान ले तो वो दिन दूर नहीं जब लिंगानुपात पर जागरूकता कार्यक्रमों की जरूरत ही नहीं रहेगी। क्योंकि युवाओं की बदौलत कन्या भू्रण हत्या व लिंग जांच पर पूर्णत: अंकुश लगाई जा सकती है और जिले पर लगे कन्या भू्रण हत्या के कलंक को मिटाया जा सकता है। कार्यक्रम में मुखबिर योजना, टोल फ्री नंबर एवं पीसीपीएनडीटी अधिनियम की जानकारी देते हुए पीसीपीएनटी प्रभारी रणदीपसिंह ने बताया कि राज्य सरकार कन्या भू्रण हत्या एवं लिंग जांच संबंधी सूचना देने पर मुखबिर योजना के तहत दो लाख रूपए तक की प्रोत्साहन राशि दे रही है। आमजन कहीं से भी, किसी भी क्षेत्र में हो रही इस तरह की अवांछित गतिविधियों की जानकारी विभाग के टोल फ्री नंबर 104 पर दे सकते हैं। उन्होंने बताया कि अधिनियम का उल्लघंन करने वाले चिकित्सकों पर विभाग लगातार शिकंजा कस रहा है। अधिनियम के तहत कन्या भू्रण हत्या, लिंग जांच सहित अन्य उल्लंघन पर तीन से पांच साल की सजा तथा दस हजार रूपए जुर्माने का प्रावधान है। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने स्टूडेंटï्स से सवाल-जवाब करते हुए उन्हें स्वास्थ्य सेवाओं से संबंधित जानकारी दी। उन्होंने ब्रांड एम्बेसडर सहित राज्य सरकार द्वारा बेटी बचाओ अभियान के तहत किए जा रहे कार्यों के बारे में जानकारी दी। कॉलेज प्रबंधक सूरज अग्रवाल ने कहा कि वे विभाग के साथ मिलकर बेटी बचाओ अभियान के तहत लगातार अभियान चलाएंगे ताकि इस जागरूकता कार्यक्रम को जन-जन तक पहुंचाया जा सके।
ली शपथ, दी श्रद्धांजलि
कार्यक्रम के दौरान अतिथिगणों सहित सभी स्टूडेंट्स ने बेटी बचाओ अभियान के तहत शपथ ली कि वे कभी भी कन्या भू्रण हत्या नहीं करेंगे और न ही किसी को करने देंगे। वहीं स्टूडेंटï्स ने मोमबती जलाकर उन बेटियों को श्रद्धांजलि दी, जिनका कोख में कत्ल कर दिया गया। स्टूडेंटï्स ने भावुक होते कहा कि वे इस मुहिम को आगे से आगे बढ़ाने में हर संभव प्रयास करेेंगे। इसी दौरान स्टूडेंट्स ने कामना की कि भगवान उन चिकित्सकों को सद्बुद्धि दे जो कन्या भू्रण हत्या जैसा जघन्य अपराध करने में संलिप्त है। 


गुरुवार, 13 अक्टूबर 2016

आज से लगेंगे शिविर, स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी ग्रामीणों को
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार की ओर से जिले में शुक्रवार से जन कल्याण पंचायत शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अहम भूमिका रहेगी। विभाग की ओर से हर शिविर में जहां स्वास्थ्य सुविधा मुहैया करवाई जाएगी, वहीं विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं व योजनाओं के बारे में आमजन को जागरूक किया जाएगा। खासकर, भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना को लेकर आमजन को विस्तार से जानकारी दी जाएगी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बश्ताया कि शुक्रवार को श्रीगंगानगर खण्ड के गांव 13 जी एवं 27 जीजी, श्रीकरणपुर खण्ड के रडेवाला व नौ एफए, पदमपुर के 35 बीबी व पांच बीबीए, रायसिंहनगर खण्ड के समेजा व 75 एनपी, अनूपगढ़ के नौ एलएमबी व 20 एलएम, घड़साना के 13 एमडी व दो एमएलडी, श्रीविजयनगर खण्ड के 18 एएस व 17 जीबी, सूरतगढ़ के सरदारपुरा व रामसरा और सादुलशहर खण्ड के डूंगरसिंहपुरा एवं गणेशगढ़ में शिविरों का आयोजन होगा। इसी तरह आगामी शुक्रवार, 21 अक्टूबर को जन कल्याण पंचायत शिविरों का आयोजन किया जाएगा। 
यहां कन्या जन्म पर बजती है थाली, बंटती है मिठाइयाँ
-पीएचसी 17 जेड में चिकित्सक की पहल पर बेटियों का बढ़ रहा मान

श्रीगंगानगर। जिला मुख्यालय से कुछेक दूरी पर स्थित एक गाँव के वाशिंदे इन दिनों बेटियों का मान बढ़ाते हुए ‘बेटी बचाओ अभियान’  में अपना अहम योगदान दे रहे हैं। भले ही श्रीगंगानगर जिला कन्या भू्रण हत्या के लिए कुख्यात रहा हो लेकिन अब इस बदलती सोच और बेटियों के प्रति स्नेह के साथ जिला नई इबारत लिखने को तैयार है। निश्चित ही जागरूकता के मामले में ऐसे छोटे-छोटे प्रयास ही हमें उस सामूहिक लक्ष्य तक पहुंचाएंगे, जहां सब चाहते हैं कि लिंगानुपात समान हो। यानी बेटे-बेटी का भेदभाव समाप्त होते हुए कन्या भू्रण हत्या जैसे जघन्य अपराध पर रोक लगे। 

कहने को छोटा सा, लेकिन बेटियों को समाज में बराबरी का हक दिलाने में बेहद खास योगदान दे रहे हैं ग्राम पंचायत 18 जेड के निवासी। इस ग्राम पंचायत के गांव 17 जेड में स्थित प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी अधिकारी डॉ. धीरज मंगल ने सकारात्मक पहल करते हुए बेटी के जन्म पर थाली बजाने का निर्णय लिया। यही नहीं पीएचसी पर जन्म लेने वाली बेटी की खुशी में चिकित्सक व अन्य स्टाफ अपने खर्च पर मिठाई भी बांटते हैं। बकौल डॉ. धीरज, ‘‘हमारे समाज में बेटे-बेटी का भेद उसके जन्म से शुरू हो जाता है। बेटा जन्मे तो थाली भी बजे और मिठाइयां भी बंटे। वहीं यदि बेटी ने जन्म लिया तो घर में माहौल कुछ अलग ही बन जाता है। इसी सोच, इसी प्रथा पर प्रहार करने के लिए हमने निर्णय लिया है कि पीएचसी पर जन्म लेने वाली हर बेटी की खुशी में थाली भी बजेगी और मिठाइयां भी बंटेगी। हम प्रयास करेंगे कि यह मुहिम ग्राम पंचायत के हर घर-घर में पहुंचे ताकि बेटे-बेटी का भेद समाप्त हो। क्योंकि यदि शुरूआत से ही भेद समाप्त होने लगा तो भविष्य में बेटियों को भेदभाव का शिकार नहीं होना पड़ेगा।’’  डॉ. धीरज बताते हैं कि उन्हें इस मुहिम के लिए जिला आईईसी समन्वयक विनोद बिश्रोई ने प्रेरित किया, जिसके बाद उन्होंने अपने स्टाफ व गांव के मौजिज लोगों से चर्चा कर थाली बजाने और मिठाई बांटने का निर्णय लिया। बेशक, यह शुरूआत है लेकिन हम निरंतर इस मुहिम को लेकर अलख जगाएंगे और बेटे-बेटी का भेदभाव समाप्त करने के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। 

जन्मी लाडो, परिजनों ने भी मनाई खुशी

पीएचसी 17 जेड में गुरूवार को भी एक लाडली ने जन्म लिया। गांव 15 जेड के बिलाल खां की पत्नी शानी बेगम ने गुरूवार सुबह सवा आठ बजे चांद सी बेटी को जन्म दिया। बेटी के जन्म के साथ ही पीएचसी स्टाफ ने थाली बजाकर और मिठाई बांटकर खुशी मनाई। वहीं परिजनों ने भी इस मुहिम को सकारात्मक रूप में लेते हुए बेटी के जन्म पर खुशी मनाते हुए कहा कि वे अपने परिजनों को प्रेरित करेंगे कि अपने परिवार या रिश्तेदार में अब कहीं भी बेटी होगी तो थाली बजाकर बेटी का स्वागत करेंगे। इस मौके पर चिकित्सा प्रभारी डॉ. धीरज मंगल, डॉ. प्रेम कुमार सहित नर्सिंग स्टाफ राजकुमार, उदयसिंह, वल्सला वीआर और बलजीत कौर आदि मौजूद रहे। 
ताकि समान हो लिंगानुपात
पीएचसी 17 जेड में ग्राम पंचायत 18 जेड के पांच गांव शामिल है। डॉ. धीरज मंगल के मुताबिक गांव 17 जेड में 358 बालक व 316 बालिकाएं, गांव 19 जेड में 353 बालक व 310 बालिकाएं, गांव 16 जेड में 245 बालक व 193 बालिकाएं, गांव 13 जेड में 383 बालक व 287 बालिकाएं और गांव 18 जेड में 258 बालक एवं 237 बालिकाएं हैं। हालांकि लिंगानुपात तकरीबन समान है, लेकिन फिर भी एक दूरी है, जिसे पाटने के लिए ही ये जागरूकता मुहिम शुरू की गई है। ताकि आने वाले समय में बेटा-बेटी की संख्या समान है और समाज से भेदभाव भी समाप्त हो। 

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मंगलवार, 11 अक्टूबर 2016

पंचायत शिविरों में मिलेगी स्वास्थ्य सुविधाएं
-स्वास्थ्य विभाग करेगा आमजन को जागरूक, 14 अक्टूबर से शुरू होंगे शिविर
श्रीगंगानगर। जिले की पंचायतों में आगामी 14 अक्टूबर से जन कल्याण शिविरों का आयोजन किया जाएगा। इन शिविरों में अन्य विभागों के साथ चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की अहम भूमिका रहेगी। विभाग की आरे से न केवल चिकित्सा जांच व उपचार की सुविधा उपलब्ध करवाई जाएगी बल्कि आमजन को जागरूक करने के लिए प्रचार-प्रसार सामग्री भी दी जाएगी। इसके लिए बकायदा हर शिविर में प्रशिक्षित कार्मिकों को नियुक्त किया जाएगा जो आमजन को विभिन्न स्वास्थ्य सेवाओं व योजनाओं की जानकारी देंगे। 
मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि 14 अक्टूबर से प्रारंभ हो रहे शिविरों में मरीजों की जांच व उपचार की सुविधा मुहैया करवाई जाएगी। यदि जरूरत हुई तो मरीजों को उच्च चिकित्सा संस्थानों में रैफर भी किया जाएगा। चूंकि इन दिनों मौसमी बीमारियां चल रही हैं, इस लिहाज से ये शिविर आमजन के लिए खासे मुफीद साबित होंगे। शिविर जिला प्रशासन द्वारा निर्धारित कार्यक्रमानुसार पंचायत मुख्यालयों पर हर शुक्रवार को आयोजित होंगे। हर खण्ड में हर बार दो पंचायतों पर शिविर लगाए जाएंगे। शिविर में आने वाले लोगों से पंजीयन के समय बीएसबीवाई, आधार कार्ड, राशन कार्ड आदि की संख्या भी इन्द्राज की जाएगी। वहीं रैफर किए जाने वाले मरीजों का फॉलोअप भी किया जाएगा। यही नहीं चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ के निर्देशानुसार इन शिविरों में आने वाले मरीजों को आवश्यकतानुसार नि:शुल्क दवा भी उपलब्ध करवाई जाएगी। वहीं शिविरों के जरिए आमजन में स्वास्थ्य जन चेतना जागृत करने के लिहाज से उन्हें प्रचार-प्रसार सामग्री मुहैया करवाई जाएगी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि शिविरों में सहज विकलांगता वाले दिव्यजनों को प्रमाण पत्र भी जारी किए जाएंगे। इसके साथ ही गर्भवती महिलाओं एवं 30 वर्ष से अधिक आयु के पुरूषों की नि:शुल्क हिमोग्लोबिन, ब्लड शुगर व ब्लड प्रेशर आदि की जांच की जाएगी। शिविरों में टीवी रोगियोंं को जांच के लिए नजदीकी टीवी जांच केंद्र पर  रैफर किया जाएगा। शिविरों में लगाई जाने वाली मेडिकल टीम में एक चिकित्सा अधिकारी, दो नर्स ग्रेड द्वितीय, एलएचवी/पीएचएस, दो एएनएम एवं लैब टेक्रीशिन तथा एक बीपीएम/बीएचएस सहित सहायक कार्मिक को नियुक्त किया जाएगा। इसके साथ ही आरबीएसके का चिकित्सा दल भी शिविरों में मौजूद रहकर बाल स्वास्थ्य जांचेगा। 

शनिवार, 8 अक्टूबर 2016

हर मंगलवार, शुक्रवार को लगेंगे आरबीएसके शिविर
-शिवपुर में लगा आरबीएसके शिविर, 14 को सादुलशहर में 
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए जा रहे राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत चिन्हित किए गए बच्चों के लिए अब हर मंगलवार व शुक्रवार को स्वास्थ्य शिविर लगाए जा रहे हैं। विभाग की ओर से इन शिविरों ने विशेषज्ञ चिकित्सकों द्वारा सामान्य बच्चों की भी जांच की जा रही है। वहीं जिले में 16 आरबीएसके मोबाइल टीमें लगातार कार्य कर रही हैं। उल्लेखनीय है कि जिले में आरबीएसके के तहत सबसे बेहतर कार्य किया जा रहा है, जिसे लेकर मिशन निदेशक नवीन जैन आरबीएसके टीम की पीठ थपथपा चुके हैं। जिले में बेहतर से बेहतर कार्य करने के उदï्देश्य से इस सोमवार को जिलास्तरीय वीडियो कॉन्फें्रसिंग भी की जाएगी। 
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि मिशन निदेशक नवीन जैन के निर्देशों पर लगाए जा रहे आरबीएसके शिविरों में स्वास्थ्य विभाग के विशेषज्ञों के साथ ही निजी चिकित्सालयों की टीमें अपनी सेवाएं दे रही हैं। इस दौरान आरबीएसके मोबाइल टीमों द्वारा चिन्हित बच्चों को प्राथमिकता से जांच कर उनका उपचार किया जाता है। वहीं सामान्य बच्चों की भी विशेषज्ञ चिकित्सक जांच करते हैं। इस शुक्रवार को शिवपुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में आरबीएसके स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। जहां डॉ. भारत भूषण, डॉ. निर्मण सैनी, डॉ. माया माथुर, डॉ. रामप्रसाद, डॉ. सोनल, डॉ. अमित शर्मा, डॉ. चंदन, डॉ. विकास बेनीवाल आदि ने अपनी सेवाएं दी। वहीं सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज की टीम ने भी शिविर में स्वास्थ्य जांच एवं उपचार की सुविधा मुहैया करवाई। शिविर में १२७ बच्चों की स्वास्थ्य जांच की गई, जिनमें ८३ का उपचार किया गया जबकि नौ बच्चों को जिला अस्पताल में रैफर किया गया। इसी तरह 35 बच्चों की नि:शुल्क दंत जांच व उपचार के लिए सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज में रैफर किया गया। आगामी 14 अक्टूबर को सादुलशहर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र परिसर में आरबीएसके शिविर का आयोजन किया जाएगा, जिसमें विशेषज्ञ चिकित्सक अपनी सेवाएं देंगे और बच्चों को स्वास्थ्य जांच व उपचार उपलब्ध करवाएंगे। 
कल वीडियो कॉन्फें्रसिंग 
आरबीएसके के सहायक नोडल प्रभारी डॉ. सुनील बिश्रोई ने बताया कि राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत लगाए जा रहे शिविरों के सफल आयोजन को लेकर दस अक्टूबर को दोपहर डेढ़ बजे वीडियो कॉन्फें्रसिंग होगी। वीसी में सभी बीसीएमओ, आरबीएसके कैंप प्रभारी और मोबाइल हेल्थ टीम के आयुष चिकित्सक संबंधित खण्ड के अटल सेवा केंद्रों से भाग लेंगे। वहीं जिलास्तर से सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल, आरबीएसके प्रभारी डॉ. वीपी असीजा, सहायक नोडल अधिकारी डॉ. भारत भूषण एवं डॉ. सुनील बिश्रोई वीसी में शामिल होंगे। 
बेटियों ने ली ‘बेटी’ बचाने की शपथ
-गल्र्स कॉलेज में आयोजित हुआ बेटी बचाओ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम
श्रीगंगानगर। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के पीसीपीएनडीटी, आईईसी अनुभाग एवं बीसीएमओ सूरतगढ़ की ओर से शनिवार को सूरतगढ़ स्थित श्रीमाता जीतो जी कन्या महाविद्यालय में बेटी बचाओ अभियान के तहत जागरूकता कार्यक्रम का आयेाजन किया गया। इस दौरान कॉलेज की सभी छात्राओं ने कन्या भू्रण हत्या के खिलाफ आवाज बुलंद करने और बेटी बचाने को लेकर शपथ ली। बेटियों ने एकजुट, एक स्वर में कहा कि वे इस कुकृत्य का ताउम्र विरोध करेंगी ताकि किसी भी बेटी का कोख में कत्ल न हो। श्रीमाता जीतो जी कन्या महाविद्यालय प्रबंध कमेटी के सहयोग से आयोजित इस कार्यक्रम में अणुव्रत सेवा समिति का भी योगदान रहा। इस मौके पर कॉलेज प्राचार्य डॉ. मोहिनी दहिया, संस्था प्रधान हरनेसिंह गिल, पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीपसिंह, आईईसी प्रभारी विनोद बिश्रोई, बीपीएम हंसराज भाटी, अणुव्रत संस्था के संस्था के घनश्याम दास, संजय वैद्य एवं अन्य प्रमुखजन शामिल हुए। मंच संचालन लाडली गुरूतोज कवातड़ा ने किया।
इस मौके पर छात्राओं को संबोधित करते हुए पीसीपीएनडीटी प्रभारी रणदीपसिंह ने स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाई जा रही मुखबिर योजना के बारे में विस्तार से बताया। उन्होंने छात्राओं को प्रेरित किया कि वे अपने क्षेत्र में ऐसे लोगों पर नजर रखें जो कन्या भू्रण हत्या में शामिल हों। अनेक दलाल जिले में है जो यह कुकृत्य कर रहे हैं, जिन्हें सलाखों के पीछे तभी धकेला जा सकता है जब आमजन विभाग का साथ दें। ऐसे लोगों की शिकायत स्थानीय स्तर न करना चाहें तो सीधे विभागीय टोल फ्री नंबर 104 पर कर सकते हैं और इसके अलावा हमारी बेटी वेबसाइट भी शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है। कार्यक्रम के दौरान बीपीएम हसंराज भाटी ने सरकार की ओर से बेटियों के लिए चलाई जा रही बालिका संबल योजना, राजश्री योजना आदि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि सरकार बेटियों को लेकर अनेक सकारात्मक कदम उठा रही है, लेकिन बेटी बचाओ अभियान तब तक कामयाब नहीं हो सकता जब तक आमजन की इसमें भागीदारी न हों। इस मौके पर कॉलेज प्राचार्य मोहिनी दहिया, संस्था प्रधान हरनेकसिंह गिल आदि ने बेटियों को शपथ दिलाई। वहीं अणुव्रत समिति के सदस्यों ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि वे विभाग के हर कार्यक्रम में शामिल होकर इस अभियान को जन-जन तक पहुंचाने में अहम योगदान देंगे। 



फेफड़ों की गंभीर बीमारी है सिलिकोसिस 
-बीमारी होने पर सरकार देती है एक लाख और मौत पर तीन लाख रूपए की सहायता राशि

        -विनोद बिश्रोई -

श्रीगंगानगर। सिलिकोसिस फेफड़ों में होने वाला भयंकर रोग है, जो प्राय: रेत व पत्थर की खदानों, पहाड़ों व चट्टानों की ब्लास्टिंग, के्रशर, पत्थरों की कटाई व पिसाई आदि में कार्य कर मजदूरों में होता है। वहीं सडक़ व भवन निर्माण में कार्यरत मजदूर भी इस बीमारी की चपेट में आ सकते हैं। ऐसे में जरूरी है कि इस बीमारी के प्रति आमजन, खासकर मजदूर वर्ग में व्यापक जानकारी हो ताकि वे इससे बच सकें। एक अहम जानकारी ये भी कि राज्य सरकार सिलिकोसिस पीडि़तों को एक लाख रूपए की सहायता राशि दे रही है। वहीं यदि रोगी की मौत हो जाए और इसी बीमारी से मौत की पुष्टि हो जाए तो तीन लाख रूपए तक सहायता राशि राज्य सरकार दे रही है। 
सिलिकोसिस रोग के लक्षणों में प्रमुखत: रोगी को शुरूआत में व्यायाम या कार्य करते समय श्वास लेने में परेशानी होती है। बाद में जैसे-जैसे रोग बढ़ता है रोगी का श्वास फूलने लगता है। खांसी, बलगम और बिना बलगम के खांसी लगातार रहती है। खांसी के साथ खून आना, बुखार आना, वजन घटना, अन्य संक्रमित रोग भी हो जाते हैं। मसलन, ट्यूबर कोलोसिस के लक्षण आदि। घबराहट, छाती में जकडऩ, श्वास में रूकावट, कठिनाई जैसे अन्य लक्षण भी रोगी में पाए जाते हैं। 
सिलिकोसिस का उपचार
विशेषज्ञों के मुताबिक सिलिकोसिस का कोई उपचार नहीं है। इसका इलाज व बचाव मुख्यत: लक्षणों व संक्रमण पर निर्भर करता है। जैसे की रोगी को धूम्रपान नहीं करना चाहिए, क्योंकि इससे रोग बढ़ता है। धूल के संपर्क में आने से बचना चाहिए। इस व्यवसाय को रोकने मात्र से ही यह रोग नहीं रोका जा सकता है। इस मामले में सुझाव यही दिया जाता है कि फेफड़ों को क्षति होने से बचाना चाहिए। अंतिम अवस्था में ऑक्सीजन एवं कृत्रिम वायु संचार दिया जा सकता है। शारीरिक एवं मानसिक पुनर्वास रोगी के जीवन की उत्तमता को सुनिश्चित करना एवं उसे निराशा से बचाना ही बचाव है। 
सिलिकोसिस को रोकने के उपाय
रोकथाम इलाज से बेहतर है क्योंकि इसका कोई इलाज नहीं है। इससे बचाव की एकमात्र उपाय है। बचाव प्रत्येक स्तर पर होना चाहिए। मसलन, फेक्ट्री और खान प्रशासन अपने मजदूरों के स्वास्थ्य के लिए जिम्मेदार हैं, इसलिए वे उनकी नियमित जांच करवाएं। कार्य करने के तरीकों को जोखिम के अनुसार बदलें। प्रबंधन को ध्यान रखना चाहिए कि कार्य क्षेत्र में स्नानगृह, फव्वारे, साफ एवं गंदे कपड़ों की अलग-अलग व्यवस्था हो। जलपान के लिए अलग व्यवस्था हो। सूचना, प्रशिक्षण एवं पर्यवेक्षण नियमित हो। वहीं हवा संचान जैसे संसाधन उपलब्ध हों। इसके साथ ही व्यक्तिगत बचाव भी जरूरी है। कार्य करने वाले लोगों को चाहिए कि वे अत्यधिक धूल वाले स्थान पर श्वास लेने से बचें, यानी मुंह ढक कर रखें और स्वच्छ जगह पर जाकर सांस ले। कार्य को सावधानीपूर्ण करें। धूल, दमन एवं निष्कर्षण उपकरणों का इस्तेमाल करना चाहिए। इन उपकरणों को साफ सुथरा रखना चाहिए। धूल युक्त त्वचा को नियमित रूप से साफ करें। रूई एवं उनी कपड़ों से बचें। 
राज्य सरकार की ओर से दी जा रही सहायता
हितलाभ - सिलिकोसिस पीडि़त होने पर एक लाख रूपए और
सिलिकोसिस से पीडि़त की मृत्यु होने पर तीन लाख रूपए की सहायता
पात्रता एवं शर्ते
1. पंजीकृत निर्माण श्रमिक हिताधिकारी हों।
2. सिलिकोसिस से पीडि़त होना न्यूमोकोनियोसिस मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रमाणित किया गया हो।
3. हिताधिकारी को राजस्थान एनवायरमेन्ट एण्ड हैल्थ सैस फण्ड से सहायता राशि प्राप्त नहीं हुई हो।
4. वे श्रमिक, जिन पर खान अधिनियम, 1952 के प्रावधान लागू होते हैं, वे सहायता राशि प्राप्त करने के पात्र नहीं होंगे।
आवेदन की समय सीमा
मेडिकल बोर्ड द्वारा प्रमाण-पत्र दिए जाने से 6 माह तक तथा मृत्यु की दशा में मृत्यु की तिथि से 6 माह की अवधि तक।
वांछित दस्तावेज
1. मृत्यु होने की दशा में मृत्यु प्रमाण पत्र।
2. न्यूमोकोनियोसिस मेडिकल बोड का सिलिकोसिस संबंधी प्रमाण-पत्र।
3. हिताधिकारी पंजीयन परिचय पत्र या कार्ड की प्रति
4. भामाशाह परिवार कार्ड या भामाशाह नामांकन की प्रति
5. आधार कार्ड की प्रति
6. बैंक खाता पासबुक के पहले पृष्ठ की प्रति


‘‘दरअसल सिलिकोसिस व्यवसायिक जनिक फेफड़ों का रोग है जो श्वास लेने से क्रिस्टलीय सिलिका के कणों के फेफड़ों में एकत्र होने से होता है। सिलिका या सिलिकोन डाईऑक्साइड धरती के परतों में पाई जाती है। यह एक घातक रोग है, क्योंकि यह जल्दी से फैलता है और इससे स्थाई विकलांगता हो जाती है। इस बीमारी के कारण जल्दी मृत्यु होने की संभावना बढ़ जाती है।’’
डॉ. नरेश बंसल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, श्रीगंगानगर 

बीमा योजना में हुई साढ़े सात करोड़ रूपए की राशि बुक
-आमजन के लिए भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना बनी वरदान, निजी और सरकारी अस्पतालों में मिल रहा लाभ
श्रीगंगानगर। राज्य सरकार की अतिमहत्वाकांक्षी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के जरिए जिले के हजारों लोग लाभान्वित हो रहे हैं। आमजन इस योजना का लाभ सरकारी के साथ ही गैर सरकारी अस्पतालों में लाभ उठा रहे हैं। शुरूआती दिनों के मुकाबले अब निजी हॉस्पीटलों की तरफ आमजन का रूझान ज्यादा बढ़ा है और वहां उन्हें नि:शुल्क व बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। अब तक योजना के जरिए जिले में 16843 पैकेज और साढ़े सात करोड़ से अधिक की राशि बुक की जा चुकी है। उल्लेखनीय है कि राज्य सरकार के सफलतापूर्ण दो वर्ष पूरे होने के उपलक्ष में राज्य की मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने 13 दिसंबर को यह सौगात राज्यवासियों को दी थी। योजना निरंतर व नियमित रूप से सफलतापूर्ण संचालित की जा रही है और यहां के सरकारी व अधिकृत गैर सरकारी अस्पतालों में आमजन को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं दी जा रही हैं। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल के मुताबिक आमजन को गुणवत्तापूर्ण कैशलेस चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराने के लिहाज से शुरू की गई स्वास्थ्य विभाग की जनहितैषी भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के बेहतरीन परिणाम निरंतर सामने आ रहे हैं। योजना के तहत अब तक जिले के सरकारी व गैर सकारी अस्पतालों में 16843 पैकेज बुक किए जा चुके हैं। जिसमें 9634 सरकारी और 7209 पैकेज निजी अस्पतालों में बुक हुए हैं। योजना के तहत प्रत्येक परिवार को प्रतिवर्ष सामान्य बीमारियों के लिए 30 हजार और चिन्हित गंभीर बीमारियों के लिए तीन लाख तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जा रहा है। जिसकी एवज में परिवार या व्यक्ति से कोई शुल्क नहीं लिया जाता। योजना में बीमित परिवार के सभी सदस्यों की बीमा से पूर्व की भी समस्त बीमारियां कवर की जा रही हैं। हृदय रोग तथा अत्यधिक आघात की स्थिति में 100 से 500 रुपए तक का यात्रा भत्ता भी बीमा राशि में शामिल किया गया है। योजना के लाभार्थी के सहयोग एवं मार्गदर्शन के लिए सभी संबंधित चिकित्सालयों में स्वास्थ्य मार्गदर्शक लगाए गए हैं जो मरीज की राषन कार्ड अथवा भामाशाह कार्ड में उपलब्ध जानकारी के आधार पर पहचान, उपलब्ध बीमा राशि तथा कराए जाने वाले उपचार के लिए अधिकृत करवाए जाने डिस्चार्ज एवं फॉलोअप में सहयोग कर रहे हैं। इनडोर मरीजों के लिए 13 दिसंबर 2015 को शुरू की गई यह योजना लगातार जारी है। योजना का लाभ राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना और खाद्य सुरक्षा योजना में पात्र परिवारों को मिल रहा है। योजना के तहत पात्र व्यक्ति को सामान्य बीमारी में 30 हजार रुपए गंभीर रोग के इलाज के लिए तीन लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज होता है। योजना में अस्पताल में भर्ती के सात दिन पहले और अस्पताल से छुट्टी के 15 दिन बाद की चिकित्सा भी कवर की जा रही है। स्वास्थ्य योजना के संबंध में किसी भी तरह जानकारी के लिए कोई भी विभाग के टोल फ्री नंबर 18001806127 और असुविधा होने पर इसकी षिकायत टोल फ्री नंबर 104 पर कर सकते हैं। 
अब तक 16843 पैकेज बुक, सर्वाधिक निजी हॉस्पीटल में
जिले के सरकारी व गैर सरकारी चिकित्सालयों में योजना शुरू होने के बाद अब तक 16843 पैकेज बुक हो चुके हैं, जबकि राशि सात करोड़ 59 लाख 19 हजार 136 रूपए बुक हुई है। जबकि पांच करोड़ तीस लाख 1387 रूपए का भुगतान हो चुका है। राजकीय संस्थानों में कुल 9634 पैकेज और राशि 19904800 रूपए हुई है। वहीं भुगतान 11088400 रूपए का हुआ है। इसी तरह निजी अस्पतालों के 7209 पैकेज और 56014336 रूपए की राशि बुक हुई। जबकि भुगतान 41912737 रूपए का हुआ। निजी हॉस्पीटलों में सर्वाधिक पैकेज आस्था हॉस्पीटल के 3781 हुए जबकि बेनीवाल के 888 और नागपाल किडनी केयर के भी 472 पैकेज बुक हुए। वहीं राजकीय संस्थानों में सर्वाधिक पैकेज बुक जिला अस्पताल में 4044 हुए, जबकि सादुलशहर सीएचसी पर 1078 पैकेज बुक हुए।
यहां मिल रहा नि:शुल्क इलाज
सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि योजना के तहत जिले के 13 सरकारी और 24 निजी अस्पतालों में निशुल्क इलाज की सुविधा मिल रही है। सरकारी अस्पतालों में जिला अस्पताल सहित सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र केसरीसिंहपुर, श्रीकरणपुर, रायसिंहनगर, घड़साना, सूरतगढ़, अनूपगढ़, चूनावढ़, सादुलशहर, राजियासर, गजसिंहपुर, पदमपुर व श्रीविजयनगर में नि:शुल्क इलाज मुहैया करवाया जा रहा है। इसी तरह निजी अस्पतालों में जिला मुख्यालय के सुखाडिय़ा नगर स्थित जुबिन नर्सिंग होम, आदर्श नर्सिंग होम, अर्पण हॉस्पीटल, दीवोज हॉस्पीटल, आस्था किडनी केयर सेंटर, मीरा मार्ग स्थित टांटिया हॉस्पीटल, गौड़ हॉस्पीटल, पेडि़वाल नर्सिंग होम, अग्रवाल नर्सिंग होम, अग्रसेननगर चैक स्थित नयन मंदिर हॉस्पीटल, जवाहरनगर स्थित आंचल हॉस्पीटल, तपोवन हॉस्पीटल, चहल चौक स्थित बहल हॉस्पीटल, श्री जगदंबा अंधविद्यालय, गगन पथ स्थित लालगढिय़ा हॉस्पीटल, नागपाल किडनी केयर हॉस्पीटल, गोल बाजार स्थित आदित्य नर्सिंग होम, एंजल हॉस्पीटल, सुरेंद्रा जनरल हॉस्पीटल, हनुमानगढ़ रोड स्थित मेक्स केयर हॉस्पीटल, श्री ओम सांई हॉस्पीटल, श्री बालाजी हॉस्पीटल, के अलावा श्रीकरणपुर का बेनीवाल हॉस्पीटल योजना के तहत बेहतर सेवाएं दे रहे हैं, जहां योजना के लाभार्थियों को नि:शुल्क इलाज मिल रहा है। 
मैं शामिल हूं या नहीं ? 
सीएमएचओ डॉ. बंसल बताते हैं कि योजना के तहत आप शामिल हैं या नहीं इसे साधारण रूप से समझने का तरीका यह है यदि आपको राशन कार्ड पर सरकारी गेहूं मिल रही है तो आप योजना में शामिल हैं। इसके अलावा यदि आपके पास राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का कार्ड हैं तो भी आप योजना में सम्मिलित हैं। आप अपने राशन डिपो केंद्र के संचालक से भी पूछ सकते हैं कि आप खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत चयनित हैं अथवा नहीं। वहीं जब भी आप हॉस्पीटल जाएं अपना भामाषाह कार्ड, राशन कार्ड व अन्य पहचान पत्र साथ अवश्य ले जाएं, वहां नियुक्त भामाशाह मार्गदर्शक आपको पूरी जानकारी तुरंत प्रभाव से देगा। यदि वह आनाकानी करता है या योजना के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं दे पाता है तो आप तुरंत चिकित्सालय प्रबंधक से संपर्क कर सकते हैं इसके अलावा जिलास्तर पर मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी को शिकायत की जा सकती हैं। वहीं सीधे तौर पर आप विभाग के टोल फ्री नंबर 18001806127 पर इस बाबत जानकारी ले सकते हैं और असुविधा होने पर इसकी शिकायत टोल फ्री नंबर 104 पर कर सकते हैं। बेशक योजना का नाम भामाषाह स्वास्थ्य बीमा योजना है, लेकिन फिलहाल इसका लाभ बिना भामाशाह कार्ड के भी मिल रहा है बेशक यदि आप एनएफएसए या राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना में सम्मिलित हैं तो। इसके अलावा योजना में सम्मिलित होने के लिए कहीं भी किसी तरह का पंजीकरण करवाने की आवष्यकता नहीं है और ना ही कोई बिचैलिए की भूमिका है। बीमार होने की स्थिति में अपना राशन कार्ड, भामाशाह कार्ड व पहचान पत्र लेकर अस्पताल जाएं, वहां यदि आप लाभार्थी हैं और आपको भर्ती होने की जरूरत बतलाई जाती है तो स्वत: ही आपको योजना का लाभ मिल जाएगा। 

जरूरतमंद हो रहे हैं लाभान्वित
‘‘भामाशाह स्वास्थ्य बीमा योजना के बेहद सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। विभाग के आईईसी अनुभाग की ओर से करवाए जा रहे व्यापक प्रचार-प्रसार के कारण हमारे जिले में अन्य जिलों के मुकाबले अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं। योजना को लेकर एनएचएम के एमडी नवीन जैन नियमित तौर पर व्यक्तिगत रूप से निरंतर मोनिटरिंग और हर जिले में जाकर इसकी समीक्षा कर रहे हैं। आमजन योजना की अधिक जानकारी के लिए विभाग के टोल फ्री नंबर 18001806127 अथवा नजदीकी राजकीय स्वास्थ्य केंद्र पर संपर्क कर सकते हैं।’’ 
-डॉ. नरेश बंसल, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी, श्रीगंगानगर।

शुक्रवार, 7 अक्टूबर 2016

सिलिकोसिस को लेकर बरतें गंभीरता - सीएमएचओ
मासिक समीक्षा बैठक में लापरवाही पर कार्मिकों को लगाई फटकार


श्रीगंगानगर। सिलिकोसिक को लेकर सभी बीसीएमओ सहित अन्य अधिकारियों-कर्मचारियों को गंभीरता बरतने के लिए मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेश बंसल ने निर्देशित किया है। उन्होंने कहा कि अधिकारियों को पाबंद करते हुए कहा कि सिलिकोसिस को लेकर किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने जिला क्षय रोग अधिकारी को निर्देशित किया कि वे कार्य के प्रति लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों व कर्मचारियों के खिलाफ नोटिस जारी करें। ये आदेश सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने जिला स्वास्थ्य भवन में आयोजित टीबी कार्यक्रम की बैठक में जारी किए।

सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि सीएमएचओ डॉ. बंसल ने सिलिकोसिस से संबंधित कार्रवाई करने और उसका नियमित फॉलोअप करने का आदेश सभी अधिकारियों जारी किया है। साथ ही अब सिलिकोसिक और सीबीनाट से संबंधित एक बैठक जल्द ही जिला अस्पताल में करवाने के लिए डीटीओ का कहा गया है। इसके अलावा सभी एमओ, एएनएम, जीएनएम, एलटी आदि को डॉट्स एवं डॉट्स प्लस का प्रशिक्षण दिया जाएगा ताकि वे इस क्षेत्र में बेहतर कार्य कर सके। सिलिकोसिस एवं टीबी के लक्ष्यों की प्राप्ति सुनिश्चित करने के लिए भी अधिकारियों व कर्मचारियों को पाबंद किया गया है। वहीं अब निजी चिकित्सालयों को पाबंद किया जाएगा कि वे टीबी मरीजों को जिला क्षय निवारण केंद्र में अवश्य भेजें ताकि वहां मरीजों की नि:शुल्क जांच एवं उपचार हो सके। यही नहीं स्वास्थ्य विभाग टीबी मरीजों का फॉलोअप भी करता है ताकि उन्हें वापिस टीबी न हो और वे दूसरों में टीबी न फैलाएं। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल की अध्यक्षता में आयोजित इस बैठक में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. साक्षी महता, बीसीएमओ डॉ. मोहनलाल सोलंकी, डॉ. मनोज अग्रवाला सहित डॉ. गुंजन, नरेश सिंह भदोरिया एवं अन्य अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे। 

गुरुवार, 6 अक्टूबर 2016

आरबीएसके शिविर में हुआ नि:शुल्क उपचार
-आरसीएचओ ने किया आकस्मिक निरीक्षण, आगे भी लगेंगे शिविर
श्रीगंगानगर। राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत गुरूवार को चूनावढ़ में स्वास्थ्य जांच शिविर लगाया गया। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगाए गए इस शिविर में सुरेंद्र डेंटल कॉलेज की टीम ने सहयोग किया। शिविर में 209 बच्चे पहुंचे, जिनमें से 100 बच्चों का नि:शुल्क उपचार किया गया, जबकि 58 बच्चों को जिला अस्पताल और 51 बच्चों को सहयोगी निजी चिकित्सालय में रैफर किया गया। शिविर का आरसीएचओ डॉ. वीपी असीजा एवं बीसीएमओ डॉ. सोनाली सारस्वत ने आकस्मिक निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि विभाग की ओर से डॉ. भारत भूषण, डॉ. करण आर्य, शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेश अरोड़ा, चर्म रोग विशेषज्ञ डॉ. जीविका कटारिया, नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. टेकचं, बहल हॉस्पीटल की डॉ. पल्लवी सहारण एवं सुरेंद्रा डेंटल कॉलेज के डॉ. अनमोल माथुर ने अपनी सेवाएं दी। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि राज्य सरकार की ओर से चलाए जा रहे आरबीएसके के तहत विभिन्न स्वास्थ्य शिविरों का आयोजन विभाग के साथ किया जा रहा है। इसी कड़ी में गुरूवार को चूनावढ़ सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। उन्होंने बताया कि शिविर में बहल हॉस्पीटल की ओ रर से 13 बच्चों को नि:शुल्क चश्में वितरण किए गए एवं 50 बच्चों की नेत्र जांच की गई। वहीं दंत विशेषज्ञों ने 71 बच्चों की दंत जांच की। शिविर में 71 दंत रोग, 50 नेत्र रोग, 10 चर्म रोग, 10 ईएनटी, 21 एनिमिया, 46 अन्य तथा एक कुपोषण से संबंधित बच्चों की जांच की गई।

टीबी मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही सीबीनाट मशीन
-जिला क्षय रोग निवारण केंद्र में स्थापित है सीबीनाट मशीन, दो घण्टे में मिल रही है रिपोर्ट
श्रीगंगानगर। भारत सरकार की ओर से जिला मुख्यालय पर स्थापित सीबीनाट मशीन टीबी मरीजों के लिए वरदान साबित हो रही है। मरीजों को अब रिपोर्ट के लिए लंबे अर्से तक इंतजार नहीं करना पड़ता, उन्हें महज दो घण्टे में रिपोर्ट दी जा रही है। यह मशीन जिला क्षय निवारण केंद्र में स्थापित की गई है, जहां नियमित जांच की जा रही है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से जिले के सभी बीसीएमओ को पाबंद किया गया है कि वे जब भी टीबी संभावित मरीज आए, उसे जांच के लिए आवश्यक रूप से जिला क्षय निवारण केंद्र में भेजें ताकि मरीज की सही व समय पर जांच की जा सके। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि जिला क्षय निवारण केंद्र में भारत सरकार की ओर से सीबीनाट मशीन स्थापित की गई है, जहां एमडीआर संभावित क्षय रोगियों की जांच की जा रही है। स्पुटम नेगेटिव, एचआईवी केस, एक्सट्रा पुलमोनरी केस एवं चाइल्ड केस के सभी तरह के संभावित टीबी मरीजों की जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि यह जांच सरकार की ओर से पूर्णत: नि:शुल्क की जा रही है। अभी तक राजकीय संस्थानों को टीबी संभावित मरीजों की जांच सीबीनाट से करवाने के लिए पाबंद किया गया था, लेकिन अब सभी निजी चिकित्सालयों को भी इस जांच के लिए निर्देशित किया गया है। सभी निजी चिकित्सालय इसके लिए पाबंद रहेंगे कि वे टीबी संभावित एवं टीबी के मरीजों की जांच आवश्यक रूप से सीबीनाट से करवाएं और मरीज को जिला क्षय निवारण केंद्र में भेजें। यदि इस मामले में लापरवाही बरती जाती है तो संबंधित को नोटिस दिया जाएगा।
क्या है सीबीनाट मशीन
जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. साक्षी महता नेे बताया कि जिले में टीबी रोगियों के प्रभावी इलाज व उपयुक्त दवा की जांच के लिए अब रोगियों के बलगम की जांच सीबीनॉट मशीन से होगी। इस लाखों रुपए की लागत की मशीन को भारत सरकार ने श्रीगंगानगर में स्थापित किया है, जो निरंतर चलाई जा रही है। गंभीर रूप से पीडि़त टीबी रोगियों में संबंधित दवा के असर की जांच शीघ्रता से होना संभव हुआ है। इससे पहले इस जांच के लिए रोगियों के बलगम के सैंपल को जांच के लिए जोधपुर भेजा जाता था, जिसकी रिपोर्ट करीब एक माह के बाद आती थी। अब जिला केंद्र पर स्थापित हुई मशीन के बाद रोगियों की जांच केवल दो घंटे में होना संभव हुआ है। #IEC SGNR/VINOD BISHNOI
गर्भवती महिलाओं की जांच में न हो लापरवाही - डॉ. चौहान
-एचआईवी-एड्स की समीक्षा बैठक में निदेशक ने दिए दिशा-निर्देश

श्रीगंगानगर।  स्वास्थ्य केंद्रों पर आने वाली हर गर्भवती महिला की एचआईवी जांच करना अब लाजिमी होगा। इस मामले में किसी तरह की लापरवाही पर संबंधित कार्मिक व अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में गुरूवार को जयपुर से आए निदेशक एडï्स डॉ. एसएस चौहान ने विस्तृत दिशा-निर्देश संबंधित कार्मिकों व अधिकारियों को दिए। उन्होंने कहा कि एचआईवी-एड्स को लेकर हर स्तर पर गंभीरता बरती जाए और ऐसे मरीजों के साथ किसी तरह का भेदभाव न किया जाए। यदि ऐसी शिकायत कहीं से प्राप्त होती है या इलाज में कोताही बरती जाती है तो संबंधित के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। 
डॉ. चौहान गुरूवार को जिला स्वास्थ्य भवन में आयोजित जिला एडï्स नियंत्रण एवं निवारण इकाई की बैठक में जिले के सभी स्वास्थ्य केंद्रों के एचआईवी का कार्य देख रहे कार्मिकों को संबोधित कर रहे थे। इस मौके पर डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला, डॉ. पुष्पेंद्र कुमार, नवल किशोर, मनोज कुमार, आशा समन्वयक रायसिंह सहारण एवं सीओआईईसी विनोद बिश्रोई मौजूद रहे। बैठक के दौरान कार्मिकों द्वारा किए जा रहे कार्यों की समीक्षा की गई, जिसमें बेहतर कार्य करने वालों की सराहना की गई जबकि कार्य में कोताही बरतने वालों को फटकार लगाई गई। बैठक में निर्देशित करते हुए डॉ. चौहान ने कहा कि गर्भवती महिलाओं की हर हाल में एचआईवी की जांच की जाए। इसी तरह समस्त टीबी मरीजों एवं यौन संक्रमित पीडि़तों की एचआईवी जांच की जाए। सभी एचआईवी संक्रमित लोगों को जिला अस्पताल स्थित एआरटी केंद्र पर पंजीकृत करवा उपचार करवाने के निर्देश डॉ. चौहान ने दिए। उन्होंने कहा कि एचआईवी पीडि़त लोगों को राज्य सरकार द्वारा चलाई जा रही विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से लाभान्वित किया जाए ताकि उनका जीवन यापन सुचारू हो सके। बैठक में रिपोर्ट की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि पीसीटीएस एवं आईसीटीसी व एफआईसीटीसी सेंटर की मासिक रिपोर्ट में इंद्राज एचआईवी जांच व पॉजीटिव में विरोधाभास न हो। यदि ऐसा होता है और किसी भी तरह की लापरवाही बरती जाती है तो संबंधित के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई अमल में ली जाएगी। 

मंगलवार, 4 अक्टूबर 2016

स्वास्थ्य विभाग कर रहा है डोर-टू-डोर सर्वे, पार्षद देंगे साथ
-मौसमी बीमारियों को लेकर आमजन भी बरतें सावधानी, नगर परिषद भी करेगा एंटीलार्वा गतिविधियां व फॉगिंग
श्रीगंगानगर। मौसमी बीमारियों को लेकर लेकर जहां चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग पूरी तरह से सजग एवं सतर्क है, वहीं आमजन को भी मौसमी बीमारियों के प्रति सावधानी बरतने की जरूरत है। किसी भी तरह की मौसमी बीमारी होते ही तुरंत प्रभाव से नजदीकी चिकित्सालय में संपर्क करना चाहिए ताकि समय रहते सही जांच करवाई जा सके और मरीज का उपचार हो सके। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने आमजन से अपील करते हुए कहा कि मौसमी बीमारियों को लेकर सतर्कता बरती जानी आवश्यक है और आमजन को चाहिए कि वे इन बीमारियों के प्रति कतई लापरवाही नहीं बरतें। वहीं स्वास्थ्य विभाग नियमित रूप से सर्वे गतिविधियां कर रहा है और डोर-टू-डोर सर्वे के साथ ही डेंगू, मलेरिया आदि के मरीज मिलने पर विभागीय टीमें मौके पर पहुंच रही हैं। 
सीएमएचओ डॉ. बंसल ने बताया कि आमजन को जागरूक करने के लिए विभाग की ओर से गलियों में माइकिंग भी करवाई जा रही है ताकि आमजन मौसमी बीमारियों के प्रति सावधानियां बरतें। ग्रामीण व कस्बाई क्षेत्र में आवश्यक गतिविधियों के लिए संबंधित बीसीएमओ को पाबंद किया गया है। वहीं जिलास्तरीय अधिकारी नियमित निरीक्षण कर व्यवस्थाओं की समीक्षा कर रहे हैं। टीमों को निर्देशित किया गया है कि वे भ्रमण के दौरान घरों में जाकर फ्रीज के पीछे की ट्रे व गमले आदि में भरे पानी को देख कर उसे खाली करवाएं एवं आमजन को जागरूक करें। वहीं खड़े पानी में एमएलओ डाला जा रहा है, जबकि घरों में पीने के पानी के लिए बनी टंकियों मे टेमीफॉस डाला जा रहा है। सर्वे के दौरान यदि कोई बुखार का मरीज मिलता है तो वहां से स्लाइड भी ली जाती है। स्वास्थ्य कार्यकर्ता इस दौरान घरों में जागरूकता सामग्री भी उपलब्ध करवा रहे हैं। सीओआईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि विभाग की ओर से वार्ड नंबर 13, २० एवं एक नंबर में डोर-टू-डोर गतिविधियां पूर्ण कर ली गई हैं। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला के मुताबिक जल्द ही वार्ड नंबर चार एवं सात में गतिविधियां पूर्ण की जाएंगी। एंटीलार्वा गतिविधियां करने के साथ ही पार्षदों से प्रमाण-पत्र भी लिया जा रहा है ताकि उनके क्षेत्र में कोई घर या इलाका आवश्यक गतिविधियों से वंचित न रह जाए। उन्होंने बताया कि विभागीय गतिविधियों में आमजन के साथ ही पार्षदों का सहयोग वांछित है ताकि जल्द से जल्द आवश्यक गतिविधियां की जा सके। 
नगर परिषद को सौंपी प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की सूची
चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग ने नगर परिषद को जिला मुख्यालय के उन एरिया की सूची सौंपी ही, जहां प्राथमिकता से एंटीलार्वा गतिविधियां की जानी है। डिप्टी सीएमएचओ डॉ. अजय सिंगला के मुताबिक इंदिरा कॉलोनी का समस्त क्षेत्र, शुगर मिल एरिया, गुरूनानक बस्ती एवं सरस्वती नगर का एरिया, विनोबा बस्ती का समस्त क्षेत्र, एसएसबी रोड, मौसम विभाग का एरिया, सुखाडिय़ा सर्किल मार्ग, गुरूनगर, श्यामनगर एरिया, भरतनगर, अर्जुननगर व देवनगर का समस्त एरिया, सेतिया कॉलोनी, भांभू कॉलोनी, सुरजीत सिंह कॉलोनी, बसंती चौक क्षेत्र, भगतसिंह कॉलोनी, सर्किट हाउस क्षेत्र, रेलवे कॉलोनी, गंगासिंह चौक एरिया, कलेक्ट्रेट कार्यालय एरिया, जिला कारागार, भगतसिंह चौक होते हुए रविंद्र पथ से बीरबल चौक तक के समस्त क्षेत्र में एंटीलार्वा गतिविधियां नगर परिषद द्वारा की जानी है। इस बाबत नगर परिषद की ओर से विगत दिनों आयोजित बैठक में स्वास्थ्य विभाग से सूची चाही गई थी, जो अब उपलब्ध करवा दी गई है और एंटीलार्वा गतिविधियां करवाने के लिए कहा गया है।
विभाग के साथ नगर परिषद भी करेगी एंटीलार्वा गतिविधियां व फॉगिंग
डिप्टी सीएमएचओ डॉ. सिंगला ने बताया कि जिला कलेक्टर पीसी किशन के निर्देशानुसार शहरी क्षेत्र में स्वास्थ्य विभाग के साथ-साथ नगर परिषद एंटीलार्वा गतिविधियां और फॉगिंग करेगा। इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग की ओर से नगर परिषद को लिखित में सूचित भी किया गया है। उन्होंने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की ओर से नगर परिषद को २६ सितंबर २०१६ को २१० लीटर काला तेल भिजवाया गया है। इस बाबत नगर परिषद प्रशासन से अनुरोध किया गया है कि जब भी एमएलओ का निर्माण किया जाए तब स्वास्थ्य विभाग के मलेरिया निरीक्षक को भी मौके पर बुलाया जाए ताकि उचित मात्रा में एमएलओ घोल तैयार किया जा सके। इसके साथ ही नगर परिषद आयुक्त से आग्रह किया गया है कि वे सभी सफाई निरीक्षकों को पाबंद करें कि वे शहर में सभी नाले, नालियों व खडï्ढ़ों में एमएलओ डालें और पारेथ्रम दो प्रतिशत से फॉगिंग करने के लिए मलेरिया निरीक्षक से संपर्क करे। पायरेथ्रम दो प्रतिशत की खरीद नगर परिषद प्रशासन द्वारा किए जाने के संबंध में आयुक्त को लिखित में सूचित किया गया है। 
जीवन बचाने लगी ‘जीवन वाहिनी’
-एकीकृत हुई आपातकालीन सेवाओं के आने लगे सकारात्मक परिणाम, एमडी खुद कर रहे हैं मोनिटरिंग
श्रीगंगानगर। आमजन को आपातकाल में बेहतर एम्बुलेंस सेवाएं देने के लिहाज से शुरू की गई जीवनवाहिनी एम्बुलेंस सेवा के सकारात्मक परिणाम अब सामने आने लगे है। इसी 15 अगस्त से आमजन के लिए शुरू की गई एकीकृत एम्बुलेंस सेवा ‘जीवनवाहिनी’ जीवन का सहारा बन रही है। मरीजों की लाइफ-लाइन बनी इस सेवा ने प्रदेश में शुरूआत के डेढ़ माह में ही अपनी अलग पहचान बना ली है। दूर-दराज की गांव-ढाणियों में बैठा व्यक्ति भी एक कॉल कर बीमार और घायल का उपचार करवाने में सक्षम हुआ है। अब मरीज समय पर चिकित्सा संस्थान पहुंच रहे हैं जिससे उनका समय पर इलाज सुनिश्चित किया जा रहा है। राज्य में प्रतिवर्ष होने वाली मौतों का एक प्रमुख कारण चिकित्सा संस्थान  पर पहुंचने में देरी होना रहा है। जीवन वाहिनी की राज्यस्तरीय मोनिटरिंग कर रहे एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन बताते हैं कि सडक़ दुर्घटनाओं में पीडि़त व्यक्ति को यदि शुरूआती घंटे यानी ‘गोल्डन ऑवर’ में चिकित्सा सुविधा प्राप्त हो जाती है तो उसकी जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है। 
सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि जीवनवाहिनी एकीकृत एंबुलेंस सेवा के राजस्थान में शुरू होने के बाद घायल और अति गंभीर व्यक्ति को अब समय पर एंबुलेंस सेवा मिल रही है, क्योंकि इससे पहले 10४ जननी एक्सप्रेस, बेस एंबुलेंस और 108 एंबुलेंस के सेवा प्रदाता अलग अलग होने से तीनों सेवाओं का आपस में तारतम्य नहीं होता था। इस बार किसी भी आपातकालीन स्थिति में तीनों प्रकार की एंम्बुलेंस घटनास्थल पर पहुंच कर घायलों को शीघ्र ही अस्पताल पहुंचाना सुनिश्चित कर पा रही हैं। राजस्थान सरकार ने इन सभी सेवाओं को एक ही सेवाप्रदाता कंपनी से करार कर जीवनवाहिनी एकीकृत एम्बुलेंस सेवा की शुरूआत की है जिससे इसका संचालन बेहतर हो रहा है और प्रत्येक कॉल पर तुरन्त एम्बुलेंस पहुंचकर घायल और प्रसूताओं को अस्पताल तक पहुंचा रही हैं। अब प्रसूता को अस्पताल तक लेकर जाने के लिए और आपातकालीन सेवाओं के लिये अलग-अलग नंबर पर फोन करके एम्बुलेंस बुलवाने की जरूरत नहीं है। राजस्थान का कोई भी निवासी 108 या 104 नम्बर पर फोन करके एम्बुलेंस सुविधा प्राप्त कर सकता है। 
समय पर नहीं पहुंचने का अब नहीें कर सकेंगे बहाना 
सीओआर्ईईसी विनोद बिश्रोई ने बताया कि आपातकाल में मरीज को एम्बुलेंस सेवा समय पर उपलब्ध करवाने में अब कोई बहाना नहीं चलेगा। चिकित्सा विभाग द्वारा इस बार इसकी मॉनिटरिंग के लिये सॉफ्टवेयर, जीपीएस सिस्टम और एप जैसी टैक्नोलॉजी का सहारा लेकर सेवाओं का आमजन तक तय समय और तय प्रोटोकॉल पहुंचना सुनिश्चित कर दिया है। इस बार विभाग द्वारा प्रत्येक कॉल की रिकार्डिंग को सुनने और उसकी मॉनिटरिंग कर पेनेल्टी लगाने का प्रावधान किया गया है। जिससे आम आदमी को प्रत्येक कॉल पर सेवाएं मिलना तय हुआ है। विभाग की ओर से इन जीवनवाहिनी एम्बुलेंस सेवाओं की मॉनिटरिंग के लिये एक मोबाइल ऐप भी तैयार किया गया है। एम्बुलेंस चालक के घटनास्थल के लिए निकलने, वहां पहुंचने तथा चिकित्सा संस्थान तक पहुंचने व मरीज को भर्ती करवाने की सूचना मोबाइल ऐप से सॉफ्टवेयर में दर्ज होगी। सेवाप्रदाता एजेंसी को आपातकाल के कॉल की सेवा समय पर उपलब्ध नहीं करवाने पर उसके भुगतान में कटौती की जाएगी। यही नहीं 108 व 104 नम्बर पर कॉल करने पर महज चंद मिनटों में ही मरीज के पास एम्बुलेंस पहुंच जाएगी। सॉफ्टवेयर के आधार पर मरीज के आपातकालीन कॉल को जीपीएस सिस्टम के माध्यम से निकटवर्ती एम्बुलेंस चालक को सूचना भेजी जाएगी। जिससे वह जल्द से जल्द मौके पर पहुंच सके। जीवनवाहिनी एम्बुलेंस सेवा मरीज के जीवन को ही सुरक्षित रखने के साथ आम आदमी को पुलिस व अग्निशमन जैसी आपातकालीन सेवाओं से भी जोड़ रही है। पुलिस व अग्निशमन से जुुड़े मामलों के बारे में निकटवर्ती पुलिस स्टेशन व अग्निशमन केन्द्र को सूचना दी जाती है जिससे आमजन को तुरंत राहत मिल सकें। 
नि:शुल्क परामर्श, सुझाव, शिकायत व स्वास्थ्य योजनाओं की जानकारी भी
जीवनवाहिनी एकीकृत एम्बुलेंस सेवा में 108 व 104 नम्बर पर किसी भी बीमारी के बारे में चिकित्सकों से नि:शुल्क परामर्श व काउंसलिग भी दी जा रही है। साथ ही चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग की ओर से चल रही विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी भी 108 व 104 नम्बर डायल कर प्राप्त की जा सकती है। इससे आमजन को घर बैठे ही नि:शुल्क मेडीकल सलाह मिल जाएगी। यही नहीं विभाग से जुड़ी भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायत भी १०४ पर दर्ज करवाई जा सकती है। वहीं बेटी बचाओ अभियान में भी १०४ सुविधा कारगर साबित हो रही है, क्योंकि अब कोई भी कन्या भू्रण हत्या या लिंग जांच संबंधी शिकायत १०४ पर दर्ज करवा सकता है। जीवनवाहिनी एम्बुलेंस सेवा से आमजन को कोई परेशानी हो तो उनकी सहायता के लिये राज्य स्तर पर कंट्रोल रूम बनाया गया है। विभाग की ओर से दो हैल्पलाइन नम्बर भी जारी किए गए हैं। विभाग के 8764835254 और 8764835255 नम्बर पर आम आदमी एम्बुलेंस सेवा से संबंधित अपनी शिकायत दर्ज करवा सकते हैं और सहायत प्राप्त कर सकते हैं। 
डायल एन एम्बूलेन्स सेवा
अब तक बेस एम्बूलेन्स वाहन राजकीय चिकित्सा संस्थानों पर स्थापित किए गए थे, परंतु यहां पर इनका उपयोग काफी कम रहा। जीवनवाहिनी एकीकृत एंबुलेंस सेवा के माध्यम से इस बेस एम्बुलेंस का उपयोग डायल एन एम्बुलेंस सेवा के रूप में किया जा रहा है। बेस एम्बूलेन्स की सेवाएं उन वृद्ध या बीमार लोगों के लिए हैं, जो आपातकालीन स्थिति में नहीं है परंतु साधारण वाहन से सफर करने में सक्षम नहीं है। इससे पहले निजी एंबुलेंस द्वारा अपनी मनमर्जी से पैसे वसूले जा रहे थे वहीं विभाग की डायल एन एंबुलेंस सेवा के द्वारा न्यूनतम किराए में ये सेवाएं आमजन को उपलब्ध करवाई जा रही है। बेस एम्बुलेंस की सेवाऐं लाभार्थी के लिए नि:शुल्क नहीं है जबकि अन्य तीन सेवाएं पूर्णतया नि:शुल्क उपलब्ध है। 
ये खासियत हैं जीवन वाहिनी की
सभी वाहनों पर बेहतर मॉनिटरिंग हेतु जीपीएस प्रणाली।
योजना के सफल संचालन हेतु वेब आधारित सॉफ्टवेयर। यह सॉफ्टवेयर जीपीएस सिस्टम से इंटीग्रेट होगा व घटनास्थल से निकटतम एम्बुलैंस की स्थिति बताने में सक्षम होगा। इसके माध्यम से दुर्घटना होने की स्थिति में सबसे निकटवर्ती उपलब्ध एम्बुलैंस का चयन कर घटनास्थल पर भिजवाया जाना सुनिश्चित किया जाएगा। 
इस सॉफ्टवेयर में चिकित्सा सुविधा के आधार पर चिकित्सा संस्थानों, फायर स्टेशनों तथा पुलिस स्टेशनों को भी जी.आई.एस. मैपिंग के माध्यम से इन्टिग्रेट किया जायेगा, ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति में आवश्यकता अनुसार निकटतम संस्थान को सूचित किया जा सके। 
सेवाप्रदाता को प्रत्येक वैध कॉल पर सेवायें प्रदान करना आवष्यक होगा एवं ऐसा नहीं करने पर उसके भुगतान में से कटौती की जायेगी।
इंटीग्रेटेड एम्बुलैंस के बेड़े में इस बार 588 जननी एक्सप्रेस वाहन, 200 बेस एम्बुलेंस और 630 एम्बुलेंस (108) सम्मिलित होंगी। 
मोबाइल ऐप से होगी पारदर्शी और सुव्यवस्थित प्रक्रिया 
वाहनो में कार्यरत ड्राइवर की मोबाइल ऐप के माध्यम से वाहन पर घटनास्थल के लिये निकलने, वहां पहुचने, घटना स्थल से चिकित्सा संस्थान हेतु निकलने तथा चिकित्सा संस्थान पर मरीज को सुरक्षित सौपने तथा वापिस अपने स्थान पर पहुचने की सूचना स्वत: सॉफ्टवेयर में दर्ज होगी। 
वाहनो में उपकरणाो तथा वाहन की गुणवत्ता सुनिश्चित करने हेतु इंस्पेक्शन मोबाइल ऐप बनाई गई है। इस मोबाइल ऐप से निरीक्षण होते ही वाहन में पाई गई कमिया सीधे सॉफ्टवेयर में अंकित होने के साथ साथ सेवाप्रदाता को भी सुधार करने हेतु प्रेषित हो जायेगी।

रविवार, 2 अक्टूबर 2016

जिले की घड़साना टीम राज्यस्तर पर पुरस्कृत
-आरबीएसके के तहत किया बेहतर कार्य, दो चिकित्सकों का हुआ सम्मान

श्रीगंगानगर। जिले में राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत बेहतर कार्य करने पर घड़साना टीम राज्यस्तर पर पुरस्कृत हुई है। चिकित्सा एवं स्वास्थ्य निदेशालय की ओर से गांधी जयंती के उपलक्ष में आयोजित स्वास्थ्य समारोह में टीम में शामिल दो चिकित्सकों का चिकित्सा मंत्री राजेंद्र राठौड़, एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन एवं सहित अन्य अतिथियों ने सम्मान किया। टीम ने ११ जुलाई २०१६ से ३० सितंबर २०१६ तक आठ हजार १६ बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर आरबीएसके सॉफ्टवेयर में ऑनलाइन एंट्री दर्ज करवाई। इस टीम की कर्मठता की बदौलत अनेक बच्चों की न केवल बीमारियां चिन्हित हो पाई, बल्कि उन्हें राज्य सरकार द्वारा नि:शुल्क उपचार भी मिला। सीएमएचओ डॉ. नरेश बंसल ने बताया कि टीम में शामिल आयुष चिकित्सक डॉ. नमृता सिंह और डॉ. रामस्वरूप, सयाहक स्टाफ पालचंद एवं शारदा शामिल थे। आरबीएसके प्रभारी डॉ. भारत भूषण ने बताया कि टीम ने हृदय संबंधित बीमारी से पीडि़त सात बच्चों को चिन्हित किया, जिनमें से पांच बच्चों में हृदय संबंधी बीमारी की पुष्टि हुई। इसी टीम ने कई बच्चे कटे तालू एवं कटे होंठ के भी चिन्हित किए, जिनका नि:शुल्क उपचार भी हुआ। उल्लेखनीय है कि घड़साना टीम द्वारा बेहतर कार्य करने पर चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री राजेंद्र राठौड़ और एनएचएम के मिशन निदेशक नवीन जैन ने टीम की हौसला अफजाई करते हुए वीसी में दूसरी टीमों को इनसे सीखने के लिए प्रेरित कर चुके हैं।